shayarisms4lovers mar18 78 - Hindi Poem on Tere Dil Mein

Hindi Poem on Tere Dil Mein

अभी नादाँ हु इश्क में, जताऊ कैसे, प्यार कितना है, तुमसे बताऊ कैसे.. बहुत चाहत है, दिल में तुम्हारे लिये, तुम ही कहो, तुम्हें अपना बनाऊ कैसे.. जो अगन मेरे दिल में है, तुम्हारे लिये, वही आग तेरे दिल में भी, जलाऊ कैसे..

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सेठ और ठग – Motivational Short Story in Hindi

एक बार की बात है , एक बहुत बड़े सेठ जी हीरो मोतियों का ब्यापार करते थे । और अक्सर ब्यापार के लिए देश विदेश जाया करता थे । कभी इस शहर कभी उस शहर …!! एक बार की बात है , सेट जी ऐसे ही ब्यापार यात्रा कर रहे थे । तो उनको एक ठग ने देख लिया और सेठ जी का पीछा करने लगा । जिस जहाज़ में सेठ जी यात्रा कर रहे थे , ठग ने भी उसी जहाज़ का टिकट ले कर सवार हो गया और सेठ जी के साथ यात्रा करने लगा । दो दिन की यात्रा थी , सेठ जी थोड़े परेशान थे की ठग ने उन्हें देख लिया है । ठग ने सोचा की आज रात को वो सेठ जी के हीरे चुरा लेगा । ठग मन ही मन योजना बना रहा था । उस रात ठग जल्दी सो गया ताकि रात को जब सेठ जी गहरी नींद सो रहे होंगे , तो जल्दी उठ कर सेठ जी के हीरे चुरा लूंगा । सेठ जी इस बात को सोच कर चिंतित थे की हीरे साथ लेके कैसे सोया जाये .. ठग का खतरा था । सेठ जी ने बहुत सोचा और हीरे सोते […]

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Best Hindi Shayari on Love , Life Download 2018

आज कल किसी को आजमाता नहीं हूँ मैं पास अपने भी किसी को बिठाता नहीं हूँ मैं ख्वाब में भी कहीं बेवफाई उसकी न दिखे इस लिए आँखों को कभी सुलाता नहीं हूँ मैं I O O O मुझे आईने की ज़रूरत नहीं है मैं तेरी निगाहों में रहना हूँ चाहता ना कर पाए कोई जुदा हमको हमदम मैं हरदम तुझे अपना कहना हूँ चाहता । O O O कहने को तो अच्छी लगती हैं ये बातें मगर जो सहता है वही जानता है दोस्त हमने सबको आज़माकर देखा है यहाँ कौन किसी को अपना मानता है दोस्त | O O O ज़िन्दगी के तमाम लन्हों को जियो तुम हर एक लम्हा खुशी के घुट पियो तुम निकले सचिन के दिल से सदा यही दुआ अपने दोस्तों के हर जख़्म को सियो तुम I O O O आपकी इन्हीं अदाओं ने किया बेकरार हमे’ तभी रहता है सदा आपका इंतज़ार हमें, अपने दिल क्रो रखना ऐसे ही पाक सनम गैर समझो काबिल कर लेना प्यार हमेँ । O O O मैं केसे ये कह दूँ वो क्या चाहता था बात अपनी ही तुम्हें मैँ कह सकता हूँ मुझे भूल कर गर. गुजारा है उसका बिन उसके फिर मैं भी तो […]

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नटखट कविताएं – Kids Naughty Poems

मोटा पेट मोटा पेट , सड़क पर लेट गाड़ी आयी फट गया पेट गाड़ी का नंबर 563 मोटा बोला हाय मेरा पेट Kids Naughty Poems – नटखट कविताएं – मोटा पेट , सड़क पर लेट नाच मोर का नाच मोर का सब को भाता ​जब वह पंखो को फैलाता , ​कूँ -कूँ कर के शोर मचाता ​घूम -घूम कर नाच दिखाता नाच मोर का सब को भाता Kids Naughty Poems – नटखट कविताएं – नाच मोर का सब को भाता सुबह सवेरे आती तितली सुबह सवेरे आती तितली फूल -फूल पर जाती तितली रंग बिरंगे पंख सजाये सबके मन को भाती तितली Kids Naughty Poems – नटखट कविताएं – सुबह सवेरे आती तितली मछली जल की रानी है मछली जल की रानी है , जीवन उसका पानी है , हाथ लगाओ , डर जायेगी बाहर निकालो , मर जायेगी Kids Naughty Poems – नटखट कविताएं – मछली जल की रानी है हम प्यारे प्यारे बच्चे हम प्यारे प्यारे बच्चे हैं हम दिल के बिल्कुल सच्चे हैं हम दिल लगा कर पढ़ते हैं लड़ना नहीं है काम हमारा हम देश से प्यार भी करते हैं हम प्यारे प्यारे बच्चे हैं Kids Naughty Poems – नटखट कविताएं – हम प्यारे प्यारे बच्चे […]

