shayarisms4lovers mar18 98 - जब उठा मेरा जनाज़ा – मेरा जनाज़ा उर्दू शायरी

जब उठा मेरा जनाज़ा – मेरा जनाज़ा उर्दू शायरी

मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला जब मेरा जनाज़ा इस ज़माने से निकला मेरे जनाज़े को देखने सारा ज़माना निकला मगर मेरे जनाज़े में वो न निकला जिसके लिए मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला Mere Janaze Mein Wo Na Nikla Jab Mera Janaza is Zamane Se Nikla Mere Janaze Ko Dekhne Sara Zamana Nikla Magar Mere Janaze Mein Wo Na Nikla Jiske Liye Mera Janaza Zamane Se Nikla मेरे जनाज़े के पीछे एक वादा था तेरा हर वादे के पीछे तू मिलेगा मुझे हर गली ,हर दरवाज़े के पीछे पर तू तो बड़ा ही बेवफा निकला मेरी जान एक तू ही नहीं था मेरे जनाज़े के पीछे Mere Janaze ke Peeche Ek wada tha tera har wade ke peeche Tu milega muje har gali,har darwaze ke peeche Par tu bada bewafa nikla meri jaan Ek tu hi nahi tha mere janaze ke peeche तेरे जनाज़े के पीछे एक वादा था मेरा हर वादे के पीछे मैं मिलूंगा तुझसे हर गली , हर दरवाज़े के पीछे पर तुमने ही मुद के नहीं देखा मेरी जान मेरा भी जनाज़ा था तेरे जनाज़े के पीछे Tere Janaze ke Peeche Ek wada tha mera har wade ke peeche Main milunga tujse har gali, har darwaze […]

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