shayarisms4lovers June18 276 - ज़माने ने मुझे चोट दी है – दुःख व् गहराई भरी कविता

ज़माने ने मुझे चोट दी है – दुःख व् गहराई भरी कविता

चले हैं लोग मैं रस्ता हुआ हूं मुद्दत से यहीं ठहरा हुआ हूं ज़माने ने मुझे जब चोट दी है मैं जिंदा था नहीं जिंदा हुआ हूं मैं पहले से कभी ऐसा नहीं था मैं तुमको देखकर प्यारा हुआ हूं मैं कागज सा न फट जाऊं ए लोगो उठाओ ना मुझे भीगा हुआ हूं मेरी […]

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कैसे जीऊ मैं खुशहाल ज़िन्दगी | एक और अधूरी मोहब्बत

कैसे जीऊ मैं खुशहाल ज़िन्दगी उसकी मोहब्बत ने हमको मारा हैं रखा था जो दिल संभाल कर उस दिल को हमने हारा हैं बनता हैं महफ़िलो की शान वो पर बनता ना मेरा सहारा हैं दूर भी हम कैसे रह सकते हैं इंसां वो सबसे लगता प्यारा हैं जाए कहा अब उसे छोड़ कर बिन […]

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