shayarisms4lovers mar18 127 - हिंदी और उर्दू शायरी – दो लाइन शायरी – Daag , Perveen , Naqvi Shayari

हिंदी और उर्दू शायरी – दो लाइन शायरी – Daag , Perveen , Naqvi Shayari

न जाने कौन न जाने कौन सा आसब दिल में बसता है के जो भी ठहरा वो आखिर मकान छोड़ गया … Na jane kaun Na jane kaun sa aasaab dil mein basta hai Ke jo bhi thehra wo aakhir makaan chod gaya तुझी को पूछता रहा बिछड़ के मुझ से , हलक़ को अज़ीज़ हो गया है तू , मुझे तो जो कोई भी मिला , तुझी को पूछता रहा Tujhi ko puchta raha Bichar ke mujh se, halaq ko aziz ho geya hai tu Mujhe to jo koi mila, tujhi ko puchta raha मेरे हम-सकूँ  मेरे हम-सकूँ  का यह हुक्म था के कलाम उससे मैं कम करूँ .. मेरे होंठ ऐसे सिले के फिर उसे मेरी चुप ने रुला दिया … Mere hum-sukhan Mere hum-sukhan ka yeh hukm tha ke kalaam us se main kam karoon.. mere hont aise sile ke phir usey meri chup ne rula diya …. यह शब-ऐ-हिजर यह शब-ऐ-हिजर तो साथी है मेरी बरसों से जाओ सो जाओ सितारों के मैं ज़िंदा हूँ अभी Shab-ae-hizar Yeh Shab-ae-hizar To Sathi Hai Meri Barsoon Se Jao So Jao Sitaro Ke Main Zinda Hoon Abhi न आना तेरा ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा ऐसे […]

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shayarisms4lovers June18 148 - हर धड़कन में एक राज़ होता है – धड़कन उर्दू शायरी

हर धड़कन में एक राज़ होता है – धड़कन उर्दू शायरी

बहुत देर कर दी तुमने मेरी धड़कन महसूस करने में वो दिल नीलाम हो गया जिस को कभी हसरत तुम्हारे दीदार की थी हर धड़कन में एक राज़ होता है हर धड़कन में एक राज़ होता है हर बात कहने का एक अंदाज़ होता है जब तक ठोकर न लगे इश्क़ में हर किसी को अपने महबूब पे नाज़ होता है Har Dhadkan Mein Ek Raaz Hota Hai Har Dhadkan mein ek raaz hota hai Har baat kehne ka ek andaaz hota hai Jab tak thokar na lage ishq mein Har kisiko apne mehboob pe naaz hota hai धड़कन ज़रा थम जा शोर न कर धड़कन ज़रा थम जा कुछ पल के लिए बड़ी मुश्किल से मेरी आँखों में उसका खवाब आया है Dhadkan Zara Tham Ja Shor Na Kar Dhadkan Zara Tham Ja Kuch Pal Ke Liye Badi Muskil Se Meri Aankhon Mein Uska Khawab Aaya hai दिल की धड़कन को धड़का गया कोई दिल की धड़कन को धड़का गया कोई मेरे ख्वाबों को जगा गया कोई हम तो अनजाने रास्तो पे यूं ही चल रहे थे अचानक ही प्यार का मतलव भी सीखा गया कोई Dil ki Dhadkan ko Dhadka Gaya Koi Dil ki dhadkan ko dhadka gaya […]

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shayarisms4lovers mar18 205 - शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

मेरी वेहशत इश्क़ मुझको नहीं वेहशत ही सही मेरी वेहशत तेरी शोहरत ही सही कटा कीजिए न तालुक हम से कुछ नहीं है तो अदावत ही सही Meri Wehshat Ishq mujhko nahin wehshat hi sahi Meri wehshat teri shohrat hi sahi kta kijiay na taaluq hum se kuch nahin hai to adaawat he sahi… शब-ऐ-इंतज़ार वो गया तो साथ ही ले गया सभी रंग उतार के शहर के कोई शख्स था मेरे शहर में किसी दूर पार के शहर का चलो कोई दिल तो उदास था , चलो कोई आँख तो नम थी चलो कोई दर तो खुला रहा शब-ऐ-इंतज़ार के शहर का Shab-ae-Intezaar Wo Gaya To Saath Hi Le Gaya Sabhi Rang Utaar Ke Shehar Ke Koi Shakhs Tha Mere Shehar Mein Kisi Door Paar Ke Shehar Ka Chalo Koi Dil to Udaas Tha, Chalo Koi Aankh To Num thi Chalo Koi Dar To Khula Raha Shab-ae-Intezaar Ke Shehar Ka… तुम्हारे ख्याल बहुत दिनों से मेरे ज़ेहन के दरीचे मैं ठहर गया है तुम्हारे ख्याल का मौसम यूं भी यकीन हो बहारें उजड़ भी सकती हैं तो आ के देख मेरे ज़वाल का मौसम Tumhare Khyal Bahut Dino Se Mere Zehan Ke Darichoon Main Thehar Gaya Hai Tumhare Khyal […]

