बशीर बद्र – उर्दू शायरी & ग़ज़ल

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हमा वक़्त रंज-ओ-मलाल क्या , जो गुज़र गया सो गुज़र गया
उसे याद कर के न दिल दुखा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                  न गिला किया न खफा हुए , यूं ही रास्ते में जुदा हुए
                  न तू बेवफा न में बेवफा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

वो ग़ज़ल की एक किताब था , वो गुलाबों में एक गुलाब था
ज़रा देर का कोई ख्वाब था , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                   मुझे पतझड़ों की कहानिया , न सुना सुना कर उदास कर
                   तू ख़िज़ाँ का फूल है मुस्कुरा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

वो उदास धूप समेट कर , कहीं वादियों में उतर चूका
उसे अब न दे मेरे दिल सदा ,जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                  यह सफर भी कितना तवील है , यहाँ वक़्त कितना क़लील है
                 कहाँ लौट कर कोई आएगा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

वो वफ़ाएँ थी या जफायें थी , यह न सोच किस की खतायें थी
वो तेरे है उस को गले लगा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                  तुझे ऐतबार -ओ -यकीन नहीं , न ही दुनिया इतनी बुरी नहीं
                  न मलाल कर मेरे साथ आ , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।


Hama Waqt Ranj-O-Malaal Kya , Jo Guzaar Gaya So Guzar Gaya
Usay Yaad Kar Key Na Dil Dukha , Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                    Na Gila Kiya Na Khafa Hue, Yoon Hi Raastey Mein Juda Hue
                    Na Tu Bewafa Na Mein Bewafa, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

Wo Gazal Ki Ek Kitab Tha , Wo Gulabon Mein Ek Gulab Tha
Zara Der Ka Koi Khwaab Tha, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                    Mujhey Patjharon Ki Kahaniya , Na Suna Suna Kar Udaas Kar
                    Tu Kizaan Ka Phool Hai Muskura, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

Wo Udaas Dhoop Samait Kar , Kahin Wadiyon Mein Utaar Chuka
Usay Ab Na Dey Mere Dil Sada,Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                    Yeh Safaar Bhi Kitna Taweel Hai, Yahan Waqt Kitna Qaleel Hai
                   Kahan Laut Kat Koi Ayee Ga , Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

Wo Wafaein Thi Ya Jafaien Thi, Yeh Na Soch Kis Ki Khataien Thi
Wo Tere Hai Us Ko Gale Laga, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                  Tujhe Aitbar-O-Yakeen Nahin, Na Hi Duniya Itni Buri Nahi
                  Na Malaal Kar Mere Saath Aa , Jo Guzaar Gya So …

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shayarisms4lovers mar18 28 - हालात-ऐ-इश्क़ – दो लाइन उर्दू पाकिस्तानी शायरी

हालात-ऐ-इश्क़ – दो लाइन उर्दू पाकिस्तानी शायरी

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मासूम सा चेहरा

किस क़दर मासूम सा चेहरा था उस का ग़ालिब
धीरे से जान कह कर बेजान कर गया

Masoom Sa Chehra

Kis Kadar Masoom Sa Chehra Tha Uss Ka Ghalib
Dheere se Jaan Keh kar Bejaan Kar Gaya


ऐसी बेरुखी

ऐसी बेरुखी भी देखी  है, हम ने आज कल के लोगों में
आप से तुम तक , तुम से जान तक , जान से अनजान तक हो जाते हैं

Aisi Berukhi

Aisi Berukhi Bhi Dekhi Hai Hum Ne Aaj  Kal  Ke Logo Mein
Aap se Tum Tak, Tum se  Jaan  Tak, Jaan se Anjaan Tak  Ho Jatey Hain


मुहब्बत  का खुमार

मुहब्बत  का खुमार उतरा तो तब साबित हुआ
वो जो मंज़िल का रास्ता था , बे-मकसद सफर निकला

Mohabbat ka Khumaar

Mohabbat ka khumaar Utraa to Tab Saabit  Hua,
Wo Jo Manzil ka Rasta Tha, Be-maksaad Safar Niklaa.


