shayarisms4lovers June18 98 - तेरा आना मेरी जिंदगी में एक ख्वाब सा लगता है

तेरा आना मेरी जिंदगी में एक ख्वाब सा लगता है

तेरा आना मेरी जिंदगी में एक ख्वाब सा लगता है तेरा आना मेरी जिंदगी में एक ख्वाब सा लगता है ऐतबार नहीं है मुझे अपनी किस्मत पे एक धोखा सा लगता है जब भी तुझे करीब पता हूँ एक सकून सा लगता है फिर न जाने क्यों एक डर सा लगता है तुझे पाकर जहाँ मुकमल सा लगता है फिर भी न जाने कहीं एक कोना अधूरा सा लगता है जमानो चले जिस के साथ हर एक पल का साथ फिर भी न जाने क्यों यह सफर अधूरा लगता है रहेंगे तलबगार तेरे सारी उम्र का है फिर भी न जाने यह वादा अधूरा लगता है देखे सारे ख्वाब हर ख्वाब को जिया हमने फिर भी न जाने क्यों एक सपना अधूरा लगता है कहीं तो कुछ खाली है कहीं तो कुछ अधूरा है फिर भी न जाने क्यों तेरा साथ मुकमल लगता है Tera Aana Meri Zindagi Mein Ek Khwab Aa Lagta Hai Tera aana meri jindagi mein ek khwab sa lagta hai aitbaar nahi hai mujhe apni kismat pe ek dhokha sa lagta hai Jab bhi tujhe karib pata hoon ek sakoon sa lagta hai phir na jane kyon ek dar sa lagta hai tujhe pake jahan mukamal […]

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shayarisms4lovers June18 202 - पहले पहले का इश्क़ अभी भी याद है – फ़राज़

पहले पहले का इश्क़ अभी भी याद है – फ़राज़

खुश और उदास – फ़राज़ वो मुझ से बिछड़ कर खुश है तो उसे खुश रहने दो “फ़राज़ “ मुझ से मिल कर उस का उदास होना मुझे अच्छा नहीं लगता …. पहले पहले का इश्क़ अभी याद है “फ़राज़” दिल भी बुझा हो शाम की परछाइयाँ भी हों मर जाए जो ऐसे में तन्हाइयाँ भी हों हर हुस्न -ऐ -सदा लो न दिल में उतार सका कुछ तो मिज़ाज -ऐ -यार मैं गहराइयाँ भी हों दुनिया के तजकरे तो तबियत ही ले बुझे बात उस की हो तो फिर सुख आराईयां भी हों पहले पहले का इश्क़ अभी भी याद है फ़राज़ दिल खुद यह चाहता था के रुस्वाइयाँ भी हों Pehle pehle ka ishq abhi yaad hai “Faraz” Dil bhi bhuja ho shaam ki parchaiyan bhi hon Mar jaiyye jo aise main tanhaiyan bhi hon Har husn-ae-saada loh na dil main utar saka Kuch to mizaaj-e-yaar mein gehraiyan bhi hon Duniya ke tazkaray to tabiyat hi le bujhay Baat us ki ho to phir sukhan aaraiyan bhi hon Pehle pehle ka ishq abhi yaad hai Faraz Dil khud yeh chahta tha ke ruswaiyan bhi hon

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shayarisms4lovers June18 263 - आज फिर दिल है कुछ उदास उदास – जावेद अख्तर

आज फिर दिल है कुछ उदास उदास – जावेद अख्तर

दर्द अपनाता है पराये कौन कौन सुनता है और सुनाए कौन कौन दोहराए वो पुरानी बात गम अभी सोया है जगाए कौन वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैं कौन दुःख झेले आज़माए कौन अब सुकून है तो भूलने में है लेकिन उस शख्स को भुलाए कौन आज फिर दिल है कुछ उदास उदास देखिये आज याद आए कौन Aaj Phir Dil Hai Kuch Udaas Udaas- Javed Akhtar dard apanaataa hai paraae kaun kaun sunataa hai aur sunaae kaun kaun doharaae vo puraanii baat Gam abhii soyaa hai jagaae kaun vo jo apane hain kyaa vo apane hain kaun dukh jhele aazamaae kaun ab sukuuN hai to bhuulane mein hai lekin us shaKhs ko bhulaae kaun aaj phir dil hai kuchh udaas udaas dekhiye aaj yaad aae kaun

