shayarisms4lovers June18 292 - यह उदास शाम और तेरी जुदाई – यह शाम तेरे नाम शायरी

यह उदास शाम और तेरी जुदाई – यह शाम तेरे नाम शायरी

शाम-ऐ-तन्हाई शाम से है मुझ को सुबह-ऐ-ग़म की फ़िक्र सुबह से ग़म शाम-ऐ-तन्हाई का है Shaam-ae-Tanhai Sham se hai mujh ko subha-ae-gham ki fikar Subha se gham shaam-ae-tanhai ka hai शाम के बाद तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दर्द तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बाद लौट आये न […]

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shayarisms4lovers June18 292 - ख्वाब टूटें या बिक जाएँ – ग़मगीन शायरी

ख्वाब टूटें या बिक जाएँ – ग़मगीन शायरी

मेरे दिल में घर बना कर वो मेरे दिल में छोड़ गया है न खुद रहता है न किसी और को बसने देता है Mere Dil Mein Ghar bana kar wo mere dil mein chod gaya hai Na khud rehta hai na kisi aur ko basne deta hai ज़रा ठहर जाओ थकी थकी सी फ़िज़ाएं […]

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