वो खुद आता नहीं

कभी नींदें कभी आँखों में पानी भेज देता है , जालिम
वो खुद आता नहीं , अपनी निशानी भेज देता है …

Wo Khud Aata Nahi

Kabhi Neendain Kabhi Ankhon Mein Paani Bhej Deta Hai , Zalim
Wo Khud Aata Nahi Apni  Nishaani Bhej Deta Hai


हाथ की लकीरें

जिस तरह से बदली हैं हाथ की लकीरें नासिर
मौसम को भी इस तरह  मैंने  बदलते नहीं देखा

Hath Ki Lakirein

Jiss Tarah Se Badli Hain Hath ki Lakirein Nasir,
Mausam Ko Bhi Iss Tarah Maine Badalte Nahin Dekhaa


तुम ही न मिल सके

एक तुम ही न मिल सके वरना ,
मिलने वाले तो बिछड़ बिछड़ के मिले

Tum Hi  Na  Mil  Sakey

Ek Tum Hi  Na  Mil  Sakey  Warna
Milne Bale To Bichad Bichad  Ke Mile.…

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shayarisms4lovers mar18 71 - यह इश्क़ वाले हैं जो हर चीज़ लूटा देते हैं – ग़ालिब

यह इश्क़ वाले हैं जो हर चीज़ लूटा देते हैं – ग़ालिब

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यह इश्क़ वाले

अक़्ल वालों के मुक़द्दर में यह जूनून कहाँ ग़ालिब
यह इश्क़ वाले हैं जो हर चीज़ लूटा देते हैं ….

Yeh Ishq Wale

Aqal Walon ke Muqaddar mein Yeh Junoon Kahan Ghalib,
Yeh Ishq Wale hain Jo Har cheez Luta Deta Hain…..


ज़ाहिर है तेरा हाल

ग़ालिब न कर हुज़ूर में तू बार बार अरज़
ज़ाहिर है तेरा हाल सब उन पर कहे बग़ैर

Zaahir Hai Tera Haal

Ghalib na kar huzoor mein tu bar bar arz,
Zaahir hai tera haal sab un par kahe baghair !!


वो आये घर में  हमारे

यह जो हम हिज्र में दीवार-ओ -दर को देखते हैं
कभी सबा को कभी नामाबर को देखते हैं

वो आये घर में  हमारे , खुदा की कुदरत है
कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं

नज़र लगे न कहीं उसके दस्त-ओ -बाज़ू को
ये लोग क्यों मेरे ज़ख्म-ऐ -जिगर को देखते हैं

तेरे जवाहीर-ऐ- तरफ ऐ-कुलाह को क्या देखें
हम ओज-ऐ-ताला- ऐ-लाल-ओ-गुहार को देखते हैं

Wo Aaye Ghar Mein Hamaare

Ye jo ham hijr mein diivaar-o-dar ko dekhate hain
kabhii sabaa ko kabhii naamaabar ko dekhate hain

Wo aaye ghar mein hamaare, Khudaa kii kudarat hai
kabhii ham un ko kabhii apane ghar ko dekhate hain

nazar lage na kahii.n usake dast-o-baazuu ko
ye log kyon mere zaKhm-e-jigar ko dekhate hain

tere javaahiir-e- tarf-e-kulah ko kyaa dekhein
ham auj-e-taalaa- e-laal-o- guhar ko dekhate hain…..…

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shayarisms4lovers mar18 16 - खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता

खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता

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खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता ,
यह चीज़ वो है जो देखी कहीं कहीं मैंने ..

Khudaa to milta hai, Insaan hi nahi milta,
Yeh cheez woh hai jo dekhi kahin kahin meine…


जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है ,
उन का हर ऐब भी ज़माने को हुनर लगता है …

Jin ke angan mein Ameeri ka shajar lagta hai,
Un ka har aaib bhi zamane ko hunar lagta hai…


तेरी बन्दा परवारी से मेरे दिन गुज़र रहे हैं
न गिला है दोस्तों का , न शिकायत -ऐ -ज़माना

Teri Banda Parwari Se Mere Din Guzaar Rahe Hain
Na Gila Hai Doston Ka, Na Shikayat-e-Zamana…


और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा
तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना

Aur bhi kar daita hai Dard mein Izafa
Tere hote huwe Gairoon ka Dilasa daina…

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shayarisms4lovers June18 263 - आज फिर दिल है कुछ उदास उदास – जावेद अख्तर

आज फिर दिल है कुछ उदास उदास – जावेद अख्तर

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दर्द अपनाता है पराये कौन
कौन सुनता है और सुनाए कौन

कौन दोहराए वो पुरानी बात
गम अभी सोया है जगाए कौन

वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैं
कौन दुःख झेले आज़माए कौन

अब सुकून है तो भूलने में है
लेकिन उस शख्स को भुलाए कौन

आज फिर दिल है कुछ उदास उदास
देखिये आज याद आए कौन

Aaj Phir Dil Hai Kuch Udaas Udaas- Javed Akhtar

dard apanaataa hai paraae kaun
kaun sunataa hai aur sunaae kaun

kaun doharaae vo puraanii baat
Gam abhii soyaa hai jagaae kaun

vo jo apane hain kyaa vo apane hain
kaun dukh jhele aazamaae kaun

ab sukuuN hai to bhuulane mein hai
lekin us shaKhs ko bhulaae kaun

aaj phir dil hai kuchh udaas udaas
dekhiye aaj yaad aae kaun…

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दुःख दे कर सवाल करते हो – उर्दू शायरी

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दुःख दे कर सवाल करते हो ,
तुम भी ग़ालिब ! कमाल करते हो ..