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“झाँसी की रानी” कविता | Jhansi ki Rani Poem

Jhansi Ki Rani दोस्तों, बचपन से ही हमनें झाँसी की राणी लक्ष्मीबाई की वीरता के बहुत से किस्से सुने होंगे। हम बचपन में स्कूल के प्रोग्राम में कभी झाँसी की राणी भी बने होंगे। उनकी वीरता को बताने के लिए शब्द भी कम पड़ते हैं। झाँसी की राणी सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा स्थान हैं। झाँसी की राणी लक्ष्मीबाई की वीरता का गाथा महान कवियत्री सुभद्रा कुमारी चौहान – Subhadra Kumari Chauhan ने अपनी “झाँसी की रानी” – Jhansi Ki Rani इस कविता के जरिये बताने की कोशिश की आज हम उसी “झाँसी की रानी” को आपके लिए लाये हैं। “झाँसी की रानी” कविता – Jhansi ki Rani Poem सिंहासन हिल उठे राजवंषों ने भृकुटी तनी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सब ने मन में ठनी थी। चमक उठी सन सत्तावन में, यह तलवार पुरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी। कानपुर के नाना की मुह बोली बहन छब्बिली थी, लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वो संतान अकेली थी, नाना के सॅंग पढ़ती थी वो नाना के सॅंग खेली थी बरछी, […]

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shayarisms4lovers June18 279 - सुभद्रा कुमारी चौहान की कवितायेँ | Subhadra Kumari Chauhan Poems

सुभद्रा कुमारी चौहान की कवितायेँ | Subhadra Kumari Chauhan Poems

Subhadra Kumari Chauhan – सुभद्रा कुमारी चौहान हिन्दी भाषा की एक महान और प्रसिद्ध कवयित्री तथा लेखिका थीं। उन्होंने अपने जीवन में बहुत सुंदर सुंदर रचनाएँ की उनकी प्रसिद्ध कविता “झाँसी की रानी” आपने हमारे पिछले पोस्ट में पढ़ी। यह कविता झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की गाथा बताती है इसी कविता के वजह से सुभद्रा कुमारी चौहान काफ़ी प्रसिद्ध हुयी। आज हम उन्ही की कुछ और कविताओं – Subhadra Kumari Chauhan Poems को पढेंगे। आशा हैं आपको बाकि की कविता भी जरुर पसंद आयेंगी। सुभद्रा कुमारी चौहान की कवितायेँ – Subhadra Kumari Chauhan Poems Subhadra Kumari Chauhan Poems 1 “मेरा नया बचपन” बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी। गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी॥ चिंता-रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्भय स्वच्छंद। कैसे भूला जा सकता है बचपन का अतुलित आनंद? ऊँच-नीच का ज्ञान नहीं था छुआछूत किसने जानी? बनी हुई थी वहाँ झोंपड़ी और चीथड़ों में रानी॥ किये दूध के कुल्ले मैंने चूस अँगूठा सुधा पिया। किलकारी किल्लोल मचाकर सूना घर आबाद किया॥ रोना और मचल जाना भी क्या आनंद दिखाते थे। बड़े-बड़े मोती-से आँसू जयमाला पहनाते थे॥ मैं रोई, माँ काम छोड़कर आईं, मुझको उठा लिया। झाड़-पोंछ कर चूम-चूम कर गीले गालों […]

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shayarisms4lovers June18 199 - पिता पर खूबसूरत कविता

पिता पर खूबसूरत कविता

पिता एक उम्मीद है, एक आस है परिवार की हिम्मत और विश्वास है, बाहर से सख्त अंदर से नर्म है उसके दिल में दफन कई मर्म हैं। पिता संघर्ष की आंधियों में हौसलों की दीवार है परेशानियों से लड़ने को दो धारी तलवार है, बचपन में खुश करने वाला खिलौना है नींद लगे तो पेट पर सुलाने वाला बिछौना है। पिता जिम्मेवारियों से लदी गाड़ी का सारथी है सबको बराबर का हक़ दिलाता यही एक महारथी है सपनों को पूरा करने में लगने वाली जान है इसी से तो माँ और बच्चों की पहचान है। पिता ज़मीर है पिता जागीर है जिसके पास ये है वह सबसे अमीर है, कहने को सब ऊपर वाला देता है पर खुदा का ही एक रूप पिता का शरीर है। – संदीप कुमार सिंह

