Urdu Mehfil Shayari – Parveen Shakir,Ibrahim Zauq,Jigar Moradabadi & Muneer Niyazi

Mehfil shayari - Urdu Mehfil Shayari – Parveen Shakir,Ibrahim Zauq,Jigar Moradabadi & Muneer Niyazi



ख्याल जिसका था मुझे ख्याल में मिला मुझे 
सवाल का जवाब भी सवाल में मिला मुझे

BY Poetry – MUNEER NIYAZI

हम तो समझे थे की एक ज़ख़्म है भर जायेगा 
क्या खबर थी की रग-ऐ -जान में उतर जायेगा

BY Poetry – Parveen Shakir

पास जब तक वो रहे दर्द थम जाता है 
फ़ैल जाता है फिर आँख के काजल की तरह

BY Poetry – Parveen Shakir

तुम जिसे याद करो फिर उसे क्या याद रहे 
न खुद की हो परवाह न खुदा याद रहे

BY Poetry – Ibrahim Zauq

हम नहीं वो जो करें खून का दावा तुझ पर 
बाकि पूछेगा खुदा भी तो मुकर जायेंगे

BY Poetry – Ibrahim Zauq

क्या जाने उसे वहां है क्या मेरी तरफ से 
जो ख्वाब में भी रात को तनहा नहीं आता

BY Poetry – Ibrahim Zau

मेरी ज़िन्दगी तो गुज़री तेरे हिजर के सहारे 
मेरी मौत को भी प्यारे कोई चाहिए बहाना

BY Poetry – Jigar Moradabadi

कुछ खटकता तो है पहलु में मेरे रह रह कर 
अब खुदा जाने तेरी याद है या दिल मेरा

BY Poetry – Jigar Moradabadi


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बशीर बद्र – उर्दू शायरी & ग़ज़ल

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हमा वक़्त रंज-ओ-मलाल क्या , जो गुज़र गया सो गुज़र गया
उसे याद कर के न दिल दुखा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                  न गिला किया न खफा हुए , यूं ही रास्ते में जुदा हुए
                  न तू बेवफा न में बेवफा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

वो ग़ज़ल की एक किताब था , वो गुलाबों में एक गुलाब था
ज़रा देर का कोई ख्वाब था , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                   मुझे पतझड़ों की कहानिया , न सुना सुना कर उदास कर
                   तू ख़िज़ाँ का फूल है मुस्कुरा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

वो उदास धूप समेट कर , कहीं वादियों में उतर चूका
उसे अब न दे मेरे दिल सदा ,जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                  यह सफर भी कितना तवील है , यहाँ वक़्त कितना क़लील है
                 कहाँ लौट कर कोई आएगा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

वो वफ़ाएँ थी या जफायें थी , यह न सोच किस की खतायें थी
वो तेरे है उस को गले लगा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                  तुझे ऐतबार -ओ -यकीन नहीं , न ही दुनिया इतनी बुरी नहीं
                  न मलाल कर मेरे साथ आ , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।


Hama Waqt Ranj-O-Malaal Kya , Jo Guzaar Gaya So Guzar Gaya
Usay Yaad Kar Key Na Dil Dukha , Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                    Na Gila Kiya Na Khafa Hue, Yoon Hi Raastey Mein Juda Hue
                    Na Tu Bewafa Na Mein Bewafa, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

Wo Gazal Ki Ek Kitab Tha , Wo Gulabon Mein Ek Gulab Tha
Zara Der Ka Koi Khwaab Tha, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                    Mujhey Patjharon Ki Kahaniya , Na Suna Suna Kar Udaas Kar
                    Tu Kizaan Ka Phool Hai Muskura, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

Wo Udaas Dhoop Samait Kar , Kahin Wadiyon Mein Utaar Chuka
Usay Ab Na Dey Mere Dil Sada,Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                    Yeh Safaar Bhi Kitna Taweel Hai, Yahan Waqt Kitna Qaleel Hai
                   Kahan Laut Kat Koi Ayee Ga , Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

Wo Wafaein Thi Ya Jafaien Thi, Yeh Na Soch Kis Ki Khataien Thi
Wo Tere Hai Us Ko Gale Laga, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                  Tujhe Aitbar-O-Yakeen Nahin, Na Hi Duniya Itni Buri Nahi
                  Na Malaal Kar Mere Saath Aa , Jo Guzaar Gya So …

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shayarisms4lovers mar18 127 - हिंदी और उर्दू शायरी – दो लाइन शायरी – Daag , Perveen , Naqvi Shayari

हिंदी और उर्दू शायरी – दो लाइन शायरी – Daag , Perveen , Naqvi Shayari

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न जाने कौन

न जाने कौन सा आसब दिल में बसता है
के जो भी ठहरा वो आखिर मकान छोड़ गया …

Na jane kaun

Na jane kaun sa aasaab dil mein basta hai
Ke jo bhi thehra wo aakhir makaan chod gaya


तुझी को पूछता रहा

बिछड़ के मुझ से , हलक़ को अज़ीज़ हो गया है तू ,
मुझे तो जो कोई भी मिला , तुझी को पूछता रहा

Tujhi ko puchta raha

Bichar ke mujh se, halaq ko aziz ho geya hai tu
Mujhe to jo koi mila, tujhi ko puchta raha


मेरे हम-सकूँ 

मेरे हम-सकूँ  का यह हुक्म था के कलाम उससे मैं कम करूँ ..
मेरे होंठ ऐसे सिले के फिर उसे मेरी चुप ने रुला दिया …

Mere hum-sukhan

Mere hum-sukhan ka yeh hukm tha ke kalaam us se main kam karoon..
mere hont aise sile ke phir usey meri chup ne rula diya ….


