बाजीराव के शनिवार वाडा किले में आज भी गूंजती है किसी की चीख | Shaniwar Wada Fort History In Hindi

भारत की एतिहासिक धरोहर शनिवार वाडा किला (Shaniwar Wada Fort) पुणे, महाराष्ट्र का एक प्रमुख पर्यटक स्थल है. बाजीराव प्रथम द्वारा निर्मित यह किला बाजीराव द्वारा काशीबाई को दिए धोखे और बाजीराव-मस्तानी की अधूरी प्रेमगाथा के साथ ही पेशवाओं की उन्नति से लेकर पतन की कहानी खुद में संजोये हुए है. यह पुणे के प्रमुख पर्यटक स्थलों में गिना जाता है.

१८ वीं शताब्दी में मराठा पेशवाओं के उदयकाल में शनिवार वाडा किला भारतीय राजनीति का प्रमुख केंद्र हुआ करता था. लेकिन दुर्भाग्यवश यह बड़े ही रहस्यमयी तरीके से आग की चपेट में आकर नष्ट हुआ. आज यह अवशेष के रूप शेष है.

Shaniwar Wada Fort History In Hindi
Shaniwar Wada Fort History In Hindi | Source : wikipedia

शनिवार वाडा किले के साथ एक काला अध्याय भी जुड़ा हुआ है. इस किले में सत्ता में लोभ में मराठाओं के ५वें पेशवा १६ वर्ष के नारायणराव की निर्मम हत्या करवा दी गई थी. कहा जाता है कि उनकी आत्मा इस किले में भटकती है और अंतिम घड़ी में उनके द्वारा ली गई चीखें आज भी इस किले की चारदीवारों में गूंजती है. यह किला भारत के सबसे रहस्यमयी/डरावनी जगहों (Top Most Haunted Places Of India) में शामिल है.

शनिवार वाडा किले का निर्माण (Shaniwar Wada Fort Constrution)

शनिवार वाडा का निर्माण पेशवा बाजीराव प्रथम द्वारा करवाया गया था, जो मराठा शासक छत्रपति साहू के पेशवा/प्रधान थे. इसकी नींव १० जनवरी १७३० को शनिवार के दिन रखी गई थी. शनिवार के दिन नींव रखे जाने के कारण इस किले का नाम ‘शनिवार वाडा’ (Shaniwar Wada) पड़ा.

इस ७ मंजिला किले के निर्माण की जिम्मेदारी राजस्थान के ठेकेदारों को सौंपी गई, जो ‘कुमावत क्षत्रिय’ (Kumawat Kshatriya) कहलाते थे. इसे पूर्णतः पत्थरों से निर्मित किये जाने की योजना थी. किंतु सतारा की प्रजा द्वारा वहाँ के राजा साहू से शिकायत की गई कि पत्थरों से ईमारत के निर्माण का अधिकार केवल राजाओं का है. जिसके बाद राजा साहू द्वारा पेशवाओं को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई गई और शनिवार वाडे का निर्माण पत्थरों के बजाय ईंट से करने को कहा. उस समय तक किले का आधार तैयार हो चुका था. राजा साहू की बात मानकर पेशवाओं ने किले की शेष मंजिलों का निर्माण ईंटों से करवाया.

किले के निर्माण हेतु प्रयुक्त टीक की लकड़ी जुन्नार के जंगलों (Junnar Forest) से, पत्थर चिचवाड़ की खदानों (Chinchwad Mines) से और चूना जेजुरी खदानों (Jejuri Mines) से …

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