shayarisms4lovers June18 228 - खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा – एक बेवफा

खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा – एक बेवफा

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

हमे बेवफा का इल्जाम दे गया

ज़िंदा थे जिसकी आस पर वो भी रुला गया
बंधन वफ़ा के तोड़ के सारे चला गया
खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा
हाथों में हाथ दे के खुद ही छुड़ा गया
कर दी जिसके लिए हमने तबाह ज़िन्दगी
उल्टा वो हमे बेवफा का इल्जाम दे गया

Wo Bewafa ka ilzam de Gaya

Zinda thi jiski aas pe Wo bhi rula gaya
Bandhan Wafa ke tood ke Sare chala gaya
Khud hi to ki thi usne MUHABBAT ki IBTADA
Hathon main hath de ke khud hi chuda gaya
Kardi jiske liye humne Tabah zindagi
Ulta wo BEWAFA ka ilzam de gaya…


तमाशा बन दिया मेरा

क़तरा अब एहतजा करे भी तो किया मिले
दरिया जो लग रहे थे समंदर से जा मिले

हर शख्स दौड़ता है यहां भीड़ की तरफ
फिर यह भी चाहता है उसे रास्ता भी मिले

उस आरज़ू ने और तमाशा बन दिया मेरा
जो भी मिले हमारी तरफ देखता मिले

दुनिया को दूसरों की नज़र से न देखिये
चेहरे न पढ़ सके तो किताबों में किया मिले

Tamasha Bna Diya Mera

Qatra ab ehtjaaj karey bhi to kiya miley
Darya jo lag rahe they samandar se ja miley

Har shakhs dodta hai yahaan bhid ki taraf
Phir yeh bhi chahta hai usay raasta miley

Us aarzu ne aur tamasha bana diya mera
Jo bhi miley hamaari taraf dekhta miley

Duniya ko doosron ki nazar se na dekhiye
Chehre na pad sakey to kitaabon mein kiya miley…


तुझे देखने के बाद

सोचा था के किसी से प्यार न करेंगे हम
बदल गया इरादा तुझे देखने के बाद

चैन से सो जाते थे हम सुहानी रातों में
नींदें उड़ गयी मेरी तुझे देखने के बाद

बहुत नाज़ था चाँद को अपनी चांदनी पर
छुप गया बादलोँ में वो भी तुझे देखने के बाद

क्यूँ करूं मैं रिश्ता तेरी ज़ात के साथ
उठ रहे है सवाल तुझे देखने के बाद

अपने चेहरे को छुपा के रखो खुदा के वास्ते
दिल हो जाता है बेकाबू तुझे देखने के बाद

Tujhe Dekhne ke Baad

Socha tha Ke kisi se Piyar Na karain gay hum
badal gaya Irada tujhe Dekhne ke baad

Chain se So jati The Main In Suhani Ratoon mein
Neendain Urh gayi Meri tujhe Dekhne ke Baad

Bahut Naaz tha Chand ko Apni Chandni Par
Chup gaya Badloun mein wo Bhi tujhe Dekhne Ke Baad

Kyon karo main rishta teri …

Continue Reading
shayarisms4lovers June18 239 - हम ने एक इंसान को चाहा और गुनहगार हो गए – Hindi Shayari

हम ने एक इंसान को चाहा और गुनहगार हो गए – Hindi Shayari

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

मैं अश्क़ हूँ

मैं अश्क़ हूँ मेरी आँख तुम हो
मैं दिल हूँ मेरी धडकन तुम हो
मैं जिस्म हूँ मेरी रूह तुम हो
मैं जिंदा हूँ मेरी ज़िन्दगी तुम हो
मैं साया हूँ मेरी हक़ीक़त तुम हो
मैं आइना हूँ मेरी सूरत तुम हो
मैं सोच हूँ मेरी बात तुम हो
मैं मुकमल हूँ जब मेरे साथ तुम हो
मैं तुम मैं हूँ अब तुम ही हो , अब तुम ही हो

