shayarisms4lovers mar18 127 - हिंदी और उर्दू शायरी – दो लाइन शायरी – Daag , Perveen , Naqvi Shayari

हिंदी और उर्दू शायरी – दो लाइन शायरी – Daag , Perveen , Naqvi Shayari

न जाने कौन न जाने कौन सा आसब दिल में बसता है के जो भी ठहरा वो आखिर मकान छोड़ गया … Na jane kaun Na jane kaun sa aasaab dil mein basta hai Ke jo bhi thehra wo aakhir makaan chod gaya तुझी को पूछता रहा बिछड़ के मुझ से , हलक़ को अज़ीज़ […]

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shayarisms4lovers June18 145 - इक आंसू भी गिरा तो सुनाई देगा

इक आंसू भी गिरा तो सुनाई देगा

कहाँ जाएंगे तेरे शहर से कहाँ जाएंगे तेरे शहर से गम जदा हो कर अभी तो जीना बाकी है अभी तो मरना बाकी है राजदार न रहा कोई किसको  सुनाए हाल -ऐ -दिल अपना जिसका जीकर हम करते वो रूहे-यार रहा न अपना अब कश्मकश यह की न बसते  बने न चलते बने कुछ यूं […]

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shayarisms4lovers mar18 205 - शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

मेरी वेहशत इश्क़ मुझको नहीं वेहशत ही सही मेरी वेहशत तेरी शोहरत ही सही कटा कीजिए न तालुक हम से कुछ नहीं है तो अदावत ही सही Meri Wehshat Ishq mujhko nahin wehshat hi sahi Meri wehshat teri shohrat hi sahi kta kijiay na taaluq hum se kuch nahin hai to adaawat he sahi… शब-ऐ-इंतज़ार […]

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shayarisms4lovers June18 228 - खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा – एक बेवफा

खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा – एक बेवफा

हमे बेवफा का इल्जाम दे गया ज़िंदा थे जिसकी आस पर वो भी रुला गया बंधन वफ़ा के तोड़ के सारे चला गया खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा हाथों में हाथ दे के खुद ही छुड़ा गया कर दी जिसके लिए हमने तबाह ज़िन्दगी उल्टा वो हमे बेवफा का इल्जाम दे […]

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shayarisms4lovers mar18 199 - बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’ – Best Collection of “Ghalib”

बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’ – Best Collection of “Ghalib”

खुदा के वास्ते खुदा के वास्ते पर्दा न रुख्सार से उठा ज़ालिम कहीं ऐसा न हो जहाँ भी वही काफिर सनम निकले मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – जहाँ भी वही काफिर सनम निकले Khuda ke Waaste Khuda ke waaste parda na kaabe se uthaa zaalim Kaheen aisa na ho yahan bhi wahi kaafir […]

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shayarisms4lovers mar18 92 - तमाम उम्र तेरा मुंतज़िर रहा – मोहसिन नक़वी की शायरी

तमाम उम्र तेरा मुंतज़िर रहा – मोहसिन नक़वी की शायरी

तमाम उम्र तेरा मुंतज़िर रहा “मोहसिन” उदासियों का यह मौसम बदल भी सकता था वो चाहता तो मेरे साथ चल भी सकता था वो शख्स तूने जिसे छोड़ने की जल्दी की तेरे मिज़ाज के साँचे में ढाल भी सकता था वो जल्दबाज़ खफा हो के चल दिया वरना तनाज़आत का कोई हल निकल भी सकता […]

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