यह शब-ऐ-हिजर

यह शब-ऐ-हिजर तो साथी है मेरी बरसों से
जाओ सो जाओ सितारों के मैं ज़िंदा हूँ अभी

Shab-ae-hizar

Yeh Shab-ae-hizar To Sathi Hai Meri Barsoon Se
Jao So Jao Sitaro Ke Main Zinda Hoon Abhi


न आना तेरा

ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा
ऐसे आने से तो बेहतर था न आना तेरा

Na aanaa Tera

Le chalaa jaan meri ruth ke jaana tera
aise aane se to behtar tha na aanaa tera…

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shayarisms4lovers June18 148 - हर धड़कन में एक राज़ होता है – धड़कन उर्दू शायरी

हर धड़कन में एक राज़ होता है – धड़कन उर्दू शायरी

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बहुत देर कर दी तुमने मेरी धड़कन महसूस करने में
वो दिल नीलाम हो गया जिस को कभी हसरत तुम्हारे दीदार की थी

हर धड़कन में एक राज़ होता है

हर धड़कन में एक राज़ होता है
हर बात कहने का एक अंदाज़ होता है
जब तक ठोकर न लगे इश्क़ में
हर किसी को अपने महबूब पे नाज़ होता है

Har Dhadkan Mein Ek Raaz Hota Hai

Har Dhadkan mein ek raaz hota hai
Har baat kehne ka ek andaaz hota hai
Jab tak thokar na lage ishq mein
Har kisiko apne mehboob pe naaz hota hai


धड़कन ज़रा थम जा

शोर न कर धड़कन ज़रा थम जा कुछ पल के लिए
बड़ी मुश्किल से मेरी आँखों में उसका खवाब आया है

Dhadkan Zara Tham Ja

Shor Na Kar Dhadkan Zara Tham Ja Kuch Pal Ke Liye
Badi Muskil Se Meri Aankhon Mein Uska Khawab Aaya hai


दिल की धड़कन को धड़का गया कोई

दिल की धड़कन को धड़का गया कोई
मेरे ख्वाबों को जगा गया कोई
हम तो अनजाने रास्तो पे यूं ही चल रहे थे
अचानक ही प्यार का मतलव भी सीखा गया कोई

Dil ki Dhadkan ko Dhadka Gaya Koi

Dil ki dhadkan ko dhadka gaya koi
Mere khawaboon ko jgaa gaya koi
Hum to anjane rasto pe yoon hi chal rahe the
Achanak hi pyar ka matlab sikha gaya koi


दिल का धड़कना माँगोगे

मेरी धड़कनो से दिल का धड़कना माँगोगे
एक दिन तुम मुझसे मेरा प्यार उधर माँगोगे
मैं वो फूल हूँ जो तेरे चमन से न खिलेगा
एक दिन तुम अपनी वीरान ज़िन्दगी के लिए बहार माँगोगे

Dil Ka Dhadknaa Mangoge

Meri Dhadkano Se Dil Ka Dhadknaa Mangoge
Ek Din Tum Mujhse Mera Pyaar Udhar Mangoge
Main Wo Phool Hoon Jo Tere Chaman Se Na khilega
Ek din tum Apni Viran Zindagi Ke Liye Bhaar Mangoge


मेरी साँसे उसकी धड़कन में बस्ती है

आज भी मेरे दिल में वो रहती है
आज भी मेरे सपनो में वो दिखती  है
क्या हुआ अब हम दूर है एक दुसरे से पर
आज भी मेरी साँसे उसकी धड़कन में बस्ती है

Meri Saanse Uski Dhadkan Mein Basti Hai

Aaj Bhi Mere Dil Mein Wo rehti Hai
Aaj Bhi Mere Sapno Me Wo Dikhti Hai
Kya Hua Ab Hum Door Hai Ek Dosre Se Par
Aaj Bhi Meri Saanse Uski Dhadkan mein basti Hai


धड़कन है मेरे दिल की

धड़कन है मेरे दिल की तू आँखों का …

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shayarisms4lovers mar18 205 - शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

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मेरी वेहशत

इश्क़ मुझको नहीं वेहशत ही सही
मेरी वेहशत तेरी शोहरत ही सही
कटा कीजिए न तालुक हम से
कुछ नहीं है तो अदावत ही सही

Meri Wehshat

Ishq mujhko nahin wehshat hi sahi
Meri wehshat teri shohrat hi sahi
kta kijiay na taaluq hum se
kuch nahin hai to adaawat he sahi…


शब-ऐ-इंतज़ार

वो गया तो साथ ही ले गया सभी रंग उतार के शहर के
कोई शख्स था मेरे शहर में किसी दूर पार के शहर का
चलो कोई दिल तो उदास था , चलो कोई आँख तो नम थी
चलो कोई दर तो खुला रहा शब-ऐ-इंतज़ार के शहर का

Shab-ae-Intezaar

Wo Gaya To Saath Hi Le Gaya Sabhi Rang Utaar Ke Shehar Ke
Koi Shakhs Tha Mere Shehar Mein Kisi Door Paar Ke Shehar Ka
Chalo Koi Dil to Udaas Tha, Chalo Koi Aankh To Num thi
Chalo Koi Dar To Khula Raha Shab-ae-Intezaar Ke Shehar Ka…


