shayarisms4lovers mar18 28 - हालात-ऐ-इश्क़ – दो लाइन उर्दू पाकिस्तानी शायरी

हालात-ऐ-इश्क़ – दो लाइन उर्दू पाकिस्तानी शायरी

मासूम सा चेहरा किस क़दर मासूम सा चेहरा था उस का ग़ालिब धीरे से जान कह कर बेजान कर गया Masoom Sa Chehra Kis Kadar Masoom Sa Chehra Tha Uss Ka Ghalib Dheere se Jaan Keh kar Bejaan Kar Gaya ऐसी बेरुखी ऐसी बेरुखी भी देखी  है, हम ने आज कल के लोगों में आप से तुम तक , तुम से जान तक , जान से अनजान तक हो जाते हैं Aisi Berukhi Aisi Berukhi Bhi Dekhi Hai Hum Ne Aaj  Kal  Ke Logo Mein Aap se Tum Tak, Tum se  Jaan  Tak, Jaan se Anjaan Tak  Ho Jatey Hain मुहब्बत  का खुमार मुहब्बत  का खुमार उतरा तो तब साबित हुआ वो जो मंज़िल का रास्ता था , बे-मकसद सफर निकला Mohabbat ka Khumaar Mohabbat ka khumaar Utraa to Tab Saabit  Hua, Wo Jo Manzil ka Rasta Tha, Be-maksaad Safar Niklaa. वो खुद आता नहीं कभी नींदें कभी आँखों में पानी भेज देता है , जालिम वो खुद आता नहीं , अपनी निशानी भेज देता है … Wo Khud Aata Nahi Kabhi Neendain Kabhi Ankhon Mein Paani Bhej Deta Hai , Zalim Wo Khud Aata Nahi Apni  Nishaani Bhej Deta Hai हाथ की लकीरें जिस तरह से बदली हैं हाथ […]

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shayarisms4lovers mar18 71 - यह इश्क़ वाले हैं जो हर चीज़ लूटा देते हैं – ग़ालिब

यह इश्क़ वाले हैं जो हर चीज़ लूटा देते हैं – ग़ालिब

यह इश्क़ वाले अक़्ल वालों के मुक़द्दर में यह जूनून कहाँ ग़ालिब यह इश्क़ वाले हैं जो हर चीज़ लूटा देते हैं …. Yeh Ishq Wale Aqal Walon ke Muqaddar mein Yeh Junoon Kahan Ghalib, Yeh Ishq Wale hain Jo Har cheez Luta Deta Hain….. ज़ाहिर है तेरा हाल ग़ालिब न कर हुज़ूर में तू बार बार अरज़ ज़ाहिर है तेरा हाल सब उन पर कहे बग़ैर Zaahir Hai Tera Haal Ghalib na kar huzoor mein tu bar bar arz, Zaahir hai tera haal sab un par kahe baghair !! वो आये घर में  हमारे यह जो हम हिज्र में दीवार-ओ -दर को देखते हैं कभी सबा को कभी नामाबर को देखते हैं वो आये घर में  हमारे , खुदा की कुदरत है कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं नज़र लगे न कहीं उसके दस्त-ओ -बाज़ू को ये लोग क्यों मेरे ज़ख्म-ऐ -जिगर को देखते हैं तेरे जवाहीर-ऐ- तरफ ऐ-कुलाह को क्या देखें हम ओज-ऐ-ताला- ऐ-लाल-ओ-गुहार को देखते हैं Wo Aaye Ghar Mein Hamaare Ye jo ham hijr mein diivaar-o-dar ko dekhate hain kabhii sabaa ko kabhii naamaabar ko dekhate hain Wo aaye ghar mein hamaare, Khudaa kii kudarat hai kabhii ham un ko kabhii apane […]

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shayarisms4lovers mar18 16 - खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता

खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता

खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता , यह चीज़ वो है जो देखी कहीं कहीं मैंने .. Khudaa to milta hai, Insaan hi nahi milta, Yeh cheez woh hai jo dekhi kahin kahin meine… जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है , उन का हर ऐब भी ज़माने को हुनर लगता है … Jin ke angan mein Ameeri ka shajar lagta hai, Un ka har aaib bhi zamane ko hunar lagta hai… तेरी बन्दा परवारी से मेरे दिन गुज़र रहे हैं न गिला है दोस्तों का , न शिकायत -ऐ -ज़माना Teri Banda Parwari Se Mere Din Guzaar Rahe Hain Na Gila Hai Doston Ka, Na Shikayat-e-Zamana… और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना Aur bhi kar daita hai Dard mein Izafa Tere hote huwe Gairoon ka Dilasa daina

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shayarisms4lovers June18 263 - आज फिर दिल है कुछ उदास उदास – जावेद अख्तर

आज फिर दिल है कुछ उदास उदास – जावेद अख्तर

दर्द अपनाता है पराये कौन कौन सुनता है और सुनाए कौन कौन दोहराए वो पुरानी बात गम अभी सोया है जगाए कौन वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैं कौन दुःख झेले आज़माए कौन अब सुकून है तो भूलने में है लेकिन उस शख्स को भुलाए कौन आज फिर दिल है कुछ उदास उदास देखिये आज याद आए कौन Aaj Phir Dil Hai Kuch Udaas Udaas- Javed Akhtar dard apanaataa hai paraae kaun kaun sunataa hai aur sunaae kaun kaun doharaae vo puraanii baat Gam abhii soyaa hai jagaae kaun vo jo apane hain kyaa vo apane hain kaun dukh jhele aazamaae kaun ab sukuuN hai to bhuulane mein hai lekin us shaKhs ko bhulaae kaun aaj phir dil hai kuchh udaas udaas dekhiye aaj yaad aae kaun

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दुःख दे कर सवाल करते हो – उर्दू शायरी

दुःख दे कर सवाल करते हो , तुम भी ग़ालिब ! कमाल करते हो .. Dukh Day Kar Sawaal Kartay ho, Tum Bhe GHAALiB ! Kamaal Kartay ho.. यह हम ही जानते हैं जुदाई के मोड़ पर , इस दिल का जो भी हाल तुझे देख कर हुआ .. Yeah hum hi jantey hain judaai ke mod par, Is dil ka jo bhi haal tujhe dekh kar hua.. क्या ज़रूरी है के हम हार के जीतें, ताबिश इश्क़ का खेल बराबर भी तो हो सकता है… Kia Zaroori Hai Ke Hum Haar Ke Jeetien Tabish Ishq Ka Khel Baraber Bhi To Ho Sakta Hai… तुम आज हँसते हो हँस लो मुझ पर ये आजमाइश न बार बार होगी मैं जनता हूँ मुझे खबर है के कल फ़िज़ा खुशगवार होगी . Tum Aj Hanste Ho Hans Lo Mujh Par Ye Ajamaish Naa Bar Bar Hogi Main Janta Hun Mujhe Khabar Hai Ki Kal Faza Khushgawar Hogi. लगा न दिल को क्या सूना नहीं तूने , जो कुछ के मीर का इस आशिक़ी ने हाल किया .. Laga na dil ko kya sunaa nahin tu ne, Jo kuch ke Meer ka is aashqi ne haal kiya.. इश्क़ माशूक़ इश्क़ आशिक़ है , […]

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shayarisms4lovers June18 271 - वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी – फैयाज़ शायरी

वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी – फैयाज़ शायरी

तुझसे मिलकर तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था, तंगी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात ने रोने न दिया. हिंदी और उर्दू शायरी – वक़्त शायरी – तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था Tujhase Milakar Tujhase milakar hamene ronaa thaa bahut ronaa thaa tangii-ae-waqt-ae-mulaaqaat ne rone na diyaa Hindi and urdu shayari – Waqt Shayari – tujhase milakar hamene ronaa thaa bahut वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी है मगर, चंद घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं, इन को खो कर अभी जान-ए-जाँ, उम्र भर न तरसते रहो. – फैयाज़ हिंदी और उर्दू शायरी – वक़्त शायरी – वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी है मगर Waqt ki Qaid Mein Zindagi waqt ki qaid mein zindagi hai magar chand ghadiyaan yahi hain jo aazaad hai In ko khoo kar abhi jaan-e-jaaN umar bhar na taraste raho – –Faiyaz Hindi and urdu shayari – Waqt Shayari – waqt ki qaid mein zindagi hai magar

