shayarisms4lovers June18 228 - खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा – एक बेवफा

खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा – एक बेवफा

हमे बेवफा का इल्जाम दे गया ज़िंदा थे जिसकी आस पर वो भी रुला गया बंधन वफ़ा के तोड़ के सारे चला गया खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा हाथों में हाथ दे के खुद ही छुड़ा गया कर दी जिसके लिए हमने तबाह ज़िन्दगी उल्टा वो हमे बेवफा का इल्जाम दे […]

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shayarisms4lovers June18 239 - हम ने एक इंसान को चाहा और गुनहगार हो गए – Hindi Shayari

हम ने एक इंसान को चाहा और गुनहगार हो गए – Hindi Shayari

मैं अश्क़ हूँ मैं अश्क़ हूँ मेरी आँख तुम हो मैं दिल हूँ मेरी धडकन तुम हो मैं जिस्म हूँ मेरी रूह तुम हो मैं जिंदा हूँ मेरी ज़िन्दगी तुम हो मैं साया हूँ मेरी हक़ीक़त तुम हो मैं आइना हूँ मेरी सूरत तुम हो मैं सोच हूँ मेरी बात तुम हो मैं मुकमल हूँ […]

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shayarisms4lovers mar18 198 - मुहब्बत भी तिजारत हो गयी है इस ज़माने में – Sahir Ludhianvi

मुहब्बत भी तिजारत हो गयी है इस ज़माने में – Sahir Ludhianvi

कोई इलज़ाम यह हुस्न तेरा यह इश्क़ मेरा रंगीन तो है बदनाम सही मुझ पर तो कई इलज़ाम लगे तुझ पर भी कोई इलज़ाम सही Koi ilzaam yeh husn teraa yeh ishq mera rangeen to hai badnaam sahi mujh par to kai ilzaam lage tujh par bhi koi ilzaam sahi.. फ़िज़ायों के इशारे नज़रें भी […]

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