Main ashq Hoon

Main ashq Hoon Meri ankh Tum Ho
Main Dil Hoon Meri Dharkan Tum Ho
Main jism Hoon Meri Rooh Tum Ho
Main Jinda Hoon Meri Zindagi Tum Ho
Main saya Hoon Meri Haqiqat Tum Ho
Main Aena Hun Meri Surat Tum Ho
Main soch Hoon Meri Baat Tum Ho
Main Mukmal hoon Jab Mere Sath Tum Ho
Main Tum main hoon Ab Tum hi ho , Ab Tum Hi Ho…


वादा

वादा निभाना हमारी आदत हो गयी
हमें भूलने की उनकी आदत है
उन्हें याद करने की हमारी आदत हो गयी

Wada

Wada Nibhana Humari Aadat Ho Gayi
Humein Bhulane Ki Unki Aadat Hai
Unhe Yaad Karne Ki Humari Aadat Ho Gayi…


गुनहगार

लोग पत्थर के बूतों को पूज कर भी मासूम रहे “फ़राज़”
हम ने एक इंसान को चाहा और गुनहगार हो गए

Ghunegar

Log Pathar Ke Bhuton Ko Poojh Ker Bhi Masoom Rahay “Faraz”
Hum Ne Ek Insan Ko Chaaha Aur Ghunegar Ho Gaye…


तन्हाई

तन्हाई मेरे दिल में समाती चली गयी
किस्मत भी अपना खेल दिखाती चली गयी
महकती फ़िज़ा की खुशबू में जो देखा तुम को
बस याद उनकी आई और रुलाती चली गयी..

Tanhayi

Tanhayi mere dil mein samati chali gayi
Kismat bhi apna khel dikhati chali gayi
Mehkti fiza ki khusbu me jo deka tum ko
Bas yaad unki aayi aur rulati chali gayi…

Continue Reading
shayarisms4lovers mar18 202 - ग़ज़ल – वो मेरा हमसफ़र हुआ भी तो लम्हा भर

ग़ज़ल – वो मेरा हमसफ़र हुआ भी तो लम्हा भर

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

हम तो अकेले रहे

हमेशा रहेगा यह आलम कहाँ
यह महफ़िल कहाँ और यह हमदम कहाँ

सदा चोट पर चोट खाता रहा
मुक़द्दर में इस दिल के मरहम कहाँ

कहाँ अब्र कोई कड़ी धुप में
झुलसते बयाबां में शबनम कहाँ

ना मस्त आँखें होंगी ना ज़ुल्फे रसा
हमेशा रहेगा यह मौसम कहाँ

अकेले थे हम तो अकेले रहे
कोई अपना गमख्वार हो , हमदम कहाँ

जहांगीर-ओ-नौशेरवां चल बसे
रहा डर में अद्ल पैहम कहाँ

ना अय्यूबी कोई ना खालिद कोई
गया रखता अपना परचम कहाँ

Hum To Akele Rahe

Hamesha Rahega Yeh Aalam Kahan
Yeh Mahfil Kahan aur Yeh Humdam Kahan

Sada Chot Par Chot Khata Raha
Muqaddar Mein Is Dil Ke Marham Kahan

Kahan Abr Koi Kadi Dhoop Mein
Jhulaste Bayabaan Mein Shabnam Kahan

Naa Mast Aankhein Hongi Naa Zulfe Rasaa
Hamesha Rahega Yeh Mausam Kahan

Akele The Hum To Akele Rahe
Koi Apna Ghamkhwaar , Humdam Kahan

Jahangeer-O-Nausherwaan Chal Base
Rahaa Daar Mein Adl Paiham Kahan

Naa Ayyubi Koi Naa Khalid Koi
Gaya Rekhta Apna Parcham Kahan..


दिखाई दिए यूँ

दिखाई दिए यूँ की बेखुद किया
हमें आप से भी जुदा कर चले

जबीं सजदा करते ही करते गए
हक़-ऐ-बंदगी हम अदा कर चले

गई उम्र दर बंद-ऐ-फ़िक्र-ऐ-ग़ज़ल
वो इस फन को ऐसा बढ़ा कर चले

कहें क्या जो पूछे कोई हम से “मीर”
जहाँ में तुम आए थे , क्या कर चले

Dikhai Diye Yun

Dikhai diye yun ki bekhud kiya
Hamain ap se bhi juda kar chale

Jabin sajda karte hi karte gai
Haq-ae-bandagi ham ada kar chale

Gai umar dar band-ae-fikar-ae-gazal
So is faan ko aisas bada kar chale

Kahen kya jo puche koi ham se “Meer”
Jahan main tum aaye the, kya kar chale..