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shayarisms4lovers mar18 163 - हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते – Noshi Gilani ki Shayari

हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते – Noshi Gilani ki Shayari

मेरी सांसें यह नामुमकिन नहीं रहेगा , मुक़ाम मुमकिन नहीं रहेगा ग़रूर लहजे में आ गया तो कलाम मुमकिन नहीं रहेगा तुम अपनी साँसों से मेरी सांसें अलग तो करने लगे हो लेकिन जो काम आसान समझ रहे हो वो काम मुमकिन नहीं रहेगा Meri Saansain Yeh Nammumkin Nahi rahega, Muqaam Mumkin Nahi rahega Gharoor Lehjay Mein Aa Gaya To Kalaam Mumkin Nahi rahega Tum Apni Saanson Se Meri Saansain Alag To Karnay Lagay ho Laikin Jo Kaam Aasaan Samajh Rahay ho Wo Kaam Mumkin Nahi rahega… एहले-ऐ-इश्क़ कभी यह चुप में कभी मेरी बात बात में था तुम्हारा अक्स मेरी सारी क़ायनात में था हम एहले-ऐ-इश्क़ बहुत बदगुमाँ होते हैं इसी तरह का कोई वस्फ तेरी ज़ात में था .. Ehle-ae-ishq Kahbi yeh chup main kabhi meri baat baat main tha, Tumhara akss meri saari kayenaat mein tha, Hum ehle-ae-ishq bahut bdgumaan hote hain, isi tarah ka koi vasf teri zaat mein tha… अगर हौसले किये होते हमारे बस में अगर अपने फैसले होते तो हम कभी के घरों को पलट गए होते करीब रह के सुलगने से कितना बेहतर था किसी मुक़ाम पर हम तुम बिछड़ गए होते हमारे नाम पे कोई चिराग तो जलता किसी जुबान पर […]

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shayarisms4lovers June18 116 - हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

प्यार की गहराइयाँ हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़” यहाँ नहीं डूबता तो कहीं और डूबे होते Pyar ki Gehraiya hume to pyar ki gehraiya maaloom karni thi “FARAZ” yahan nhi dubte to kahin aur dube hote मेरी ख़ामोशी वो अब हर एक बात का मतलब पूछता है मुझसे “फ़राज़” कभी जो मेरी ख़ामोशी की तफ्सील लिखा करता था Meri Khamoshi woh ab har ek baat ka matlab poochta hai mujhse “FARAZ” kbhi jo meri khamoshi ki tafseel likha karta tha… लफ़्ज़ों की तरतीब लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब” हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है Lafzon ki Tarteeb Lafzon ki tarteeb mujhe bandhni nahi aati “GHALIB” Hum tum ko yaad karte hain sidhi si baat hai… इंतज़ार तेरे जाने के बाद बस इतना सा गिला रहा हमको “मोहसिन “ तू पलट कर देख जाता तो सारी ज़िन्दगी इंतज़ार में गुज़ार देते . Intezar Tere jane ke bad bus itna sa gila raha humko “mohsin” tu palat kar dekh jata to sari zindagi intezar mein guzar dete… ज़ख़्म खिल उठे लाज़िम था गुज़ारना ज़िन्दगी से बिन ज़हर पिये गुज़ारा कब था कुछ पल उसे देख सकते अश्कों को मगर गवारा कब […]

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shayarisms4lovers June18 148 - हर धड़कन में एक राज़ होता है – धड़कन उर्दू शायरी

