shayarisms4lovers mar18 127 - हिंदी और उर्दू शायरी – दो लाइन शायरी – Daag , Perveen , Naqvi Shayari

हिंदी और उर्दू शायरी – दो लाइन शायरी – Daag , Perveen , Naqvi Shayari

न जाने कौन न जाने कौन सा आसब दिल में बसता है के जो भी ठहरा वो आखिर मकान छोड़ गया … Na jane kaun Na jane kaun sa aasaab dil mein basta hai Ke jo bhi thehra wo aakhir makaan chod gaya तुझी को पूछता रहा बिछड़ के मुझ से , हलक़ को अज़ीज़ हो गया है तू , मुझे तो जो कोई भी मिला , तुझी को पूछता रहा Tujhi ko puchta raha Bichar ke mujh se, halaq ko aziz ho geya hai tu Mujhe to jo koi mila, tujhi ko puchta raha मेरे हम-सकूँ  मेरे हम-सकूँ  का यह हुक्म था के कलाम उससे मैं कम करूँ .. मेरे होंठ ऐसे सिले के फिर उसे मेरी चुप ने रुला दिया … Mere hum-sukhan Mere hum-sukhan ka yeh hukm tha ke kalaam us se main kam karoon.. mere hont aise sile ke phir usey meri chup ne rula diya …. यह शब-ऐ-हिजर यह शब-ऐ-हिजर तो साथी है मेरी बरसों से जाओ सो जाओ सितारों के मैं ज़िंदा हूँ अभी Shab-ae-hizar Yeh Shab-ae-hizar To Sathi Hai Meri Barsoon Se Jao So Jao Sitaro Ke Main Zinda Hoon Abhi न आना तेरा ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा ऐसे […]

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shayarisms4lovers June18 145 - इक आंसू भी गिरा तो सुनाई देगा

इक आंसू भी गिरा तो सुनाई देगा

कहाँ जाएंगे तेरे शहर से कहाँ जाएंगे तेरे शहर से गम जदा हो कर अभी तो जीना बाकी है अभी तो मरना बाकी है राजदार न रहा कोई किसको  सुनाए हाल -ऐ -दिल अपना जिसका जीकर हम करते वो रूहे-यार रहा न अपना अब कश्मकश यह की न बसते  बने न चलते बने कुछ यूं हुए बेवफा इस शहर के लोग की बस चलते बने . Kahan jayinge tere shehar se kahan jayinge tere shehar se gam jda ho kar abhi to jina baki hai abhi to marna baki hai rajdar na raha koi kiso sunaye haal-ae-dil apna Jiska jikar hum karte wo rohe-yaar raha na apna Ab kashmkas yeah ki na baste bane na chalte bane kush yoon hue bewafa is shere ke log ki bas chalte bane. इक आंसू भी गिरा तो सुनाई देगा यह मोहबत है जरा सोच के करना रात होगी तो चाँद भी दिखाई देगा , ख्वाबों में तुम्हे वो चेहरा भी दिखाई देगा ; यह मोहबत है जरा सोच के करना , क्योंकि इक आंसू भी गिरा तो सुनाई देगा Ek AANSU bhi gira to sunai dega Raat hogi to chand bhi dikhai dega, khabho me tumhe vo chehra bhi dikhai dega; ye mohabat […]

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shayarisms4lovers mar18 205 - शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

मेरी वेहशत इश्क़ मुझको नहीं वेहशत ही सही मेरी वेहशत तेरी शोहरत ही सही कटा कीजिए न तालुक हम से कुछ नहीं है तो अदावत ही सही Meri Wehshat Ishq mujhko nahin wehshat hi sahi Meri wehshat teri shohrat hi sahi kta kijiay na taaluq hum se kuch nahin hai to adaawat he sahi… शब-ऐ-इंतज़ार वो गया तो साथ ही ले गया सभी रंग उतार के शहर के कोई शख्स था मेरे शहर में किसी दूर पार के शहर का चलो कोई दिल तो उदास था , चलो कोई आँख तो नम थी चलो कोई दर तो खुला रहा शब-ऐ-इंतज़ार के शहर का Shab-ae-Intezaar Wo Gaya To Saath Hi Le Gaya Sabhi Rang Utaar Ke Shehar Ke Koi Shakhs Tha Mere Shehar Mein Kisi Door Paar Ke Shehar Ka Chalo Koi Dil to Udaas Tha, Chalo Koi Aankh To Num thi Chalo Koi Dar To Khula Raha Shab-ae-Intezaar Ke Shehar Ka… तुम्हारे ख्याल बहुत दिनों से मेरे ज़ेहन के दरीचे मैं ठहर गया है तुम्हारे ख्याल का मौसम यूं भी यकीन हो बहारें उजड़ भी सकती हैं तो आ के देख मेरे ज़वाल का मौसम Tumhare Khyal Bahut Dino Se Mere Zehan Ke Darichoon Main Thehar Gaya Hai Tumhare Khyal […]

