shayarisms4lovers mar18 163 - हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते – Noshi Gilani ki Shayari

हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते – Noshi Gilani ki Shayari

मेरी सांसें यह नामुमकिन नहीं रहेगा , मुक़ाम मुमकिन नहीं रहेगा ग़रूर लहजे में आ गया तो कलाम मुमकिन नहीं रहेगा तुम अपनी साँसों से मेरी सांसें अलग तो करने लगे हो लेकिन जो काम आसान समझ रहे हो वो काम मुमकिन नहीं रहेगा Meri Saansain Yeh Nammumkin Nahi rahega, Muqaam Mumkin Nahi rahega Gharoor Lehjay Mein Aa Gaya To Kalaam Mumkin Nahi rahega Tum Apni Saanson Se Meri Saansain Alag To Karnay Lagay ho Laikin Jo Kaam Aasaan Samajh Rahay ho Wo Kaam Mumkin Nahi rahega… एहले-ऐ-इश्क़ कभी यह चुप में कभी मेरी बात बात में था तुम्हारा अक्स मेरी सारी क़ायनात में था हम एहले-ऐ-इश्क़ बहुत बदगुमाँ होते हैं इसी तरह का कोई वस्फ तेरी ज़ात में था .. Ehle-ae-ishq Kahbi yeh chup main kabhi meri baat baat main tha, Tumhara akss meri saari kayenaat mein tha, Hum ehle-ae-ishq bahut bdgumaan hote hain, isi tarah ka koi vasf teri zaat mein tha… अगर हौसले किये होते हमारे बस में अगर अपने फैसले होते तो हम कभी के घरों को पलट गए होते करीब रह के सुलगने से कितना बेहतर था किसी मुक़ाम पर हम तुम बिछड़ गए होते हमारे नाम पे कोई चिराग तो जलता किसी जुबान पर […]

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