Dukh Day Kar Sawaal Kartay ho,
Tum Bhe GHAALiB ! Kamaal Kartay ho..

यह हम ही जानते हैं जुदाई के मोड़ पर ,
इस दिल का जो भी हाल तुझे देख कर हुआ ..

Yeah hum hi jantey hain judaai ke mod par,
Is dil ka jo bhi haal tujhe dekh kar hua..

क्या ज़रूरी है के हम हार के जीतें, ताबिश
इश्क़ का खेल बराबर भी तो हो सकता है…

Kia Zaroori Hai Ke Hum Haar Ke Jeetien Tabish
Ishq Ka Khel Baraber Bhi To Ho Sakta Hai…

तुम आज हँसते हो हँस लो मुझ पर ये आजमाइश न बार बार होगी
मैं जनता हूँ मुझे खबर है के कल फ़िज़ा खुशगवार होगी .

Tum Aj Hanste Ho Hans Lo Mujh Par Ye Ajamaish Naa Bar Bar Hogi
Main Janta Hun Mujhe Khabar Hai Ki Kal Faza Khushgawar Hogi.

लगा न दिल को क्या सूना नहीं तूने ,
जो कुछ के मीर का इस आशिक़ी ने हाल किया ..

Laga na dil ko kya sunaa nahin tu ne,
Jo kuch ke Meer ka is aashqi ne haal kiya..

इश्क़ माशूक़ इश्क़ आशिक़ है ,
यानी अपना ही मुबतला है इश्क़ .
इश्क़ है तर्ज़ -ओ -तौर इश्क़ के ताईं ,
कहीं बंदा कहीं खुदा है इश्क़ .

Ishq maashuq ishq aashiq hai,
Yaani apna hi mubtala hai ishq.
Ishq hai tarz-o-taur ishq ke taeen,
Kahin banda kahin Khuda hai ishq.

बस के दुस्बार है हर काम का आसान होना ,
आदमी को भी मुयस्सर नहीं इंसान होना ,

मेरे कत्ल के बाद उसने की जफ़ा से तौबा ,
हाय उस जोर पशेमान का पशेमान होना ,

है उस चारगिरह कपड़े की क़िस्मत ‘ग़ालिब ,
जिस की क़िस्मत में हो आशिक़ का गिरेवान होना ..!!

Bus ke Dushwaar hai har kaam ka Asaan hona,
Admi ko bhi muyassar nahin insaaN hona,

ki Mere Qatal ke baad Usne jafa se Tauba,
Haye Us zoad pasheman ka pasheman hona,

Haif us chaar girah kaprhe ki Qismat ‘GHalib,
Jis ki Qismat main ho Ashiq ka GarebaN hona..!!

जो काम आसान समझ रहे हो वो काम मुमकिन नहीं रहेगा
वफ़ा का काग़ज़ तो भीग जाएगा बदगुमानी की बारिशों में
खतों की बातें तो ख्वाब होंगी पयाम मुमकिन नहीं रहेगा
में जानती हूँ मुझे यक़ीन है अगर कभी तू मुझे भुला दे
तो तेरी आँखो में रौशनी का क़याम मुमकिन …

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shayarisms4lovers June18 271 - वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी – फैयाज़ शायरी

वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी – फैयाज़ शायरी

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तुझसे मिलकर


तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था,
तंगी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात ने रोने न दिया.

हिंदी और उर्दू शायरी – वक़्त शायरी – तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था

Tujhase Milakar

Tujhase milakar hamene ronaa thaa bahut ronaa thaa
tangii-ae-waqt-ae-mulaaqaat ne rone na diyaa

Hindi and urdu shayari – Waqt Shayari – tujhase milakar hamene ronaa thaa bahut

वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी

वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी है मगर,
चंद घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं,
इन को खो कर अभी जान-ए-जाँ,
उम्र भर न तरसते रहो.