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Vajpayee - भारतीय जनता के लिए अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रसिद्ध कविता

भारतीय जनता के लिए अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रसिद्ध कविता

क़दम मिला कर चलना होगा बाधाएँ आती हैं आएँ घिरें प्रलय की घोर घटाएँ, पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ, निज हाथों में हँसते-हँसते, आग लगाकर जलना होगा। क़दम मिलाकर चलना होगा। हास्य-रूदन में, तूफ़ानों में, अगर असंख्यक बलिदानों में, उद्यानों में, वीरानों में, अपमानों में, सम्मानों में, उन्नत मस्तक, उभरा सीना, पीड़ाओं में पलना होगा। क़दम मिलाकर चलना होगा। उजियारे में, अंधकार में, कल कहार में, बीच धार में, घोर घृणा में, पूत प्यार में, क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में, जीवन के शत-शत आकर्षक, अरमानों को ढलना होगा। क़दम मिलाकर चलना होगा। सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ, प्रगति चिरंतन कैसा इति अब, सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ, असफल, सफल समान मनोरथ, सब कुछ देकर कुछ न मांगते, पावस बनकर ढ़लना होगा। क़दम मिलाकर चलना होगा। कुछ काँटों से सज्जित जीवन, प्रखर प्यार से वंचित यौवन, नीरवता से मुखरित मधुबन, परहित अर्पित अपना तन-मन, जीवन को शत-शत आहुति में, जलना होगा, गलना होगा। क़दम मिलाकर चलना होगा। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

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Vajpayee - ज़िन्दगी पर अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रसिद्ध कविता

ज़िन्दगी पर अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रसिद्ध कविता

सच्चाई यह है कि केवल ऊँचाई ही काफ़ी नहीं होती, सबसे अलग-थलग, परिवेश से पृथक, अपनों से कटा-बँटा, शून्य में अकेला खड़ा होना, पहाड़ की महानता नहीं, मजबूरी है। ऊँचाई और गहराई में आकाश-पाताल की दूरी है। जो जितना ऊँचा, उतना एकाकी होता है, हर भार को स्वयं ढोता है, चेहरे पर मुस्कानें चिपका, मन ही मन रोता है। – अटल बिहारी वाजपेयी

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सृष्टि(Srishti) – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत)

सृष्टि(Srishti) – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत) मिट्टी का गहरा अंधकार, डूबा है उस में एक बीज वह खो न गया, मिट्टी न बना कोदों, सरसों से शुद्र चीज! उस छोटे उर में छुपे हुए हैं डाल–पात औ’ स्कन्ध–मूल गहरी हरीतिमा की संसृति बहु रूप–रंग, फल और फूल! वह है मुट्ठी में बंद किये वट के पादप का महाकार संसार एक! आशचर्य एक! वह एक बूंद, सागर अपार! बंदी उसमें जीवन–अंकुर जो तोड़ निखिल जग के बंधन पाने को है निज सत्त्व, मुक्ति! जड़ निद्रा से जग, बन चेतन आः भेद न सका सृजन रहस्य कोई भी! वह जो शुद्र पोत उसमे अनंत का है निवास वह जग जीवन से ओत प्रोत! मिट्टी का गहरा अंधकार सोया है उसमें एक बीज उसका प्रकाश उसके भीतर वह अमर पुत्र! वह तुच्छ चीज? ∼ सुमित्रानंदन पंत सुमित्रानंदन पंत (मई 20, 1900 – दिसंबर 28, 1977) का जन्म सुरम्य वातावरण में रविवार 20 मई 1900 को उत्तराखंड के कुमायूं की पहाड़ियों में स्थित बागेश्वर के एक गांव कौसानी में हुआ था | पंत जी हिंदी में छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। जन्म के छह घंटे बाद ही माँ को क्रूर मृत्यु ने छीन लिया। शिशु को उसकी दादी ने पाला […]

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Love Shayari - Jab tanhai me

Hindi Poem on Deewana Tumhara Koi Aur Nahi

मौसम को इशारों से बुला क्यों नहीं लेते, रूठा है अगर वो तो मना क्यों नहीं लेते, तुम जाग रहे हो मुझको अच्छा नहीं लगता, चुपके से मेरी नींद चुरा क्यों नहीं लेते, दीवाना तुम्हारा कोई गैर नहीं, मचला भी तो सीने से लगा क्यों नहीं लेते, खत लिखकर कभी खत को जला क्यों नहीं लेते..

