संत कबीर अनमोल वाणी – कबीर के दोहे

संत कबीर वाणी कबीरा खड़ा बाजार में मांगे सब की खैर न कहु से दोस्ती न कहु से बैर —- बुरा जो देखन में चला , बुरा न मिलया कोई , जो मन खोजा अपना तो मुझ से बुरा न कोई —- चलती चक्की देख के दिया कबीरा रोए दुई पाटन के बीच में साबुत बचा न कोई   —- कल करे सो आज कर , आज करे सो अब पल में परलय होगी , बहुरि करोगे कब संत कबीर दास के साधु बचन साईं इतना दीजिये जिसमे  कुटुम्ब समाए , मैं भी भूखा न रहूँ , साधु भी न भूखा जाए —- दुःख में सिमरन सब करें , सुख में करे न कोई जो सुख में सिमरन करे , तो दुःख कहे को होये . —- ऐसी वाणी बोलिये , मन का आपा खोये , अपना तन शीतल करे , औरों को सुख होये . —- धीरे धीरे रे मन धीरे सब कुछ होये , माली सींचे सौ घड़ा , ऋतू आये फल होये . दोहे संत कबीर के जाती न पूछो साधु की , पूछ लीजिये ज्ञान मोल करो तलवार का पड़ी रहें जो मयान . —- जीवत समझे जीवत बुझाय , जीवत ही करो आस , जीवत […]

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एक उम्मीद ज़िन्दगी की – पारिवारिक ज्ञान

उम्मीद  उस   ख़ुशी  का  नाम  है  जिस  के  इंतज़ार  में  ग़म  के  अय्याम  कट  जाते  हैं  रिश्ते आजकल उंगलिया ही निभा रही है रिश्ते आजकल, जुबां से निभाने का वक़्त कहाँ है सब टच में बिजी है पर टच में कोई नहीं है एक उम्मीद ज़िन्दगी की – पारिवारिक ज्ञान – उंगलिया ही निभा रही है रिश्ते आजकल रिश्तों की सिलाई रिश्तों की सिलाई अगर भावनाओ से हुई है तो टूटना मुश्किल है और अगर स्वार्थ से हुई है तो टिकना मुश्किल है एक उम्मीद ज़िन्दगी की – पारिवारिक ज्ञान – रिश्तों की सिलाई ज़िन्दगी का गणित कुएं में उतरने वाली बाल्टी यदि झुकती है तो भर कर बाहर निकलती है ज़िन्दगी का भी यही गणित है जो झुकता है वह प्राप्प्त करता है एक उम्मीद ज़िन्दगी की – पारिवारिक ज्ञान – ज़िन्दगी का भी यही गणित है ज़िन्दगी का मकसक बस दिलो को जीतना ही ज़िन्दगी का मकसक होना चाहिए, वरना , दुनिया जीतकर भी सिकंदर खाली हाथ ही गया था एक उम्मीद ज़िन्दगी की – पारिवारिक ज्ञान – दिलो को जीतना ही ज़िन्दगी का मकसक होना चाहिए वक़्त और हालात जिस तरह मौसम बदलने का एक वक़्त होता है इसी तरह वक़्त बदलने का भी एक मौसम […]

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