जानिए चिपको आन्दोलन का इतिहास और पूरी जानकारी | Chipko Movement History

Chipko Movement History पर्यावरण के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती, क्योंकि हमारा जीवन पूरी तरह से पर्यावरण पर ही आश्रित है, वहीं अगर हमारी जलवायु में थोड़ासा भी बदलाव होता है तो इसका सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ता है। इसलिए पर्यावरण को संरक्षित करना हम सभी का कर्तव्य है। इसलिए हमें पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को रोकने और जंगलों के दोहन के लिए उचित कदम उठाने चाहिए, लेकिन क्या आप जानते हैं कि, प्रकृति की रक्षा के लिए चिपको आंदोलन – Chipko Movement चलाया गया था। जिसमें पेड़ों की हो रही कटाई का विरोध किया गया था, वहीं इस आंदोलन की खास बात यह थी कि महात्मा गांधी जी का अहिंसा का मार्ग अपनाते हुए इस आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से किया गया था। वहीं कब हुई चिपको आंदोलन की शुरुआत, इस आंदोलन से क्या प्रभाव पड़ा और क्या रहीं इस आंदोलन की उपलब्धियां समेत तमाम जानकारी हम आपको अपने इस आर्टिकल में देंगे, लेकिन सबसे पहले हम आपको चिपको आंदोलन के स्लोगन – Chipko Movement Slogan के बारे में बताएंगे – ‘क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी, पानी और बयार। मिट्टी, पानी और बयार, जिंदा रहने के आधार।‘ इसी स्लोगन को चिपको आंदोलन के दौरान […]

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आख़िर क्या था होमरूल आंदोलन?

What is Home Rule Movement होमरूल लीग आंदोलन की शुरुआत इसलिए की गई क्योंकि इसकी मुख्य वजह ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन रहते हुए संवैधानिक तरीके से स्वशासन को हासिल करना था। आपको बता दें कि इस होम लीग के प्रमुख नेता बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट थी। स्वराज्य की प्राप्ति के लिए बाल गंगाधर तिलक ने 28 अप्रैल, 1916 को बेलगांव में होमरूल लीग की स्थापना की गई थी। जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्यप्रांत और बरार तक फैला हुआ था। इस आंदोलन की खास बात यह थी कि अहिंसा का इस्तेमाल किए बिना ब्रिटिश सरकार से भारतीय उपनिवेश को स्वशासन देने की कोशिश की थी। ‘होमरूल’ शब्द मुख्य रूप से आयरलैंड के एक ऐसे आंदोलन से लिया गया था। जिसका सबसे पहले इस्तेमाल श्याम जी कृष्ण वर्मा ने 1905 में लंदन में किया था। वहीं भारतीय होमरूल लीग का गठन आयरलैंड के होमरूल लीग के नमूने पर किया गया था, जो तत्कालीन परिस्थितियों में तेजी से उभरती हुयी प्रतिक्रियात्मक राजनीति के नए स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता था। ऐनी बेसेंट और तिलक की इस आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका थी। आख़िर क्या था होमरूल आंदोलन – What is Home Rule Movement वहीं होमरूल का तात्पर्य एक ऐसी स्थिति से है, […]

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जानिए अप्पिको आंदोलन का इतिहास –  Appiko Movement

Appiko movement उत्तराखंड में पर्यावरण को बचाने के लिए चलाया गया चिपको आंदोलन दक्षिण भारत में अप्पिको आंदोलन – Appiko movement के रूप में सामने आया। पर्यावरण के महत्व को समझते हुए और दक्षिण भारत के  पेड़ों को काटने से रोकने के लिए कर्नाटक में अप्पिको आंदोलन चलाया गया। अप्पिको का अर्थ– अप्पिको एक कन्नड़ भाषा का शब्द है जो कि चिपको का पर्याय ही है। इस प्रकार अप्पिको का भी अर्थ है चिपक जाना या लिपट जाना। आपको बता दें कि लगातार खत्म हो रही वन संपदा, अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और विलुप्त  हो रहे जंगली जीव-जन्तु और जंगल खत्म होने से पर्यावरण पर पड़े रहे बुरे प्रभाव को देखते हुए दक्षिण भारत के लोगों ने पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए एक अभियान चलाया। Appiko movement – अप्पिको आंदोलन 1983 में कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ क्षेत्र में शुरू हुआ। यह आंदोलन पूरे जोश से लगातार 38 दिन तक चलता रहा। जानिए अप्पिको आंदोलन का इतिहास –  Appiko Movement पर्यावरण को लेकर जागरूक करने और पेड़ों की रक्षा के लिए चलाया गया अप्पिको आंदोलन की शुरुआत 1983 में कर्नाटक के सिलकानी गांव से हुई थी। पेड़ों को कटने से बचाने के लिए सिलकानी और आस-पास के गांव वाले […]

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