shayarisms4lovers June18 116 - हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

प्यार की गहराइयाँ हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़” यहाँ नहीं डूबता तो कहीं और डूबे होते Pyar ki Gehraiya hume to pyar ki gehraiya maaloom karni thi “FARAZ” yahan nhi dubte to kahin aur dube hote मेरी ख़ामोशी वो अब हर एक बात का मतलब पूछता है मुझसे “फ़राज़” कभी जो मेरी ख़ामोशी की तफ्सील लिखा करता था Meri Khamoshi woh ab har ek baat ka matlab poochta hai mujhse “FARAZ” kbhi jo meri khamoshi ki tafseel likha karta tha… लफ़्ज़ों की तरतीब लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब” हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है Lafzon ki Tarteeb Lafzon ki tarteeb mujhe bandhni nahi aati “GHALIB” Hum tum ko yaad karte hain sidhi si baat hai… इंतज़ार तेरे जाने के बाद बस इतना सा गिला रहा हमको “मोहसिन “ तू पलट कर देख जाता तो सारी ज़िन्दगी इंतज़ार में गुज़ार देते . Intezar Tere jane ke bad bus itna sa gila raha humko “mohsin” tu palat kar dekh jata to sari zindagi intezar mein guzar dete… ज़ख़्म खिल उठे लाज़िम था गुज़ारना ज़िन्दगी से बिन ज़हर पिये गुज़ारा कब था कुछ पल उसे देख सकते अश्कों को मगर गवारा कब […]

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shayarisms4lovers June18 264 - तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी

तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी

मेरे मर जाने की वो सुन के खबर आई  “मोहसिन” घर से रोते हुए वो बिन ज़ुल्फ़ सँवारे निकले ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे ऐसा लगता है तेरी ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे होके गुलशन से सबा आज चली हो जैसे अध खुले होंठ सियाह ज़ुल्फ़ और गज़ली ऑंखें किसी शायर ने कोई ग़ज़ल तर्ज़ की हो जैसे Zulf khuli ho jaise Aisa lagta hai teri zulf khuli ho jaise Hoke Gulshan se saba aaj chali ho jaise Adh khule hont siyah zulf aur gazali ankheN Kisi shayar ne koi gazal tarz ki ho jaise… ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये यह ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये तो अच्छा है इस रात की तक़दीर सँवर जाये तो अच्छा है जिस तरह से थोड़ी सी ज़िन्दगी तेरे साथ कटी है बाकी भी उसी तरह गुज़र जाये तो अच्छा है वैसे तो तुम्ही ने मुझे बर्बाद किया है इल्ज़ाम किसी और के सिर जाये तो अच्छा है Zulf Agar Khul ke Bikhar Jaye Yeh zulf agar khul ke bikhar jaye to accha hai Is raat ki takdir sanwar jaye to accha hai Jis tarah se thodi si zindagi tere saath kati hai Baaki bhi usi tarah guzar jaye to accha hai Waise to […]

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shayarisms4lovers mar18 18 - दिल की तलाशियाँ

दिल की तलाशियाँ

ज़हर बड़ा अजीब सा ज़हर था उसकी यादों में सारी उम्र गुज़र गयी मुझे मरते मरते Zehar Bada Ajeeb sa Zehar tha uski Yaadon Mein Saari Umar Guzar Gayi Mujhe Marte Marte!!! दिल की तलाशियाँ अपने सिवा बताओ और कुछ मिला है तुम्हे  फ़राज़ ‘ हज़ार बार ली है तुमने इस दिल की तलाशियाँ Dil ki Talaashiyaan Apne siwa Batao aur Kuch mila hai tumhe Faraz’ Hazaar baar Li hai tumne is dil ki Talaashiyaan…! तेरे बगैर में बस इतना जानता हूँ के तेरे बगैर ज़िंदगी “हयात ” नहीं और मौत “निजात ” नहीं Tere Bagair Mein Bas Itna Jaanta hoon Ke Tere Bagair Zindgi Hayaat Nahi Aur Mout Nijaat Nahi उस के ख्याल मैं उस के ख्याल से जाऊं तो कहाँ जाऊं .. वो मेरी सोच के हर रस्ते पर नज़र आता है .. Us ke khayal Main us ke khayal se jaoon to kahan jaoon.. Wo meri soch ke har raste pay nazar aata hai.. कहीं न कफ़न के रहे ऐ सनम तेरे हिजर में न सफर के रहे न वतन के , गिरे टुकड़े दिल के कहीं न कफ़न के रहे न दफ़न के .. Kahin na kafan ke rahe Aye sanam tere hijar mein na safar […]

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यादों का इक झोंका – तेरी यादें शायरी

