shayarisms4lovers mar18 35 - हम ने भी बनाया था एक यार शीशे का

हम ने भी बनाया था एक यार शीशे का

एक यार शीशे का पत्थरों की बस्ती में कारोबार शीशे का कोई भी नहीं करता ऐतबार शीशे का कांच से बने पुतले कहाँ दूर चलते हैं चार दिन का होता है यह खुमार शीशे का बन सँवर के हरजाई आज घर से निकला है जाने कौन होता है फिर शिकार शीशे का दिल के आज़माने […]

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shayarisms4lovers mar18 52 - तेरी खुशबू का एहसास – अक्स-ऐ-खुशबू हूँ उर्दू शायरी

तेरी खुशबू का एहसास – अक्स-ऐ-खुशबू हूँ उर्दू शायरी

अक्स -ऐ -खुशबू हूँ अक्स -ऐ -खुशबू हूँ बिखरने से न रोके कोई और बिखर जाऊं तो मुझे न समेटे कोई काँप उठती हूँ मैं इस तन्हाई में मेरे चेहरे पे तेरा नाम न पढ़ ले कोई जिस तरह ख्वाब मेरे हो गए रेज़ा-रेज़ा इस तरह से न कभी टूट के बिखरे कोई मैं तो […]

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