shayarisms4lovers June18 248 - ऐ दिल है मुश्किल शायरी – आज जाने की जिद न करो

ऐ दिल है मुश्किल शायरी – आज जाने की जिद न करो

ऐ दिल है मुश्किल जब प्यार में प्यार न हो जब दर्द में यार न हो जब आँसूओ में मुस्कान न हो जब लफ़्ज़ों में जुबान न हो जब साँसे बस यूं ही चले जब हर दिन में रात ढले जब इंतज़ार सिर्फ वक़्त का हो जब याद उस कमबख्त की हो क्यों वो हो राही जो हो किसी और की मंजिल जब धड़कनों ने साथ छोड़ दिया ऐ दिल है मुश्किल , ऐ दिल है मुश्किल AE Dil Hai Muskil jab pyar mein pyar na ho jab dard mein yaar na ho jab anssooao mein muskan na ho jab lafzzo main jubaan na ho jab sanse bas yoon hi chale jab har din main raat dhale jab intezaar sirf waqt ka ho jab yaad us kambaqat ki ho kyon wo ho raahi jo ho kisi aur ki manjil jab dhadkno ne sath chod diya AE dil hai muskil , AE dil hai muskil जनून हद से बढ़ चला है बात बस से निकल चली है दिल की हालत संभल चली है अब जनून हद से बढ़ चला है अब तबियत निहाल हो चली है Janoon Haad se Bhad Chala Hai Baat bas se nikal chali hai Dil ki halat […]

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shayarisms4lovers mar18 129 - छोड़ दिए हम ने ऐतबार किस्मत की लकीरों पे – Aitbar Shayari

छोड़ दिए हम ने ऐतबार किस्मत की लकीरों पे – Aitbar Shayari

कोई तो बरसात ऐसी हो कोई तो बरसात ऐसी हो जो तेरे संग बरसे … तनहा तो मेरी आँखें हर रोज़ बरसती हैं … Koi To Barsat Aisi Ho Koi To Barsat Aisi Ho Jo Tere Sang Barsy… Tanha To Meri Aankhen Har Roz Barasti Hain… ऐतबार छोड़ दिए हम ने ऐतबार किस्मत की लकीरों पे “वासी” जो दिलों में बस जाएँ वो लकीरों में नहीं मिला करते … Aitbar Chod Dia Hum Ne Aitbar Qismat Ki Lakeeron Pe “Wasi” Jo Dilon Me Bus Jaen Wo Lakeeron Me Nahi Mila Karte… हमराज़ यूँ फ़िज़ा महकी के बदला मेरे हमराज़ का रंग यूँ सजा चाँद के झलका तेरे अंदाज़ का रंग Humraaz yun fiza mehaki kay badala mere humraaz ka rang Yun saaja chand kay jhalaka tere andaaz ka rang बरसात में काग़ज़ की तरह रहने दो अब के तुम भी मुझे पढ़ न सकोगे बरसात में काग़ज़ की तरह भीग गया हूँ मैं … Barsat Me Kaghaz Ki Tarha Rehne Do Ab K Tum Bhi Mujhe Parh Na Sako Ge Barsat Me Kaghaz Ki Tarha Bheeg Gaya Hun main… तस्वीर तस्वीर तेरी मेरे मन में इस क़दर बसी है की हर वक़्त इन आँखों में तू ही नज़र आता है […]

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हम तेरे हिजर में अंदर से बिखर जाते हैं – WASI SHAH SHAYARI

हिजर हम तेरे हिजर में अंदर से बिखर जाते हैं ज़िंदा लगते हैं मगर असल में मर जाते हैं जब कभी बोलता है हँस के किसी और से तू कितने खंज़र मेरे सीने में उतर जाते हैं Hijar Hum Tere Hijar Mein Andar Se Bikhar Jaate Hain Zindah Lagte Hain Magar Asal Mein Mar Jaate Hain Jab Kabhi Bolta Hai Hans Ke Kisi Aur Se TU Kitne Khanjar Mere Seene Mein Utar Jaate Hain.. वो वादे कसमें तोड़ कर बहुत दिन हो गए शायद सहारा कर लिया उस ने हमारे बाद भी आखिर गुज़ारा कर लिया उस ने हमारा जिकर तो उस के लबों पर आ नहीं सकता हमें एहसास है हम से किनारा कर लिया उस ने वो बस्ती ग़ैर की बस्ती वो कूचा ग़ैर का कूचा सुना है इश्क़ भी अब तो दोबारा कर लिया उस ने सुना है ग़ैर की बाँहों को वो अपना घर समझता है लगता है मेरा यह दुःख गवारा कर लिया उस ने भुला कर प्यार की कसमें वो वादे तोड़ कर “वासी ” किसी को ज़िन्दगी से भी प्यारा कर लिया उस ने Wo vade kasmein Todh Kar Bahut Din Ho Gaye Shayad Sahara Kar Liya Us Ne Hamare Baad Bhi Akhir […]

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