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shayarisms4lovers June18 202 - Best Ever Shayari Colletion of Munir Niazi – मुनीर नियाज़ी शायरी मजमूआ

Best Ever Shayari Colletion of Munir Niazi – मुनीर नियाज़ी शायरी मजमूआ

उसके जाने का रंज मेरी सदा हवा में बहुत दूर तक गयी पर मैं बुला रहा था जिसे , वो बेखबर रहा उसकी आखिरी नज़र में अजब दर्द था “मुनीर” उसके जाने का रंज मुझे उम्र भर रहा Uske Jaane Ka Ranj Meri Sada Hawa Mein Bohat Door Tak Gayi Par Main Bula Raha Tha Jise, wo Bekhabar Raha Uski Aakhiri Nazar Mein Ajab Dard Tha “Munir” Uske Jaane Ka Ranj Mujhe Umar Bhar Raha हम जवाब क्या देते किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते सवाल सारे ग़लत थे, हम जवाब क्या देते हवा की तरह मुसाफिर थे, दिलबरों के दिल उन्हें बस एक ही घर का अजाब क्या देते Hum Jawab Kya Dete Kisi Ko Apnay Amal Ka Hisaab Kya Dete Sawaal Saare Ghalat The, Hum Jawab Kya Dete Hawa Ki Tarha Musafir The, Dilbaron Ke Dil Unhain Bus Ak Hi Ghar Ka Azaab Kya Dete ज़ुल्म मेरे नाम शहर में वो मोअतबर मेरी गवाही से हुआ फिर मुझे इस शहर में नमोअतबर उसी ने किया शहर को बर्बाद करके रख दिया उस ने “मुनीर” शहर पर यह ज़ुल्म मेरे नाम पर उसने किया Zulam Mere Naam Shehar mein wo moatbir meri gawahi se huwa Phir mujhe […]

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shayarisms4lovers June18 269 - ज़ख्म-ऐ जिगर

ज़ख्म-ऐ जिगर

सज़ा डूबी हैं मेरी उंगलियां खुद अपने ही लहू में , यह कांच के टुकड़ों को उठने की सज़ा है .. Sazaa Doobi hain meri ungliyaan khud apne hi lahuu main, Yeh kaanch ke tukrron ko uthaney ki sazaa hai.. गुज़रे हुए वक़्त की यादें सजा बन जाती है गुज़रे हुए वक़्त की यादें , न जाने क्यों छोड़ जाने के लिए मेहरबान होते हैं लोग … Guzre Hue Waqt Ki Yaadein Saza Ban Jati Hai Guzre Hue Waqt Ki Yaadein, Najaane Kyun ChoOr Jaane K Liye Meharban Hote Hein LoOg… तेरी एक निगाह मेरे पास इतने सवाल थे मेरी उम्र में न सिमट सके तेरे पास जितने जवाब थे तेरी एक निगाह में आ गए Teri ek nigaah Mere paas itnay sawaal thay meri umar se na simat sakay Tere paas jitnay jawaab thay teri ek nigaah main aa gaye!! ज़ख्म-ऐ जिगर दर्द क्या होता है बताएंगे किसी रोज़ कमाल की ग़ज़ल है तुम को सुनाएंगे किसी रोज़ थी उन की जिद के मैं जाऊँ उन को मनाने मुझ को यह बेहम था वो बुलाएंगे किसी रोज़ कभी भी मैंने तो सोचा भी नहीं था वो इतना मेरे दिल को दुखाएंगे किसी रोज़ हर रोज़ शीशे से यही पूछता […]

