shayarisms4lovers June18 240 - इश्क़ करने वाले आँखों की बात समझ लेते है – नशीली आँखों की शायरी

इश्क़ करने वाले आँखों की बात समझ लेते है – नशीली आँखों की शायरी

आँखों की बात इश्क़ करने वाले आँखों की बात समझ लेते है सपनो में यार आए तो उसे मुलाकात समझ लेते है रूठता तो आसमान भी है अपनी ज़मीन के लिए यह तो लोग ही उसे बरसात समझ लेते है Aankhon ki Baat Ishq karnewale Aankhon ki baat samajh lete hai Sapno mein yaar aaye Toh usse mulakat samajh lete hai Roota to aasman bhi hai Apni zameen ke liye Yeh to log hi usse barsaat samajh lete hai… नशीली ऑंखें नशीली आँखों से वो जब हमें देखते हैं हम घबराकर ऑंखें झुका लेते हैं कौन मिलाए उनकी आँखों से ऑंखें सुना है वो आँखों से अपना बना लेते है . Nashili Ankhen Nashili aankho se wo jab hamein dekhte hain, hum ghabraakar ankhen jhuka leite hain, kaun milaye unn ankhon se ankhen, suna hai wo ankho se apna bana leite hai… आँखों से बातें कोई आँखों से बातें करता हैं कोई आँखों से मुलाकाते करता हैं बड़ा मुश्किल होता हैं जवाब देना जब कोई चुप रह के सवाल करता हैं . Aankho se Batein Koi aankho se batein karta hain Koi aankhon se mulakate karta hain Bada mushkil hota hain jawab dena Jab koi chup raheke sawaal karta hain… […]

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shayarisms4lovers mar18 163 - हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते – Noshi Gilani ki Shayari

हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते – Noshi Gilani ki Shayari

मेरी सांसें यह नामुमकिन नहीं रहेगा , मुक़ाम मुमकिन नहीं रहेगा ग़रूर लहजे में आ गया तो कलाम मुमकिन नहीं रहेगा तुम अपनी साँसों से मेरी सांसें अलग तो करने लगे हो लेकिन जो काम आसान समझ रहे हो वो काम मुमकिन नहीं रहेगा Meri Saansain Yeh Nammumkin Nahi rahega, Muqaam Mumkin Nahi rahega Gharoor Lehjay Mein Aa Gaya To Kalaam Mumkin Nahi rahega Tum Apni Saanson Se Meri Saansain Alag To Karnay Lagay ho Laikin Jo Kaam Aasaan Samajh Rahay ho Wo Kaam Mumkin Nahi rahega… एहले-ऐ-इश्क़ कभी यह चुप में कभी मेरी बात बात में था तुम्हारा अक्स मेरी सारी क़ायनात में था हम एहले-ऐ-इश्क़ बहुत बदगुमाँ होते हैं इसी तरह का कोई वस्फ तेरी ज़ात में था .. Ehle-ae-ishq Kahbi yeh chup main kabhi meri baat baat main tha, Tumhara akss meri saari kayenaat mein tha, Hum ehle-ae-ishq bahut bdgumaan hote hain, isi tarah ka koi vasf teri zaat mein tha… अगर हौसले किये होते हमारे बस में अगर अपने फैसले होते तो हम कभी के घरों को पलट गए होते करीब रह के सुलगने से कितना बेहतर था किसी मुक़ाम पर हम तुम बिछड़ गए होते हमारे नाम पे कोई चिराग तो जलता किसी जुबान पर […]

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shayarisms4lovers mar18 199 - यारों की इनायत – ख्वाजा मीर दर्द की शायरी

यारों की इनायत – ख्वाजा मीर दर्द की शायरी

यारों की इनायत न कोई इलज़ाम , न कोई तंज़ , न कोई रुस्वाई मीर , दिन बहुत हो गए यारों ने कोई इनायत नहीं की Yaron ki Inayat Na koi ilzaam, Na koi tanz, Na koi ruswai Mir, din bohat hogaye yaron ne koi inayat nahi ki.. ज़ोर आशिक़ मिज़ाज है कोई जब मैंने आकर इधर उधर देखा तू ही आया नज़र जिधर देखा जान से हो गया बदन खाली जिस तरफ तूने आँख भर के देखा उन लबों ने की न मसीहाई हम ने सौ -सौ तरह से मर देखा ज़ोर आशिक़ मिज़ाज है कोई “दर्द ” को किसे -ऐ -मुख़्तसर देखा ख्वाजा मीर दर्द Zor Ashiq Mizaj Hai koi Jag main aakar idhar udhar dekha tu hi aya nazar jidhar dekha Jaan se ho gaye badan khali jis taraf tune ankh bhar ke dekha Un labon ne ki na masihai ham ne sau -sau tarah se mar dekha Zor ashiq mizaj hai koi Dard” ko qisa-e-mukhtasar dekha..

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shayarisms4lovers mar18 202 - ग़ज़ल – वो मेरा हमसफ़र हुआ भी तो लम्हा भर

ग़ज़ल – वो मेरा हमसफ़र हुआ भी तो लम्हा भर

हम तो अकेले रहे हमेशा रहेगा यह आलम कहाँ यह महफ़िल कहाँ और यह हमदम कहाँ सदा चोट पर चोट खाता रहा मुक़द्दर में इस दिल के मरहम कहाँ कहाँ अब्र कोई कड़ी धुप में झुलसते बयाबां में शबनम कहाँ ना मस्त आँखें होंगी ना ज़ुल्फे रसा हमेशा रहेगा यह मौसम कहाँ अकेले थे हम तो अकेले रहे कोई अपना गमख्वार हो , हमदम कहाँ जहांगीर-ओ-नौशेरवां चल बसे रहा डर में अद्ल पैहम कहाँ ना अय्यूबी कोई ना खालिद कोई गया रखता अपना परचम कहाँ Hum To Akele Rahe Hamesha Rahega Yeh Aalam Kahan Yeh Mahfil Kahan aur Yeh Humdam Kahan Sada Chot Par Chot Khata Raha Muqaddar Mein Is Dil Ke Marham Kahan Kahan Abr Koi Kadi Dhoop Mein Jhulaste Bayabaan Mein Shabnam Kahan Naa Mast Aankhein Hongi Naa Zulfe Rasaa Hamesha Rahega Yeh Mausam Kahan Akele The Hum To Akele Rahe Koi Apna Ghamkhwaar , Humdam Kahan Jahangeer-O-Nausherwaan Chal Base Rahaa Daar Mein Adl Paiham Kahan Naa Ayyubi Koi Naa Khalid Koi Gaya Rekhta Apna Parcham Kahan.. दिखाई दिए यूँ दिखाई दिए यूँ की बेखुद किया हमें आप से भी जुदा कर चले जबीं सजदा करते ही करते गए हक़-ऐ-बंदगी हम अदा कर चले गई उम्र दर बंद-ऐ-फ़िक्र-ऐ-ग़ज़ल […]

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