shayarisms4lovers June18 292 - यह उदास शाम और तेरी जुदाई – यह शाम तेरे नाम शायरी

यह उदास शाम और तेरी जुदाई – यह शाम तेरे नाम शायरी

शाम-ऐ-तन्हाई शाम से है मुझ को सुबह-ऐ-ग़म की फ़िक्र सुबह से ग़म शाम-ऐ-तन्हाई का है Shaam-ae-Tanhai Sham se hai mujh ko subha-ae-gham ki fikar Subha se gham shaam-ae-tanhai ka hai शाम के बाद तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दर्द तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बाद लौट आये न किसी रोज़ वो आवारा मिज़ाज खोल रखते हैं इसी आस पर दर शाम के बाद Shaam ke Baad Tu hai suraj tujhe maloom kahan raat ka dard Tu kisi roz mere ghar mein utar sham ke baad Laut aaye na kisi roz wo aavara mizaaj Khol rakhte hain isi aas par dar shaam ke baad शाम की दहलीज़ भीगी हुई एक शाम की दहलीज़ पे बैठा हूँ मैं दिल के सुलगने का सबब सोच रहा हूँ दुनिया की तो आदत है बदल लेती है आंखें में उस के बदलने का सबब सोच रहा हूँ Shaam Ki Dehleez Bheegi hui ek Shaam Ki Dehleez Pe Baitha hoon Main dil Ke Sulagne Ka Sabab Soch Raha Hoon Duniya Ki to Aadat Hai Badal leeti Hai Ankhain Mein us Ke Badlaney Ka Sabab Soch Raha Hoon ज़रा सी शाम होने दो अभी सूरज नहीं डूबा ज़रा सी शाम […]

Continue Reading
shayarisms4lovers June18 264 - तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी

तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी

मेरे मर जाने की वो सुन के खबर आई  “मोहसिन” घर से रोते हुए वो बिन ज़ुल्फ़ सँवारे निकले ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे ऐसा लगता है तेरी ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे होके गुलशन से सबा आज चली हो जैसे अध खुले होंठ सियाह ज़ुल्फ़ और गज़ली ऑंखें किसी शायर ने कोई ग़ज़ल तर्ज़ की हो जैसे Zulf khuli ho jaise Aisa lagta hai teri zulf khuli ho jaise Hoke Gulshan se saba aaj chali ho jaise Adh khule hont siyah zulf aur gazali ankheN Kisi shayar ne koi gazal tarz ki ho jaise… ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये यह ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये तो अच्छा है इस रात की तक़दीर सँवर जाये तो अच्छा है जिस तरह से थोड़ी सी ज़िन्दगी तेरे साथ कटी है बाकी भी उसी तरह गुज़र जाये तो अच्छा है वैसे तो तुम्ही ने मुझे बर्बाद किया है इल्ज़ाम किसी और के सिर जाये तो अच्छा है Zulf Agar Khul ke Bikhar Jaye Yeh zulf agar khul ke bikhar jaye to accha hai Is raat ki takdir sanwar jaye to accha hai Jis tarah se thodi si zindagi tere saath kati hai Baaki bhi usi tarah guzar jaye to accha hai Waise to […]

Continue Reading
shayarisms4lovers mar18 184 - ऐ बारिश ज़रा थम के बरस – Romantic बारिश शायरी

ऐ बारिश ज़रा थम के बरस – Romantic बारिश शायरी

ऐ बारिश ऐ बारिश ज़रा थम के बरस जब मेरा यार आ जाये तो जम के बरस पहले न बरस की वो आ न सकें फिर इतना बरस की वो जा न सकें AE Barish Ae barish zara tham ke baras Jab mera yaar aa jaye to jam ke baras Pehle na baras ki woh aa na sake Phir itna baras ki wo ja na sake.. बारिश की बूँद मत पूछ कितनी “मोहब्बत ” है मुझे उस से , बारिश की बूँद भी अगर उसे छु ले तो दिल में आग लग जाती है Baarish Ki Boond Mat Pooch Kitni “Mohabbat” Hai Mujhe Us Se, Baarish Ki Boond Bhi Agar Use Chu Le To Dil Mein Aag Lag Jati Hai.. बरसात का मौसम जब जब आता है यह बरसात का मौसम तेरी याद होती है साथ हरदम इस मौसम में नहीं करेंगे याद तुझे यह सोचा है हमने पर फिर सोचा की बारिश को कैसे रोक पाएंगे हम Barsaat Ka Mausam Jab Jab Aata Hai Ye Barsaat Ka Mausam Teri Yaad Hoti Hai Saath Hardam Is Mausam Mein Nahi Karege Yaad Tujhe Ye Socha Hai Humne Par Fir Socha Ki Barish Ko Kaise Rok Payege Hum.. ज़रा ठहरो के बारिश […]

Continue Reading