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दुःख दे कर सवाल करते हो – उर्दू शायरी

दुःख दे कर सवाल करते हो , तुम भी ग़ालिब ! कमाल करते हो .. Dukh Day Kar Sawaal Kartay ho, Tum Bhe GHAALiB ! Kamaal Kartay ho.. यह हम ही जानते हैं जुदाई के मोड़ पर , इस दिल का जो भी हाल तुझे देख कर हुआ .. Yeah hum hi jantey hain judaai ke mod par, Is dil ka jo bhi haal tujhe dekh kar hua.. क्या ज़रूरी है के हम हार के जीतें, ताबिश इश्क़ का खेल बराबर भी तो हो सकता है… Kia Zaroori Hai Ke Hum Haar Ke Jeetien Tabish Ishq Ka Khel Baraber Bhi To Ho Sakta Hai… तुम आज हँसते हो हँस लो मुझ पर ये आजमाइश न बार बार होगी मैं जनता हूँ मुझे खबर है के कल फ़िज़ा खुशगवार होगी . Tum Aj Hanste Ho Hans Lo Mujh Par Ye Ajamaish Naa Bar Bar Hogi Main Janta Hun Mujhe Khabar Hai Ki Kal Faza Khushgawar Hogi. लगा न दिल को क्या सूना नहीं तूने , जो कुछ के मीर का इस आशिक़ी ने हाल किया .. Laga na dil ko kya sunaa nahin tu ne, Jo kuch ke Meer ka is aashqi ne haal kiya.. इश्क़ माशूक़ इश्क़ आशिक़ है , […]

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shayarisms4lovers June18 102 - Umar bhar teri mohabbat  meri  khidmat rahi

Umar bhar teri mohabbat meri khidmat rahi

तेरी खिदमत के क़ाबिल उम्र भर तेरी मोहब्बत मेरी खिदमत रही मैं तेरी खिदमत के क़ाबिल जब हुआ तो तू चल बसी हिंदी और उर्दू शायरी – अल्लम इक़बाल शायरी – तेरी खिदमत के क़ाबिल Teri Khidmat Ke Qabil Umer Bhar Teri Mohabbat Meri Khidmat Rahi Main Teri Khidmat Ke Qabil Jab Huwa Tu Chal Basi Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki (dedicated to maa) shayari – Teri Khidmat Ke Qabil ऐ बेखबर सौदागरी नहीं , यह इबादत खुदा की है ऐ बेखबर ! जज़ा की तमन्ना भी छोड़ दे हिंदी और उर्दू शायरी – अल्लम इक़बाल शायरी – ऐ बे -खबर Ae Be-Khabar Sodagari Nahin, Ye Ibadat Khuda Ki Hai Ae Be-Khabar! Jaza Ki Tamanna Bhi Chor De Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari – Ae Be-Khaba इश्क़ क़ातिल से इश्क़ क़ातिल से भी मक़तूल से हमदर्दी भी यह बता किस से मुहब्बत की जज़ा मांगेगा सजदा ख़ालिक़ को भी इबलीस से याराना भी हसर में किस से अक़ीदत का सिला मांगेगा हिंदी और उर्दू शायरी – अल्लम इक़बाल शायरी – इश्क़ क़ातिल से भी मक़तूल से हमदर्दी भी Ishq Qatil Se Ishq Qatil Se Bhi Maqtool Se Hamdardi Bhi Ye Bata Kis Se […]

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shayarisms4lovers June18 89 - चंद नग्मे हुस्न वालो की नज़र

चंद नग्मे हुस्न वालो की नज़र

जख्म है गहरे और न आये मुझे उन्हें सीना उसके जख्मो के बिन जिंदगी क्या जीना अगर लफ्ज़ो में तेरी तारीफ करू तो तेरे हुस्न की बेअदबी होगी बस तू यह जान ले चाँद भी अधूरा है तेरे बिना हुस्न वालों के पीछे दीवाने चले आते है शमा के पीछे परवाने चले आते है तुम भी चली आना मेरे जनाजे के पीछे उसमे अपने तो क्या बेगाने भी चले आते है

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shayarisms4lovers mar18 129 - जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया – Javed Akhtar Shayari