हर धड़कन में एक राज़ होता है – धड़कन उर्दू शायरी

बहुत देर कर दी तुमने मेरी धड़कन महसूस करने में वो दिल नीलाम हो गया जिस को कभी हसरत तुम्हारे दीदार की थी हर धड़कन में एक राज़ होता है हर धड़कन में एक राज़ होता है हर बात कहने का एक अंदाज़ होता है जब तक ठोकर न लगे इश्क़ में हर किसी को अपने महबूब पे नाज़ होता है Har Dhadkan Mein Ek Raaz Hota Hai Har Dhadkan mein ek raaz hota hai Har baat kehne ka ek andaaz hota hai Jab tak thokar na lage ishq mein Har kisiko apne mehboob pe naaz hota hai धड़कन ज़रा थम जा शोर न कर धड़कन ज़रा थम जा कुछ पल के लिए बड़ी मुश्किल से मेरी आँखों में उसका खवाब आया है Dhadkan Zara Tham Ja Shor Na Kar Dhadkan Zara Tham Ja Kuch Pal Ke Liye Badi Muskil Se Meri Aankhon Mein Uska Khawab Aaya hai दिल की धड़कन को धड़का गया कोई दिल की धड़कन को धड़का गया कोई मेरे ख्वाबों को जगा गया कोई हम तो अनजाने रास्तो पे यूं ही चल रहे थे अचानक ही प्यार का मतलव भी सीखा गया कोई Dil ki Dhadkan ko Dhadka Gaya Koi Dil ki dhadkan ko dhadka gaya […]

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shayarisms4lovers June18 148 - तेरा रंग-ऐ-हिना – उर्दू हिना शायरी

तेरा रंग-ऐ-हिना – उर्दू हिना शायरी

हाथों की हिना चंद मासूम से पतों का लहू है ‘फाखिर’ जिस को महबूब के हाथों की हिना कहते हैं Haathon Ki Hina Chand Maasoom Se Patton Ka Lahoo Hai ‘Faakhir’ Jis Ko Mahaboob Ke Haathon Ki Hina Kahte Hain… मोहताज-ऐ-हिना खून है दिल ख़ाक में अहवाल-ऐ-बुतान पर यानी उन के नाखून हुए मोहताज -ऐ -हिना मेरे बाद Mohtaaj-AE-Hinaa Khoon Hai Dil Khaak Mein Ahvaal-AE-Butaan Par Yaani Un Ke Naakhoon Hue Mohtaaj-AE-Hinaa Mere Baad… पा बस्ता ऐ-ज़ंजीर ऐ-हिना मैं भी पलकों पे सजा लूँगा लहू की बूँदें तुम भी पा-बस्ता-ऐ-ज़ंजीर-ऐ-हिना हो जाना Paa Basta-AE-Zanjeer AE-Hina Main Bhi Palkon Pe Sajaa Loon Ga Lahoo Ki Boonden Tum Bhi Paa-Basta-AE-Zanjeer-AE-Hina Ho Jaanaa… तन्हाई में खुशबू-ऐ-हिना वो हाथ पराये हो भी गए अब दूर का रिश्ता है “कैसर ” आती है मेरी तन्हाई में खुशबू-ऐ-हिना धीरे धीरे Tanhaai Mein Khushboo-AE-Hina Vo Haath Paraaye Ho Bhi Gaye Ab Door Ka Rishta Hai “Qaisar” Aati Hai Meri Tanhaai Mein Khushboo-AE-Hina Dheere Dheere… मेहँदी के वास्ते मेहँदी के वास्ते वो लहू मांगते हैं रोज़ दिल देना उन को जान का बे-नामा हो गया Mehndi Ke Vaaste Mehndi Ke Vaaste Vo Lahoo Maangte Hain Roz Dil Dena Un Ko Jaan Ka Be-Naamaa Ho Gayaa… तेरी हिना में […]

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shayarisms4lovers mar18 205 - शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