– फैयाज़
हिंदी और उर्दू शायरी – वक़्त शायरी – वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी है मगर

Waqt ki Qaid Mein Zindagi

waqt ki qaid mein zindagi hai magar
chand ghadiyaan yahi hain jo aazaad hai
In ko khoo kar abhi jaan-e-jaaN
umar bhar na taraste raho –

–Faiyaz
Hindi and urdu shayari – Waqt Shayari – waqt ki qaid mein zindagi hai magar
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shayarisms4lovers mar18 163 - हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते – Noshi Gilani ki Shayari

हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते – Noshi Gilani ki Shayari

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मेरी सांसें

यह नामुमकिन नहीं रहेगा , मुक़ाम मुमकिन नहीं रहेगा
ग़रूर लहजे में आ गया तो कलाम मुमकिन नहीं रहेगा
तुम अपनी साँसों से मेरी सांसें अलग तो करने लगे हो लेकिन
जो काम आसान समझ रहे हो वो काम मुमकिन नहीं रहेगा

Meri Saansain

Yeh Nammumkin Nahi rahega, Muqaam Mumkin Nahi rahega
Gharoor Lehjay Mein Aa Gaya To Kalaam Mumkin Nahi rahega
Tum Apni Saanson Se Meri Saansain Alag To Karnay Lagay ho Laikin
Jo Kaam Aasaan Samajh Rahay ho Wo Kaam Mumkin Nahi rahega…


एहले-ऐ-इश्क़

कभी यह चुप में कभी मेरी बात बात में था
तुम्हारा अक्स मेरी सारी क़ायनात में था
हम एहले-ऐ-इश्क़ बहुत बदगुमाँ होते हैं
इसी तरह का कोई वस्फ तेरी ज़ात में था ..

Ehle-ae-ishq

Kahbi yeh chup main kabhi meri baat baat main tha,
Tumhara akss meri saari kayenaat mein tha,
Hum ehle-ae-ishq bahut bdgumaan hote hain,
isi tarah ka koi vasf teri zaat mein tha…


अगर हौसले किये होते

हमारे बस में अगर अपने फैसले होते
तो हम कभी के घरों को पलट गए होते

करीब रह के सुलगने से कितना बेहतर था
किसी मुक़ाम पर हम तुम बिछड़ गए होते

हमारे नाम पे कोई चिराग तो जलता
किसी जुबान पर हमारे भी तजकरे होते

हम अपना कोई अलग रास्ता बना लेते
हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते

Agar Hoslay Kye Hotay

Hamaray Bas Mein Agar Apne Faislay Hotay
Tou Hum Kubhi Ke gharon Ko Palat Gaye Hotay

Qareeb Reh Ke Sulaghnay Se Kitna Behtar Tha
Kisi Muqaam Per Hum Tum Bicharr Gaye Hotay

Hamaray Naam Pe Koi Charaagh Tou Jalta
Kisi Zabaan Pe Hamaray Bhi Tazkaray Hotay

Ham Apna Koi Alag Raasta Bana Letay
Hamaray Dil Ne Agar Hoslay Kye Hotay……

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shayarisms4lovers June18 116 - हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

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प्यार की गहराइयाँ

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”
यहाँ नहीं डूबता तो कहीं और डूबे होते

Pyar ki Gehraiya

hume to pyar ki gehraiya maaloom karni thi “FARAZ”
yahan nhi dubte to kahin aur dube hote


मेरी ख़ामोशी

वो अब हर एक बात का मतलब पूछता है मुझसे “फ़राज़”
कभी जो मेरी ख़ामोशी की तफ्सील लिखा करता था

Meri Khamoshi

woh ab har ek baat ka matlab poochta hai mujhse “FARAZ”
kbhi jo meri khamoshi ki tafseel likha karta tha…


लफ़्ज़ों की तरतीब

लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब”
हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है

Lafzon ki Tarteeb

Lafzon ki tarteeb mujhe bandhni nahi aati “GHALIB”
Hum tum ko yaad karte hain sidhi si baat hai…


इंतज़ार

तेरे जाने के बाद बस इतना सा गिला रहा हमको “मोहसिन “
तू पलट कर देख जाता तो सारी ज़िन्दगी इंतज़ार में गुज़ार देते .