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shayarisms4lovers June18 264 - तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी

तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी

मेरे मर जाने की वो सुन के खबर आई  “मोहसिन” घर से रोते हुए वो बिन ज़ुल्फ़ सँवारे निकले ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे ऐसा लगता है तेरी ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे होके गुलशन से सबा आज चली हो जैसे अध खुले होंठ सियाह ज़ुल्फ़ और गज़ली ऑंखें किसी शायर ने कोई ग़ज़ल तर्ज़ की हो जैसे Zulf khuli ho jaise Aisa lagta hai teri zulf khuli ho jaise Hoke Gulshan se saba aaj chali ho jaise Adh khule hont siyah zulf aur gazali ankheN Kisi shayar ne koi gazal tarz ki ho jaise… ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये यह ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये तो अच्छा है इस रात की तक़दीर सँवर जाये तो अच्छा है जिस तरह से थोड़ी सी ज़िन्दगी तेरे साथ कटी है बाकी भी उसी तरह गुज़र जाये तो अच्छा है वैसे तो तुम्ही ने मुझे बर्बाद किया है इल्ज़ाम किसी और के सिर जाये तो अच्छा है Zulf Agar Khul ke Bikhar Jaye Yeh zulf agar khul ke bikhar jaye to accha hai Is raat ki takdir sanwar jaye to accha hai Jis tarah se thodi si zindagi tere saath kati hai Baaki bhi usi tarah guzar jaye to accha hai Waise to […]

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shayarisms4lovers June18 228 - खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा – एक बेवफा

खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा – एक बेवफा

हमे बेवफा का इल्जाम दे गया ज़िंदा थे जिसकी आस पर वो भी रुला गया बंधन वफ़ा के तोड़ के सारे चला गया खुद ही तो की थी उसने मुहब्बत की इब्तदा हाथों में हाथ दे के खुद ही छुड़ा गया कर दी जिसके लिए हमने तबाह ज़िन्दगी उल्टा वो हमे बेवफा का इल्जाम दे गया Wo Bewafa ka ilzam de Gaya Zinda thi jiski aas pe Wo bhi rula gaya Bandhan Wafa ke tood ke Sare chala gaya Khud hi to ki thi usne MUHABBAT ki IBTADA Hathon main hath de ke khud hi chuda gaya Kardi jiske liye humne Tabah zindagi Ulta wo BEWAFA ka ilzam de gaya… तमाशा बन दिया मेरा क़तरा अब एहतजा करे भी तो किया मिले दरिया जो लग रहे थे समंदर से जा मिले हर शख्स दौड़ता है यहां भीड़ की तरफ फिर यह भी चाहता है उसे रास्ता भी मिले उस आरज़ू ने और तमाशा बन दिया मेरा जो भी मिले हमारी तरफ देखता मिले दुनिया को दूसरों की नज़र से न देखिये चेहरे न पढ़ सके तो किताबों में किया मिले Tamasha Bna Diya Mera Qatra ab ehtjaaj karey bhi to kiya miley Darya jo lag rahe they samandar se ja […]

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shayarisms4lovers mar18 52 - तेरी खुशबू का एहसास – अक्स-ऐ-खुशबू हूँ उर्दू शायरी