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया – Javed Akhtar Shayari

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया उम्र भर दोहराएंगे ऐसी कहानी दे गया उस से मैं कुछ पा सकू ऐसी कहाँ उम्मीद थी ग़म भी शायद बराए मेहरबानी दे गया खैर मैं प्यासा रहा पर उसने इतना तो किया मेरी पलकों की कितरों को वो पानी दे गया Jatay jatay wo mujhe acchi nishani de gaya jatay jatay wo mujhe acchi nishani de gaya umar bhar dohraoonge, aisi kahani dae gaya us say main kuch pa sakoon aisi kahaN umeed thi gham bhi wo shayad baaraye meharbani de gaya khair maiN pyasa raha par usne itna to kia meri palkon ki qitaroN ko wo pani de gaya… अपने होने पर मुझको यकीन आ गया पिघले नीलम सा बहता ये समां नीली नीली सी खामोशियां न कहीं है ज़मीन न कहीं आसमान सरसराती हुई टहनियाँ -पत्तियां कह रही हैं बस एक तुम हो यहाँ बस मैं हूँ , मेरी साँसे हैं और मेरी धड़कने ऐसी गहराइयाँ , ऐसी तन्हाइयाँ , और मैं … सिर्फ मैं अपने होने पर मुझको यकीन आ गया Apne Hone Par Mujhko Yakeen Aa Gaya Pighle Neelam Sa Behta Yeh Sama Neeli Neeli Si Khamoshiyan Na Kahin […]

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shayarisms4lovers mar18 69 - थामी है कलाई अब न छुटेगी मुझसे – चूड़ियाँ

थामी है कलाई अब न छुटेगी मुझसे – चूड़ियाँ

यादों का इक झोंखा यादों का इक झोंखा आया मुद्द्तों बाद पहले इतना रोये नहीं जितना रोये बरसों बाद लम्हां लम्हां गुजरा तो  हमे अहसास हुआ पत्थर फैंके बरसों पहले , शीशे टूटे बरसों बाद दस्तक ही उमीद लगाये कब से बैठे हैं हम कल का वादा करने वाले , मिलने आए बरसों बाद.. गुजरे हुए वक़्त की यादें सजा बन जाती है गुजरे हुए वक़्त की यादें न जाने क्यों छोड़ जाने के लिए मोहबत करते है लोग.. टूटी थी चूड़ियाँ थामी है कलाई अब न छुटेगी मुझसे टूटी थी चूड़ियाँ , टूटे अब मेरी बला से.. तुझे सोचना कोई और काम दे दो मुझे अब तुम यह क्या तुझे सोचना और सोचते ही रहना..

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shayarisms4lovers mar18 125 - नए कवियों की शायरी पढ़िए

नए कवियों की शायरी पढ़िए

Poet – Kautilya Gaurav कहती सुनती बातों सी… जैसे गहरी मेरी रातों सी… ख़ामोशी से भरी भरी… ख़ाली मेरे हाथों सी… कभी कभी कहीं जो मिलती थी… ख़ामोशी सी रातों में… जाने कहाँ मुझसे गुम हुई… कुछ बातें तेरी बातों सी… Poet – Kautilya Gaurav दरिया सा एक सब्र का… बहता रहा मुझमें कहीं… बहोत दिन हुये… अब न जाने कितने…   ख़्वाब कितने थे अब… जाने क्या कहिये… कुछ एक बातें कभी कभी… जैसे लगता है कि… दोहराती हैं खुद को… बहोत दिन हुये… मेरी बातों को… मुझमें कहीं रूबरू हुये… बातें मेरी अब… बड़ी बेनूर सी हैं… बहोत दिन हुये… अब न जाने कितने… Poet – Kautilya Gaurav लकीरों से भरता रहा हथेलियों को… जाने कौन सी कहीं किसी मंज़िल तक हो जाती… मंज़िलों से कहीं आगे तक है जाता… फिर क्युं ये मेरा रास्ता… कभी कुछ ज़हन में जो था मैंने सोचा… एक रास्ता वहाँ से जैसे चल पड़ा… मंज़िलों के रास्ते बनाता चला… हथेलीयों पे लकीरें को मिलाता चला… कभी शायद कहीं किसी मंज़िल के रास्ते पे… मैं कभी कहीं खुद से मिलूँगा… लकीरों की हद से कही बहोत आगे… मंज़िलों से कहीं बहोत आगे तक है जाता… मेरे ज़हन में ये मेरा रास्त..