तुम्हारे ख्याल

बहुत दिनों से मेरे ज़ेहन के दरीचे मैं
ठहर गया है तुम्हारे ख्याल का मौसम
यूं भी यकीन हो बहारें उजड़ भी सकती हैं
तो आ के देख मेरे ज़वाल का मौसम

Tumhare Khyal

Bahut Dino Se Mere Zehan Ke Darichoon Main
Thehar Gaya Hai Tumhare Khyal Ka Mausam
Jo bhi Yaqeen hio Baharain Ujar Bhi Sakti Hain
To Aa Ke Deakh Mere Zawaal Ka Mausam…


खुदा बचाए

हमारे हाल पर वो मुस्करा तो देते हैं
चलो यही सही , कुछ तो ख़याल करते हैं
खुदा बचाए तुझे इन वफ़ा के मारों से
जवाब जिस का न हो वो सवाल करते हैं

Khudaa bachaaye

hamaare Haal par wo muskura to dete hain
chalo yahi sahi, kuChh to Khayaal karte hain
Khudaa bachaaye tujhe in wafaa ke maaron se
jawab jis ka na ho wo savaal karte hain……

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shayarisms4lovers June18 202 - Best Ever Shayari Colletion of Munir Niazi – मुनीर नियाज़ी शायरी मजमूआ

Best Ever Shayari Colletion of Munir Niazi – मुनीर नियाज़ी शायरी मजमूआ

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उसके जाने का रंज

मेरी सदा हवा में बहुत दूर तक गयी
पर मैं बुला रहा था जिसे , वो बेखबर रहा
उसकी आखिरी नज़र में अजब दर्द था “मुनीर”
उसके जाने का रंज मुझे उम्र भर रहा

Uske Jaane Ka Ranj

Meri Sada Hawa Mein Bohat Door Tak Gayi
Par Main Bula Raha Tha Jise, wo Bekhabar Raha
Uski Aakhiri Nazar Mein Ajab Dard Tha “Munir”
Uske Jaane Ka Ranj Mujhe Umar Bhar Raha


हम जवाब क्या देते

किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते
सवाल सारे ग़लत थे, हम जवाब क्या देते
हवा की तरह मुसाफिर थे, दिलबरों के दिल
उन्हें बस एक ही घर का अजाब क्या देते

Hum Jawab Kya Dete

Kisi Ko Apnay Amal Ka Hisaab Kya Dete
Sawaal Saare Ghalat The, Hum Jawab Kya Dete
Hawa Ki Tarha Musafir The, Dilbaron Ke Dil
Unhain Bus Ak Hi Ghar Ka Azaab Kya Dete


ज़ुल्म मेरे नाम

शहर में वो मोअतबर मेरी गवाही से हुआ
फिर मुझे इस शहर में नमोअतबर उसी ने किया
शहर को बर्बाद करके रख दिया उस ने “मुनीर”
शहर पर यह ज़ुल्म मेरे नाम पर उसने किया

Zulam Mere Naam

Shehar mein wo moatbir meri gawahi se huwa
Phir mujhe is shehar mein namoatbir usi ne kiya
Shehar ko barbaad kar kay rakh diya us ne “Munir”
Shehar par yeh zulam mere naam per usi ne kiya


ऐसे भी हम नहीं

ग़म से लिपट जाएंगे ऐसे भी हम नहीं
दुनिया से कट ही जाएंगे ऐसे भी हम नही
इतने सवाल दिल में हैं और वो खामोश देर
इस देर से हट जाएंगे ऐसे भी हम नहीं

Aise Bhi Hum Nahi

Gham say lipat jaingay Aise bhi hum nahi
Duniya say kat hi jaingay Aise b hum nahi
Itnay sawal dil mein hain or wo khamosh der
Is der say hat jaingay Aise bhi hum nahi


गम की बारिश

गम की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहीं
तूने मुझ को खो दिया मैंने तुझे खोया नहीं
जानता हूँ एक ऐसे शख्स को मैं भी “मुनीर”
गम से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं

Gam Ki Barish

Gam ki barish ne bhi tere naqsh ko dhoya nahin
Tune mujh ko khoo diya mainne tujhe khoya nahin
Janata hoon Ek aise shaKhs ko main bhi “Munir”
Gam se patthar ho gaya lekin kabhi roya nahin


शहर-ऐ-संगदिल

इस शहर-ऐ-संगदिल को जला देना चाहिए
फिर इस की ख़ाक को भी उड़ा देना …

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shayarisms4lovers June18 269 - ज़ख्म-ऐ जिगर

ज़ख्म-ऐ जिगर

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सज़ा

डूबी हैं मेरी उंगलियां खुद अपने ही लहू में ,
यह कांच के टुकड़ों को उठने की सज़ा है ..

Sazaa

Doobi hain meri ungliyaan khud apne hi lahuu main,
Yeh kaanch ke tukrron ko uthaney ki sazaa hai..


गुज़रे हुए वक़्त की यादें

सजा बन जाती है गुज़रे हुए वक़्त की यादें ,
न जाने क्यों छोड़ जाने के लिए मेहरबान होते हैं लोग …

Guzre Hue Waqt Ki Yaadein

Saza Ban Jati Hai Guzre Hue Waqt Ki Yaadein,
Najaane Kyun ChoOr Jaane K Liye Meharban Hote Hein LoOg…


तेरी एक निगाह

मेरे पास इतने सवाल थे मेरी उम्र में न सिमट सके
तेरे पास जितने जवाब थे तेरी एक निगाह में आ गए

Teri ek nigaah

Mere paas itnay sawaal thay meri umar se na simat sakay
Tere paas jitnay jawaab thay teri ek nigaah main aa gaye!!