तेरी खुशबू का एहसास – अक्स-ऐ-खुशबू हूँ उर्दू शायरी

अक्स -ऐ -खुशबू हूँ अक्स -ऐ -खुशबू हूँ बिखरने से न रोके कोई और बिखर जाऊं तो मुझे न समेटे कोई काँप उठती हूँ मैं इस तन्हाई में मेरे चेहरे पे तेरा नाम न पढ़ ले कोई जिस तरह ख्वाब मेरे हो गए रेज़ा-रेज़ा इस तरह से न कभी टूट के बिखरे कोई मैं तो उस दिन से हरासां हूँ के जब हुक्म मिले खुश्क फूलों को किताबों में न रखे कोई अब तो इस राह से वो शख्स गुज़रता भी नहीं अब किस उम्मीद से दरवाज़े से झांके कोई कोई आवाज़ ,कोई आहात ,कोई चाप नहीं दिल की गलिया बड़ी सुनसान हैं आये कोई Aks-AE-Khushboo Aks-AE-Khushboo Hoon Bikharne Se Na Roke Koi Aur Bikhar Jaaun To Mujhe Na Samete Koi Kaanp Uthti Hoon Main Iss Tanhaai Mein Mere Chehre Pe Tera Naam Na Padh Le Koi Jis Tarah Khwaab Mere Ho Gaye Reza-Reza Is Tarah Se Na Kabhi Toot Ke Bikhre Koi Main To Us Din Se Harasaan Hoon Ke Jab Hukm Mile Khushk Phoolon Ko Kitabon Mein Na Rakhe Koi Ab To Is Raah Se Wo Shakhs Guzarta Bhi Nahin Ab Kis Ummeed Se Darwaaze Se Jaahnke Koi Koi Aawaaz,Koi Aahaat,Koi Chaap Nahin Dil Ki Galyaan Badi Sunsaan […]

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shayarisms4lovers mar18 27 1 - यह इश्क़ नहीं आसां – Jigar Moradabadi – Urdu Shayar

यह इश्क़ नहीं आसां – Jigar Moradabadi – Urdu Shayar

यूं ही दिल के तड़पने का कुछ तो है सबब आखिर या दर्द ने करवट ली है या तुमने इधर देखा माथे पे पसीना क्यों आँखों में नमी सी क्यों कुछ खैर तो है , तुमने जो हाल -ऐ -जिगर देखा                                                            Jigar Moradabadi – Urdu Shayar यह इश्क़ नहीं आसां क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है हम ख़ाक-नाशिनो की ठोकर में ज़माना है वो हुस्न -ओ -जमाल उनका यह इश्क़ -ओ -शबाब अपना जीने की तम्मना है मरने का ज़माना है या वो थे खफा हम से या हम थे खफा उनसे कल उनका ज़माना था आज अपना ज़माना है यह इश्क़ नहीं आसां इतना तो समझ लीजिये एक आग का दरिया है और डूब के जाना है आँसू तो बहुत से हैं आँखों में “जिगर” लेकिन बन जाए सो मोती है बह जाए सो पानी है Yeh Ishq Nahin Aasaan kya husn ne samjha hai kya ishq ne jaana hai ham Khaak-nashinoo ki Thokar mein zamana hai wo husn-o-jamaal unkaa yeh ishq-o-shabaab apana jeene ki tamanaa […]

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shayarisms4lovers mar18 192 - तक़दीर का अफसाना – किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है

तक़दीर का अफसाना – किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है

किस्मत मैं लिखदे मेरी किस्मत मैं मेरी चैन से जीना लिखदे मिटा न सके कोई वो अफसाना लिखदे जन्नत भी न-गवार है मुझे तेरे बिन ऐ कातिब-ऐ-तक़दीर ख़ाक-ऐ-मदीना लिखदे Kismat mein Likhde Meri kismat main meri chain se jeena likhde mita na sake koi wo afsana likhde jannat bhi na-gawar hai mujhe tere bin Ae kaatib-ae-taqdeer KHaak-e-madiina likhde.. किस्मत पर ऐतबार किस्मत पर ऐतबार किस को है मिल जाये ‘ख़ुशी’ इनकार किस को है कुछ मजबूरियां हैं मेरे दोस्तों वरना ‘जुदाई ’ से प्यार किस को है Kismat Par Aitbaar kismat par aitbaar kis ko ha Mil jaye ‘KHUSHI’ inkaar kis ko hai kuch ‘MAJBURIYAN’ hain mere dosto warna! ‘JUDAI’ se pyar kis ko hai.. किस्मत से शिकायत किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है जो नहीं मिल सकता उसी से मोहब्बत क्यों है कितने खड़े है राहो पे फिर भी दिल को उसी की चाहत क्यों Kismat se Shikayat Kismat se apni sabko shikayat kyon hai Jo nahi mil sakta usi se mohabbat kyon hai Kitne khade hai raho pe Phir bhi dil ko usi ki chahat kyon.. किस्मत में मोहब्बत कुछ किस्मत ही ऐसी रही दोस्तों की अब ज़िन्दगी से कोई तम्मना ही नहीं जिसको चाहा हमने उसे पा न […]

