Best Hindi Shayari on Love , Life Download 2018

आज कल किसी को आजमाता नहीं हूँ मैं पास अपने भी किसी को बिठाता नहीं हूँ मैं ख्वाब में भी कहीं बेवफाई उसकी न दिखे इस लिए आँखों को कभी सुलाता नहीं हूँ मैं I O O O मुझे आईने की ज़रूरत नहीं है मैं तेरी निगाहों में रहना हूँ चाहता ना कर पाए कोई जुदा हमको हमदम मैं हरदम तुझे अपना कहना हूँ चाहता । O O O कहने को तो अच्छी लगती हैं ये बातें मगर जो सहता है वही जानता है दोस्त हमने सबको आज़माकर देखा है यहाँ कौन किसी को अपना मानता है दोस्त | O O O ज़िन्दगी के तमाम लन्हों को जियो तुम हर एक लम्हा खुशी के घुट पियो तुम निकले सचिन के दिल से सदा यही दुआ अपने दोस्तों के हर जख़्म को सियो तुम I O O O आपकी इन्हीं अदाओं ने किया बेकरार हमे’ तभी रहता है सदा आपका इंतज़ार हमें, अपने दिल क्रो रखना ऐसे ही पाक सनम गैर समझो काबिल कर लेना प्यार हमेँ । O O O मैं केसे ये कह दूँ वो क्या चाहता था बात अपनी ही तुम्हें मैँ कह सकता हूँ मुझे भूल कर गर. गुजारा है उसका बिन उसके फिर मैं भी तो […]

Continue Reading

देशभक्ति कविता इन हिंदी : चन्द्रशेखर आजाद! Desh Bhakti Poem

देश प्रेम पर देशभक्ति कविता ये देशभक्ति कविता (Hindi Deshbhakti Kavita/Poem) महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के बलिदान और उनके आजाद भारत के सपने पर आधारित है| इस हिंदी देशभक्ति कविता में कवि ने अपनी बातों से झकझोर कर रख दिया है| जिस आजादी के लिए चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह जैसे वीरों ने अपनी कुर्बानी दी थी, क्या आज उन सेनानियों के लिए हमारे हृदय में कोई स्थान नहीं है| चंद पैसे और कुर्सी के लालच में लोग इन क्रांतिकारियों का मजाक उड़ाने तक से बाज नहीं आते| कुछ ऐसे ही विद्रोही बोलों के साथ कवि ने यह कविता लिखी है| जरूर पढ़िए ये देशभक्ति कविता आपके दिल को छू जाएगी – मन तो मेरा भी करता है झूमूँ , नाचूँ, गाऊँ मैं आजादी की स्वर्ण-जयंती वाले गीत सुनाऊँ मैं लेकिन सरगम वाला वातावरण कहाँ से लाऊँ मैं मेघ-मल्हारों वाला अन्तयकरण कहाँ से लाऊँ मैं मैं दामन में दर्द तुम्हारे, अपने लेकर बैठा हूँ आजादी के टूटे-फूटे सपने लेकर बैठा हूँ — घाव जिन्होंने भारत माता को गहरे दे रक्खे हैं उन लोगों को जैड सुरक्षा के पहरे दे रक्खे हैं जो भारत को बरबादी की हद तक लाने वाले हैं वे ही स्वर्ण-जयंती का पैगाम सुनाने वाले हैं — […]

Continue Reading

सृष्टि(Srishti) – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत)

सृष्टि(Srishti) – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत) मिट्टी का गहरा अंधकार, डूबा है उस में एक बीज वह खो न गया, मिट्टी न बना कोदों, सरसों से शुद्र चीज! उस छोटे उर में छुपे हुए हैं डाल–पात औ’ स्कन्ध–मूल गहरी हरीतिमा की संसृति बहु रूप–रंग, फल और फूल! वह है मुट्ठी में बंद किये वट के पादप का महाकार संसार एक! आशचर्य एक! वह एक बूंद, सागर अपार! बंदी उसमें जीवन–अंकुर जो तोड़ निखिल जग के बंधन पाने को है निज सत्त्व, मुक्ति! जड़ निद्रा से जग, बन चेतन आः भेद न सका सृजन रहस्य कोई भी! वह जो शुद्र पोत उसमे अनंत का है निवास वह जग जीवन से ओत प्रोत! मिट्टी का गहरा अंधकार सोया है उसमें एक बीज उसका प्रकाश उसके भीतर वह अमर पुत्र! वह तुच्छ चीज? ∼ सुमित्रानंदन पंत सुमित्रानंदन पंत (मई 20, 1900 – दिसंबर 28, 1977) का जन्म सुरम्य वातावरण में रविवार 20 मई 1900 को उत्तराखंड के कुमायूं की पहाड़ियों में स्थित बागेश्वर के एक गांव कौसानी में हुआ था | पंत जी हिंदी में छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। जन्म के छह घंटे बाद ही माँ को क्रूर मृत्यु ने छीन लिया। शिशु को उसकी दादी ने पाला […]

Continue Reading