ज़ख्म-ऐ जिगर

दर्द क्या होता है बताएंगे किसी रोज़
कमाल की ग़ज़ल है तुम को सुनाएंगे किसी रोज़

थी उन की जिद के मैं जाऊँ उन को मनाने
मुझ को यह बेहम था वो बुलाएंगे किसी रोज़

कभी भी मैंने तो सोचा भी नहीं था
वो इतना मेरे दिल को दुखाएंगे किसी रोज़

हर रोज़ शीशे से यही पूछता हूँ मैं
क्या रुख पे तबस्सुम सजाएंगे किसी रोज़

उड़ने दो इन परिंदों को आज़ाद फ़िज़ाओं में
तुम्हारे हों अगर तो लौट आएंगे किसी रोज़

अपने सितम को देख लेना खुद ही साक़ी तुम
ज़ख्म-ऐ -जिगर तुमको दिखायेगें किसी रोज़

Zakham-AE-Jigar

Dard Kya Hota Hai Batayein Gay Kisi Roz
Kamal Ki Ghazal Tum Ko Sunayein Gay Kisi Roz

Thi Un Ki Zid Ki Main Jaaoun Un Ko Manane
Mujh Ko Ye Veham Tha Wo Bulayein Gay Kisi Roz

Kabi Bhi Maine To Socha Bhi Nahi Tha
Wo Itna Mere Dil Ko Dukhayein Gay Kisi Roz

Har Roz Sheshay Se Yehi Poochta Hoon Main
Kya Rukh Pe Tabassum Sajayein Gay Kisi Roz

Urney Do In Parindon Ko Azaad Fizaon Mein
Tumhare Hon Agar To Lout Aayein Gay Kisi Roz

Apne Sitam Ko Dekh Lena Khud Hi Saqi Tum
Zakhm-AE-Jigar Tumko Dekhein Gay Kisi Roz…

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shayarisms4lovers June18 264 - तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी

तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी

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मेरे मर जाने की वो सुन के खबर आई  “मोहसिन”
घर से रोते हुए वो बिन ज़ुल्फ़ सँवारे निकले

ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे

ऐसा लगता है तेरी ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे
होके गुलशन से सबा आज चली हो जैसे
अध खुले होंठ सियाह ज़ुल्फ़ और गज़ली ऑंखें
किसी शायर ने कोई ग़ज़ल तर्ज़ की हो जैसे

Zulf khuli ho jaise

Aisa lagta hai teri zulf khuli ho jaise
Hoke Gulshan se saba aaj chali ho jaise
Adh khule hont siyah zulf aur gazali ankheN
Kisi shayar ne koi gazal tarz ki ho jaise…


ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये

यह ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये तो अच्छा है
इस रात की तक़दीर सँवर जाये तो अच्छा है
जिस तरह से थोड़ी सी ज़िन्दगी तेरे साथ कटी है
बाकी भी उसी तरह गुज़र जाये तो अच्छा है
वैसे तो तुम्ही ने मुझे बर्बाद किया है
इल्ज़ाम किसी और के सिर जाये तो अच्छा है

Zulf Agar Khul ke Bikhar Jaye

Yeh zulf agar khul ke bikhar jaye to accha hai
Is raat ki takdir sanwar jaye to accha hai
Jis tarah se thodi si zindagi tere saath kati hai
Baaki bhi usi tarah guzar jaye to accha hai
Waise to tumhi ne mujhe barbaad kiya hai
Ilzaam kisi aur ke sar jaye to accha hai….


परेशान ज़ुल्फ़-ऐ-यार

छलके हुए थे जाम परेशान थी ज़ुल्फ़-ऐ-यार
कुछ ऐसे हादसात से घबरा के पी गया
कांटे तो खैर कांटे हैं इस का गिला ही क्या
फूलों की वारदात से घबरा के पी गया .

Pareshaan Zulf-AE-Yaar

Chhalke hue the jaam pareshaan thi zulf-AE-yaar
kuchh aise haadsaat se ghabra ke pee gaya
Kaante to khair kaante hain iss ka gila hi kya
phoolon ki waardaat se ghabra ke pee gaya…


ज़ुल्फ़ रातों सी

ज़ुल्फ़ रातों सी , रंगत है उजालों जैसी
पर तबियत है वही , भूलने वालों जैसी
ढूढ़ता फिरता हूँ , लोगों में शबाहत उसकी
के वो ख्वाबों में भी लगती है , ख्यालों जैसी

Zulf Raaton Si

Zulf raaton si, rangat hai ujaalon jaisi
par tabiyat hai wohi, bhulne walon jaisi
?Dhoonta phirta hun, logon mein shabahat uski?
ke wo khwabon mein bhi lagti hai, khayalon jaisi….


चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़

चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन
क्यों रोज़ गरजते हो बरस जाओ किसी दिन
राज़ों की तरह उतरो मेरे दिल में किसी शब्
दस्तक पे मेरे हाथ की खिल जाओ किसी दिन

Chehre pe mere Zulf

Chehre pe …

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shayarisms4lovers June18 228 - खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा – एक बेवफा

खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा – एक बेवफा

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हमे बेवफा का इल्जाम दे गया

ज़िंदा थे जिसकी आस पर वो भी रुला गया
बंधन वफ़ा के तोड़ के सारे चला गया
खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा
हाथों में हाथ दे के खुद ही छुड़ा गया
कर दी जिसके लिए हमने तबाह ज़िन्दगी
उल्टा वो हमे बेवफा का इल्जाम दे गया

Wo Bewafa ka ilzam de Gaya

Zinda thi jiski aas pe Wo bhi rula gaya
Bandhan Wafa ke tood ke Sare chala gaya
Khud hi to ki thi usne MUHABBAT ki IBTADA
Hathon main hath de ke khud hi chuda gaya
Kardi jiske liye humne Tabah zindagi
Ulta wo BEWAFA ka ilzam de gaya…


तमाशा बन दिया मेरा

क़तरा अब एहतजा करे भी तो किया मिले
दरिया जो लग रहे थे समंदर से जा मिले

हर शख्स दौड़ता है यहां भीड़ की तरफ
फिर यह भी चाहता है उसे रास्ता भी मिले

उस आरज़ू ने और तमाशा बन दिया मेरा
जो भी मिले हमारी तरफ देखता मिले

दुनिया को दूसरों की नज़र से न देखिये
चेहरे न पढ़ सके तो किताबों में किया मिले

Tamasha Bna Diya Mera

Qatra ab ehtjaaj karey bhi to kiya miley
Darya jo lag rahe they samandar se ja miley

Har shakhs dodta hai yahaan bhid ki taraf
Phir yeh bhi chahta hai usay raasta miley

Us aarzu ne aur tamasha bana diya mera
Jo bhi miley hamaari taraf dekhta miley

Duniya ko doosron ki nazar se na dekhiye
Chehre na pad sakey to kitaabon mein kiya miley…


तुझे देखने के बाद

सोचा था के किसी से प्यार न करेंगे हम
बदल गया इरादा तुझे देखने के बाद

चैन से सो जाते थे हम सुहानी रातों में
नींदें उड़ गयी मेरी तुझे देखने के बाद

बहुत नाज़ था चाँद को अपनी चांदनी पर
छुप गया बादलोँ में वो भी तुझे देखने के बाद

क्यूँ करूं मैं रिश्ता तेरी ज़ात के साथ
उठ रहे है सवाल तुझे देखने के बाद

अपने चेहरे को छुपा के रखो खुदा के वास्ते
दिल हो जाता है बेकाबू तुझे देखने के बाद

Tujhe Dekhne ke Baad

Socha tha Ke kisi se Piyar Na karain gay hum
badal gaya Irada tujhe Dekhne ke baad

Chain se So jati The Main In Suhani Ratoon mein
Neendain Urh gayi Meri tujhe Dekhne ke Baad

Bahut Naaz tha Chand ko Apni Chandni Par
Chup gaya Badloun mein wo Bhi tujhe Dekhne Ke Baad

Kyon karo main rishta teri …

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shayarisms4lovers mar18 52 - तेरी खुशबू का एहसास – अक्स-ऐ-खुशबू हूँ उर्दू शायरी

तेरी खुशबू का एहसास – अक्स-ऐ-खुशबू हूँ उर्दू शायरी

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अक्स -ऐ -खुशबू हूँ

अक्स -ऐ -खुशबू हूँ बिखरने से न रोके कोई
और बिखर जाऊं तो मुझे न समेटे कोई

काँप उठती हूँ मैं इस तन्हाई में
मेरे चेहरे पे तेरा नाम न पढ़ ले कोई

जिस तरह ख्वाब मेरे हो गए रेज़ा-रेज़ा
इस तरह से न कभी टूट के बिखरे कोई

मैं तो उस दिन से हरासां हूँ के जब हुक्म मिले
खुश्क फूलों को किताबों में न रखे कोई

अब तो इस राह से वो शख्स गुज़रता भी नहीं
अब किस उम्मीद से दरवाज़े से झांके कोई

कोई आवाज़ ,कोई आहात ,कोई चाप नहीं
दिल की गलिया बड़ी सुनसान हैं आये कोई

Aks-AE-Khushboo

Aks-AE-Khushboo Hoon Bikharne Se Na Roke Koi
Aur Bikhar Jaaun To Mujhe Na Samete Koi

Kaanp Uthti Hoon Main Iss Tanhaai Mein
Mere Chehre Pe Tera Naam Na Padh Le Koi

Jis Tarah Khwaab Mere Ho Gaye Reza-Reza
Is Tarah Se Na Kabhi Toot Ke Bikhre Koi

Main To Us Din Se Harasaan Hoon Ke Jab Hukm Mile
Khushk Phoolon Ko Kitabon Mein Na Rakhe Koi

Ab To Is Raah Se Wo Shakhs Guzarta Bhi Nahin
Ab Kis Ummeed Se Darwaaze Se Jaahnke Koi

Koi Aawaaz,Koi Aahaat,Koi Chaap Nahin
Dil Ki Galyaan Badi Sunsaan Hain Aaye Koi..


खुशबू की तरह आया वो

खुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में
माँगा था जिसे हम ने दिन रात दुआओं में
तुम चाट पे नहीं आये मैं घर से नहीं निकल
यह चाँद बहुत भटकता है सावन की घटाओं में

Khushboo ki Tarah Aaya wo

Khushboo ki Tarah Aaya wo tez Hawaaon mein
Manga tha jise hum ne Din Raat Duaaon mein
Tum Chat pe nahi aaye Main Ghar se nahi Nikla
Yeh Chaand bahut bhatka hai Saawan ki Ghataon mein..


