देशभक्ति कविता इन हिंदी : चन्द्रशेखर आजाद! Desh Bhakti Poem

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देश प्रेम पर देशभक्ति कविता

ये देशभक्ति कविता (Hindi Deshbhakti Kavita/Poem) महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के बलिदान और उनके आजाद भारत के सपने पर आधारित है| इस हिंदी देशभक्ति कविता में कवि ने अपनी बातों से झकझोर कर रख दिया है|

जिस आजादी के लिए चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह जैसे वीरों ने अपनी कुर्बानी दी थी, क्या आज उन सेनानियों के लिए हमारे हृदय में कोई स्थान नहीं है| चंद पैसे और कुर्सी के लालच में लोग इन क्रांतिकारियों का मजाक उड़ाने तक से बाज नहीं आते| कुछ ऐसे ही विद्रोही बोलों के साथ कवि ने यह कविता लिखी है| जरूर पढ़िए ये देशभक्ति कविता आपके दिल को छू जाएगी –

मन तो मेरा भी करता है झूमूँ , नाचूँ, गाऊँ मैं
आजादी की स्वर्ण-जयंती वाले गीत सुनाऊँ मैं
लेकिन सरगम वाला वातावरण कहाँ से लाऊँ मैं
मेघ-मल्हारों वाला अन्तयकरण कहाँ से लाऊँ मैं
मैं दामन में दर्द तुम्हारे, अपने लेकर बैठा हूँ
आजादी के टूटे-फूटे सपने लेकर बैठा हूँ

घाव जिन्होंने भारत माता को गहरे दे रक्खे हैं
उन लोगों को जैड सुरक्षा के पहरे दे रक्खे हैं
जो भारत को बरबादी की हद तक लाने वाले हैं
वे ही स्वर्ण-जयंती का पैगाम सुनाने वाले हैं

आज़ादी लाने वालों का तिरस्कार तड़पाता है
बलिदानी-गाथा पर थूका, बार-बार तड़पाता है
क्रांतिकारियों की बलिवेदी जिससे गौरव पाती है
आज़ादी में उस शेखर को भी गाली दी जाती है
राजमहल के अन्दर ऐरे- गैरे तनकर बैठे हैं
बुद्धिमान सब गाँधी जी के बन्दर बनकर बैठे हैं

मै दिनकर की परम्परा का चारण हूँ
भूषण की शैली का नया उदहारण हूँ
इसीलिए मैं अभिनंदन के गीत नहीं गा सकता हूँ |
मैं पीड़ा की चीखों में संगीत नहीं ला सकता हूँ | |

इससे बढ़कर और शर्म की बात नहीं हो सकती थी
आजादी के परवानों पर घात नहीं हो सकती थी
कोई बलिदानी शेखर को आतंकी कह जाता है
पत्थर पर से नाम हटाकर कुर्सी पर रह जाता है
गाली की भी कोई सीमा है कोई मर्यादा है
ये घटना तो देश-द्रोह की परिभाषा से ज्यादा है

सारे वतन-पुरोधा चुप हैं कोई कहीं नहीं बोला
लेकिन कोई ये ना समझे कोई खून नहीं खौला
मेरी आँखों में पानी है सीने में चिंगारी है
राजनीति ने कुर्बानी के दिल पर ठोकर मारी है
सुनकर बलिदानी बेटों का धीरज डोल गया होगा
मंगल पांडे फिर शोणित की भाषा बोल गया होगा

सुनकर हिंद – महासागर की लहरें …

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