shayarisms4lovers June18 148 - तेरा रंग-ऐ-हिना – उर्दू हिना शायरी

तेरा रंग-ऐ-हिना – उर्दू हिना शायरी

हाथों की हिना चंद मासूम से पतों का लहू है ‘फाखिर’ जिस को महबूब के हाथों की हिना कहते हैं Haathon Ki Hina Chand Maasoom Se Patton Ka Lahoo Hai ‘Faakhir’ Jis Ko Mahaboob Ke Haathon Ki Hina Kahte Hain… मोहताज-ऐ-हिना खून है दिल ख़ाक में अहवाल-ऐ-बुतान पर यानी उन के नाखून हुए मोहताज -ऐ -हिना मेरे बाद Mohtaaj-AE-Hinaa Khoon Hai Dil Khaak Mein Ahvaal-AE-Butaan Par Yaani Un Ke Naakhoon Hue Mohtaaj-AE-Hinaa Mere Baad… पा बस्ता ऐ-ज़ंजीर ऐ-हिना मैं भी पलकों पे सजा लूँगा लहू की बूँदें तुम भी पा-बस्ता-ऐ-ज़ंजीर-ऐ-हिना हो जाना Paa Basta-AE-Zanjeer AE-Hina Main Bhi Palkon Pe Sajaa Loon Ga Lahoo Ki Boonden Tum Bhi Paa-Basta-AE-Zanjeer-AE-Hina Ho Jaanaa… तन्हाई में खुशबू-ऐ-हिना वो हाथ पराये हो भी गए अब दूर का रिश्ता है “कैसर ” आती है मेरी तन्हाई में खुशबू-ऐ-हिना धीरे धीरे Tanhaai Mein Khushboo-AE-Hina Vo Haath Paraaye Ho Bhi Gaye Ab Door Ka Rishta Hai “Qaisar” Aati Hai Meri Tanhaai Mein Khushboo-AE-Hina Dheere Dheere… मेहँदी के वास्ते मेहँदी के वास्ते वो लहू मांगते हैं रोज़ दिल देना उन को जान का बे-नामा हो गया Mehndi Ke Vaaste Mehndi Ke Vaaste Vo Lahoo Maangte Hain Roz Dil Dena Un Ko Jaan Ka Be-Naamaa Ho Gayaa… तेरी हिना में […]

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shayarisms4lovers June18 248 - पंजाबी और उर्दू शायरी – हीर राँझा शायरी

पंजाबी और उर्दू शायरी – हीर राँझा शायरी

जेल बिच बंद ग़ुलाम रह जाँदै न किताबां बिच लिखे पैग़ाम रह जाँदै न पहली मुलाकात किसी नु याद रवे न रवे याद सब नू आखरी सलाम रह जाँदै न ​ jailaan ch band ghulaam reh janday ne kitaabaan ch likhay paighaam reh janday ne pehli mulakaat kissi nu yaad raway na raway yaad sab nu akhari SALAAM reh janday ne​ वेख के उदास चेहरा यार दा , जिदी आँख भर आवे . रब्ब ऐसे सजना नु कदे भी न तड़फावे …. अस्सी रब्ब तक पहुँच बनायीं होई है … मेरे हुंदियां न डरीं मौत कोलों … तेरी मौत अस्सी अपनी लक़ीरां च लिखाई होई है … vekh k udass chehra yaar da, jeedi akhh par aave. Rabb aise sajna nu kade vi na tarpave…. Assi rabb tak pohach banayi hoyi hai… Mere hundiyaa na darrin maut kolon… Teri maut assi apni lakeran ch likhayi hoyi hai… तू मेरी जिंद ते जान वरगा मेरे पिंड नूं जांदी राह वरगा तैनू भुला वे किंज यारा तू आंदी जांदी साह वरगा To meri Jind Tay jaan Wergaa Mery Pind Nou Jaandi Raah Wergaa tainoo Pullaan V Kainj yaraaaaaaaa Tou Aandi jaandi Saah Wergaaaaa हाजी लोक मक्का  ” नू जांदे ” मेरा रांझा […]

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shayarisms4lovers mar18 01 - हीर शायरी – वारिस शाह

हीर शायरी – वारिस शाह

लिखी रांझे नाम ये हीर हुंदी की मुक जाना सी वारिस शाह दा, लिखी रांझे नाम ये हीर हुंदी . वख रूह नालो रूह न हो सकदी , न दिल चो वख तस्वीर हुंदी . नशा अख दा इक वारी चढ़ जावे , पूरी इश्क़ दी फिर तासीर हुंदी . झूठा रब्ब नू तुस्सी केहन वालयो , निगाह मेरी नाल ये देख लावो , झूठ अख कदे नी कह सकदी , निगाह यार दी निगाहे -ऐ -पीर हुंदी . तेरी अख तो ओहले मैं हुँदा न , मंदी ऐनी ये न तक़दीर हुंदी . Likhi Ranjhe Naam Je Heer Hundi Ki Mukk Jana Si Waris Shah Da, Likhi Ranjhe Naam Je Heer Hundi. Vakh Rooh Naalo Rooh na Ho Sakdi, Nai Dil Cho Vakh Tasveer Hundi. Nasha Akh Da Ik Vaari Chadh Jave, Poori Ishq Di Fer Taseer Hundi. Jhootha Rabb Nu Tussi Kehen Waleyo, Nigah Meri Naal Je Dekh Lavo, Jhooth Akh Kade Ni Keh Sakdi, Nigah Yaar Di Nigahe-E-Peer Hundi. Teri Akh To Ohle Manu Hunda Na, Maadi Enni Je Na Taqdeer Hundi.