खिलावत -ऐ -खुशबू

तेरे हुनर में खिलावत -ऐ -खुशबू सही मगर
काँटों को उम्र भर की चुभन कौन दे गया
“मोहसिन” वो कायनात -ऐ -ग़ज़ल है उससे भी देख
मुझ से न पूछ मुझ को यह फन कौन दे गया

Khilwat-AE-khushboo

Tere hunar mein khilwat-AE-khushboo sahi magar
Kaanton ko umar bhar ki chubhan kaun day gaya
“Mohsin” wo kaayinaat-ae-ghazal hai ussay bhi deikh
Mujh say na pooch mujh ko yeh fun kaun day gaya..


तेरी बात से खुशबु आये

तेरी हस्ती से तेरी ज़ात से खुशबु आये
तू जो बोले तो तेरी बात से खुशबु आये

तुझको देखों तो मेरी आँख महक सी जाये
तुझको सोचूं तो ख्यालात से खुशबु आये

तू चमेली है , …

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shayarisms4lovers mar18 27 1 - यह इश्क़ नहीं आसां – Jigar Moradabadi – Urdu Shayar

यह इश्क़ नहीं आसां – Jigar Moradabadi – Urdu Shayar

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यूं ही दिल के तड़पने का कुछ तो है सबब आखिर
या दर्द ने करवट ली है या तुमने इधर देखा
माथे पे पसीना क्यों आँखों में नमी सी क्यों
कुछ खैर तो है , तुमने जो हाल -ऐ -जिगर देखा

                                                           Jigar Moradabadi – Urdu Shayar

यह इश्क़ नहीं आसां

क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है
हम ख़ाक-नाशिनो की ठोकर में ज़माना है

वो हुस्न -ओ -जमाल उनका यह इश्क़ -ओ -शबाब अपना
जीने की तम्मना है मरने का ज़माना है

या वो थे खफा हम से या हम थे खफा उनसे
कल उनका ज़माना था आज अपना ज़माना है

यह इश्क़ नहीं आसां इतना तो समझ लीजिये
एक आग का दरिया है और डूब के जाना है

आँसू तो बहुत से हैं आँखों में “जिगर” लेकिन
बन जाए सो मोती है बह जाए सो पानी है

Yeh Ishq Nahin Aasaan

kya husn ne samjha hai kya ishq ne jaana hai
ham Khaak-nashinoo ki Thokar mein zamana hai

wo husn-o-jamaal unkaa yeh ishq-o-shabaab apana
jeene ki tamanaa hai marne ka zamana hai

yaa wo the Khafaa hum se yaa hum the Khafaa unse
kal unkaa zamana tha aaj apana zamana hai

yeh ishq nahin aasaan itanaa to samajh lijiye
Ek aag kaa dariyaa hai aur Doob ke jaanaa hai

aansuu to bahut se hain aankhon mein “Jigar” lekin
ban jaaye so moti hai beh jaaye so pani hai..


तुझ को खुदा का वास्ता

इश्क़ फना का नाम है इश्क़ में ज़िन्दगी न देख
जलवा-ऐ-आफताब बंजारे में रोशनी न देख

शौक़ को राहनुमा बना , जो हो चुका कभी न देख
आग दबी हुई निकाल , आग बुझी हुई न देख

तुझ को खुदा का वास्ता तू मेरी ज़िन्दगी न देख
जिस की सहर भी शाम हो उस की सियाह की छबि न देख

Tujh ko Khudaa kaa Baastaa

ishq fanaa kaa naam hai ishq mein zindagi na dekh
jalwa-ae-aaftaab banzarre mein roshani na dekh

shauq ko rahnumaa banaa jo ho chukaa kabhi na dekh
aag dabi huii nikaal aag bujhi hui na dekh

tujh ko Khudaa kaa Baastaa tu meri zindagi na dekh
jis ki sahar bhi shaam ho us ki siyaah shavvi na dekh..


इश्क़ में लाजवाब

इश्क़ में लाजवाब हैं हम लोग
माहताब आफताब हैं हम लोग

गरचे अहल -ऐ -शराब हैं हम लोग
यह न समझो खराब हैं हम लोग

शाम से आ गए जो पीनी पर
सुबह तक आफताब हैं हम लोग…

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shayarisms4lovers mar18 192 - तक़दीर का अफसाना – किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है

तक़दीर का अफसाना – किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है

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किस्मत मैं लिखदे मेरी

किस्मत मैं मेरी चैन से जीना लिखदे
मिटा न सके कोई वो अफसाना लिखदे
जन्नत भी न-गवार है मुझे तेरे बिन
ऐ कातिब-ऐ-तक़दीर ख़ाक-ऐ-मदीना लिखदे

Kismat mein Likhde Meri

kismat main meri chain se jeena likhde
mita na sake koi wo afsana likhde
jannat bhi na-gawar hai mujhe tere bin
Ae kaatib-ae-taqdeer KHaak-e-madiina likhde..


किस्मत पर ऐतबार

किस्मत पर ऐतबार किस को है
मिल जाये ‘ख़ुशी’ इनकार किस को है
कुछ मजबूरियां हैं मेरे दोस्तों
वरना ‘जुदाई ’ से प्यार किस को है

Kismat Par Aitbaar

kismat par aitbaar kis ko ha
Mil jaye ‘KHUSHI’ inkaar kis ko hai
kuch ‘MAJBURIYAN’ hain mere dosto
warna! ‘JUDAI’ se pyar kis ko hai..


किस्मत से शिकायत

किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है
जो नहीं मिल सकता उसी से मोहब्बत क्यों है
कितने खड़े है राहो पे
फिर भी दिल को उसी की चाहत क्यों

Kismat se Shikayat

Kismat se apni sabko shikayat kyon hai
Jo nahi mil sakta usi se mohabbat kyon hai
Kitne khade hai raho pe
Phir bhi dil ko usi ki chahat kyon..


