shayarisms4lovers June18 288 - तेरे बिना टूट कर बिखर जायेंगे !!#01 !! ❤🌷☘💐💗 Romantic Shayari Hindi!! Romantic शायरी

तेरे बिना टूट कर बिखर जायेंगे !!#01 !! ❤🌷☘💐💗 Romantic Shayari Hindi!! Romantic शायरी

❤❤❤❤🌷☘💐💗 उसके साथ रहते रहते हमे चाहत सी हो गयी, उससे बात करते करते हमे आदत सी हो गयी, एक पल भी न मिले तो न जाने बेचैनी सी रहती है, दोस्ती निभाते निभाते हमे मोहब्बत सी हो! ❤❤❤❤🌷☘💐💗 😀😀😀😀😀😀😀 मेरी मोहब्बत है वो कोई मज़बूरी तो नही, वो मुझे चाहे या मिल जाये, जरूरी तो नही, ये कुछ कम है कि बसा है मेरी साँसों में वो, सामने हो मेरी आँखों के जरूरी तो नही! 😀😀😀😀😀😀😀 🌹🙏😩😜😜🌹💓😍😀😀 तेरे बिना टूट कर बिखर जायेंगे, तुम मिल गए तो गुलशन की तरह खिल जायेंगे, तुम ना मिले तो जीते जी ही मर जायेंगे, तुम्हें जो पा लिया तो मर कर भी जी जायेंगे। 🌹🙏😩😜😜🌹💓😍😀😀 ❤❤❤❤🌷☘💐💗 उदास नहीं होना, क्योंकि मैं साथ हूँ, सामने न सही पर आस-पास हूँ, पल्को को बंद कर जब भी दिल में देखोगे, मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ! ❤❤❤❤🌷☘💐💗 ❤❤❤❤🌷☘💐💗 इश्क मुहब्बत तो सब करते हैं! गम-ऐ-जुदाई से सब डरते हैं हम तो न इश्क करते हैं न मुहब्बत! हम तो बस आपकी एक मुस्कुराहट पाने के लिए तरसते हैं! ❤❤❤❤🌷☘💐💗

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“झाँसी की रानी” कविता | Jhansi ki Rani Poem

Jhansi Ki Rani दोस्तों, बचपन से ही हमनें झाँसी की राणी लक्ष्मीबाई की वीरता के बहुत से किस्से सुने होंगे। हम बचपन में स्कूल के प्रोग्राम में कभी झाँसी की राणी भी बने होंगे। उनकी वीरता को बताने के लिए शब्द भी कम पड़ते हैं। झाँसी की राणी सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा स्थान हैं। झाँसी की राणी लक्ष्मीबाई की वीरता का गाथा महान कवियत्री सुभद्रा कुमारी चौहान – Subhadra Kumari Chauhan ने अपनी “झाँसी की रानी” – Jhansi Ki Rani इस कविता के जरिये बताने की कोशिश की आज हम उसी “झाँसी की रानी” को आपके लिए लाये हैं। “झाँसी की रानी” कविता – Jhansi ki Rani Poem सिंहासन हिल उठे राजवंषों ने भृकुटी तनी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सब ने मन में ठनी थी। चमक उठी सन सत्तावन में, यह तलवार पुरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी। कानपुर के नाना की मुह बोली बहन छब्बिली थी, लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वो संतान अकेली थी, नाना के सॅंग पढ़ती थी वो नाना के सॅंग खेली थी बरछी, […]

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shayarisms4lovers June18 279 - सुभद्रा कुमारी चौहान की कवितायेँ | Subhadra Kumari Chauhan Poems

सुभद्रा कुमारी चौहान की कवितायेँ | Subhadra Kumari Chauhan Poems

Subhadra Kumari Chauhan – सुभद्रा कुमारी चौहान हिन्दी भाषा की एक महान और प्रसिद्ध कवयित्री तथा लेखिका थीं। उन्होंने अपने जीवन में बहुत सुंदर सुंदर रचनाएँ की उनकी प्रसिद्ध कविता “झाँसी की रानी” आपने हमारे पिछले पोस्ट में पढ़ी। यह कविता झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की गाथा बताती है इसी कविता के वजह से सुभद्रा कुमारी चौहान काफ़ी प्रसिद्ध हुयी। आज हम उन्ही की कुछ और कविताओं – Subhadra Kumari Chauhan Poems को पढेंगे। आशा हैं आपको बाकि की कविता भी जरुर पसंद आयेंगी। सुभद्रा कुमारी चौहान की कवितायेँ – Subhadra Kumari Chauhan Poems Subhadra Kumari Chauhan Poems 1 “मेरा नया बचपन” बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी। गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी॥ चिंता-रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्भय स्वच्छंद। कैसे भूला जा सकता है बचपन का अतुलित आनंद? ऊँच-नीच का ज्ञान नहीं था छुआछूत किसने जानी? बनी हुई थी वहाँ झोंपड़ी और चीथड़ों में रानी॥ किये दूध के कुल्ले मैंने चूस अँगूठा सुधा पिया। किलकारी किल्लोल मचाकर सूना घर आबाद किया॥ रोना और मचल जाना भी क्या आनंद दिखाते थे। बड़े-बड़े मोती-से आँसू जयमाला पहनाते थे॥ मैं रोई, माँ काम छोड़कर आईं, मुझको उठा लिया। झाड़-पोंछ कर चूम-चूम कर गीले गालों […]

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