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shayarisms4lovers mar18 39 - आज की रात

आज की रात

आज की रात वो कह के चले इतनी मुलाक़ात बहुत है मैंने कहा रुक जाओ अभी रात बहुत है आँसू मेरे थम जाएं तो फिर शौक से जाना ऐसे मैं कहाँ जाओगे बरसात बहुत है वो कहने लगे जाना मेरा बहुत ज़रूरी है नहीं चाहता दिल तोडू तेरा पर मजबूरी है गर हुई हो कोई खता तो माफ़ कर देना मैंने कहा हो जाओ चुप इतनी कही बात बहुत है समझ गए हों सब और कुछ कहो ज़रूरी नहीं बस आज की रात रुक जाओ , जाना इतना भी ज़रूरी नहीं है फिर कभी न आऊँगी तुम्हारी ज़िन्दगी में लौट के सारी ज़िन्दगी तन्हाई के लिए , आज की रात बहुत है Aaj Ki Raat Wo Keh Ke Chalay Itni Mulaqat bahut hai Maine Kaha Ruk Jao Abhi Raat bahut hai Aansoo Mere Thum Jayein To Phir Shoq Say Jana Aisay Main Kahan JaoGey Barsaat bahut hai Wo Kehne Lagey Jana Mera Bohot Zaroori Hai Nahi Chahta Dil Todun Tera Par Majboori Hai Gar Hui Ho Koi Khata To Maaf Ker Dena Maine Kaha Ho jao Chup Itni Kahi Baat bahut hai Samajh Gayi Hon Sab Aur Kuch Kaho Zaroori Nahi Bas Aaj Ki Raat Ruk Jao, Jana Itna Bhi […]

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shayarisms4lovers mar18 27 1 - यह इश्क़ नहीं आसां – Jigar Moradabadi – Urdu Shayar

यह इश्क़ नहीं आसां – Jigar Moradabadi – Urdu Shayar

यूं ही दिल के तड़पने का कुछ तो है सबब आखिर या दर्द ने करवट ली है या तुमने इधर देखा माथे पे पसीना क्यों आँखों में नमी सी क्यों कुछ खैर तो है , तुमने जो हाल -ऐ -जिगर देखा                                                            Jigar Moradabadi – Urdu Shayar यह इश्क़ नहीं आसां क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है हम ख़ाक-नाशिनो की ठोकर में ज़माना है वो हुस्न -ओ -जमाल उनका यह इश्क़ -ओ -शबाब अपना जीने की तम्मना है मरने का ज़माना है या वो थे खफा हम से या हम थे खफा उनसे कल उनका ज़माना था आज अपना ज़माना है यह इश्क़ नहीं आसां इतना तो समझ लीजिये एक आग का दरिया है और डूब के जाना है आँसू तो बहुत से हैं आँखों में “जिगर” लेकिन बन जाए सो मोती है बह जाए सो पानी है Yeh Ishq Nahin Aasaan kya husn ne samjha hai kya ishq ne jaana hai ham Khaak-nashinoo ki Thokar mein zamana hai wo husn-o-jamaal unkaa yeh ishq-o-shabaab apana jeene ki tamanaa […]

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shayarisms4lovers mar18 149 - कली का फूल बनना और बिखर जाना मुक़दर है

कली का फूल बनना और बिखर जाना मुक़दर है

तुम ही को चाहते है तुम ही से प्यार करते है यही बरसो से आदत है और आदत कब बदलती है तुम को जो याद रखा है यही अपनी इबादत है इबादत जिस तरह की हो इबादत कब बदलती है कली का फूल बनना और बिखर जाना मुक़दर है यही कानून-ऐ-फितरत है और फितरत कब बदलती है जो दिल ही नक़्श कर जाये निगाहों में सिमट आये अलामत है यह चाहत की तो चाहत कब बदलती है पुराने ज़ख़्म को अक्सर भुला देना ही अच्छा है न चाहे आप ही कोई तो क़िस्मत कब बदलती है

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shayarisms4lovers mar18 108 - यह जरूरी तो नहीं – इश्क़-ऐ-गम

