shayarisms4lovers June18 92 - रोज तुमसे सपनो में मुलाकात करते है – मुलाकात शायरी

रोज तुमसे सपनो में मुलाकात करते है – मुलाकात शायरी

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मुलाकात का इंतज़ार

हर एक मुलाकात को याद हम करते है
कभी मोहब्बत कभी जुदाई की आह भरते है
यूँ तो रोज तुमसे सपनो में मुलाकात करते है
मगर फिर भी अगली मुलाकात का इंतज़ार करते है .

Mulakat Ka Intzar

Har ek mulakat ko yaad hum karte hai
Kabhi mohabbat kabhi judai ki aah bharte hai
Yun to roj tumse sapno mein mulakat karte hai par
Magar Fir bhi agli mulakat ka intzar karte hai…


जब मुलाकात नहीं होती

निकलते है आँसू , जब बात नहीं होती
टूट जाता है दिल , जब मुलाकात नहीं होती
आप याद न आओ ऐसी तो कोई बात नहीं
ऐसी कोई सुबह , ऐसी कोई शाम नहीं

Jab Mulakat Nahi Hoti

Nikalte hai aanso, jab bat nahi hoti
Tut jata hai dil, jab mulakat nahi hoti
Aap yaad na ao aise to koi bat nahi
Aisi koi subah, aisi koi sham nahi…


हमसे मुलाकात कीजिये

अगर हो वक़्त तो मुलाकात कीजिये
दिल कुछ कहना चाहो तो बात कीजिये
यूं तो मुसकिल है तुमसे दूर रहना
अगर लम्हा एक मिल जाये तो हमको याद कीजिये

Humse Mulakat Kijiye

Agar ho waqt toh mulakat kijiye
Dil kuch kehna chaho to baat kijiye
Yoon toh muskil hai tumse dur rehna
agar lamha ek mil jaye to humko yaad kijiye…

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shayarisms4lovers mar18 163 - हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते – Noshi Gilani ki Shayari

हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते – Noshi Gilani ki Shayari

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मेरी सांसें

यह नामुमकिन नहीं रहेगा , मुक़ाम मुमकिन नहीं रहेगा
ग़रूर लहजे में आ गया तो कलाम मुमकिन नहीं रहेगा
तुम अपनी साँसों से मेरी सांसें अलग तो करने लगे हो लेकिन
जो काम आसान समझ रहे हो वो काम मुमकिन नहीं रहेगा

Meri Saansain

Yeh Nammumkin Nahi rahega, Muqaam Mumkin Nahi rahega
Gharoor Lehjay Mein Aa Gaya To Kalaam Mumkin Nahi rahega
Tum Apni Saanson Se Meri Saansain Alag To Karnay Lagay ho Laikin
Jo Kaam Aasaan Samajh Rahay ho Wo Kaam Mumkin Nahi rahega…


एहले-ऐ-इश्क़

कभी यह चुप में कभी मेरी बात बात में था
तुम्हारा अक्स मेरी सारी क़ायनात में था
हम एहले-ऐ-इश्क़ बहुत बदगुमाँ होते हैं
इसी तरह का कोई वस्फ तेरी ज़ात में था ..

Ehle-ae-ishq

Kahbi yeh chup main kabhi meri baat baat main tha,
Tumhara akss meri saari kayenaat mein tha,
Hum ehle-ae-ishq bahut bdgumaan hote hain,
isi tarah ka koi vasf teri zaat mein tha…


अगर हौसले किये होते

हमारे बस में अगर अपने फैसले होते
तो हम कभी के घरों को पलट गए होते

करीब रह के सुलगने से कितना बेहतर था
किसी मुक़ाम पर हम तुम बिछड़ गए होते

हमारे नाम पे कोई चिराग तो जलता
किसी जुबान पर हमारे भी तजकरे होते

हम अपना कोई अलग रास्ता बना लेते
हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते

Agar Hoslay Kye Hotay

Hamaray Bas Mein Agar Apne Faislay Hotay
Tou Hum Kubhi Ke gharon Ko Palat Gaye Hotay

Qareeb Reh Ke Sulaghnay Se Kitna Behtar Tha
Kisi Muqaam Per Hum Tum Bicharr Gaye Hotay

Hamaray Naam Pe Koi Charaagh Tou Jalta
Kisi Zabaan Pe Hamaray Bhi Tazkaray Hotay

Ham Apna Koi Alag Raasta Bana Letay
Hamaray Dil Ne Agar Hoslay Kye Hotay……

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shayarisms4lovers June18 116 - हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

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प्यार की गहराइयाँ

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”
यहाँ नहीं डूबता तो कहीं और डूबे होते

Pyar ki Gehraiya

hume to pyar ki gehraiya maaloom karni thi “FARAZ”
yahan nhi dubte to kahin aur dube hote


मेरी ख़ामोशी

वो अब हर एक बात का मतलब पूछता है मुझसे “फ़राज़”
कभी जो मेरी ख़ामोशी की तफ्सील लिखा करता था

Meri Khamoshi

woh ab har ek baat ka matlab poochta hai mujhse “FARAZ”
kbhi jo meri khamoshi ki tafseel likha karta tha…


लफ़्ज़ों की तरतीब

लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब”
हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है

Lafzon ki Tarteeb

Lafzon ki tarteeb mujhe bandhni nahi aati “GHALIB”
Hum tum ko yaad karte hain sidhi si baat hai…


इंतज़ार

तेरे जाने के बाद बस इतना सा गिला रहा हमको “मोहसिन “
तू पलट कर देख जाता तो सारी ज़िन्दगी इंतज़ार में गुज़ार देते .