किस्मत में मोहब्बत

कुछ किस्मत ही ऐसी रही दोस्तों
की अब ज़िन्दगी से कोई तम्मना ही नहीं
जिसको चाहा हमने उसे पा न सका
जो किस्मत में थी उसे मोहब्बत न कर सके

Kismat Mein Mohabbat

Kuch Kismat Hi Aisi rahi Doston
Ki Ab Zindagi Se Koi Tammana hi Nahi
Jisko Chahaa humne use paa Na Saka
Jo kismat mein thi usse Mohabbat Na kar sake..


मेरे नसीब की लकड़ी

मेरी किस्मत ही बेईमानी निकली
कबर भी खोदी तो ज़मीन पत्थर की निकली
लेकर मेरा जनाजा वो जलाने गए तो
कम्बख़त मेरे नसीब की लकड़ी भी गीली निकली

Mere Naseeb Ki Lakdi

Meri kismat bhi beimani nikli
Kabar Bhi Khodi To Zamin Pathar Ki Nikli
Lekar Mera Janaja Wo Jalane Gaye To
Kambakat Mere Naseeb Ki Lakdi Bhi Gili Nikli..


किस्मत का फैसला

मेरी तक़दीर से पूछ मेरी किस्मत का फैसला
मेरी मुस्कराहट पे न जा मेरा दर्द तलाश कर
आँखों से पूछ मेरे इंतज़ार की हद
इम्तिनान पे न जा मेरे सबर को तलाश कर
मेरे दोस्तों से पूछ मेरी दोस्ती का आलम
सूरत पे न जा मेरी सिरत तलाश कर
जो मिल जाये तुम को मेरी बातों के जवाब
तो फिर तू ज़रा सा काम कर
मुझे आस पास न देख मुझे खुद मैं तलाश कर

Kismat Ka Faisla

Meri Taqdeer Se Pooch Meri Kismat Ka Faisla
Meri Muskrahat …

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shayarisms4lovers mar18 184 - ज़ख़्म-ऐ -जिगर तुमको दिखाएगें किसी रोज़ – परवीन शाकिर उर्दू शायरी

ज़ख़्म-ऐ -जिगर तुमको दिखाएगें किसी रोज़ – परवीन शाकिर उर्दू शायरी

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इश्क़ में सच्चा चाँद

पूरा दुःख और आधा चाँद हिजर की शब और ऐसा चाँद
इतने घने बादल के पीछे कितना तनहा होगा चाँद
मेरी करवट पर जाग उठे नींद का कितना कच्चा चाँद
सेहरा सेहरा भटक रहा है अपने इश्क़ में सच्चा चाँद

Ishq mein Sachcha chaand

Pura dukh aur Aadha Chaand Hijr ki shab aur Aisa Chaand
Itne ghane Badal ke piche Kitna tanha Hoga chaand
Meri karavat par Jag uthe Neend ka kitna Kachcha chaand
Sehra sehra Bhatak raha hai Apne ishq mein Sachcha chaand


मिन्नत -ऐ -सैयाद

बहुत रोया वो हम को याद कर के
हमारी ज़िन्दगी बर्बाद कर के

पलट कर फिर यहीं आ जायेंगे हम
वो देखे तो हमें आज़ाद करके

रिहाई की कोई सूरत नहीं है
मगर हाँ मिन्नत -ऐ -सैयाद कर के

बदन मेरा छुआ था उसने लेकिन
गया है रूह को आबाद कर के

हर आमिर तोल देना चाहता है
मुकर्रर-ऐ-ज़ुल्म की मीआद कर के

Minnat-ae-Saiyaad

Bahut roya wo hum ko yaad kar ke
Hamaari zindagi barbaad kar ke

Palat kar phir yahiN aajayenge hum
Wo dekhe to hamain aazaad karke

Rihaayi ki koi soorat nahi hai
Magar haaN minnat-ae-saiyaad kar ke

Badan mera chhuaa tha usne lekin
Gaya hai rooh ko aabaad kar ke

Har amir tool dena chaahta hai
Muqarrar-ae-zulm ki meeaad kar ke..


ज़ख़्म-ऐ -जिगर

उड़ने दो इन परिंदों को आज़ाद फ़िज़ाओं में
तुम्हारे होंगे अगर तो लौट आएंगे किसी रोज़
अपने सितम को देख लेना खुद ही साक़ी तुम
ज़ख़्म-ऐ -जिगर तुमको दिखाएगें किसी रोज़

Zakham-AE-Jigar

Udne do In Parindon Ko Azaad Fizaon Mein
Tumhare Honge Agar To Lout Aayein Gay Kisi Roz
Apne Sitam Ko Dekh Lena Khud Hi Saqi Tum
Zakham-AE-Jigar Tumko Dekhein Gaye Kisi Roz……

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shayarisms4lovers mar18 140 - ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – मुनीर नियाज़ी

ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – मुनीर नियाज़ी

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ज़िन्दगी की किताब

यह जो ज़िन्दगी की किताब है
यह किताब भी क्या किताब है
कहीं एक हसीं सा ख्वाब है
कहीं जान लेवा अज़ाब है

मुनीर नियाज़ी – ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – यह जो ज़िन्दगी की किताब है


Zindgi ki Kitab

Yeh jo Zindgi ki kitab hai
Yeh kitab bhi kya kitab hai
Kahin ek haseen sa khwab hai
Kahin jaan levaa azaab hai

