shayarisms4lovers June18 250 - Chand – Ajay

Chand – Ajay

गंगा की शांत सतह पे वो एकादसी का चंद्रमा घाटों पे लगा वो नौंको का डेरा सीढ़ियों पे बैठे हम भी कुछ शांत से ही है लेकिन मन को है पानी के लथेड़ों ने घेरा मेरा मन भी है गंगा की गहराइयां लिए बाते बहुत सी दबी है अंगड़ाइयाँ लिए… मैं भी वो चाँद होना […]

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shayarisms4lovers June18 175 - Khud kiTalash Abhi baki hai – Chanchal

Khud kiTalash Abhi baki hai – Chanchal

खुद की तलाश मे भटकती सी “मैं ” अनगिनत, अनन्त, असीम सवालो के संग! न जाने किस अधूरे पन को भरती सी- मैं | कई रिश्ते, जज्बात, रास्ते, और मंजिलों से गुजरती सी मैं | न जाने कितने एहसासों मै संवरती बिखरती सी “मैं ” कहा किस डगर किधर जा रही हूँ | क्या है? […]

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