Intezar

Tere jane ke bad bus itna sa gila raha humko “mohsin”
tu palat kar dekh jata to sari zindagi intezar mein guzar dete…


ज़ख़्म खिल उठे

लाज़िम था गुज़ारना ज़िन्दगी से
बिन ज़हर पिये गुज़ारा कब था

कुछ पल उसे देख सकते
अश्कों को मगर गवारा कब था

हम खुद भी जुदाई का सबब थे
उस का ही क़सूर सारा कब था

अब औरों के साथ है तो क्या दुःख
पहले भी कोई हमारा कब था

एक नाम पे ज़ख़्म खिल उठे
क़ातिल की तरफ इशारा कब था

आए हो तो रौशनी हुई है
इस बाम में कोई सितारा कब था

देखा हुआ घर था हर किसी ने
दुल्हन की तरह संवारा कब था

Zakham Khil Uthe

Lazim Tha Guzarna Zindagi Se
Bin Zehar Piye Guzara Kab Tha

Kuch Pal Use Dekh Sakte
Ashkoon Ko Mager Gawara Kab Tha

Ham Khud Bhi Judai Ka Sabab The
Us Ka Hi Qasoor Sara Kab Tha

Ab Auron Ke Sath Hai To Kya Dukh
Phele Bhi Koi Hamara Kab Tha

Ek Naam Pe Zakham Khil Uthe
Qatil Ki Taraf Eshara Kab Tha

Ayee Ho To Roshni Hui Hai
Is Baam Main Koi Setara Kab Tha

Dekha Hua Ghar Tha Har Kisi Ne
Dulhan Ki Tarah Sanwara Kab Tha…

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shayarisms4lovers June18 148 - तेरा रंग-ऐ-हिना – उर्दू हिना शायरी

तेरा रंग-ऐ-हिना – उर्दू हिना शायरी

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हाथों की हिना

चंद मासूम से पतों का लहू है ‘फाखिर’
जिस को महबूब के हाथों की हिना कहते हैं

Haathon Ki Hina

Chand Maasoom Se Patton Ka Lahoo Hai ‘Faakhir’
Jis Ko Mahaboob Ke Haathon Ki Hina Kahte Hain…


मोहताज-ऐ-हिना

खून है दिल ख़ाक में अहवाल-ऐ-बुतान पर यानी
उन के नाखून हुए मोहताज -ऐ -हिना मेरे बाद

Mohtaaj-AE-Hinaa

Khoon Hai Dil Khaak Mein Ahvaal-AE-Butaan Par Yaani
Un Ke Naakhoon Hue Mohtaaj-AE-Hinaa Mere Baad…


पा बस्ता ऐ-ज़ंजीर ऐ-हिना

मैं भी पलकों पे सजा लूँगा लहू की बूँदें
तुम भी पा-बस्ता-ऐ-ज़ंजीर-ऐ-हिना हो जाना

Paa Basta-AE-Zanjeer AE-Hina

Main Bhi Palkon Pe Sajaa Loon Ga Lahoo Ki Boonden
Tum Bhi Paa-Basta-AE-Zanjeer-AE-Hina Ho Jaanaa…


तन्हाई में खुशबू-ऐ-हिना

वो हाथ पराये हो भी गए अब दूर का रिश्ता है “कैसर ”
आती है मेरी तन्हाई में खुशबू-ऐ-हिना धीरे धीरे

Tanhaai Mein Khushboo-AE-Hina

Vo Haath Paraaye Ho Bhi Gaye Ab Door Ka Rishta Hai “Qaisar”
Aati Hai Meri Tanhaai Mein Khushboo-AE-Hina Dheere Dheere…


मेहँदी के वास्ते

मेहँदी के वास्ते वो लहू मांगते हैं रोज़
दिल देना उन को जान का बे-नामा हो गया

Mehndi Ke Vaaste

Mehndi Ke Vaaste Vo Lahoo Maangte Hain Roz
Dil Dena Un Ko Jaan Ka Be-Naamaa Ho Gayaa…


तेरी हिना में

शामिल है मेरा खून-ऐ-जिगर तेरी हिना में
यह काम हो तो अब खून-ऐ-वफ़ा साथ लिए जा

Teri Hena Mein

Shaamil Hai Meraa Khoon-E-Jigar Teri Hena Mein
Ye Kam Ho To Ab Khoon-AE-Vafaa Saath Liye Jaa…


तेरा रंग-ऐ-हिना

न मेरे ज़ख्म खिले हैं न तेरा रंग -ऐ -हिना
मौसम आये ही नहीं अब के गुलाबों वाले

Tera Rang-AE-Hina

Na Mere Zakhm Khile Hain Na Tera Rang-AE-Hina
Mausam Aaye Hi Nahin Ab Ke Gulaabon Vaale…


रंग-ऐ-हिना

रंग-ऐ-हिना के बोझ से उठना मोहाल है …
नाजुक हैं किस क़दर मेरे मेहबूब के पाओं

Rang-E-Hina

Rang-E-Hina Ki Bojh Se Uthna Mohaal Hai
NazukK Hain Kis Qadar Mere Mehboob Ke Paaon…


रंग-ऐ-हिना भी तेरा

हाय अब भूल गया रंग-ऐ-हिना भी तेरा
खत भी कभी खून से तहरीर हुआ करते थे . .