मेरी वेहशत इश्क़ मुझको नहीं वेहशत ही सही मेरी वेहशत तेरी शोहरत ही सही कटा कीजिए न तालुक हम से कुछ नहीं है तो अदावत ही सही Meri Wehshat Ishq mujhko nahin wehshat hi sahi Meri wehshat teri shohrat hi sahi kta kijiay na taaluq hum se kuch nahin hai to adaawat he sahi… शब-ऐ-इंतज़ार वो गया तो साथ ही ले गया सभी रंग उतार के शहर के कोई शख्स था मेरे शहर में किसी दूर पार के शहर का चलो कोई दिल तो उदास था , चलो कोई आँख तो नम थी चलो कोई दर तो खुला रहा शब-ऐ-इंतज़ार के शहर का Shab-ae-Intezaar Wo Gaya To Saath Hi Le Gaya Sabhi Rang Utaar Ke Shehar Ke Koi Shakhs Tha Mere Shehar Mein Kisi Door Paar Ke Shehar Ka Chalo Koi Dil to Udaas Tha, Chalo Koi Aankh To Num thi Chalo Koi Dar To Khula Raha Shab-ae-Intezaar Ke Shehar Ka… तुम्हारे ख्याल बहुत दिनों से मेरे ज़ेहन के दरीचे मैं ठहर गया है तुम्हारे ख्याल का मौसम यूं भी यकीन हो बहारें उजड़ भी सकती हैं तो आ के देख मेरे ज़वाल का मौसम Tumhare Khyal Bahut Dino Se Mere Zehan Ke Darichoon Main Thehar Gaya Hai Tumhare Khyal […]

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shayarisms4lovers mar18 05 - अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना – आलम इक़बाल की शायरी

अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना – आलम इक़बाल की शायरी

अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना मुहब्बत की तमना है तो फिर वो वस्फ पैदा कर जहां से इश्क़ चलता है वहां तक नाम पैदा कर अगर सचा है इश्क़ में तू ऐ बानी आदम निग़ाह -ऐ -इश्क़ पैदा कर मैं तुझ को तुझसे ज़्यादा चाहूँगा मगर शर्त ये है के अपने अंदर जुस्तजू तो पैदा कर अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना तू अपने आप में पहले अंदाज़ -ऐ -वफ़ा तो पैदा कर Agar Na Badlu Teri Khatir Har Ek Cheez To Kehna Muhabbt Ki Tamna Hai To Phir Wo Vasf Peda Kar Jahan Se Ishq Chalta Hai Wahan Tak Naaam Peda Kar Agar Sacha Hai Ishq Mein Tu Ae Bani ADAM Nighah-E-Ishq Peda Kar Main Tujh Ko Tujh Se Ziada Chahunga Magar Shart Yeh Hai Ki Apne Andar Justju To Pedaa Kar Agar Na Badlu Teri Khatir Har Ek Cheez To Kehna Tu Apne Aap Mein Pehle ANDAAZ-AE-Wafa To Paida Kar

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shayarisms4lovers June18 20 - कर के इज़हार-ऐ-मोहब्बत बेपरवाह हो जाते हैं लोग

कर के इज़हार-ऐ-मोहब्बत बेपरवाह हो जाते हैं लोग

राह -ऐ -जूनून फ़ना न कर अपनी ज़िन्दगी को ऐ इंसान राह -ऐ -जूनून में तब करेगा इबादत जब गुनाह करने की ताक़त न होगी Raah-ae-Junoon Fana na kar apni zindagi ko ay jawan raah-e-junoon main. Tab karega ibadat jab gunnah karne ki taqat na hogi क्यों बेवफा हो जाते हैं लोग हँसते हैं यूँ ही हंस कर रुला जाते हैं लोग मिलते हैं यूँ ही मिल कर जुदा हो जाते हैं लोग पल दो पल की मोहब्बत को उम्र भर का साथ न समझना मुहबत भी करते हैं और खफा भी हो जाते हैं लोग .   नसीब में प्यार न था जो मुझे मिला ही नहीं . कर के इज़हार-ऐ-मोहब्बत बेपरवाह हो जाते हैं लोग . अब किस से करें शिकवा अपनी किस्मत का . कर के वादे वफ़ा क्यों बेवफा हो जाते हैं लोग Kyon bewafaa ho jate hain log Hanste hain yun hi hans kar rula jate hain log Milte hain yun hi mil kar juda ho jate hain log Pal do pal ki Mohabbat ko umar bhar ka sath na samjhna. Muhabat bhi karte hain or khafaa bhi ho jate hain log. Naseeb mein pyar na tha jo mujhe mila hi nhi. Kar ke izhaar-ae-Mohabbat […]

