shayarisms4lovers mar18 195 - Punjabi Shayari – पंजाबी शायरी

Punjabi Shayari – पंजाबी शायरी

रब दी सो में तेनु प्यार नी कीता आधी रात नु दिल दी देहलीज उते इक सूपना आन खलो जाँदा आ बेहन्दे हो सिरहाने तुसी सोना मुस्किल हो जाँदा है प्यार तेरे दा दर्द वे सजना मेरी नाड़ी नाड़ी टओ जाँदा रब दी सो में तेनु प्यार नी कीता ऐ ता अपने आप ही हो जाँदा… मौत ता बुरी चीज़ है यारो मौत ता बुरी चीज़ है यारो पर मौत तो बुरी जुदाई सब तो बुरी उडीक साजन दी जो रख दी खून सुखाई…

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shayarisms4lovers June18 89 - चंद नग्मे हुस्न वालो की नज़र

चंद नग्मे हुस्न वालो की नज़र

जख्म है गहरे और न आये मुझे उन्हें सीना उसके जख्मो के बिन जिंदगी क्या जीना अगर लफ्ज़ो में तेरी तारीफ करू तो तेरे हुस्न की बेअदबी होगी बस तू यह जान ले चाँद भी अधूरा है तेरे बिना हुस्न वालों के पीछे दीवाने चले आते है शमा के पीछे परवाने चले आते है तुम भी चली आना मेरे जनाजे के पीछे उसमे अपने तो क्या बेगाने भी चले आते है

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shayarisms4lovers June18 231 - मेरे मेहबूब की खूबसूरती में चुनिदां शायरी की पंक्तियाँ

मेरे मेहबूब की खूबसूरती में चुनिदां शायरी की पंक्तियाँ

नज़र इस हुस्न पर ठहरे तो आखिर किस तरह ठहरे कभी जो फूल बन जाये कभी रुखसार हो जाये तुम्हारा चाँद सा चेहरा फिज़ाओ में रंग बिखेरे तुम्हारा चाँद सा चेहरा मुझे बेचैन कर जाये तुम्हारा मासूम चाँद सा चेहरा मेरी खातिर सँवरता है तुम्हारा चाँद सा चेहरा ऐसी कशिश उस चेहरे में उस हसीन चेहरे की क्या बात है हर दिल अज़ीज़ , कुछ ऐसी उसमें बात है है कुछ ऐसी कशिश उस चेहरे में के एक झलक के लिए सारी दुनिया बर्बाद है तेरा होंठो की पंखुडियो तेरा होंठो की पंखुडियो को तू गुलाब न कहना वो तो मुरझा जाते है इनकी लाली को देखकर लगता है गुलाब भी अपना रंग यही से चुरा कर लाये है मेहबूब की तारीफ मेरे मेहबूब की बस इतनी सी तारीफ है चेहरा जैसे रोशन चाँद शरबती उसकी ऑंखें है ​ नाज़ुक होंठ कलियों जैसे , दाँत जैसे सफ़ेद मोती है लंबी घनी ज़ुल्फ़ें उसकी काली , उस पे अदा निराली है ​ मेरे सपनो की रानी जब चलती है गुलशन में बहार आती है बातों में जादू और मुस्कराहट बेमिसाल है ​ उसके अंग अंग की खुश्बू मेरे दिल को लुभाती है यारो यही लड़की मेरे सपनो की रानी है वो […]

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shayarisms4lovers June18 264 - तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी

तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी

मेरे मर जाने की वो सुन के खबर आई  “मोहसिन” घर से रोते हुए वो बिन ज़ुल्फ़ सँवारे निकले ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे ऐसा लगता है तेरी ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे होके गुलशन से सबा आज चली हो जैसे अध खुले होंठ सियाह ज़ुल्फ़ और गज़ली ऑंखें किसी शायर ने कोई ग़ज़ल तर्ज़ की हो जैसे Zulf khuli ho jaise Aisa lagta hai teri zulf khuli ho jaise Hoke Gulshan se saba aaj chali ho jaise Adh khule hont siyah zulf aur gazali ankheN Kisi shayar ne koi gazal tarz ki ho jaise… ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये यह ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये तो अच्छा है इस रात की तक़दीर सँवर जाये तो अच्छा है जिस तरह से थोड़ी सी ज़िन्दगी तेरे साथ कटी है बाकी भी उसी तरह गुज़र जाये तो अच्छा है वैसे तो तुम्ही ने मुझे बर्बाद किया है इल्ज़ाम किसी और के सिर जाये तो अच्छा है Zulf Agar Khul ke Bikhar Jaye Yeh zulf agar khul ke bikhar jaye to accha hai Is raat ki takdir sanwar jaye to accha hai Jis tarah se thodi si zindagi tere saath kati hai Baaki bhi usi tarah guzar jaye to accha hai Waise to […]

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