Rang-AE-Hina Bhi Tera

Haaye ab bhool gaya rang-AE-hina bhi tera
Khat bhi kabhi khoon se tehreer hua karte the…


मेहँदी लगा के बैठे हैं

वो जो सर झुका के बैठे हैं
हमारा दिल चुरा के बैठे हैं
हमने उनसे कहा हमारा दिल हमे लौटा दो
तो बोले , हम तो हाथों में , मेहँदी लगा के बैठे हैं

Mehndi Laga ke Baithe Hain

Woh jo sar jhuka ke baithe hain
Hamara dil chura …

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shayarisms4lovers June18 152 - छोड़कर तेरी चाहत पराई लगे दुनिया सारी – तेरे इश्क़ में

छोड़कर तेरी चाहत पराई लगे दुनिया सारी – तेरे इश्क़ में

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बला है इश्क़

कहर है , मौत है , सजा है इश्क़
सच तो यह है बुरी बला है इश्क़
करते सब है पर सब से हारा है इश्क़

Blaa Hai IshQ

Kehar Hai, Mout Hai, Saja Hai IshQ
Sach To Yeh Hai Buri Blaa Hai IshQ
karte sab hai par sab se hara hai ishq


आप की मुस्कुराहट

मेरी किसी खता पर नाराज़ मत होना
अपनी प्यारी सी मुस्कान कभी न खोना
सकून मिलता है देख कर आप की मुस्कुराहट को
मुझे मौत भी आये तो भी तुम मत रोना

Aap ki Muskurahat

Meri kisi khata par naraz mat hona
Apni pyari si muskan kabhi kabhi na khona
Sakoon milta hai dekh kar aap ki muskurahat ko
Mujhe mout bhi aaye to bhi tum mat rona


मेरा इंतज़ार

मुझे भी कोई याद कर रही होगी
अपने सपनो मैं वो मुझे सजा रही होगी
कोई कहे या न कहे मगर
वो मेरा इंतज़ार ज़रूर कर रही होगी

Mera Intezar

Mujhe bhi koi yaad kar rahi hogi
Apne sapno main wo mujhe saja rahi hogi
Koi kahe ya na kahe magar
Wo mera intezar zaroor ka rahi hogi


ज़िन्दगी तेरे नाम

हर बला से खूबसूरत तेरी शाम कर दूँ
प्यार अपना मैं तेरे नाम कर दूँ
मिल जाये अगर दोबारा यह ज़िन्दगी
तो हर बार यह ज़िन्दगी तेरे नाम कर दूँ

Zindagi Tere Naam

Har bla se khubsurat teri sham kar du
pyaar apna main tere naam kar du
Mil jaye agar dobara yeh zindagi
To har bar yeh zindagi tere naam kar du


छोड़कर तेरी चाहत

ज़िन्दगी कुछ अधूरी सी लगे तेरे प्यार के बिना
मुनासीब नहीं है जीना मेरे लिए तेरे साथ के बिना
छोड़कर तेरी चाहत पराई लगे दुनिया सारी
इस दिल ने सीखा नहीं धड़कना तेरी याद के बिना

Chodkar Teri Chahat

Zindagi kuch adhuri si lage tere pyaar ke bina
Munasib nahi hai jeena mere liye tere saath ke bina
Chodkar teri chahat parai lage duniya saari
Is dil ne seekha nahi dhadkna teri yaad ke bina…

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shayarisms4lovers June18 228 - खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा – एक बेवफा

खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा – एक बेवफा

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हमे बेवफा का इल्जाम दे गया

ज़िंदा थे जिसकी आस पर वो भी रुला गया
बंधन वफ़ा के तोड़ के सारे चला गया
खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा
हाथों में हाथ दे के खुद ही छुड़ा गया
कर दी जिसके लिए हमने तबाह ज़िन्दगी
उल्टा वो हमे बेवफा का इल्जाम दे गया

Wo Bewafa ka ilzam de Gaya

Zinda thi jiski aas pe Wo bhi rula gaya
Bandhan Wafa ke tood ke Sare chala gaya
Khud hi to ki thi usne MUHABBAT ki IBTADA
Hathon main hath de ke khud hi chuda gaya
Kardi jiske liye humne Tabah zindagi
Ulta wo BEWAFA ka ilzam de gaya…