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shayarisms4lovers June18 228 - खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा – एक बेवफा

खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा – एक बेवफा

हमे बेवफा का इल्जाम दे गया ज़िंदा थे जिसकी आस पर वो भी रुला गया बंधन वफ़ा के तोड़ के सारे चला गया खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा हाथों में हाथ दे के खुद ही छुड़ा गया कर दी जिसके लिए हमने तबाह ज़िन्दगी उल्टा वो हमे बेवफा का इल्जाम दे गया Wo Bewafa ka ilzam de Gaya Zinda thi jiski aas pe Wo bhi rula gaya Bandhan Wafa ke tood ke Sare chala gaya Khud hi to ki thi usne MUHABBAT ki IBTADA Hathon main hath de ke khud hi chuda gaya Kardi jiske liye humne Tabah zindagi Ulta wo BEWAFA ka ilzam de gaya… तमाशा बन दिया मेरा क़तरा अब एहतजा करे भी तो किया मिले दरिया जो लग रहे थे समंदर से जा मिले हर शख्स दौड़ता है यहां भीड़ की तरफ फिर यह भी चाहता है उसे रास्ता भी मिले उस आरज़ू ने और तमाशा बन दिया मेरा जो भी मिले हमारी तरफ देखता मिले दुनिया को दूसरों की नज़र से न देखिये चेहरे न पढ़ सके तो किताबों में किया मिले Tamasha Bna Diya Mera Qatra ab ehtjaaj karey bhi to kiya miley Darya jo lag rahe they samandar se ja […]

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shayarisms4lovers mar18 199 - बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’ – Best Collection of “Ghalib”

बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’ – Best Collection of “Ghalib”

खुदा के वास्ते खुदा के वास्ते पर्दा न रुख्सार से उठा ज़ालिम कहीं ऐसा न हो जहाँ भी वही काफिर सनम निकले मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – जहाँ भी वही काफिर सनम निकले Khuda ke Waaste Khuda ke waaste parda na kaabe se uthaa zaalim Kaheen aisa na ho yahan bhi wahi kaafir sanam nikle Mirza Ghalib Shayari – Urdu shayari – yahan bhi wahi kaafir sanam nikle वो निकले तो दिल निकले ज़रा कर जोर सीने पर की तीर -ऐ-पुरसितम् निकले जो वो निकले तो दिल निकले , जो दिल निकले तो दम निकले मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – वो निकले तो दिल निकले Wo Nikle To Dil Nikle Zara kar jor seene par ki teer-e-pursitam niklejo Wo nikle to dil nikle, jo dil nikle to dam nikle Mirza Ghalib Shayari – Urdu shayari – Wo nikle to dil nikle कागज़ का लिबास सबने पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास जिस कदर लोग थे बारिश में नहाने वाले अदल के तुम न हमे आस दिलाओ क़त्ल हो जाते हैं , ज़ंज़ीर हिलाने वाले मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास Kaagaz ka Libaas Sabnay pahnaa […]

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shayarisms4lovers mar18 92 - तमाम उम्र तेरा मुंतज़िर रहा – मोहसिन नक़वी की शायरी

तमाम उम्र तेरा मुंतज़िर रहा – मोहसिन नक़वी की शायरी

तमाम उम्र तेरा मुंतज़िर रहा “मोहसिन” उदासियों का यह मौसम बदल भी सकता था वो चाहता तो मेरे साथ चल भी सकता था वो शख्स तूने जिसे छोड़ने की जल्दी की तेरे मिज़ाज के साँचे में ढाल भी सकता था वो जल्दबाज़ खफा हो के चल दिया वरना तनाज़आत का कोई हल निकल भी सकता था आन ने हाथ उठने नहीं दिए वरना मेरी दुआ से वो पत्थर पिघल भी सकता था तमाम उम्र तेरा मुंतज़िर रहा मोहसिन यह और बात के वो रास्ता बदल भी सकता था Tamam Umar Tera Muntazir Raha “Mohsin” Udaasiyun Ka Yeh Mosam Badal Bhi Sakta Tha Wo Chahta To Mere Sath Chal Bhi Sakta Tha Wo Shakhs Tune Jisay Chornye Ki Jaldi Ki Tare Mizaj Ke Sanchy Mein Dhal Bhi Sakta Tha Wo Jaldbaaz Khafa ho Ke Chal diya Warna Tanazaat Ka Koi Haal Nikal bhi Sakta Tha Ann Ne Hath Uthne Nahi Diye Warna Meri Dua Say Wo Pathar Pigal Bhi Skta Tha Tamam UMAR Tera Muntazir Raha Mohsin Yeh Aur Baat Ke Wo Rasta Badal bhi Sakta Tha! यह आखरी खत मैं लिख रहा हूँ उदास तहरीर पढ़ के मेरी , मेरे सनम मुस्कुरा न देना यह आखरी खत मैं लिख रहा […]

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