सृष्टि(Srishti) – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत)

सृष्टि(Srishti) – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत) मिट्टी का गहरा अंधकार, डूबा है उस में एक बीज वह खो न गया, मिट्टी न बना कोदों, सरसों से शुद्र चीज! उस छोटे उर में छुपे हुए हैं डाल–पात औ’ स्कन्ध–मूल गहरी हरीतिमा की संसृति बहु रूप–रंग, फल और फूल! वह है मुट्ठी में बंद किये वट के पादप का महाकार संसार एक! आशचर्य एक! वह एक बूंद, सागर अपार! बंदी उसमें जीवन–अंकुर जो तोड़ निखिल जग के बंधन पाने को है निज सत्त्व, मुक्ति! जड़ निद्रा से जग, बन चेतन आः भेद न सका सृजन रहस्य कोई भी! वह जो शुद्र पोत उसमे अनंत का है निवास वह जग जीवन से ओत प्रोत! मिट्टी का गहरा अंधकार सोया है उसमें एक बीज उसका प्रकाश उसके भीतर वह अमर पुत्र! वह तुच्छ चीज? ∼ सुमित्रानंदन पंत सुमित्रानंदन पंत (मई 20, 1900 – दिसंबर 28, 1977) का जन्म सुरम्य वातावरण में रविवार 20 मई 1900 को उत्तराखंड के कुमायूं की पहाड़ियों में स्थित बागेश्वर के एक गांव कौसानी में हुआ था | पंत जी हिंदी में छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। जन्म के छह घंटे बाद ही माँ को क्रूर मृत्यु ने छीन लिया। शिशु को उसकी दादी ने पाला […]

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