shayarisms4lovers mar18 56 - तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है

तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है

तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है ज़रा से लफ्ज़ में कितना पैगाम लिखा है यह तेरी शान के काबिल नहीं लकिन मजबूरी है तेरी मस्ती भरी आँखों को मैंने जाम लिखा है मैं शायर हूँ ,मगर आगे न बढ़ पाया रिवायत से लबों को पंखुड़ी ,ज़ुल्फ़ों को मैंने शाम लिखा है मुझे मौत आएगी जब भी ,तेरे पहलू में आएगी तेरे ग़म ने बहुत अच्छा मेरा अंजाम लिखा है मेरी क़िस्मत मैं है एक दिन ग्रिफ्तार -ऐ -वफ़ा होना मेरे चेहरे पे तेरे प्यार का इलज़ाम लिखा है क़ातील वो खूबसूरत बहुत है ,जिसका मैं पूजारी हूँ मेरे मज़हब के खाने में मगर इस्लाम लिखा हैं   Tere Mehndi Lage Hathon Pe Mera Naam Likha Hai Zra Se Lafz mein Kitna Paigam Likha Hai Yeh Teri Shan Ke kabil Nahin Lakin Majbori hai Teri Masti Bhari Ankhon Ko Meine zam Likha Hai Mein Shayar Hoon, Magar Aage Na Badh Paya Riwayat Se Labon Ko Pankhudi,Zulfon Ko Meine Sham Likha Hai Muje Mout Ayegi Jab Bhi,Tere Pehlu Mein Ayegi Tere Gham Ne Bohat Achaa Mera Anjam Likha Hai Meri Kismat Mein Hai Ek Din Griftar-AE-Wafa Hona Mere Chehre Pe […]

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