shayarisms4lovers mar18 84 - मेहरबान होके बुलालो मुझे चाहो जिस भी वक़्त – मिर्ज़ा ग़ालिब

मेहरबान होके बुलालो मुझे चाहो जिस भी वक़्त – मिर्ज़ा ग़ालिब

गुजरा वक़्त – मिर्ज़ा ग़ालिब मेहरबान होके बुलालो मुझे चाहो जिस भी वक़्त मैं गुजरा वक़्त नहीं हूँ के फिर लौट के आ भी न सकूँ Mehrbaan hoke bulalo mujhe chahee jis bhi waqt Main gujra waqt Nahi hoon Ke Phir laut ke aa bhi Na Sako खाक हो जाएंगे यह जोश-ऐ -मोहब्त ग़ालिब जले कोई […]

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