Intezar

Tere jane ke bad bus itna sa gila raha humko “mohsin”
tu palat kar dekh jata to sari zindagi intezar mein guzar dete…


ज़ख़्म खिल उठे

लाज़िम था गुज़ारना ज़िन्दगी से
बिन ज़हर पिये गुज़ारा कब था

कुछ पल उसे देख सकते
अश्कों को मगर गवारा कब था

हम खुद भी जुदाई का सबब थे
उस का ही क़सूर सारा कब था

अब औरों के साथ है तो क्या दुःख
पहले भी कोई हमारा कब था

एक नाम पे ज़ख़्म खिल उठे
क़ातिल की तरफ इशारा कब था

आए हो तो रौशनी हुई है
इस बाम में कोई सितारा कब था

देखा हुआ घर था हर किसी ने
दुल्हन की तरह संवारा कब था

Zakham Khil Uthe

Lazim Tha Guzarna Zindagi Se
Bin Zehar Piye Guzara Kab Tha

Kuch Pal Use Dekh Sakte
Ashkoon Ko Mager Gawara Kab Tha

Ham Khud Bhi Judai Ka Sabab The
Us Ka Hi Qasoor Sara Kab Tha

Ab Auron Ke Sath Hai To Kya Dukh
Phele Bhi Koi Hamara Kab Tha

Ek Naam Pe Zakham Khil Uthe
Qatil Ki Taraf Eshara Kab Tha

Ayee Ho To Roshni Hui Hai
Is Baam Main Koi Setara Kab Tha

Dekha Hua Ghar Tha Har Kisi Ne
Dulhan Ki Tarah Sanwara Kab Tha…

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shayarisms4lovers June18 148 - हर धड़कन में एक राज़ होता है – धड़कन उर्दू शायरी

हर धड़कन में एक राज़ होता है – धड़कन उर्दू शायरी

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बहुत देर कर दी तुमने मेरी धड़कन महसूस करने में
वो दिल नीलाम हो गया जिस को कभी हसरत तुम्हारे दीदार की थी

हर धड़कन में एक राज़ होता है

हर धड़कन में एक राज़ होता है
हर बात कहने का एक अंदाज़ होता है
जब तक ठोकर न लगे इश्क़ में
हर किसी को अपने महबूब पे नाज़ होता है

Har Dhadkan Mein Ek Raaz Hota Hai

Har Dhadkan mein ek raaz hota hai
Har baat kehne ka ek andaaz hota hai
Jab tak thokar na lage ishq mein
Har kisiko apne mehboob pe naaz hota hai


धड़कन ज़रा थम जा

शोर न कर धड़कन ज़रा थम जा कुछ पल के लिए
बड़ी मुश्किल से मेरी आँखों में उसका खवाब आया है

Dhadkan Zara Tham Ja

Shor Na Kar Dhadkan Zara Tham Ja Kuch Pal Ke Liye
Badi Muskil Se Meri Aankhon Mein Uska Khawab Aaya hai


दिल की धड़कन को धड़का गया कोई

दिल की धड़कन को धड़का गया कोई
मेरे ख्वाबों को जगा गया कोई
हम तो अनजाने रास्तो पे यूं ही चल रहे थे
अचानक ही प्यार का मतलव भी सीखा गया कोई

Dil ki Dhadkan ko Dhadka Gaya Koi

Dil ki dhadkan ko dhadka gaya koi
Mere khawaboon ko jgaa gaya koi
Hum to anjane rasto pe yoon hi chal rahe the
Achanak hi pyar ka matlab sikha gaya koi


दिल का धड़कना माँगोगे

मेरी धड़कनो से दिल का धड़कना माँगोगे
एक दिन तुम मुझसे मेरा प्यार उधर माँगोगे
मैं वो फूल हूँ जो तेरे चमन से न खिलेगा
एक दिन तुम अपनी वीरान ज़िन्दगी के लिए बहार माँगोगे

Dil Ka Dhadknaa Mangoge

Meri Dhadkano Se Dil Ka Dhadknaa Mangoge
Ek Din Tum Mujhse Mera Pyaar Udhar Mangoge
Main Wo Phool Hoon Jo Tere Chaman Se Na khilega
Ek din tum Apni Viran Zindagi Ke Liye Bhaar Mangoge


मेरी साँसे उसकी धड़कन में बस्ती है

आज भी मेरे दिल में वो रहती है
आज भी मेरे सपनो में वो दिखती  है
क्या हुआ अब हम दूर है एक दुसरे से पर
आज भी मेरी साँसे उसकी धड़कन में बस्ती है

Meri Saanse Uski Dhadkan Mein Basti Hai

Aaj Bhi Mere Dil Mein Wo rehti Hai
Aaj Bhi Mere Sapno Me Wo Dikhti Hai
Kya Hua Ab Hum Door Hai Ek Dosre Se Par
Aaj Bhi Meri Saanse Uski Dhadkan mein basti Hai


धड़कन है मेरे दिल की

धड़कन है मेरे दिल की तू आँखों का …

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shayarisms4lovers June18 148 - तेरा रंग-ऐ-हिना – उर्दू हिना शायरी