वफाओं की मोहरें

न सोचा न समझा न सीखा न जाना
मुझे आ गया खुद ब खुद दिल लगाना
ज़रा देख कर अपना जलवा दिखाना
सिमट कर यहीं आ न जाए ज़माना
ज़ुबान पर लगी हैं वफाओं की मोहरें
ख़ामोशी मेरी कह रही है फ़साना
गुलों तक बात आई तो आसान है लेकिन
है दुष्वार काँटों से दामन बचाना
करो लाख तुम मातम -ऐ -नौजवानी
पर ‘मीर’ अब नहीं आएगा वो ज़माना

Wafaon ki Mohrain

Na socha na samajha na sikha na jana
mujhe aa gaya khudbakhud dil lagana
zara dekh kar apna jalwa dikhana
simat kar yahin aa na jaye zamana
zuban par lagi hain wafaon ki mohrain
khamoshi meri keh rahi hai fasana
gulon tak lagayi to aasan …

Continue Reading
shayarisms4lovers mar18 101 - ऑंखें तो प्यार में दिल की ज़ुबान होती है – इश्क़ बेवफा

ऑंखें तो प्यार में दिल की ज़ुबान होती है – इश्क़ बेवफा

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

बड़े शौक़ से मर जाएँगे

आओ किसी रोज़ मुझे टूट के बिखरता देखो
मेरी रगो में ज़हर जुदाई का उतरता देखो
किस किस तरह से तुझे माँगा है खुद से हमने
आओ कभी मुझे सजदों में सिसकता देखो
तेरी तलाश में हम ने खुद को खो दिया है
मत आओ सामने मगर कहीं छुप के मुझे तड़पता देखो
बड़े शौक़ से मर जाएँगे हम मगर वरना
तुम सामने बैठ कर सांसों का तसलसुल टूटता देखो

Bade Shoq Se Mar Jayeinge

Aao Kisi roz Mujhe Toot Ke Bikhrta Dekho
Meri Ragon Mein Zehar Judai Ka Uterta Dekho
Kis Kis Ada Se Tujhe Maanga Hai khuda Se
Aao Kabhi Mujhe Sajdon Mein Sisakta DekHo
Teri Talaash Mein Hum Ne Khud Ko Kho Diya Hai
Mat Aao Saamne Mgar Kahin Chup Ke Mujhe Tarapta Dekho
Bade Shoq Se Mar Jaein gay Hum magar warna
Tum Saamne Baith Kar sansoon Ka Tasalsul Tootta Dekho


वफ़ा की तलाश

जो भी मिला वो हम से खफा मिला
देखो हमे मोहब्बत का क्या सिला मिला
उम्र भर रही फ़क़त वफ़ा की तलाश हमे
पर हर शख्स मुझ को ही क्यों बेवफा मिला

Wafa Ki Talash

jo bhi mila woh ham se khafa mila
dekho dosti ka kya sila mila
umar bhar rahi faqat wafa ki talash
par har shaks mujh ko hi kyon bewafa mila


प्यार में दर्द

ऑंखें तो प्यार में दिल की ज़ुबान होती है
सच्ची चाहत तो सदा बेज़ुबान होती है
प्यार में दर्द भी मिले तो क्या घबराना
सुना है दर्द से ही चाहत जवाँ होती है

Pyar Mein Dard

Ankhen to pyar me dilki zuban hoti hai
Sachi chahat to sada bezuban hoti hai
Pyar mein dard bhi mile to kya ghabrana
Suna hai dard se hi chahat jawan hoti hai…

Continue Reading
shayarisms4lovers mar18 12 - उर्दू ग़ज़लें

उर्दू ग़ज़लें

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है

तेरे इख्लास से मोहब्बत की है तेरे एहसास से मोहब्बत की है तू मेरे पास नहीं है फिर भी तेरी याद से मोहब्बत की है कभी तो तूने भी मुझे याद किया होगा मैंने उन्ही लम्हात से मोहब्बत की है जिन में हों तेरी मेरी बातें , मैंने उस इंसान से मोहब्बत की है और मेह्की हों सिर्फ तेरी मोहब्बत से मैंने उन जज़्बात से मोहब्बत की है तुझसे मिलना तो अब ख्वाब सा लगता है मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है