सजा बन जाती है गुज़रे हुए वक़्त की यादें न जाने क्यों छोड़ जाने के लिए मेहरबान होते हैं लोग यादों का इक झोंका यादों का इक झोंका आया हम से मिलने बरसों बाद पहले इतना रोये न थे जितना रोये बरसों बाद लम्हा लम्हा उजड़ा तो ही हम को एहसास हुआ पत्थर आये बरसों पहले शीशे टूटे बरसों बाद Yaadon Ka Ik Jhonka Yaadon Ka Ik Jhonka Aaya Hum Se Milne Barson Baad Pehle Itna Roye Na The Jitna Roye Barson Baad Lamha Lamha Ujdaa To Hi Hum Ko Ihsaas Hua Pathar Aaye Barson Pehle Sheshe Tote Barson Baad इन यादों को ले जाना यादें तेरी रख दी है सँभालकर दूर कहीं इस दिल से निकाल कर सब कुछ तो वापिस ले लिया है तुमने दूर जाकर इन यादों को भी ले जाना किसी रोज़ आ कर In Yaadon Ko Le Jana Yaaden teri rakh di hai sambhalkar Dur kahin is dil se nikalkar Sab kuch to wapis le liya hai tumne dur jaakar In yaadon ko bhi le jana kisi roz aakar.. किसी की याद में बेकरार ऐ दिल किसी की याद में होता है बेकरार क्यों जिस ने भुला दिया तुझे , उस का है इंतज़ार क्यों […]

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shayarisms4lovers mar18 98 - जब उठा मेरा जनाज़ा – मेरा जनाज़ा उर्दू शायरी

जब उठा मेरा जनाज़ा – मेरा जनाज़ा उर्दू शायरी

मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला जब मेरा जनाज़ा इस ज़माने से निकला मेरे जनाज़े को देखने सारा ज़माना निकला मगर मेरे जनाज़े में वो न निकला जिसके लिए मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला Mere Janaze Mein Wo Na Nikla Jab Mera Janaza is Zamane Se Nikla Mere Janaze Ko Dekhne Sara Zamana Nikla Magar Mere Janaze Mein Wo Na Nikla Jiske Liye Mera Janaza Zamane Se Nikla मेरे जनाज़े के पीछे एक वादा था तेरा हर वादे के पीछे तू मिलेगा मुझे हर गली ,हर दरवाज़े के पीछे पर तू तो बड़ा ही बेवफा निकला मेरी जान एक तू ही नहीं था मेरे जनाज़े के पीछे Mere Janaze ke Peeche Ek wada tha tera har wade ke peeche Tu milega muje har gali,har darwaze ke peeche Par tu bada bewafa nikla meri jaan Ek tu hi nahi tha mere janaze ke peeche तेरे जनाज़े के पीछे एक वादा था मेरा हर वादे के पीछे मैं मिलूंगा तुझसे हर गली , हर दरवाज़े के पीछे पर तुमने ही मुद के नहीं देखा मेरी जान मेरा भी जनाज़ा था तेरे जनाज़े के पीछे Tere Janaze ke Peeche Ek wada tha mera har wade ke peeche Main milunga tujse har gali, har darwaze […]

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फेसबुक चुनिंदा शायरी – अरज़ किया है

   मुझे ज़रा खुदा से हमकलाम होने दो …    तुम्हारा ज़िकर भी इसी गुफ्तगू में है मेरी शामें खुद को खुद से हमकलाम कर के देखना कितना मुश्किल है यह सफर तय कर के देखना किस क़दर उदास गुज़रती हैं मेरी शामें याद किसी को किसी शाम कर के देखना कफ़न अगर तुम्हारा होगा आँखें अगर तुम्हारी होगी तो आंसू हमारे होंगे दिल अगर तुम्हारा होगा तो धड़कन हमारी होगी ख्वाहिश है ..कफ़न अगर तुम्हारा होगा तो मयत हमारी होगी कफ़न न डालो मेरी मयत पर कफ़न न डालो मेरे चेहरे पे मुझे आदत है मुस्कुराने की कफ़न न डालो मेरी मयत पर मुझे इंतज़ार है उसके आने का उनके सदके जान है मेरी शिकायत ये नहीं के वो नाराज़ है हमसे शिकायत इस बात की है वो आज भी अनजान है हमसे दिल तोडा , जज़्बात बिखेरे , फिर भी वो दिलजान है मेरे मांग ले वो कभी जान भी मेरी , उनके सदके जान है मेरी अश्क आँख से ढल गए कभी आह लब पे मचल गई कभी अश्क आँख से ढल गए वो तुम्हारे ग़म के चिराग़ हैं कभी बुझ गए कभी जल गए जो फना हुए ग़म-ऐ -इश्क़ में , उन्हें ज़िंदगी का न ग़म […]

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