अभी कुछ शेयर बाकी है – By Jaun Elia Shayari

इरादा रोज़ करता हूँ , मगर कुछ कर नहीं सकता मैं पेशेवर फरेबी हूँ , मोहब्बत कर नहीं सकता यहाँ हर एक चेहरे पर अलग तहरीर लिखी है मेरी आँखों में ऑंसू हैं , अभी कुछ पढ़ नहीं सकता मैं उस घर का मुक़ीमी हूँ , जिसे औक़ात कहतें है मैं अपनी हद में रहता हूँ , सो आगे बढ़ नहीं सकता अभी कुछ शेयर बाकी है , मगर लिखने नहीं हरगिज़ किसी की लाज रखनी है , सो ज़ाहिर कर नहीं सकता ************* Irada Roz Karta Hoon,Magar Kuch Kar Nahi Sakta Main Paisewar Fraibi Hoon , Mohabbat Kar Nahi Sakta Yahan Har Ek Chehre Par Alag Tehreer Likhi Hai Meri Aankhon Mein Ansu Hain, Abhi Kuch Padh Nahi Sakta Main Us Ghar Ka Muqeemi Hoon, Jisy Oqat Kehtein Hai Main Apni Had Mein Rehta Hoon, So Agay Badh Nahi Sakta Abhi Kuch Sher Baki Hai, Magar Likhnay Nahi Hargiz Kisi Ki Laaj Rakhni Hai, So Zahir Kar Nahi Sakta नया एक रिश्ता पैदा क्यों करें हम बिछड़ना है तो झगड़ा क्यों करें हम ख़ामोशी से अदा हो रास-ऐ-दूरी कोई हंगामा बरपा क्यों करें हम यह काफी है की दुश्मन नहीं है हम वफादारी का दावा फिर क्यों करें हम […]

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