तेरा रंग-ऐ-हिना – उर्दू हिना शायरी

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हाथों की हिना

चंद मासूम से पतों का लहू है ‘फाखिर’
जिस को महबूब के हाथों की हिना कहते हैं

Haathon Ki Hina

Chand Maasoom Se Patton Ka Lahoo Hai ‘Faakhir’
Jis Ko Mahaboob Ke Haathon Ki Hina Kahte Hain…


मोहताज-ऐ-हिना

खून है दिल ख़ाक में अहवाल-ऐ-बुतान पर यानी
उन के नाखून हुए मोहताज -ऐ -हिना मेरे बाद

Mohtaaj-AE-Hinaa

Khoon Hai Dil Khaak Mein Ahvaal-AE-Butaan Par Yaani
Un Ke Naakhoon Hue Mohtaaj-AE-Hinaa Mere Baad…


पा बस्ता ऐ-ज़ंजीर ऐ-हिना

मैं भी पलकों पे सजा लूँगा लहू की बूँदें
तुम भी पा-बस्ता-ऐ-ज़ंजीर-ऐ-हिना हो जाना

Paa Basta-AE-Zanjeer AE-Hina

Main Bhi Palkon Pe Sajaa Loon Ga Lahoo Ki Boonden
Tum Bhi Paa-Basta-AE-Zanjeer-AE-Hina Ho Jaanaa…


तन्हाई में खुशबू-ऐ-हिना

वो हाथ पराये हो भी गए अब दूर का रिश्ता है “कैसर ”
आती है मेरी तन्हाई में खुशबू-ऐ-हिना धीरे धीरे

Tanhaai Mein Khushboo-AE-Hina

Vo Haath Paraaye Ho Bhi Gaye Ab Door Ka Rishta Hai “Qaisar”
Aati Hai Meri Tanhaai Mein Khushboo-AE-Hina Dheere Dheere…


मेहँदी के वास्ते

मेहँदी के वास्ते वो लहू मांगते हैं रोज़
दिल देना उन को जान का बे-नामा हो गया

Mehndi Ke Vaaste

Mehndi Ke Vaaste Vo Lahoo Maangte Hain Roz
Dil Dena Un Ko Jaan Ka Be-Naamaa Ho Gayaa…


तेरी हिना में

शामिल है मेरा खून-ऐ-जिगर तेरी हिना में
यह काम हो तो अब खून-ऐ-वफ़ा साथ लिए जा

Teri Hena Mein

Shaamil Hai Meraa Khoon-E-Jigar Teri Hena Mein
Ye Kam Ho To Ab Khoon-AE-Vafaa Saath Liye Jaa…


तेरा रंग-ऐ-हिना

न मेरे ज़ख्म खिले हैं न तेरा रंग -ऐ -हिना
मौसम आये ही नहीं अब के गुलाबों वाले

Tera Rang-AE-Hina

Na Mere Zakhm Khile Hain Na Tera Rang-AE-Hina
Mausam Aaye Hi Nahin Ab Ke Gulaabon Vaale…


रंग-ऐ-हिना

रंग-ऐ-हिना के बोझ से उठना मोहाल है …
नाजुक हैं किस क़दर मेरे मेहबूब के पाओं

Rang-E-Hina

Rang-E-Hina Ki Bojh Se Uthna Mohaal Hai
NazukK Hain Kis Qadar Mere Mehboob Ke Paaon…


रंग-ऐ-हिना भी तेरा

हाय अब भूल गया रंग-ऐ-हिना भी तेरा
खत भी कभी खून से तहरीर हुआ करते थे . .

Rang-AE-Hina Bhi Tera

Haaye ab bhool gaya rang-AE-hina bhi tera
Khat bhi kabhi khoon se tehreer hua karte the…


मेहँदी लगा के बैठे हैं

वो जो सर झुका के बैठे हैं
हमारा दिल चुरा के बैठे हैं
हमने उनसे कहा हमारा दिल हमे लौटा दो
तो बोले , हम तो हाथों में , मेहँदी लगा के बैठे हैं

Mehndi Laga ke Baithe Hain

Woh jo sar jhuka ke baithe hain
Hamara dil chura …

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shayarisms4lovers mar18 205 - शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

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मेरी वेहशत

इश्क़ मुझको नहीं वेहशत ही सही
मेरी वेहशत तेरी शोहरत ही सही
कटा कीजिए न तालुक हम से
कुछ नहीं है तो अदावत ही सही

Meri Wehshat

Ishq mujhko nahin wehshat hi sahi
Meri wehshat teri shohrat hi sahi
kta kijiay na taaluq hum se
kuch nahin hai to adaawat he sahi…


