shayarisms4lovers mar18 162 - जब भी गुज़रे हैं किसी दर्द के बाजार से हम – परवीन शाकिर शायरी

जब भी गुज़रे हैं किसी दर्द के बाजार से हम – परवीन शाकिर शायरी

अक्स -ऐ -खुशबू हूँ अक्स -ऐ -खुशबू हूँ बिखरने से न रोके कोई और फिर बिखरु तो मुझ को न समेटे कोई . काँप उठती हूँ मैं यह सोच के तन्हाई में मेरे चेहरे पे तेरा नाम न पढ़ ले कोई अब तो इस राह से वो शख्स गुज़रता भी नहीं अब किस उम्मीद पे […]

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