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shayarisms4lovers mar18 184 - ज़ख़्म-ऐ -जिगर तुमको दिखाएगें किसी रोज़ – परवीन शाकिर उर्दू शायरी

ज़ख़्म-ऐ -जिगर तुमको दिखाएगें किसी रोज़ – परवीन शाकिर उर्दू शायरी

इश्क़ में सच्चा चाँद पूरा दुःख और आधा चाँद हिजर की शब और ऐसा चाँद इतने घने बादल के पीछे कितना तनहा होगा चाँद मेरी करवट पर जाग उठे नींद का कितना कच्चा चाँद सेहरा सेहरा भटक रहा है अपने इश्क़ में सच्चा चाँद Ishq mein Sachcha chaand Pura dukh aur Aadha Chaand Hijr ki shab aur Aisa Chaand Itne ghane Badal ke piche Kitna tanha Hoga chaand Meri karavat par Jag uthe Neend ka kitna Kachcha chaand Sehra sehra Bhatak raha hai Apne ishq mein Sachcha chaand मिन्नत -ऐ -सैयाद बहुत रोया वो हम को याद कर के हमारी ज़िन्दगी बर्बाद कर के पलट कर फिर यहीं आ जायेंगे हम वो देखे तो हमें आज़ाद करके रिहाई की कोई सूरत नहीं है मगर हाँ मिन्नत -ऐ -सैयाद कर के बदन मेरा छुआ था उसने लेकिन गया है रूह को आबाद कर के हर आमिर तोल देना चाहता है मुकर्रर-ऐ-ज़ुल्म की मीआद कर के Minnat-ae-Saiyaad Bahut roya wo hum ko yaad kar ke Hamaari zindagi barbaad kar ke Palat kar phir yahiN aajayenge hum Wo dekhe to hamain aazaad karke Rihaayi ki koi soorat nahi hai Magar haaN minnat-ae-saiyaad kar ke Badan mera chhuaa tha usne lekin Gaya hai rooh […]

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shayarisms4lovers mar18 140 - ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – मुनीर नियाज़ी

ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – मुनीर नियाज़ी

ज़िन्दगी की किताब यह जो ज़िन्दगी की किताब है यह किताब भी क्या किताब है कहीं एक हसीं सा ख्वाब है कहीं जान लेवा अज़ाब है मुनीर नियाज़ी – ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – यह जो ज़िन्दगी की किताब है Zindgi ki Kitab Yeh jo Zindgi ki kitab hai Yeh kitab bhi kya kitab hai Kahin ek haseen sa khwab hai Kahin jaan levaa azaab hai Munir Niazi – Zindgi ki kitab Urdu Shayari – Yeh jo Zindgi ki kitab hai रहमतों की हैं बारिशें कभी खो दिया कभी पा लिया कभी रो लिया कभी गा लिया कहीं रहमतों की हैं बारिशें कहीं तिशनगी बेहिसाब है मुनीर नियाज़ी – ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – कभी खो दिया कभी पा लिया Rehmaton ki Hain Barishain Kbhi kho diya kbhi pa liya Kabhi ro liya kbhi gaa liya Kahin rehmaton ki hain barishain Kahin tishnagi behisab hai Munir Niazi – Zindgi ki kitab Urdu Shayari – Kbhi kho diya kbhi pa liya वो क़यामतें जो गुज़र गयीं कोई हद नहीं है कमाल की कोई हद नहीं है जमाल की वो ही क़ुर्ब-ओ-दौर की मंज़िलें वो ही शाम खवाब-ओ-ख्याल की न मुझे ही उसका पता कोई न उसे खबर मेरे हाल […]

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shayarisms4lovers mar18 199 - बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’ – Best Collection of “Ghalib”

बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’ – Best Collection of “Ghalib”

