सेठ और ठग – Motivational Short Story in Hindi

एक बार की बात है , एक बहुत बड़े सेठ जी हीरो मोतियों का ब्यापार करते थे । और अक्सर ब्यापार के लिए देश विदेश जाया करता थे । कभी इस शहर कभी उस शहर …!! एक बार की बात है , सेट जी ऐसे ही ब्यापार यात्रा कर रहे थे । तो उनको एक ठग ने देख लिया और सेठ जी का पीछा करने लगा । जिस जहाज़ में सेठ जी यात्रा कर रहे थे , ठग ने भी उसी जहाज़ का टिकट ले कर सवार हो गया और सेठ जी के साथ यात्रा करने लगा । दो दिन की यात्रा थी , सेठ जी थोड़े परेशान थे की ठग ने उन्हें देख लिया है । ठग ने सोचा की आज रात को वो सेठ जी के हीरे चुरा लेगा । ठग मन ही मन योजना बना रहा था । उस रात ठग जल्दी सो गया ताकि रात को जब सेठ जी गहरी नींद सो रहे होंगे , तो जल्दी उठ कर सेठ जी के हीरे चुरा लूंगा । सेठ जी इस बात को सोच कर चिंतित थे की हीरे साथ लेके कैसे सोया जाये .. ठग का खतरा था । सेठ जी ने बहुत सोचा और हीरे सोते […]

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नटखट कविताएं – Kids Naughty Poems

मोटा पेट मोटा पेट , सड़क पर लेट गाड़ी आयी फट गया पेट गाड़ी का नंबर 563 मोटा बोला हाय मेरा पेट Kids Naughty Poems – नटखट कविताएं – मोटा पेट , सड़क पर लेट नाच मोर का नाच मोर का सब को भाता ​जब वह पंखो को फैलाता , ​कूँ -कूँ कर के शोर मचाता ​घूम -घूम कर नाच दिखाता नाच मोर का सब को भाता Kids Naughty Poems – नटखट कविताएं – नाच मोर का सब को भाता सुबह सवेरे आती तितली सुबह सवेरे आती तितली फूल -फूल पर जाती तितली रंग बिरंगे पंख सजाये सबके मन को भाती तितली Kids Naughty Poems – नटखट कविताएं – सुबह सवेरे आती तितली मछली जल की रानी है मछली जल की रानी है , जीवन उसका पानी है , हाथ लगाओ , डर जायेगी बाहर निकालो , मर जायेगी Kids Naughty Poems – नटखट कविताएं – मछली जल की रानी है हम प्यारे प्यारे बच्चे हम प्यारे प्यारे बच्चे हैं हम दिल के बिल्कुल सच्चे हैं हम दिल लगा कर पढ़ते हैं लड़ना नहीं है काम हमारा हम देश से प्यार भी करते हैं हम प्यारे प्यारे बच्चे हैं Kids Naughty Poems – नटखट कविताएं – हम प्यारे प्यारे बच्चे […]

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shayarisms4lovers mar18 36 - जब बचपन याद आता है – Childhood

जब बचपन याद आता है – Childhood

बचपन का जमाना बचपन का जमाना होता था खुशियों का खज़ाना होता था चाहत चाँद को पाने की दिल तितली का दीवाना होता था रोने की वजह न होती थी ना हसने का बहाना होता था खबर न थी कुछ सुबह की न शामो का ठिकाना होता था मट्टी के घर बनते थे बस उनको गिरना होता था गम ही जुबान न होती थी ना ज़ख्मों का पैमाना होता था बारिस में कागज़ की कस्ती हर मौसम सुहाना होता था वो खेल वो साथी होते थे हर रिश्ता निभाना होता था मन के सच्चे वो दिन अच्छे थे जब हम बच्चे थे झूठ बोला करते थे मगर मन के सच्चे थे बचपन की नींद वो बचपन की नींद अब ख़्वाब हो गयी क्या उम्र थी, के रात हुई और सो गए….

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