तमाशा बन दिया मेरा

क़तरा अब एहतजा करे भी तो किया मिले
दरिया जो लग रहे थे समंदर से जा मिले

हर शख्स दौड़ता है यहां भीड़ की तरफ
फिर यह भी चाहता है उसे रास्ता भी मिले

उस आरज़ू ने और तमाशा बन दिया मेरा
जो भी मिले हमारी तरफ देखता मिले

दुनिया को दूसरों की नज़र से न देखिये
चेहरे न पढ़ सके तो किताबों में किया मिले

Tamasha Bna Diya Mera

Qatra ab ehtjaaj karey bhi to kiya miley
Darya jo lag rahe they samandar se ja miley

Har shakhs dodta hai yahaan bhid ki taraf
Phir yeh bhi chahta hai usay raasta miley

Us aarzu ne aur tamasha bana diya mera
Jo bhi miley hamaari taraf dekhta miley

Duniya ko doosron ki nazar se na dekhiye
Chehre na pad sakey to kitaabon mein kiya miley…


तुझे देखने के बाद

सोचा था के किसी से प्यार न करेंगे हम
बदल गया इरादा तुझे देखने के बाद

चैन से सो जाते थे हम सुहानी रातों में
नींदें उड़ गयी मेरी तुझे देखने के बाद

बहुत नाज़ था चाँद को अपनी चांदनी पर
छुप गया बादलोँ में वो भी तुझे देखने के बाद

क्यूँ करूं मैं रिश्ता तेरी ज़ात के साथ
उठ रहे है सवाल तुझे देखने के बाद

अपने चेहरे को छुपा के रखो खुदा के वास्ते
दिल हो जाता है बेकाबू तुझे देखने के बाद

Tujhe Dekhne ke Baad

Socha tha Ke kisi se Piyar Na karain gay hum
badal gaya Irada tujhe Dekhne ke baad

Chain se So jati The Main In Suhani Ratoon mein
Neendain Urh gayi Meri tujhe Dekhne ke Baad

Bahut Naaz tha Chand ko Apni Chandni Par
Chup gaya Badloun mein wo Bhi tujhe Dekhne Ke Baad

Kyon karo main rishta teri …

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shayarisms4lovers mar18 31 - दिल तो जले मगर ‘राख ‘ न हो – महफ़िल शायरी

दिल तो जले मगर ‘राख ‘ न हो – महफ़िल शायरी

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दिल मौजूद न था

उन को देखा तो कुछ खोने का एहसास हमे हुआ
हाथ सीने पे जो गया तो दिल मौजूद न था

Dil Maujood Na Tha

Un Ko Dekha To kush khone ka Ehsaas hume Hua
Hath Seene Pe jo gaya to Dil Maujood Na Tha


बस दुआ है

और कुछ नहीं चाहती मैं इस ज़िन्दगी में ‘मेरे रब ’
बस दुआ है के किसी के दुःख की वजह मेरी ज़ात न बने

Bas Dua Hai

Aur Kuch Nahi Chahti Main is Zindagi Mein ‘Mere Rab’
bas Dua Hai Ke Kisi Ke Dukh Ki wajha Meri Zaat Na Ho..


मुस्कराहट बनाए रखो

हर एक ख्याल को ज़ुबान नहीं मिलती
हर एक आरज़ू को दुआ नहीं मिलती
मुस्कराहट बनाए रखो तो दुनिया है साथ
आँसुओ को तो आँखों में भी पनाह नहीं मिलती

Muskurahat Banaye Rakho

Har Ek khyal Ko Zuban Nahi Milti
Har Ek Aarzu Ko Dua Nahi Milti
Muskurahat Banaye Rakho To Duniya Hai Sath
Aansoo Ko To Ankhoo Mein Bhi Panah Nahi Milti…


मोहब्बत की आग

करते है मोहब्बत और जताना भूल जाते है
पहले खफा होते हैं फिर मनना भूल जाते है
भूलना तो फितरत सी है ज़माने की
लगाकर आग मोहब्बत की बुझाना भूल जाते है

Mohabbat ki Aag

Karte hai mohabbat aur jtana bhool jate hai
Pehle khfa hote hain fir manana bhool jate hai
Bhulna to fitrat si hai zamane ki
Lagakar aag mohabbat ki bujhana bhool jate hai…


दिल तो जले

वो शमा की महफ़िल ही क्या
जिसमे परवाना जल कर ‘ख़ाक’ न हो
मज़ा तो तब आता है चाहत का मेरे यार
जब दिल तो जले मगर ‘राख ‘ न हो

Dil To Jale

Wo Shama Ki Mehfil Hi Kya
Jisme parvana Jal Kar ‘Khaak’ Na Ho
Maza To Tab Aata Hai Chahat Ka mere yaar
Jab Dil To Jale Magar ‘Raakh’ Na Ho…

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shayarisms4lovers mar18 198 - एक दिल ही था वो भी उस के पास था

एक दिल ही था वो भी उस के पास था

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साक़ी

तेरी शराब कुछ भी नहीं उस की आँखों के सामने “साक़ी “
वो जो देख ले एक नज़र तो पीने की हसरत नहीं रहती

SAQI

Teri Sharab Kuch Bhi Nahi Us Ki Ankhon Ke Samne “SaQi”
Wo Jo Dekh Le Ek Nazar To Peene ki Hasrat Nahi Rehti…


मदहोशी

नज़रों से क्यों इतना पिला देती हो
महखाने की राह भूल गए हैं
गुनाह हो जाये न मदहोशी में
इसी खातिर हरदम दूर बैठे हैं