Munir Niazi – Zindgi ki kitab Urdu Shayari – Yeh jo Zindgi ki kitab hai

रहमतों की हैं बारिशें

कभी खो दिया कभी पा लिया
कभी रो लिया कभी गा लिया
कहीं रहमतों की हैं बारिशें
कहीं तिशनगी बेहिसाब है

मुनीर नियाज़ी – ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – कभी खो दिया कभी पा लिया


Rehmaton ki Hain Barishain

Kbhi kho diya kbhi pa liya
Kabhi ro liya kbhi gaa liya
Kahin rehmaton ki hain barishain
Kahin tishnagi behisab hai

Munir Niazi – Zindgi ki kitab Urdu Shayari – Kbhi kho diya kbhi pa liya

वो क़यामतें जो गुज़र गयीं

कोई हद नहीं है कमाल की
कोई हद नहीं है जमाल की

वो ही क़ुर्ब-ओ-दौर की मंज़िलें
वो ही शाम खवाब-ओ-ख्याल की

न मुझे ही उसका पता कोई
न उसे खबर मेरे हाल की

यह जवाब मेरी सदा का है
के सदा है उसके सवाल की

वो क़यामतें जो गुज़र गयीं
थी अमानतें कई साल की

यह नमाज़-ऐ-असर का वक़्त है
यह घडी है दिन के ज्वाल की

है “मुनीर ” सुबह -ऐ -सफर नया
गयी बात शब् के मलाल की

मुनीर नियाज़ी – ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – वो क़यामतें जो गुज़र गयीं


Wo Qayamatein Jo Guzar Gayein

Koi had nahi hai kamaal ki
Koi had nahi hai jamaal ki

Wo hi qurb-O-daur ki manzilein
Wo hi sham khawab-O-khyaal ki

Na mujhe hi uska pata koi
Na use khabar mere haal ki

Yeh jawaab meri sada ka hai
Ke sada hai uske sawaal ki

Wo Qayamatein Jo Guzar Gayein
ThiN amanaten kayee saal ki

Yeh namaaz-AE-asar ka waqt hai
Yeh ghadi hai din ke zawaal ki

Hai “MONIR” subh-AE-safar naya
Gayee baat shab ke malaal ki

Munir Niazi – Zindgi ki kitab Urdu Shayari – Wo Qayamatein Jo Guzar Gayein

दिल की खलिश

ज़िंदा रहे तो क्या है जो मर जाएं हम तो क्या
दुनिया से ख़ामोशी से गुज़र जाएं हम तो क्या

हस्ती ही अपनी क्या है ज़माने के सामने
एक ख्वाब है जहां में बिखर जाएं हम तो क्या…

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shayarisms4lovers mar18 199 - बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’ – Best Collection of “Ghalib”

बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’ – Best Collection of “Ghalib”

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खुदा के वास्ते

खुदा के वास्ते पर्दा न रुख्सार से उठा ज़ालिम
कहीं ऐसा न हो जहाँ भी वही काफिर सनम निकले

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – जहाँ भी वही काफिर सनम निकले

Khuda ke Waaste

Khuda ke waaste parda na kaabe se uthaa zaalim
Kaheen aisa na ho yahan bhi wahi kaafir sanam nikle

Mirza Ghalib Shayari – Urdu shayari – yahan bhi wahi kaafir sanam nikle

वो निकले तो दिल निकले

ज़रा कर जोर सीने पर की तीर -ऐ-पुरसितम् निकले जो
वो निकले तो दिल निकले , जो दिल निकले तो दम निकले

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – वो निकले तो दिल निकले

Wo Nikle To Dil Nikle

Zara kar jor seene par ki teer-e-pursitam niklejo
Wo nikle to dil nikle, jo dil nikle to dam nikle

Mirza Ghalib Shayari – Urdu shayari – Wo nikle to dil nikle

कागज़ का लिबास

सबने पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास
जिस कदर लोग थे बारिश में नहाने वाले
अदल के तुम न हमे आस दिलाओ
क़त्ल हो जाते हैं , ज़ंज़ीर हिलाने वाले

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास

Kaagaz ka Libaas

Sabnay pahnaa tha baday shaukk se kaagaz ka libaas
Jis kadarr logg thay baarish me nahaanay walay
Adal ke tum na humay aas dilaaoo
Katl ho jatay hain, zanzeer hilanay walay

Mirza Ghalib Shayari – Urdu shayari – pahnaa tha baday shaukk se kaagaz ka libaas

शब-ओ-रोज़ तमाशा

बाजीचा-ऐ-अतफाल है दुनिया मेरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे

Shab-o-Roz Tamasha

Bazeecha-ae-atfaal hai duniya mere aage
hota hai shab-o-roz tamasha mere aage

Mirza Ghalib Shayari – Urdu shayari – hota hai shab-o-roz tamasha mere aage

बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब

फिर उसी बेवफा पे मरते हैं
फिर वही ज़िन्दगी हमारी है
बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’
कुछ तो है जिस की पर्दादारी है

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब

Bekhudi Besabab Nahi “Ghalib”

Phir Usi Bewafa Pe Marte Hain
Phir Wahi Zindagi Hamari Hai
Bekhudi Besabab Nahi ‘ghalib’
Kuch To Hai Jis Ki Pardadari Hai

Mirza Ghalib Shayari – Urdu shayari – Bekhudi Besabab Nahi “Ghalib”

जन्नत की हकीकत

हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन
दिल के खुश रखने को “ग़ालिब” यह ख्याल अच्छा है

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – “ग़ालिब” यह ख्याल अच्छा है
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