खुदा के वास्ते खुदा के वास्ते पर्दा न रुख्सार से उठा ज़ालिम कहीं ऐसा न हो जहाँ भी वही काफिर सनम निकले मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – जहाँ भी वही काफिर सनम निकले Khuda ke Waaste Khuda ke waaste parda na kaabe se uthaa zaalim Kaheen aisa na ho yahan bhi wahi kaafir sanam nikle Mirza Ghalib Shayari – Urdu shayari – yahan bhi wahi kaafir sanam nikle वो निकले तो दिल निकले ज़रा कर जोर सीने पर की तीर -ऐ-पुरसितम् निकले जो वो निकले तो दिल निकले , जो दिल निकले तो दम निकले मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – वो निकले तो दिल निकले Wo Nikle To Dil Nikle Zara kar jor seene par ki teer-e-pursitam niklejo Wo nikle to dil nikle, jo dil nikle to dam nikle Mirza Ghalib Shayari – Urdu shayari – Wo nikle to dil nikle कागज़ का लिबास सबने पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास जिस कदर लोग थे बारिश में नहाने वाले अदल के तुम न हमे आस दिलाओ क़त्ल हो जाते हैं , ज़ंज़ीर हिलाने वाले मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास Kaagaz ka Libaas Sabnay pahnaa […]

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shayarisms4lovers mar18 215 - जिंदगी की रंग-ओ-बू – Shayari of Life

जिंदगी की रंग-ओ-बू – Shayari of Life

मंजूर कब थी हमको वतन से दूरियां आईना-ऐ-ख़ुलूस-ऐ-वफ़ा चूर हो गए जितने चिराग-ऐ-नूर थे बे नूर हो गए मालूम यह हुआ की वो रास्ते का साथ था मंज़िल करीब आई और हम दूर हो गए मंजूर कब थी हमको वतन से यह दूरियां हालात की जफ़ाओं से मजबूर हो गए कुछ आ गयी हमे एहले-ऐ-वफ़ा ऐ दोस्तों कुछ वो भी अपने हुस्न पे मगरूर हो गए चरागों की ऐसी इनायत हुई हफ़ीज़ के जो ज़ख़्म भर चले थे वो नासूर हो गए Manzoor Kab Thi Humko Watan Se Dooriyan Aaina-AE-Khuloos-E-Wafa Churr Ho Gaye Jitne Chirag-AE-Noor The Benoor Ho Gaye Malum Yeh Hua Ki Wo Raaste Ka Sath Tha Manzil Kareeb Aayi aur Hum Door Ho Gaye, Manzoor Kab Thi Humko Watan Se Yeh Dooriyan Haalaat Ki Jafaoon Se Majboor Ho Gaye Kuch Aa Gayi Hume Ahl-AE-Wafa Mein Ae dosto Kuch Wo Bhi Apne Husn Pe Magroor Ho Gaye Charagon Ki Aisi Inayaat Hui Hafeez Ke Jo Zakham Bhar Chale the Wo Nasoor Ho Gaye   ऐ इंसान जरा संभल के चल कल रात हम गुनगुनाते निकले दिल में कुछ अरमान थे एक तरफ थे जंगल , एक तरफ श्मशान थे रस्ते में एक हड्डी पैरो से टकराई , उस के […]

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shayarisms4lovers may18 74 - तेरे बदलने के बावसफ भी तुझ को चाहा है – परवीन शाकिर

तेरे बदलने के बावसफ भी तुझ को चाहा है – परवीन शाकिर

यह एतराफ़ भी तेरे बदलने के बावसफ भी तुझ को चाहा है यह एतराफ़ भी शामिल मेरे गुनाहों में है … Yeh Eytraaf bhi Tere badalney k bawasf b tujh ko chaha hai Yeh eytraaf bhi shamil mere gunnah mein hai…   तो हर बंदा खुदा होता ज़रुरत तोड़ देती है ग़रूर-ओ-बेनीआजी को न होती कोई मजबूरी तो हर बंदा खुदा होता . To har banda khuda hota zaroorat tod daiti hai gharoor-o-beniazi ko na hoti koi majboori to har banda khuda hota. Hindi and urdu shayari – Parveen Shakir ki Shayari – to har banda khuda hota नया दर्द एक दिल में जगा कर चला गया नया दर्द एक दिल में जगा कर चला गया कल फिर वो मेरे शहर में आ कर चला गया जिसे ढूंढती रही मैं लोगो की भीड़ में मुझ से वो अपना आप छुपा कर चला गया में उसकी खामोशी का सबब पूछती रही वो किस्से इधर उधर के सुना कर चला गया यह सोचती हूँ कैसे भूलूंगी अब उसे एक शख्स वो जो मुझ को भुला कर चला गया   Naya dard ek dil mein jaga kar chala gya Naya dard ek dil mein jaga kar chala gya Kal phir wo mere sheher […]

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