Madhoshi

Nazaron se kyun itana pila deti ho
Meihkhane ki raah bhool gaye hain
Gunaha ho jaye na madhoshi mein
Isi khatir hardam door baithe hain…


कतरे कतरे से वफ़ा

बेवफा कहने से पहले मेरी रग रग का खून निचोड लेना
कतरे कतरे से वफ़ा न मिली तो बेशक मुझे छोड़ देना

Katre Katre Se Wafa

Bewafa Kehne Se Pehle Meri Rag Rag Ka Khoön nichod Lena
Katre Katre Se Wafa Na Mili To Beshak Mujhe Chod Dena…


तेरी चाहत

पास तुम होते तो कोई शरारत करते
तुझे ले कर बाँहों में मोहब्बत करते

देखते तेरी आँखों में नींद का खुमार
अपनी खोई हुई नींदों की शिकायत करते

तेरी आँखों में अपना अक्स ढूँढ़ते
खुद से भी ज़यादा तेरी चाहत करते

एक दिल ही था वो भी उस के पास था
रात भर जाग कर किस की हिफाज़त करते

Teri Chahat

paas tum Hote To Koi Shararat Karte
Tujhe Le Kar Bahon Mein Mohabbat Karte

Dekhte Teri Ankhon Mein Neend Ka Khumar
Apni Khoyi Hui Neendon ki Shikayat Karte

Teri Aankhon Mein Apna aks Dhoondte
Khud Se Bhi Zayada Teri Chahat Karte

Ek Dil Hi Tha Wo Bhi Us Ke Paas Tha
Raat Bhar Jaag Kar Kis Ki Hifazat Karte…

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shayarisms4lovers mar18 94 - ग़म इसका नहीं की आप मिल न सकोगे – याद शायरी

ग़म इसका नहीं की आप मिल न सकोगे – याद शायरी

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तन्हाई में आंसू

करोगे याद एक दिन साथ बिताए ज़माने को
चले जाएंगे जिस दिन हम कभी वापिस न आने को
करेगा महफ़िल में ज़िकर हमारा कोई तो
चले जाओगे तन्हाई में आंसू वहाने को .

Tanhai Mein Aansu

Karoge Yaad Ek Din Saath Beete Zamane Ko
Chale Jaayenge Jis Din Hum Kabhi Wapas Na Aane Ko
Karega Mehfil Mein Zikr Hamara Koi To,
Chale Jaaoge Tanhai Mein Aansu Bahane Ko…


तुम्हारी याद

सुनो मुझे हर पल तुम्हारी याद आती है ,
कभी साँसों के चलने पे , कभी दिल के मचलने पे ,
कभी आँखें छलकने पे कभी चाँद निकलने पे ,
कभी सूरज के ढलने पे कभी शब के अंधेरों में खो जाने पे
कभी दिन के सबेरों में कभी लोगों के मेले में ,कभी तनहा अकेले में

Tumhari Yaad

Suno Mujhe Har Pal Tumhari Yaad Aati Hai,
Kabhi Saanso Ke Chalne Pe, Kabhi Dil Ke Machalnay Pe,
Kabhi Aankhen Chalakne Pe Kabhi Chand Nikalny Pe,
Kabhi Suraj Ke Dhalne Pe Kabhi Shab Ke Andheron Mein,
Kabhi Din Ke Sawairon Me Kabhi Logon Ke Melay Mein,Kabhi Tanha Akele Mein…


मौत से पहले

रात के अँधेरे में सारा जहाँ सोता है
लेकिन किसी की याद में एक दिल रोता है
खुदा करे की किसी पर कोई फ़िदा न हो
अगर हो तो मौत से पहले जुदा न हो

Maut Se Phele

Raat Ke Andhere Mein Sara Jahan Sota Hai,
Lekin Kisi Ke Yaad Mein Ek Dil Rota Hai,
Khuda Kare Ki Kisi Par Koi Fida Na Ho,
Agar Ho To Maut Se Phele Juda Na Ho…


भुला न सकेंगे

दूर जाकर भी हम दूर जा न सकेंगे
कितना रोएंगे हम बता न सकेंगे ,
ग़म इसका नहीं की आप मिल न सकोगे
दर्द इस बात का होगा की हम आपको भुला न सकेंगे

Bhula na Sakenge

Door jakar bhi hum door jaa na sakenge,
Kitna royenge hum bata na sakenge,
Gham iska nahi ki aap mil na sakoge,
Dard is baat ka hoga ki hum aapko bhula na sakenge…

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shayarisms4lovers mar18 27 1 - यह इश्क़ नहीं आसां – Jigar Moradabadi – Urdu Shayar

यह इश्क़ नहीं आसां – Jigar Moradabadi – Urdu Shayar

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यूं ही दिल के तड़पने का कुछ तो है सबब आखिर
या दर्द ने करवट ली है या तुमने इधर देखा
माथे पे पसीना क्यों आँखों में नमी सी क्यों
कुछ खैर तो है , तुमने जो हाल -ऐ -जिगर देखा

                                                           Jigar Moradabadi – Urdu Shayar

यह इश्क़ नहीं आसां

क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है
हम ख़ाक-नाशिनो की ठोकर में ज़माना है

