shayarisms4lovers June18 205 - काश ! के वो मेरा होता , मेरे नाम की तरहँ – परवीन शाकिर

काश ! के वो मेरा होता , मेरे नाम की तरहँ – परवीन शाकिर

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मेरे नाम की तरहँ 

यह मेरी ज़ात की सब से बड़ी तमन्ना थी ,
काश ! के वो मेरा होता , मेरे नाम की तरहँ

Mere Naam Ki Tarhan

Yeh Meri Zaat Ki Sab Se Bari Tamanna Thi
Kaash! Ke Woh Mera Hota, Mere Naam Ki Tarhan


दर्द क्या होता है बताएँगे किसी रोज़

दर्द क्या होता है बताएँगे किसी रोज़
कमाल की ग़ज़ल तुम को सुनायेंगे किसी रोज़
थी उन की ज़िद के मैं जाऊँ उन को मानाने
मुझ को ये वेहम था वो बुलाएंगे किसी रोज़
उड़ने दो इन परिंदों को आज़ाद फ़िज़ाओं में
तुम्हारे होंगे अगर, तो लौट आएंगे किसी रोज़

Dard Kia Hota Hai Batayein Gay Kisi Roz

Dard Kia Hota Hai Batayein Gay Kisi Roz
Kamal Ki Ghazal Tum Ko Sunayein Gay Kisi Roz
Thi Un Ki Zid K Main Jaaoun Un Ko Manane
Mujh Ko Ye Veham Tha Wo Bulayein Gay Kisi Roz
Urney Do In Parindon Ko Azaad Fizaon Mein
Tumhare Honge Agar To Lout Aayein Gay Kisi Roz


तेरी खुशबु का पता करती है

तेरी खुशबु का पता करती है
मुझ पे एहसान हवा करती है
शब की तन्हाई मैं अब तो अक्सर
गुफ्तगू तुझ से रहा करती है
दिल को उस राह पे चलना ही नहीं
जो मुझे तुझ से जुड़ा करती है
ज़िन्दगी मेरी थी लेकिन अब तो
तेरे कहने मैं रहा करती है
उस ने देखा ही नहीं वरना ये आँख
दिल का हाल बयान कहा करती है
बेनियाज़ -ऐ -कफ -ऐ -दरिया अंगुश्त
रेत पर नाम लिखा करती है

Teri Khushbu Ka Pata Karti Hai

Teri khushbu ka pata karti hai
Mujh pe ehsan hawa karti hai
Shab ki tanhai main ab to aksar
Guftagu tujh se raha karti hai
Dil ko us rah pe chalna hi nahin
Jo mujhe tujh se juda karti hai
Zindagi meri thi lekin ab to
Tere kahne main raha karti hai
Us ne dekha hi nahin warna ye ankh
Dil ka ehwal kaha karti hai
beniyaz-e-kaf-e-dariya angusht
Ret par nam likha karti hai


कोई रात 

कोई रात मेरे आश्ना मुझे यूँ भी तो नसीब हो ..
न ख्याल हो लिबास का वो इतना मेरे क़रीब हो ..
बदन की गरम आंच से मेरी आरज़ू को आग दे ..
मेरा जोश भी बहक  उठे मेरा हाल भी अजीब हो ..
तेरे चाशनी वजूद का मैं सारा रस निचोड़ लूँ ..
फिर तू ही  मेरा मर्ज़ हो फिर तू हे मेरा तबीब हो ..…

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Wasi Shah Shayari – Ankhon Se Meri is Liye Lali Nahi Jati

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आँखों से मेरी इस लिए लाली नहीं जाती
यादों से कोई रात जो खाली नहीं जाती

अब उम्र न मौसम न वो रास्ते के वो पलटे
इस दिल की मगर खामं ख्याली नही जाती

मांगे तू अगर जान भी हंस के तुझे दे दें
तेरी तो कोई बात भी टाली नहीं जाती

अब आए कोई आकर यह तेरे दर्द संभाले
अब हम से तो यह ज़ागीर संभाली नहीं जाती

मालूम हमें भी हैं बहुत से तेरे क़िस्से
हर बात तेरी हम से उछाली नही जाती

हमराह तेरे फूल खिलाती थी जो दिल में
अब शाम वही दर्द से खाली नहीं जाती

हम जान से जायेंगे तभी बात बनेगी
तुम से तो कोई राह  निकली नहीं जाती ….!!!

Ankhon Se Meri is Liye Lali Nahi Jati
Yadoon Se Koi Raat jo Khali Nahi Jati

Ab Umar Na Mosam Na Woh Rastey Ke wo palte
Iss Dil Ki Magar Khaam Khayali Nahe Jati

Maange Tu Agar Jaan Bhi Hans kay tujhay De-Dein
Teri To Koi Baat Bhi Taali Nahi Jaati

Aya Koi Aaker Yeh Tere Dard Sambhaley
Hum Sai To Yeh Jageer Sambhali Nahi Jati

Maloom Humen Bhi Hain Bahut Se Tere Qissay
Har Baat Teri Hum Se Uchhali Nahi Jati

Humrah Tere Phool Khilaati Thi Jo Dil Mein
Ab Shaam Wahi Dard Se Khaali Nahi Jati

Hum Jaan Se Jayainge Tabhi Baat Banegi
Tum Se To Koi Raah Nikali Nahi Jati

Shayari Writen By – Wasi Shah…

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