शब-ऐ-इंतज़ार

वो गया तो साथ ही ले गया सभी रंग उतार के शहर के
कोई शख्स था मेरे शहर में किसी दूर पार के शहर का
चलो कोई दिल तो उदास था , चलो कोई आँख तो नम थी
चलो कोई दर तो खुला रहा शब-ऐ-इंतज़ार के शहर का

Shab-ae-Intezaar

Wo Gaya To Saath Hi Le Gaya Sabhi Rang Utaar Ke Shehar Ke
Koi Shakhs Tha Mere Shehar Mein Kisi Door Paar Ke Shehar Ka
Chalo Koi Dil to Udaas Tha, Chalo Koi Aankh To Num thi
Chalo Koi Dar To Khula Raha Shab-ae-Intezaar Ke Shehar Ka…


तुम्हारे ख्याल

बहुत दिनों से मेरे ज़ेहन के दरीचे मैं
ठहर गया है तुम्हारे ख्याल का मौसम
यूं भी यकीन हो बहारें उजड़ भी सकती हैं
तो आ के देख मेरे ज़वाल का मौसम

Tumhare Khyal

Bahut Dino Se Mere Zehan Ke Darichoon Main
Thehar Gaya Hai Tumhare Khyal Ka Mausam
Jo bhi Yaqeen hio Baharain Ujar Bhi Sakti Hain
To Aa Ke Deakh Mere Zawaal Ka Mausam…


खुदा बचाए

हमारे हाल पर वो मुस्करा तो देते हैं
चलो यही सही , कुछ तो ख़याल करते हैं
खुदा बचाए तुझे इन वफ़ा के मारों से
जवाब जिस का न हो वो सवाल करते हैं

Khudaa bachaaye

hamaare Haal par wo muskura to dete hain
chalo yahi sahi, kuChh to Khayaal karte hain
Khudaa bachaaye tujhe in wafaa ke maaron se
jawab jis ka na ho wo savaal karte hain……

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shayarisms4lovers mar18 05 - अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना – आलम इक़बाल की शायरी

अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना – आलम इक़बाल की शायरी

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अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना

मुहब्बत की तमना है तो फिर वो वस्फ पैदा कर
जहां से इश्क़ चलता है वहां तक नाम पैदा कर

अगर सचा है इश्क़ में तू ऐ बानी आदम
निग़ाह -ऐ -इश्क़ पैदा कर

मैं तुझ को तुझसे ज़्यादा चाहूँगा
मगर शर्त ये है के अपने अंदर जुस्तजू तो पैदा कर

अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना
तू अपने आप में पहले अंदाज़ -ऐ -वफ़ा तो पैदा कर

Agar Na Badlu Teri Khatir Har Ek Cheez To Kehna

Muhabbt Ki Tamna Hai To Phir Wo Vasf Peda Kar
Jahan Se Ishq Chalta Hai Wahan Tak Naaam Peda Kar

Agar Sacha Hai Ishq Mein Tu Ae Bani ADAM
Nighah-E-Ishq Peda Kar

Main Tujh Ko Tujh Se Ziada Chahunga
Magar Shart Yeh Hai Ki Apne Andar Justju To Pedaa Kar

Agar Na Badlu Teri Khatir Har Ek Cheez To Kehna
Tu Apne Aap Mein Pehle ANDAAZ-AE-Wafa To Paida Kar

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shayarisms4lovers June18 20 - कर के इज़हार-ऐ-मोहब्बत बेपरवाह हो जाते हैं लोग

कर के इज़हार-ऐ-मोहब्बत बेपरवाह हो जाते हैं लोग

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राह -ऐ -जूनून

फ़ना न कर अपनी ज़िन्दगी को ऐ इंसान राह -ऐ -जूनून में
तब करेगा इबादत जब गुनाह करने की ताक़त न होगी

Raah-ae-Junoon

Fana na kar apni zindagi ko ay jawan raah-e-junoon main.
Tab karega ibadat jab gunnah karne ki taqat na hogi


क्यों बेवफा हो जाते हैं लोग

हँसते हैं यूँ ही हंस कर रुला जाते हैं लोग
मिलते हैं यूँ ही मिल कर जुदा हो जाते हैं लोग

पल दो पल की मोहब्बत को उम्र भर का साथ न समझना
मुहबत भी करते हैं और खफा भी हो जाते हैं लोग .

 

नसीब में प्यार न था जो मुझे मिला ही नहीं .
कर के इज़हार-ऐ-मोहब्बत बेपरवाह हो जाते हैं लोग .