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shayarisms4lovers mar18 190 - शायरी – एक मुसाफिर अजनबी

शायरी – एक मुसाफिर अजनबी

मुसाफिर के रास्ते बदलते रहे मुसाफिर के रास्ते बदलते रहे , मुक़द्दर में चलना था चलते रहे मेरे रास्तों में उजाला रहा , दीये उसकी आँखों में जलते रहे कोई फूल सा हाथ कंधे पे था , मेरे पाओं शोलों पे चलते रहे सुना है उन्हें भी हवा लग गयी , हवाओं के जो रुख बदलते रहे वो क्या था जिसे हमने ठुकरा दिया , मगर उम्र भर हाथ मलते रहे मोहब्बत , अदावत , वफ़ा , बेरुखी , किराये के घर थे बदलते रहे लिपट कर चिराग़ों से वो सो गए , जो फूलों पे करवट बदलते रहे.. मुसाफिर के साथ तू ने क्या किया इस राह -ऐ -उल्फत के मुसाफिर के साथ तू ने क्या किया कभी अपना लिया कभी ठुकरा दिया मेरी मोहब्बत तेरे नाम का मुहाल तो नहीं कभी बना लिया कभी गिरा दिया मैं तेरी किताब -ऐ -ज़िंदगी का वो हर्फ तो नहीं हूँ जिसे कभी लिख लिया कभी मिटा दिया मेरा साथ तेरे लिए बाईस-इ-रुस्वाई तू नहीं जिसे कभी दुनिया को बतला दिया कभी छुपा लिया आज कल लोगों का यही मशग़ला है “मुसाफिर” कभी हमें सोच लिया तो कभी भुला दिया.. ऐ मुसाफिर दुनिया के ऐ मुसाफिर मंज़िल तेरी कब्र है और जिस […]

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किसी के हिजर में नींदें गवां कर कुछ नहीं मिलता – Wasi Shah

हाल-ऐ-दिल न कर बयाँ उन से हाल-ऐ-दिल “वासी” मगरूर सा शख्स है कहीं साथ न छोड़ दे Haal-ae-Dil Na Kar Byaan Un Se Haal-ae-Dil “WASI” Magror Sa Shakhs Hai Kahin Sath Na Chor De जान -ऐ-मन कौन कहता है शरारत से तुम्हें देखते हैं जान -ऐ-मन हम तो मोहब्बत से तुम्हें देखते है Jaan-ae-maan kon kehta hai shararat se tumein dekhtey hain jaan e man ham to mohabbat se tumhein dekhtey hain किसी के हिजर में किसी की आँख से सपने चुरा कर कुछ नहीं मिलता मंदिरों से चिराग़ों को बुझा कर कुछ नहीं मिलता मुझे अक्सर सितारों से यही आवाज़ आती है किसी के हिजर में नींदें गवां कर कुछ नहीं मिलता Kissi Ke Hijr Mein Kissi Ki Ankh Se Sapney Chura Kar Kuch Nahi Milta Mandeiron Se Chiraaghon Ko Bhuja Kar Kuch Nahi Milta Mujhe Aksar Sitaron Se Yehi Awaaz Aati Hai Kissi Ke Hijr Mein Neendein gawan Kar Kuch Nahi Milta उन के मिल जाने का नशा हिजर की प्यास में क़तरा भी बुहत होता है दीद के वास्ते एक लम्हा भी बुहत होता है जिन के मिलने की नहीं दूर तक कोई उम्मीद उन के खो जाने का हादसा भी बुहत होता है जिन के खो […]

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shayarisms4lovers mar18 204 - Best Collection of Pakistani Two Lines urdu Shayari

Best Collection of Pakistani Two Lines urdu Shayari

कोई ऐसा शख्स जो पुकारता था हर घड़ी , जो जुड़ा था मुझसे लड़ी लड़ी कोई ऐसा शख्स अगर कभी , मुझे भूल जाये तो क्या करूं Koi Aisa Shakhs Jo Pukarta Tha Har Ghadi, Jo Juda Tha Mujhse Ladi Ladi Koi Aisa Shakhs Agar Kabhi, Mujhe Bhool Jaye To Kya Krun जान देने की इजाज़त जान देने की इजाज़त भी नहीं देते हो वरना मर जाएँ और मर के मना लें तुम को Jaan Dene Ki Ejazaat Jaan Dene Ki Ejazaat Bhi Nahi Dete Ho Warna Mar Jayein Aur Mar Ke Manaa Le Tum Ko उम्र भर के साथ उस मरहले को मौत भी कहते हैं दोस्तों एक पल में टूट जाएँ जहाँ उम्र भर के साथ Umar Bhar Ke Sath Us Marhaly Ko Mout Bhi Kehte Hain Dosto Ek Pal Mein Toot Jayen Jahan Umar Bhar Ke Sath मिसल-ऐ-खुशबु सुना है जिन की बातें मिसल-ऐ-खुशबु फैला जाती हैं बहुत बिखरे हुए होते हैं ऐसे लोग अंदर से Misl-ae-Khushbu Suna Hai Jin Ki Baaten Misl-ae-Khushbu fila Jati Hain Bahut Bikhre Hue Hote Hain Aise Log Andar Se

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