वो हुस्न -ओ -जमाल उनका यह इश्क़ -ओ -शबाब अपना
जीने की तम्मना है मरने का ज़माना है

या वो थे खफा हम से या हम थे खफा उनसे
कल उनका ज़माना था आज अपना ज़माना है

यह इश्क़ नहीं आसां इतना तो समझ लीजिये
एक आग का दरिया है और डूब के जाना है

आँसू तो बहुत से हैं आँखों में “जिगर” लेकिन
बन जाए सो मोती है बह जाए सो पानी है

Yeh Ishq Nahin Aasaan

kya husn ne samjha hai kya ishq ne jaana hai
ham Khaak-nashinoo ki Thokar mein zamana hai

wo husn-o-jamaal unkaa yeh ishq-o-shabaab apana
jeene ki tamanaa hai marne ka zamana hai

yaa wo the Khafaa hum se yaa hum the Khafaa unse
kal unkaa zamana tha aaj apana zamana hai

yeh ishq nahin aasaan itanaa to samajh lijiye
Ek aag kaa dariyaa hai aur Doob ke jaanaa hai

aansuu to bahut se hain aankhon mein “Jigar” lekin
ban jaaye so moti hai beh jaaye so pani hai..


तुझ को खुदा का वास्ता

इश्क़ फना का नाम है इश्क़ में ज़िन्दगी न देख
जलवा-ऐ-आफताब बंजारे में रोशनी न देख

शौक़ को राहनुमा बना , जो हो चुका कभी न देख
आग दबी हुई निकाल , आग बुझी हुई न देख

तुझ को खुदा का वास्ता तू मेरी ज़िन्दगी न देख
जिस की सहर भी शाम हो उस की सियाह की छबि न देख

Tujh ko Khudaa kaa Baastaa

ishq fanaa kaa naam hai ishq mein zindagi na dekh
jalwa-ae-aaftaab banzarre mein roshani na dekh

shauq ko rahnumaa banaa jo ho chukaa kabhi na dekh
aag dabi huii nikaal aag bujhi hui na dekh

tujh ko Khudaa kaa Baastaa tu meri zindagi na dekh
jis ki sahar bhi shaam ho us ki siyaah shavvi na dekh..


इश्क़ में लाजवाब

इश्क़ में लाजवाब हैं हम लोग
माहताब आफताब हैं हम लोग

गरचे अहल -ऐ -शराब हैं हम लोग
यह न समझो खराब हैं हम लोग

शाम से आ गए जो पीनी पर
सुबह तक आफताब हैं हम लोग…

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shayarisms4lovers may18 81 - यह दुनिया है बस मतलब दी

यह दुनिया है बस मतलब दी

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एक मिलन दी आस

इक दुआ की आस विच सारी रात जागे
पर कोई तारा अम्बरो टूटिया न

चुरा के नज़र लंग गए कोलो दी
उन्हे हाल भी मेरा पुछ्या न

एक मिलन दी आस रही दिल विच
आस आस च जीवन मुक्या न

Ik milan di aas

Ek dua di aas wich sari raat jagge
par koi tarra aambro tutya na

chura ke nazar lang gaye kolo di
Uhna haal vi sada puchya na

ik milan di aas rahi dil wich
aas aas ch jiwan mukya na


गैरां ते हक़

खत लिखदे नू कलम पूछन लगी
तू किस नू अपना दर्द सुनां लगा

कोई तेनु भी याद करदा है
के ऐवें  ही वक़्त गवां लगा

इथे अपनों ते भी कोई मान नहीं
तू क्यों ऐवें गैरां ते हक़ जताओं लगा

Gairan Te Haq

Khat Likhde Nu Kalam Puchan Laggi
Tu Kis Nu Apna Dard Sunaun Lagga

Koi Taniu V Yaad Karda Hai
K Avein Waqt Hi Gawaun Lagga

Ethe Apneya Te V Koi Maan Nahi
Tu Kyo Avein Gairan Te Haq Jataon Lagga


यह दुनिया है बस मतलब दी

रिश्ते वेख के प्यार निभाया कर
हर किसे नू न अपना बनाया कर

यह दुनिया है बस मतलब दी
ऐंवे हर किसे दे पीछे न लग जाया कर

इना मीठा न बन दुनिया निगल जाओगी
कदे बुरा बन के भी दिखया कर

Eh Duniya Hai Bs Matlab Di

Rishte Vekh K Pyar Nibhaya Kar
Har Kise Nu Na Apna Bnaya Kar

Eh Duniya Hai Bas Matlab Di
Ainve Har Kise De Piche Na Lag Jaya Kar

Aina Mitha Na Bn Dunia Nigal Jaugi
Kade Bura Bn K V Dikhaya Kar…

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हम तेरे हिजर में अंदर से बिखर जाते हैं – WASI SHAH SHAYARI

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हिजर

हम तेरे हिजर में अंदर से बिखर जाते हैं
ज़िंदा लगते हैं मगर असल में मर जाते हैं
जब कभी बोलता है हँस के किसी और से तू
कितने खंज़र मेरे सीने में उतर जाते हैं

Hijar

Hum Tere Hijar Mein Andar Se Bikhar Jaate Hain
Zindah Lagte Hain Magar Asal Mein Mar Jaate Hain
Jab Kabhi Bolta Hai Hans Ke Kisi Aur Se TU
Kitne Khanjar Mere Seene Mein Utar Jaate Hain..


