shayarisms4lovers mar18 127 - हिंदी और उर्दू शायरी – दो लाइन शायरी – Daag , Perveen , Naqvi Shayari

हिंदी और उर्दू शायरी – दो लाइन शायरी – Daag , Perveen , Naqvi Shayari

न जाने कौन न जाने कौन सा आसब दिल में बसता है के जो भी ठहरा वो आखिर मकान छोड़ गया … Na jane kaun Na jane kaun sa aasaab dil mein basta hai Ke jo bhi thehra wo aakhir makaan chod gaya तुझी को पूछता रहा बिछड़ के मुझ से , हलक़ को अज़ीज़ […]

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shayarisms4lovers mar18 195 - Punjabi Shayari – पंजाबी शायरी

Punjabi Shayari – पंजाबी शायरी

रब दी सो में तेनु प्यार नी कीता आधी रात नु दिल दी देहलीज उते इक सूपना आन खलो जाँदा आ बेहन्दे हो सिरहाने तुसी सोना मुस्किल हो जाँदा है प्यार तेरे दा दर्द वे सजना मेरी नाड़ी नाड़ी टओ जाँदा रब दी सो में तेनु प्यार नी कीता ऐ ता अपने आप ही हो […]

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shayarisms4lovers mar18 15 - Romantic Punjabi Love Shayari

Romantic Punjabi Love Shayari

शर्ता ला के नी कदे प्यार हुँदा ऐ जींद नी इतनी सस्ती सजना हर कोई नी इदा हक़दार हुँदा कोई वैद हाकिम नी इलाज़ करदा जो भी इश्क़ बीमार हुँदा जो रूह दे बीच बस गिया ओ नी दिल दे बीचो बिछड हुँदा होर ता सानु पता नी यारा पर शर्ता ला के नी कदे प्यार […]

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shayarisms4lovers June18 291 - पंजाबी शायरी – लेंखा विच बिछोड़े रह गए – Punjabi Shayari

पंजाबी शायरी – लेंखा विच बिछोड़े रह गए – Punjabi Shayari

लेंखा विच बिछोड़े लेंखा विच बिछोड़े रह गए अथरु रो रो थोड़े रह गए इक न मनी उन्हें मेरी हाथ भी मेरे जोड़े रह गए जांदी वारी छड़ गया मैनू पिज्हे वाल निचोड़े रह गए फेर ओ कदे मुड़ नहीं आया मोतिये दे फूल तोड़े रह गए हुन्ह ते आ के मिल वे सजना ज़िंदगी दे […]

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shayarisms4lovers June18 267 - Shiv Kumar Batalvi – नग्मे और शायरी

Shiv Kumar Batalvi – नग्मे और शायरी

प्यार तेरे शहर दा रोग बन के रह गया है प्यार तेरे शहर दा मैं मसीहा वेख्या बीमार तेरे शहर दा इसकी गलियां मेरी चढ़दी जवानी खा लायी क्यों ना करूँ दोस्ता सत्कार तेरे शहर दा शहर तेरे क़दर नहीं लोकां नू सच्चे प्यार दी रात नूं खुल्दा है हर बाजार तेरे शहर दा जिथे […]

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shayarisms4lovers mar18 149 - कली का फूल बनना और बिखर जाना मुक़दर है

कली का फूल बनना और बिखर जाना मुक़दर है

तुम ही को चाहते है तुम ही से प्यार करते है यही बरसो से आदत है और आदत कब बदलती है तुम को जो याद रखा है यही अपनी इबादत है इबादत जिस तरह की हो इबादत कब बदलती है कली का फूल बनना और बिखर जाना मुक़दर है यही कानून-ऐ-फितरत है और फितरत कब […]

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shayarisms4lovers mar18 108 - यह जरूरी तो नहीं – इश्क़-ऐ-गम

यह जरूरी तो नहीं – इश्क़-ऐ-गम

उम्र जलवो में बसर हो यह जरूरी तो नहीं हर शबे-ऐ-गम की सेहर हो यह जरूरी तो नहीं नींद तो दर्द के बिस्तर पर भी आ जाती है उसके आगोश में सर हो यह जरूरी तो नहीं आग को खेल पतंगों ने समझ रखा है सब को अंजाम का डर  हो यह जरूरी तो नहीं वो […]

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shayarisms4lovers June18 199 - सब को दुआओं में याद रखना आदत है मेरी

सब को दुआओं में याद रखना आदत है मेरी

रिवायत माना के मरने वालों को भुला देती है यह दुनिया मुझे जीते जी को भुला कर तुम ने रिवायत ही बदल डाली Riwayat Maana ke Marnay Walon Ko Bhula Daiti hai yeah Dunya Mujhe Jite ji Ko Bhula Kar Tum Ne Riwayat Hi Badal Dali.. मोहब्बत भूल जाना भुला देना फ़क़त एक वेहम् ही […]

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shayarisms4lovers June18 199 - किसी के हिजर में नींदें गवां कर कुछ नहीं मिलता – Wasi Shah

किसी के हिजर में नींदें गवां कर कुछ नहीं मिलता – Wasi Shah

हाल-ऐ-दिल न कर बयाँ उन से हाल-ऐ-दिल “वासी” मगरूर सा शख्स है कहीं साथ न छोड़ दे Haal-ae-Dil Na Kar Byaan Un Se Haal-ae-Dil “WASI” Magror Sa Shakhs Hai Kahin Sath Na Chor De जान -ऐ-मन कौन कहता है शरारत से तुम्हें देखते हैं जान -ऐ-मन हम तो मोहब्बत से तुम्हें देखते है Jaan-ae-maan kon […]

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shayarisms4lovers June18 199 - इश्क़ दा जोर – पंजाबी शायरी

इश्क़ दा जोर – पंजाबी शायरी

इश्क़ दा ख्वाब इश्क़ दा जिस नू ख्वाब आ जाँदा ऐ , वक़्त समझो खराब आ जाँदा ऐ , मेहबूब आवे या न आवे पर तारे गिन्नं दा हिसाब आ जाँदा ऐ Ishq Da Khwaab ISHQ da jisnu khwaab aa janda ae, waqt samjho khraab aa janda ae, mehboob aave ya na aave par taare […]

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shayarisms4lovers may18 88 - जो बोल ज़ुबानों निकल गया – Punjabi Shayari and Kalaam

जो बोल ज़ुबानों निकल गया – Punjabi Shayari and Kalaam

जो बोल ज़ुबानों निकल गया जो बोल ज़ुबानों निकल गया ओ तीर कमानों निकल गया .. मैं दिल विच ओहनूं लभणां वां ओ दुर आसमानों निकल गया .. ओहनूं मेरीया गलां याद रेह्याँ पर मैं पहचानों निकल गया .. हूण हाल फकीरा दा की पुछदे ओ जद्ओ दर्द बयानों निकल गया .. मैं घर दी […]

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shayarisms4lovers mar18 153 - याद-ऐ-गम

याद-ऐ-गम

तुम याद नहीं करते हम भुला नहीं सकते तुम हँसा नहीं सकते हम रुला नहीं सकते दोस्ती इतनी प्यारी है हमारी तुम जान नहीं सकते और हम बता नहीं सकते दिल गुमसुम जुबान खामोश क्यों है यह आँखें आज नम क्यों है जिन्हे कभी पाया ही न था तो आज उन्हें हमे खोने का गम […]

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