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shayarisms4lovers may18 80 - Aatish Haider Ali - Sun to sahi

Aatish Haider Ali – Sun to sahi

Sun to sahii jahaan main hai teraa fasaanaa kyaa, Kahti hai tujh se Khalq-e-Khudaa Gaibanaa kya. Zina saba kaa Dhundati hai apni musht-e-Khaak, Baam-e-baland yaar ka hai astana kya. Ati hai kis tarah se meri kabz-e-ruuh ko, Dekhun to maut dhund rahe hai bahana kya. Betab hai kamal hamara dil-e-aziim, Mahmaan saray-e-jism ka hoga ravana kya. सुन तो सही जहां में है तेरा फ़साना क्या, कहती है तुझ से ख़ल्क़-ए-खुदा गैबाना क्या. जीना सबा का ढूंढती है अपनी मुश्त-ए-ख़ाक, बाम-ए-बलन्द यार का है असताना क्या. आती है किस तरह से मेरी कब्ज़-ए-रूह को, देखूं तो मौत ढूंढ रहे हैं बहना क्या. बेताब है कमल हमारा दिल-ए-अज़ीम, मेहमान सराय-ए-जिस्म का होगा रवाना क्या.

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Love Shayari - Jab tanhai me

Life Inspirational Poems in Hindi

तू जिंदगी को जी, उसे समझने की कोशिश न कर सुन्दर सपनो के ताने बाने बुन, उसमे उलझने की कोशिश न कर चलते वक़्त के साथ तू भी चल, उसमे सिमटने की कोशिश न कर अपने हाथो को फैला, खुल कर साँस ले, अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर मन में चल रहे युद्ध को विराम दे, खामख्वाह खुद से लड़ने की कोशिश न कर कुछ बाते भगवान् पर छोड़ दे, सब कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर जो मिल गया उसी में खुश रह, जो सकून छीन ले वो पाने की कोशिश न कर रास्ते की सुंदरता का लुत्फ़ उठा, मंजिल पर जल्दी पहुचने की कोशिश न कर !

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Dil Par Tera Saya Hindi kavita on Zindagi

Dil Par Tera Saya Hindi kavita on Zindagi

Ye kaisa saya mere dil par hai chaya Jise dekha bi nhi or mehsus hua bhi nhi Ajeb sa naata jo tujhse jodna hai chaha Rishta tuta bhi nhi or tu mila bhi nhi Bedakhal bhi tujhe karu to karu kaise Tera kabja bhi nhi or koi vaada bhi nhi Zindagi tera bhi vishwas kaise karu Tune kuch liya bhi nhi to diya bhi nhi Guzar rahi hai zindagi meri kuch is trah Manzil mili bhi nhi to rasta bacha bhi nhi.. ये कैसा साया मेरे दिल पर है छाया जिसे देखा बी न्ही ओर महसूस हुआ भी न्ही अजेब सा नाता जो तुझसे जोड़ना है चाहा रिश्ता टूटा भी न्ही ओर तू मिला भी न्ही बेदखल भी तुझे करू तो करू कैसे तेरा कब्जा भी न्ही ओर कोई वादा भी न्ही ज़िंदगी तेरा भी विश्वास कैसे करू तूने कुछ लिया भी न्ही तो दिया भी न्ही गुज़र रही है ज़िंदगी मेरी कुछ इस त्राह मंज़िल मिली भी न्ही तो रास्ता बचा भी न्ही..

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2 Lines Shayari - मुहब्बत में झुकना...

Short Hindi Kavita about Badalti Duniya, Badalte Log

Short Hindi Kavita मौसम से हरियाली गायब जीवन से खुशहाली गायब ईयरफ़ोन हुआ है गहना अब कानों से बाली गायब ईद खुशी की आये कैसे होली गुम दीवाली गायब उतरा है आँखों का पानी औ चेहरे की लाली गायब अफ़वाहों के बम जिन्दा हैं बातें भोली -भाली गायब मीठापन भी ज़हर हुआ है वो मिश्री सी गाली गायब

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