shayarisms4lovers mar18 163 - हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते – Noshi Gilani ki Shayari

हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते – Noshi Gilani ki Shayari

मेरी सांसें यह नामुमकिन नहीं रहेगा , मुक़ाम मुमकिन नहीं रहेगा ग़रूर लहजे में आ गया तो कलाम मुमकिन नहीं रहेगा तुम अपनी साँसों से मेरी सांसें अलग तो करने लगे हो लेकिन जो काम आसान समझ रहे हो वो काम मुमकिन नहीं रहेगा Meri Saansain Yeh Nammumkin Nahi rahega, Muqaam Mumkin Nahi rahega Gharoor Lehjay Mein Aa Gaya To Kalaam Mumkin Nahi rahega Tum Apni Saanson Se Meri Saansain Alag To Karnay Lagay ho Laikin Jo Kaam Aasaan Samajh Rahay ho Wo Kaam Mumkin Nahi rahega… एहले-ऐ-इश्क़ कभी यह चुप में कभी मेरी बात बात में था तुम्हारा अक्स मेरी सारी क़ायनात में था हम एहले-ऐ-इश्क़ बहुत बदगुमाँ होते हैं इसी तरह का कोई वस्फ तेरी ज़ात में था .. Ehle-ae-ishq Kahbi yeh chup main kabhi meri baat baat main tha, Tumhara akss meri saari kayenaat mein tha, Hum ehle-ae-ishq bahut bdgumaan hote hain, isi tarah ka koi vasf teri zaat mein tha… अगर हौसले किये होते हमारे बस में अगर अपने फैसले होते तो हम कभी के घरों को पलट गए होते करीब रह के सुलगने से कितना बेहतर था किसी मुक़ाम पर हम तुम बिछड़ गए होते हमारे नाम पे कोई चिराग तो जलता किसी जुबान पर […]

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shayarisms4lovers mar18 13 - तू जो नहीं तो बिन तेरे शामें उदास हैं

तू जो नहीं तो बिन तेरे शामें उदास हैं

छलक पड़ेंगे आँसू  जो ज़रा किसी ने छेड़ा छलक पड़ेंगे आँसू कोई मुझ से यूँ न पूछे तेरा दिल उदास क्यों है Chalak Padegein Aansoo Jo zara kisi ne cheda chalak padegein aansu Koi mujh se yun na pooche tera dil Udas kyon hai गुलाबों में खुशबू तारों में है चमक न गुलाबों में खुशबू है तुम क्या गए हो शहर की हर शह् उदास है खुशीओं की मुझ को दोस्तों कोई तलब नहीं मुझ को है ग़म से प्यार मुझे ग़म ही रास है Gulabon mein khosboo Taron mein hai chamak na Gulabon mein khosboo hai Tum kya gaye ho Shehar ki har sheh udas hai Khushyon ki mujh ko doston koi talab nahi Mujh ko hai gham se pyar mujhe Gham hi raas hai आँखें उदास हैं तू जो नहीं तो बिन तेरे शामें उदास हैं ढूंढें तुझे कहाँ कहाँ आँखें उदास हैं इक चाँद ही नहीं है जो पूछे तेरा पता देखा नहीं है जो तुझे मेरी राहें उदास हैं Aankhein udas hain Tu jo nahi to bin tere shamein udas hain Dhoondein tujhe kahan kahan aankhein udas hain Ik chand hi nahi hai jo pooche tera pata Dekha nahi hai jo tujhe rahein udas hain जो […]

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shayarisms4lovers mar18 87 - जो सुनाई अंजुमन में शब-ऐ-ग़म की आपबीती

जो सुनाई अंजुमन में शब-ऐ-ग़म की आपबीती

पहली नज़र उस से कहो इक बार और देख कर आज़ाद कर दे मुझे के मैं आज भी उस की पहली नज़र की क़ैद में हूँ Pehli Nazar Us se kaho ik baar aur dekh kar AAZAAD kar de mujhe Ke main aaj bhi us ki pehli nazar ki qaid main hoon.. तेरी बेवफ़ाइयों पर मुझे अजमाने वाले मुझे अजमा के रोये मेरी दस्ताने हसरत सुना सुना के रोये तेरी बेवफ़ाइयों पर , तेरी कज आदइयों पर कभी सर छुपा के रोये , कभी मुँह छुपा के रोये जो सुनाई अंजुमन में शब -ऐ -ग़म की आपबीती कभी रो के मुस्कराए , कभी मुस्करा के रोये!! मैं हूँ बे -वतन मुसाफिर , मेरा नाम बेकसी है मेरा कोई भी नहीं है जो गले लगा के रोये मेरे पास से गुज़र कर मेरा हाल तक न पुछा मैं यह कैसे मान जाऊं के वो दूर जा के रोये Teri Bewafaiyon Par Mujhe Azmane Wale Mujhe Azmaa ke Roye Meri Dastane Hasrat Suna Suna ke Roye Teri Bewafaiyon Par, Teri Kaj Adaiyon Par Kabhi Sar chupa Ke Roye, Kabi Munh Chupa Ke Roye Jo Sunai Anjuman Men Shab-ae-Gham Ki Apbiti Kabhi Ro ke Muskaraye, Kabhi Muskara Ke Roye Main Hoon Be-Watan Musafir, […]

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shayarisms4lovers mar18 38 - वो मेरा है मगर इस एहसास से इंकार करता है ​- ग़ज़ल

वो मेरा है मगर इस एहसास से इंकार करता है ​- ग़ज़ल

वो मुझ से मांगता है उम्र भर की वफ़ा का वादा वो मेरा है मगर इस एहसास से इंकार करता है भरी महफ़िल मैं मुझ को रुसवा वो हर बार करता है यूँ तो करता है ज़माने भर की बातें मुझ से मगर जब बात मोहबत की हो तो तकरार करता है सितम् जब अपने सुनाता है भरी महफ़िल मैं वो बड़े अंदाज़ से अपने गुनाहों का इज़हार करता है वो मुझ से मांगता है उम्र भर की वफ़ा का वादा किस मासूमियत से वो मुझ से फरयाद करता है मालूम है सब को खफा है आज कल मुझ से वो मगर मैं जानता हूँ के वो मुझ से प्यार करता है Hindi and urdu Shayari,Gazal,kalam- वो मेरा है मगर इस एहसास से इंकार करता है Wo Mujh Se Mangta Hai Umar Bhar Ki Wafa Ka Waada Wo Mera Hai Magar Is Ihsaas Se Inkar Karta Hai Bhari Mehfil Main Mujh ko Wo Ruswa Har Baar Karta Hai Yun Tu Karta Hai Zamane Bhar Ki Batain Mujhe Se Magar Jab Baat Mohabat Ki Ho To Takrar karta Hai Sitam Jab Apnay Sunata Hai Bhari Mehfil Main wo bade Andaaz Se Apne Gunahon Ka Izhaar Karta Hai Wo Mujh Se Mangta Hai Umar […]

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