Child Story in Hindi | ये बच्चे कब समझदार होंगे

Child Story in Hindi


Child Story in Hindi | ये बच्चे कब समझदार होंगे

रघुवर प्रसाद जी अब सेवानिवृत्त हो चुके थे| वो अध्यापक थे| उनकी पहचान एक कर्मठ अध्यापक के रूप में थी| अपने कितने ही छात्रों से भावनात्मक रिश्ता था, रघुवर जी का| सेवा निवृत्ति के उपरांत भी कितने ही ऐसे छात्र थे जो सफल थे और यदि कहीं मिल जाते थे तो रघुवर जी के पैरो में पड़ जाते थे| इस सम्मान के आगे अपनी अच्छी खासी पेंशन भी रघुवर जी को छोटी लगती थी| वो अक्सर कहा करते थे “हमने शिक्षा को संस्कार के रूप में विद्यार्थियों में रोपा है, अब तो शिक्षा भी सर्विस सेक्टर का हिस्सा है… शिक्षक के लिए छात्र एक ग्राहक है, तो छात्र और उनके माता पिता के लिए शिक्षक एक सार्विस प्रोवाईडर|” फिर वो एक लम्बी साँस खिंच कर बोलते “सही समय में जिंदगी गुजार गए हम….”

रघुवर जी के एक पुत्री और दो पुत्र थे| बड़ा पुत्र इन्द्र इंजिनियर था! वह अपनी पत्नी रेखा, एक पुत्र रोहन और एक पुत्री रोहिणी के साथ चंडीगढ़ में रहता था| जबकि छोटा पुत्र राजेंद्र, रघुवर जी के साथ रहता था| वो एक अच्छी कम्पनी में नौकरी करता था| ठीक ही कमा लेता था| उसके भी एक पुत्र शिखर और एक पुत्री शिखा थी| रघुवर जी की पत्नी प्रेमलता और पुत्री आभा और छोटे पुत्र का परिवार उनके साथ उनके पैत्रक निवास “मेरठ” में ही में रहते थे| अभी पुत्री का विवाह नहीं हुआ था| बस ये ही एक चिंता रघुवर जी को थी की नौकरी रहते पुत्री का विवाह नहीं हो पाया| प्रेमलता जी भी इस विषय को लेकर थोडा परेशान रहती थी| इस कारण से ही रघुवर जी ने अपने फंड को किसी को नहीं दिया था| वो सोचते थे की बस आभा का विवाह बिना पुत्रो पर जोर डाले ठीक से करके जो बचेगा वो पुत्रो को दे देंगे|

रघुवर जी जितने मृदुभाषी थे, प्रेमलता जी उतनी ही कड़क स्वाभाव की थी| वो ज्यादा पढ़ी-लिखीं नहीं थी फिर भी किसी भी विषय पर अड़ जाना उनका स्वभाव था| रघुवर जी ने जीवन भर उनकी बात काटने की हिम्मत नहीं जुटाई थी| ये ही स्वभाव प्रेमलता का बहुओ के साथ भी था| बड़ी बहु आधुनिक परिवार से थी| और प्रेमलता जी का बड़ा पुत्र भी अच्छा कमाता था इसलिए प्रेमलता जी की अपनी बड़ी बहु से ज्यादा बनी  नहीं| पोती-पोतो की याद तो रघुवर जी और प्रेमलता जी को भी आती थी, परन्तु प्रेमलता जी भी झुकने …

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