Tere Ikhlas Se Mohabbat Ki Hai Tere Ehsas Se Mohabbat Ki Hai Tu Mere Paas Nahi Hai Phir Bhi Teri Yaad Se Mohabbat Ki Hai Kabhi To Tune Bhi Mujhe Yad Kiya Hoga Meine Un Lamhaat Se Mohabbat Ki Hai Jin Mein Ho Teri Meri Batain Maine Us Insaan Se Mohabbat Ki Hai Aur Mehkey Ho Sirf Teri Mohabbat Se Maine Un Jazbaat Se Mohabbat Ki Hai Tujhse Milna To Ab Khawab Sa Lagta Hai Maine Tere Intezaar Se Mohabbat Ki Hai


मुहब्बतों के पयाम लिखना ​

कभी किताबों में फूल रखना , कभी दरख्तों पे नाम लिखना हमें भी याद है आज तक वो , नज़र से हर्फ़-ऐ-सलाम लिखना ​ वो चाँद चेहरा , वो बहकी बातें , सुलगते दिन थे , सुलगती रातें वो छोटे छोटे से काग़ज़ों पर , मुहब्बतों के पयाम लिखना ​ गुलाब चेहरों से दिल लगाना , वो चुपके चुपके नज़र मिलाना वो आरज़ूओं के ख्वाब बुनना, वो क़िस्सा -ऐ -नाम तमाम लिखना मेरे शहर की हसीं फिज़ाओ , कहीं जो उन का निशान पाओ तो पूछना के कहाँ बसे वो , कहाँ है उन का क़याम लिखना ​ गयी रुतों में रुबाब अपना , बस एक यह ही तो मश्ग़ला था किसी के चेहरे को सुबह लिखना , किसी के चेहरे को शाम लिखना

Kabhi Kitabon Mein Phool Rakhna, Kabhi Darakhton Pe Naam Likhna Hamein Bhi Yaad Hai Aaj Tak Wo , Nazar Say Harf-Ae-Salam Likhna Wo Chand Chehray, Wo Behki Batein, Sulagtay Din The, Sulagti Ratein Wo Chote Chote Se Kaghazon Par, Muhabbaton Key Payaam Likhna Gulab Chehron Say Dil Lagana, Wo Chupkey Chupkey Nazar Milana Wo Arzuon Key Khwaab Bunna , Wo Qissa-Ae-Naam Tamaam Likhna Mere Shahar Ki Haseen Fizaoon, Kaheen Jo Un Ka Nishan Pao To Poochna Ke Kahan Basay Wo ,Kahan Hai Un Ka Qayam Likhna Gayee Ruton Mein Rubab Apna , Bas Ek Yeh Hi To Mashghala Tha

Continue Reading

फिर यही ग़ज़ल लिखोगे तुम

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

बहुत याद आते है

न जाने वो क्यों इतना याद आते है ,
उसकी सूरत आँखों से क्यों नहीं निकल पाती है ,
जितना भुलाऊँ उसको उतना याद आती है ..

Bahut Yaad aate hai

na jane wo kyu itna yaad aate hai,
uski surat aankho se kyo nahi nikal paati hai,
jitna bhulau usko utna yaad aati hai..


फिर यही ग़ज़ल लिखोगे तुम

कल जो जाना मैंने तुम्हारा प्यार
तब वक़्त ने न दिया मेरी किस्मत का साथ
फिर मेरी याद मैं तब महल बनाओगे तुम
फिर यही ग़ज़ल लिखोगे तुम

Phir yehi gazal Likhooge tum

kal jo jana mein ne tumhara payar
tab waqat ne na dya meri kismat ka sath
phir meri yaad mein tab mahal banayoogay tum
phir yehi gazal likhwayogay tum!!


उसकी यादें

उसकी यादें दिल को दर्द दे जाती हैं
दिल नहीं चाहता जब याद करना उसको ,
फिर भी वो किसी राह पर नज़र आ जाता है

Uski yaadein

uski yaadein dil ko dard de jati hain
dil nahi chahta jab yaad karna usko,
phir bhi wo kisi rah par nazar aa jata hai!!