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shayarisms4lovers June18 202 - Best Ever Shayari Colletion of Munir Niazi – मुनीर नियाज़ी शायरी मजमूआ

Best Ever Shayari Colletion of Munir Niazi – मुनीर नियाज़ी शायरी मजमूआ

उसके जाने का रंज मेरी सदा हवा में बहुत दूर तक गयी पर मैं बुला रहा था जिसे , वो बेखबर रहा उसकी आखिरी नज़र में अजब दर्द था “मुनीर” उसके जाने का रंज मुझे उम्र भर रहा Uske Jaane Ka Ranj Meri Sada Hawa Mein Bohat Door Tak Gayi Par Main Bula Raha Tha Jise, wo Bekhabar Raha Uski Aakhiri Nazar Mein Ajab Dard Tha “Munir” Uske Jaane Ka Ranj Mujhe Umar Bhar Raha हम जवाब क्या देते किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते सवाल सारे ग़लत थे, हम जवाब क्या देते हवा की तरह मुसाफिर थे, दिलबरों के दिल उन्हें बस एक ही घर का अजाब क्या देते Hum Jawab Kya Dete Kisi Ko Apnay Amal Ka Hisaab Kya Dete Sawaal Saare Ghalat The, Hum Jawab Kya Dete Hawa Ki Tarha Musafir The, Dilbaron Ke Dil Unhain Bus Ak Hi Ghar Ka Azaab Kya Dete ज़ुल्म मेरे नाम शहर में वो मोअतबर मेरी गवाही से हुआ फिर मुझे इस शहर में नमोअतबर उसी ने किया शहर को बर्बाद करके रख दिया उस ने “मुनीर” शहर पर यह ज़ुल्म मेरे नाम पर उसने किया Zulam Mere Naam Shehar mein wo moatbir meri gawahi se huwa Phir mujhe […]

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shayarisms4lovers mar18 82 - किसी के इश्क़ के हम-ओ-ख्याल थे हम भी कभी – अल्लामा इक़बाल

किसी के इश्क़ के हम-ओ-ख्याल थे हम भी कभी – अल्लामा इक़बाल

किसी के इश्क़ के किसी के इश्क़ के हम-ओ-ख्याल थे हम भी कभी गुजरे ज़माने में बहुत बा-कमाल थे हम भी कभी Kisi ke Ishq ke Kisi ke Ishq ka hum-o-Khiyaal the hum bhi kabhi Gaye Dinoon mein bahut Ba-kamaal the hum bhi kabhi… ढूंढ़ता फिरता हूँ ढूंढ़ता फिरता हूँ ऐ इक़बाल अपने आप को आप ही गोया मुसाफिर आप ही मंज़िल हूँ मैं Dhoondta Firtaa Hoon Dhoondta firtaa hoon aey IQBAL apne aap ko aap hi goya musaafir aap hi manzil hoon main… उसकी फितरत उसकी फितरत परिंदों सी थी ,मेरा मिज़ाज दरख़्तों जैसा उसे उड़ जाना था और मुझे कायम ही रहना था Uski Fitraat uski Fitraat Parindoon se thi Mera Mizaaj darkhtoon jaisa use ud jana tha aur Mujhe kayam hi Rahna Tha… किसी की याद किसी की याद ने जख्मों से भर दिया है सीना अब हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी Kisi Ki Yaad Kisi Ki Yaad ne Zakhmoon se bhar Diya Seena Har ek Saans Par Shak hai k Aakhri Hogi… करे जो इश्क़ मुझ सा कोई शख्स नादान भी न हो करे जो इश्क़ कहता है नुकसान भी न हो Kare Jo IShq Mujh sa koi Shakhs Nadaan bhi na ho Kare Jo […]

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