shayarisms4lovers June18 231 - मेरे मेहबूब की खूबसूरती में चुनिदां शायरी की पंक्तियाँ

मेरे मेहबूब की खूबसूरती में चुनिदां शायरी की पंक्तियाँ

नज़र इस हुस्न पर ठहरे तो आखिर किस तरह ठहरे कभी जो फूल बन जाये कभी रुखसार हो जाये तुम्हारा चाँद सा चेहरा फिज़ाओ में रंग बिखेरे तुम्हारा चाँद सा चेहरा मुझे बेचैन कर जाये तुम्हारा मासूम चाँद सा चेहरा मेरी खातिर सँवरता है तुम्हारा चाँद सा चेहरा ऐसी कशिश उस चेहरे में उस हसीन चेहरे की क्या बात है हर दिल अज़ीज़ , कुछ ऐसी उसमें बात है है कुछ ऐसी कशिश उस चेहरे में के एक झलक के लिए सारी दुनिया बर्बाद है तेरा होंठो की पंखुडियो तेरा होंठो की पंखुडियो को तू गुलाब न कहना वो तो मुरझा जाते है इनकी लाली को देखकर लगता है गुलाब भी अपना रंग यही से चुरा कर लाये है मेहबूब की तारीफ मेरे मेहबूब की बस इतनी सी तारीफ है चेहरा जैसे रोशन चाँद शरबती उसकी ऑंखें है ​ नाज़ुक होंठ कलियों जैसे , दाँत जैसे सफ़ेद मोती है लंबी घनी ज़ुल्फ़ें उसकी काली , उस पे अदा निराली है ​ मेरे सपनो की रानी जब चलती है गुलशन में बहार आती है बातों में जादू और मुस्कराहट बेमिसाल है ​ उसके अंग अंग की खुश्बू मेरे दिल को लुभाती है यारो यही लड़की मेरे सपनो की रानी है वो […]

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