याद बहुत आओगे तुम

याद रखना पछताओगे एक दिन तुम
पर याद बहुत आओगे तुम
पर हम तभ न होंगे शायद
तभ यही गीत शायद गुनगुनाओगे तुम
फिर याद बहुत आओगे तुम

Yaad Bahut ayoge tum

yaad rakhna pachtaoge ek din tum
par yaad bahut ayoge tum
par hum tabh na hongay shyad
tabh yehi geet shyed gungunaoge tum
phir yaad bahut ayogay tum!!


किसी बेवफा की याद में

न रोया कर सारी सारी रात किसी बेवफा की याद में ,
वो खुश है अपनी दुनिया मैं तेरी दुनिया को उजाड़ कर!!!

Kisi bewafa ki yaad mein

Na roya kar sari sari raat kisi bewafa ki yaad mein
wo khush hai apni dunya mai teri dunya ko ujad kar!!


आहें भरता है कोई

याद में तेरी आहें भरता है कोई
हर सांस के साथ तुझे याद करता है कोई
मौत सच्चाई है एक रोज आनी है
लेकिन तेरी जुदाई में हर रोज़ मरता है कोई!!

Aahen Bharta Hai Koi

Yaad Me Teri Aahen Bharta Hai Koi
Har Saans Ke Saath Tujhe Yaad Karta Hai Koi
Maut Sachai Hai Ek Roj Aani Hai
Lekin Teri Judaai Me Har Roz Marta Hai Koi…

Continue Reading
pexels photo 701816 - दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं – जावेद अख्तर

दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं – जावेद अख्तर

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

दर्द के फूल 

दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं
ज़ख्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं

उस दरीचे में भी अब कोई नहीं और हम भी
सर झुकाए हुए चुप -चाप गुज़र जाते हैं

रास्ता रोके खडी है यही उलझन कब से
कोई पूछे तो कहें क्या की किधर जाते हैं

नरम आवाज़ भली बातें मोहज़्ज़ब लहजे
पहली बारिश में ही यह रंग उतर जाते हैं

Dard ke Phool  – Javed Akhtar

dard ke phool bhi khilate hain bikhar jaate hain
zaKhm kaise bhii hoon kuchh roz mein bhar jaate hain

us dariiche mein bhii ab koi nahin aur ham bhii
sar jhukaae hue chup-chaap guzar jaate hain

raastaa roke khaadi hai yahii ulajhan kab se
koi puuchhe to kahen kyaa ki kidhar jaate hain

narm aavaaz bhalii baate.n mohazzab lahaje
pahalii baarish mein hii ye rang utar jaate hain……

Continue Reading
shayarisms4lovers mar18 192 - तक़दीर का अफसाना – किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है

तक़दीर का अफसाना – किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

किस्मत मैं लिखदे मेरी

किस्मत मैं मेरी चैन से जीना लिखदे
मिटा न सके कोई वो अफसाना लिखदे
जन्नत भी न-गवार है मुझे तेरे बिन
ऐ कातिब-ऐ-तक़दीर ख़ाक-ऐ-मदीना लिखदे

Kismat mein Likhde Meri

kismat main meri chain se jeena likhde
mita na sake koi wo afsana likhde
jannat bhi na-gawar hai mujhe tere bin
Ae kaatib-ae-taqdeer KHaak-e-madiina likhde..


किस्मत पर ऐतबार

किस्मत पर ऐतबार किस को है
मिल जाये ‘ख़ुशी’ इनकार किस को है
कुछ मजबूरियां हैं मेरे दोस्तों
वरना ‘जुदाई ’ से प्यार किस को है

Kismat Par Aitbaar

kismat par aitbaar kis ko ha
Mil jaye ‘KHUSHI’ inkaar kis ko hai
kuch ‘MAJBURIYAN’ hain mere dosto
warna! ‘JUDAI’ se pyar kis ko hai..


किस्मत से शिकायत

किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है
जो नहीं मिल सकता उसी से मोहब्बत क्यों है
कितने खड़े है राहो पे
फिर भी दिल को उसी की चाहत क्यों

Kismat se Shikayat

Kismat se apni sabko shikayat kyon hai
Jo nahi mil sakta usi se mohabbat kyon hai
Kitne khade hai raho pe
Phir bhi dil ko usi ki chahat kyon..