यह जरूरी तो नहीं – इश्क़-ऐ-गम

उम्र जलवो में बसर हो यह जरूरी तो नहीं हर शबे-ऐ-गम की सेहर हो यह जरूरी तो नहीं नींद तो दर्द के बिस्तर पर भी आ जाती है उसके आगोश में सर हो यह जरूरी तो नहीं आग को खेल पतंगों ने समझ रखा है सब को अंजाम का डर  हो यह जरूरी तो नहीं वो करता है जो मस्जिद में खुदा को सजदे उसके सजदों में असर हो यह जरूरी तो नहीं सब की शाकी पे नज़र हो यह जरूरी है मगर सब पे शाकी की नज़र हो यह जरूरी तो नहीं शायरी तो वो शक्श लिखते है यह शायरी लिखना उनका काम नहीं जिनके दिल आँखों में बसा करते है शायरी तो वो शक्श लिखते है जो शराब से नहीं , दर्द का नशा करते है मिट गयी उम्मीद किसी की शिकवा किसी का न फ़रियाद किसी की होनी थी यूँही जिंदगी बर्बाद किसी की एहसास मिटा, तलाश मिटी,मिट गयी उम्मीद किसी की सब मिट गए ,पर न मिटा सके, याद उसकी कहा था मोहबत करो क्यों कोसते है मोहबत को हर बार लोग क्या मोहबत के कहा था मोहबत करो

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shayarisms4lovers mar18 129 - छोड़ दिए हम ने ऐतबार किस्मत की लकीरों पे – Aitbar Shayari

छोड़ दिए हम ने ऐतबार किस्मत की लकीरों पे – Aitbar Shayari

कोई तो बरसात ऐसी हो कोई तो बरसात ऐसी हो जो तेरे संग बरसे … तनहा तो मेरी आँखें हर रोज़ बरसती हैं … Koi To Barsat Aisi Ho Koi To Barsat Aisi Ho Jo Tere Sang Barsy… Tanha To Meri Aankhen Har Roz Barasti Hain… ऐतबार छोड़ दिए हम ने ऐतबार किस्मत की लकीरों पे “वासी” जो दिलों में बस जाएँ वो लकीरों में नहीं मिला करते … Aitbar Chod Dia Hum Ne Aitbar Qismat Ki Lakeeron Pe “Wasi” Jo Dilon Me Bus Jaen Wo Lakeeron Me Nahi Mila Karte… हमराज़ यूँ फ़िज़ा महकी के बदला मेरे हमराज़ का रंग यूँ सजा चाँद के झलका तेरे अंदाज़ का रंग Humraaz yun fiza mehaki kay badala mere humraaz ka rang Yun saaja chand kay jhalaka tere andaaz ka rang बरसात में काग़ज़ की तरह रहने दो अब के तुम भी मुझे पढ़ न सकोगे बरसात में काग़ज़ की तरह भीग गया हूँ मैं … Barsat Me Kaghaz Ki Tarha Rehne Do Ab K Tum Bhi Mujhe Parh Na Sako Ge Barsat Me Kaghaz Ki Tarha Bheeg Gaya Hun main… तस्वीर तस्वीर तेरी मेरे मन में इस क़दर बसी है की हर वक़्त इन आँखों में तू ही नज़र आता है […]

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garden rose red pink 56866 - याद-ऐ-गम

याद-ऐ-गम

एक अजनबी चले आओ फिर से एक अजनबी हो कर मिलने तुम मेरा नाम पूछो में तुम्हारा हाल पुछू तेरी एक झलक तेरी एक झलक को दिल तरस जाता है मेरा किस्मत वाले है वो लोग जो रोज़ तेरा दीदार करते है , तुझसे बात करते है उससे इतना कहना वो लड़की नज़र आये कभी तो उससे इतना कहना जिन को आदि कर दिया है आपने वो लोग बहुत याद करते है आपको किस्मत से गिला कोई न मिले तो किस्मत से गिला नहीं करते अक्सर लोग मिल के भी मिला नहीं करते हर शाख पर बहार आती है जरूर पर हर  शाख पर फूल खिला नहीं करते प्यास मिलन की  गिरा दे जितना पानी है तेरे पास ऐ बादल यह प्यास किसी के मिलने से बुझेगी तेरे बरसने से नहीं दर्दे दिल की दबा नहीं दूर रह कर करीब कितने है फासले भी अजीब कितने है दर्दे दिल की दुआ नहीं वरना इस जहाँ में तबीब कितने थे उम्र भर जो साथ रहा जो तेरे उसके अशे नसीब कितने थे क्यों न आउूं में तेरे सपनो में मेरे शिकबे अजीब कितने है

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