वो वादे कसमें तोड़ कर

बहुत दिन हो गए शायद सहारा कर लिया उस ने
हमारे बाद भी आखिर गुज़ारा कर लिया उस ने
हमारा जिकर तो उस के लबों पर आ नहीं सकता
हमें एहसास है हम से किनारा कर लिया उस ने
वो बस्ती ग़ैर की बस्ती वो कूचा ग़ैर का कूचा
सुना है इश्क़ भी अब तो दोबारा कर लिया उस ने
सुना है ग़ैर की बाँहों को वो अपना घर समझता है
लगता है मेरा यह दुःख गवारा कर लिया उस ने
भुला कर प्यार की कसमें वो वादे तोड़ कर “वासी ”
किसी को ज़िन्दगी से भी प्यारा कर लिया उस ने

Wo vade kasmein Todh Kar

Bahut Din Ho Gaye Shayad Sahara Kar Liya Us Ne
Hamare Baad Bhi Akhir Guzara Kar Liya Us Ne
Hamara Zikar To Us Ke Labon Par aa Nahin Sakta
hamein Ehsas Hai Hum Se Kinara Kar Liya Us Ne
Wo Basti Ghair Ki Basti Wo Koocha Ghair Ka Koocha
Suna Hai Ishq Bhi Ab To Dobara Kar Liya Us Ne
Suna Hai Ghair Ki Bahon Ko Wo Apna Ghar Samajhta Hai
Lagta Hai Mera Yeh Dukh Gawara Kar Liya Us Ne
Bhula Kar Pyar Ki kasmein Wo vade Todh Kar “Wasi”
Kisi Ko Zindagi Se bhi Pyara Kar Liya Us Ne..


तलाश

अजीब हिजर परस्ती थी उस की फितरत में
सहजर के टूटे पते तलाश करता था .
तमाम रात वो पर्दै हटा के चाँद के साथ ,
जो खो गए था वो लम्हे तलाश करता था .
दुआएं करता था उजड़े हुए मज़ारों पर
बड़े अजीब सहारे तलाश करता था
मुझे तो आज बताया है बादलों ने “वासी”
वो लौटने के रस्ते तलाश करता था .

Talash

ajeeb hijar parasti thi us ki fitrat mein
shajar ke tootte patty talash karta tha.
tamam raat wo pardy hata k chand k sath,
jo kho gaye thy wo lamhy talash karta tha.
duayein karta tha ujdhe huye mazaron par
badhe ajeb sahare talash karta tha.…

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shayarisms4lovers mar18 01 - हीर शायरी – वारिस शाह

हीर शायरी – वारिस शाह

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लिखी रांझे नाम ये हीर हुंदी

की मुक जाना सी वारिस शाह दा,
लिखी रांझे नाम ये हीर हुंदी .

वख रूह नालो रूह न हो सकदी ,
न दिल चो वख तस्वीर हुंदी .
नशा अख दा इक वारी चढ़ जावे ,
पूरी इश्क़ दी फिर तासीर हुंदी .

झूठा रब्ब नू तुस्सी केहन वालयो ,
निगाह मेरी नाल ये देख लावो ,

झूठ अख कदे नी कह सकदी ,
निगाह यार दी निगाहे -ऐ -पीर हुंदी .

तेरी अख तो ओहले मैं हुँदा न ,
मंदी ऐनी ये न तक़दीर हुंदी .

Likhi Ranjhe Naam Je Heer Hundi

Ki Mukk Jana Si Waris Shah Da,
Likhi Ranjhe Naam Je Heer Hundi.

Vakh Rooh Naalo Rooh na Ho Sakdi,
Nai Dil Cho Vakh Tasveer Hundi.

Nasha Akh Da Ik Vaari Chadh Jave,
Poori Ishq Di Fer Taseer Hundi.

Jhootha Rabb Nu Tussi Kehen Waleyo,
Nigah Meri Naal Je Dekh Lavo,

Jhooth Akh Kade Ni Keh Sakdi,
Nigah Yaar Di Nigahe-E-Peer Hundi.

Teri Akh To Ohle Manu Hunda Na,
Maadi Enni Je Na Taqdeer Hundi.…

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shayarisms4lovers mar18 101 - ऑंखें तो प्यार में दिल की ज़ुबान होती है – इश्क़ बेवफा

ऑंखें तो प्यार में दिल की ज़ुबान होती है – इश्क़ बेवफा

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बड़े शौक़ से मर जाएँगे

आओ किसी रोज़ मुझे टूट के बिखरता देखो
मेरी रगो में ज़हर जुदाई का उतरता देखो
किस किस तरह से तुझे माँगा है खुद से हमने
आओ कभी मुझे सजदों में सिसकता देखो
तेरी तलाश में हम ने खुद को खो दिया है
मत आओ सामने मगर कहीं छुप के मुझे तड़पता देखो
बड़े शौक़ से मर जाएँगे हम मगर वरना
तुम सामने बैठ कर सांसों का तसलसुल टूटता देखो