अब किस से करें शिकवा अपनी किस्मत का .
कर के वादे वफ़ा क्यों बेवफा हो जाते हैं लोग

Kyon bewafaa ho jate hain log

Hanste hain yun hi hans kar rula jate hain log
Milte hain yun hi mil kar juda ho jate hain log

Pal do pal ki Mohabbat ko umar bhar ka sath na samjhna.
Muhabat bhi karte hain or khafaa bhi ho jate hain log.

Naseeb mein pyar na tha jo mujhe mila hi nhi.
Kar ke izhaar-ae-Mohabbat be parwaah ho jatey hain log.

Ab kis se karen Shikwa apni qismat ka.
Kar ke vaade wafaa kyon bewafaa ho jate hain log


जी -भर के देख लो

यूँ न मुझ को देख की तेरा दिल पिघल न जाये
मेरे आंसुओ से तेरा दामन  जल न जाये

वो मुझ से फिर मिला है आज ख़्वाबों में
ऐ खुदा कहीं मेरी नींद खुल न जाये

जी -भर के देख लो हम को तुम सनम
क्या पता फिर ज़िन्दगी की शाम ढल न जाए

Ji Bhar ke dekh lo

Yun na mujh ko dekh tera dil pighal na jaye
Mere aansuo se tera daman jal na jaye

Wo mujh se phir mila hai aaj khawabon mein
Ae khudaya kahin meri neend khul na jaye

Ji-bhar ke dekh lo hum ko tum sanam
Kya pata phir zindagi ki shaam dhal na jaaye…

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shayarisms4lovers June18 202 - Best Ever Shayari Colletion of Munir Niazi – मुनीर नियाज़ी शायरी मजमूआ

Best Ever Shayari Colletion of Munir Niazi – मुनीर नियाज़ी शायरी मजमूआ

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उसके जाने का रंज

मेरी सदा हवा में बहुत दूर तक गयी
पर मैं बुला रहा था जिसे , वो बेखबर रहा
उसकी आखिरी नज़र में अजब दर्द था “मुनीर”
उसके जाने का रंज मुझे उम्र भर रहा

Uske Jaane Ka Ranj

Meri Sada Hawa Mein Bohat Door Tak Gayi
Par Main Bula Raha Tha Jise, wo Bekhabar Raha
Uski Aakhiri Nazar Mein Ajab Dard Tha “Munir”
Uske Jaane Ka Ranj Mujhe Umar Bhar Raha


हम जवाब क्या देते

किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते
सवाल सारे ग़लत थे, हम जवाब क्या देते
हवा की तरह मुसाफिर थे, दिलबरों के दिल
उन्हें बस एक ही घर का अजाब क्या देते

Hum Jawab Kya Dete

Kisi Ko Apnay Amal Ka Hisaab Kya Dete
Sawaal Saare Ghalat The, Hum Jawab Kya Dete
Hawa Ki Tarha Musafir The, Dilbaron Ke Dil
Unhain Bus Ak Hi Ghar Ka Azaab Kya Dete


ज़ुल्म मेरे नाम

शहर में वो मोअतबर मेरी गवाही से हुआ
फिर मुझे इस शहर में नमोअतबर उसी ने किया
शहर को बर्बाद करके रख दिया उस ने “मुनीर”
शहर पर यह ज़ुल्म मेरे नाम पर उसने किया

Zulam Mere Naam

Shehar mein wo moatbir meri gawahi se huwa
Phir mujhe is shehar mein namoatbir usi ne kiya
Shehar ko barbaad kar kay rakh diya us ne “Munir”
Shehar par yeh zulam mere naam per usi ne kiya


ऐसे भी हम नहीं

ग़म से लिपट जाएंगे ऐसे भी हम नहीं
दुनिया से कट ही जाएंगे ऐसे भी हम नही
इतने सवाल दिल में हैं और वो खामोश देर
इस देर से हट जाएंगे ऐसे भी हम नहीं

Aise Bhi Hum Nahi

Gham say lipat jaingay Aise bhi hum nahi
Duniya say kat hi jaingay Aise b hum nahi
Itnay sawal dil mein hain or wo khamosh der
Is der say hat jaingay Aise bhi hum nahi


गम की बारिश

गम की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहीं
तूने मुझ को खो दिया मैंने तुझे खोया नहीं
जानता हूँ एक ऐसे शख्स को मैं भी “मुनीर”
गम से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं

Gam Ki Barish

Gam ki barish ne bhi tere naqsh ko dhoya nahin
Tune mujh ko khoo diya mainne tujhe khoya nahin
Janata hoon Ek aise shaKhs ko main bhi “Munir”
Gam se patthar ho gaya lekin kabhi roya nahin


शहर-ऐ-संगदिल

इस शहर-ऐ-संगदिल को जला देना चाहिए
फिर इस की ख़ाक को भी उड़ा देना …

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