किस्मत में मोहब्बत

कुछ किस्मत ही ऐसी रही दोस्तों
की अब ज़िन्दगी से कोई तम्मना ही नहीं
जिसको चाहा हमने उसे पा न सका
जो किस्मत में थी उसे मोहब्बत न कर सके

Kismat Mein Mohabbat

Kuch Kismat Hi Aisi rahi Doston
Ki Ab Zindagi Se Koi Tammana hi Nahi
Jisko Chahaa humne use paa Na Saka
Jo kismat mein thi usse Mohabbat Na kar sake..


मेरे नसीब की लकड़ी

मेरी किस्मत ही बेईमानी निकली
कबर भी खोदी तो ज़मीन पत्थर की निकली
लेकर मेरा जनाजा वो जलाने गए तो
कम्बख़त मेरे नसीब की लकड़ी भी गीली निकली

Mere Naseeb Ki Lakdi

Meri kismat bhi beimani nikli
Kabar Bhi Khodi To Zamin Pathar Ki Nikli
Lekar Mera Janaja Wo Jalane Gaye To
Kambakat Mere Naseeb Ki Lakdi Bhi Gili Nikli..


किस्मत का फैसला

मेरी तक़दीर से पूछ मेरी किस्मत का फैसला
मेरी मुस्कराहट पे न जा मेरा दर्द तलाश कर
आँखों से पूछ मेरे इंतज़ार की हद
इम्तिनान पे न जा मेरे सबर को तलाश कर
मेरे दोस्तों से पूछ मेरी दोस्ती का आलम
सूरत पे न जा मेरी सिरत तलाश कर
जो मिल जाये तुम को मेरी बातों के जवाब
तो फिर तू ज़रा सा काम कर
मुझे आस पास न देख मुझे खुद मैं तलाश कर

Kismat Ka Faisla

Meri Taqdeer Se Pooch Meri Kismat Ka Faisla
Meri Muskrahat …

Continue Reading
shayarisms4lovers mar18 38 - वो मेरा है मगर इस एहसास से इंकार करता है ​- ग़ज़ल

वो मेरा है मगर इस एहसास से इंकार करता है ​- ग़ज़ल

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

वो मुझ से मांगता है उम्र भर की वफ़ा का वादा

वो मेरा है मगर इस एहसास से इंकार करता है
भरी महफ़िल मैं मुझ को रुसवा वो हर बार करता है

यूँ तो करता है ज़माने भर की बातें मुझ से
मगर जब बात मोहबत की हो तो तकरार करता है

सितम् जब अपने सुनाता है भरी महफ़िल मैं वो
बड़े अंदाज़ से अपने गुनाहों का इज़हार करता है

वो मुझ से मांगता है उम्र भर की वफ़ा का वादा
किस मासूमियत से वो मुझ से फरयाद करता है

मालूम है सब को खफा है आज कल मुझ से वो
मगर मैं जानता हूँ के वो मुझ से प्यार करता है

Hindi and urdu Shayari,Gazal,kalam- वो मेरा है मगर इस एहसास से इंकार करता है

Wo Mujh Se Mangta Hai Umar Bhar Ki Wafa Ka Waada

Wo Mera Hai Magar Is Ihsaas Se Inkar Karta Hai
Bhari Mehfil Main Mujh ko Wo Ruswa Har Baar Karta Hai

Yun Tu Karta Hai Zamane Bhar Ki Batain Mujhe Se
Magar Jab Baat Mohabat Ki Ho To Takrar karta Hai

Sitam Jab Apnay Sunata Hai Bhari Mehfil Main wo
bade Andaaz Se Apne Gunahon Ka Izhaar Karta Hai

Wo Mujh Se Mangta Hai Umar Bhar Ki Wafa Ka Waada
Kis Masomiat Se Wo Mujhe Se Faryaad Karta Hai

Maloom Hai Sab Ko Khafa Hai AAj Kal Mujh Se Wo Haris
Magar Main Janta Hoon Ke Wo Mujh Se Pyar Karta Hai

Hindi and urdu Shayari – Gazal -Wo Mera Hai Magar Is Ihsaas Se Inkar Karta Hai
Continue Reading