Bade Shoq Se Mar Jayeinge

Aao Kisi roz Mujhe Toot Ke Bikhrta Dekho
Meri Ragon Mein Zehar Judai Ka Uterta Dekho
Kis Kis Ada Se Tujhe Maanga Hai khuda Se
Aao Kabhi Mujhe Sajdon Mein Sisakta DekHo
Teri Talaash Mein Hum Ne Khud Ko Kho Diya Hai
Mat Aao Saamne Mgar Kahin Chup Ke Mujhe Tarapta Dekho
Bade Shoq Se Mar Jaein gay Hum magar warna
Tum Saamne Baith Kar sansoon Ka Tasalsul Tootta Dekho


वफ़ा की तलाश

जो भी मिला वो हम से खफा मिला
देखो हमे मोहब्बत का क्या सिला मिला
उम्र भर रही फ़क़त वफ़ा की तलाश हमे
पर हर शख्स मुझ को ही क्यों बेवफा मिला

Wafa Ki Talash

jo bhi mila woh ham se khafa mila
dekho dosti ka kya sila mila
umar bhar rahi faqat wafa ki talash
par har shaks mujh ko hi kyon bewafa mila


प्यार में दर्द

ऑंखें तो प्यार में दिल की ज़ुबान होती है
सच्ची चाहत तो सदा बेज़ुबान होती है
प्यार में दर्द भी मिले तो क्या घबराना
सुना है दर्द से ही चाहत जवाँ होती है

Pyar Mein Dard

Ankhen to pyar me dilki zuban hoti hai
Sachi chahat to sada bezuban hoti hai
Pyar mein dard bhi mile to kya ghabrana
Suna hai dard se hi chahat jawan hoti hai…

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shayarisms4lovers mar18 190 - शायरी – एक मुसाफिर अजनबी

शायरी – एक मुसाफिर अजनबी

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मुसाफिर के रास्ते बदलते रहे

मुसाफिर के रास्ते बदलते रहे , मुक़द्दर में चलना था चलते रहे
मेरे रास्तों में उजाला रहा , दीये उसकी आँखों में जलते रहे

कोई फूल सा हाथ कंधे पे था , मेरे पाओं शोलों पे चलते रहे
सुना है उन्हें भी हवा लग गयी , हवाओं के जो रुख बदलते रहे

वो क्या था जिसे हमने ठुकरा दिया , मगर उम्र भर हाथ मलते रहे
मोहब्बत , अदावत , वफ़ा , बेरुखी , किराये के घर थे बदलते रहे
लिपट कर चिराग़ों से वो सो गए , जो फूलों पे करवट बदलते रहे..


मुसाफिर के साथ तू ने क्या किया

इस राह -ऐ -उल्फत के मुसाफिर के साथ तू ने क्या किया
कभी अपना लिया कभी ठुकरा दिया

मेरी मोहब्बत तेरे नाम का मुहाल तो नहीं
कभी बना लिया कभी गिरा दिया

मैं तेरी किताब -ऐ -ज़िंदगी का वो हर्फ तो नहीं हूँ जिसे
कभी लिख लिया कभी मिटा दिया

मेरा साथ तेरे लिए बाईस-इ-रुस्वाई तू नहीं जिसे
कभी दुनिया को बतला दिया कभी छुपा लिया

आज कल लोगों का यही मशग़ला है “मुसाफिर”
कभी हमें सोच लिया तो कभी भुला दिया..


ऐ मुसाफिर

दुनिया के ऐ मुसाफिर मंज़िल तेरी कब्र है
और जिस सफर पर तू चला है , दो दिन का वो सफर है..


अजनबी मुसाफिर

अजनबी राहों के अजनबी मुसाफिर
आ कर मुझसे पूछ बैठा है रास्ता बता दो गे

अजनबी राहों के , अजनबी मुसाफिर सुन
रास्ता कोई भी हो , मंज़िले नहीं मिलती

मंज़िलें तो धोखा हैं , मंज़िलें जो मिल जायें
जुस्तुजू नहीं रहती , ज़िन्दगी को जीने की आरज़ू नहीं रहती ..


एक गुमनाम मुसाफिर

एक गुमनाम मुसाफिर की तरह चुपके से
खुद को इस भीड़ में खो देने को जी चाहता है

इक इरादा ख़ाक की हर दुःख से दिला देगी निजात
खुद को मट्टी में समा देने को जी चाहता है

दर्द ऐसा है के मरहम की बजाए ‘मुसाफिर’
दिल में निश्तर सा चुभो देने को जी चाहता है..


मुसाफिर घर का रास्ता भूल गया

दर बेदर फिरा मुसाफिर घर का रास्ता भूल गया
क्या है तेरा क्या है मेरा अपना पराया भूल गया

कैसे दिन थे कैसी रातें कैसी बातें बीत गयी
मन बालक है पहले पियार का सुन्दर सपना भूल गया

याद के फेर में आकर दिल पर ऐसी फिर एक चोट लगी
दुःख में सुख है सुख में दुःख है भेद यह करना भूल गया

एक नज़र की एक ही पल की …

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