Urdu Mehfil Shayari – Parveen Shakir,Ibrahim Zauq,Jigar Moradabadi & Muneer Niyazi

Mehfil shayari - Urdu Mehfil Shayari – Parveen Shakir,Ibrahim Zauq,Jigar Moradabadi & Muneer Niyazi



ख्याल जिसका था मुझे ख्याल में मिला मुझे 
सवाल का जवाब भी सवाल में मिला मुझे

BY Poetry – MUNEER NIYAZI

हम तो समझे थे की एक ज़ख़्म है भर जायेगा 
क्या खबर थी की रग-ऐ -जान में उतर जायेगा

BY Poetry – Parveen Shakir

पास जब तक वो रहे दर्द थम जाता है 
फ़ैल जाता है फिर आँख के काजल की तरह

BY Poetry – Parveen Shakir

तुम जिसे याद करो फिर उसे क्या याद रहे 
न खुद की हो परवाह न खुदा याद रहे

BY Poetry – Ibrahim Zauq

हम नहीं वो जो करें खून का दावा तुझ पर 
बाकि पूछेगा खुदा भी तो मुकर जायेंगे

BY Poetry – Ibrahim Zauq

क्या जाने उसे वहां है क्या मेरी तरफ से 
जो ख्वाब में भी रात को तनहा नहीं आता

BY Poetry – Ibrahim Zau

मेरी ज़िन्दगी तो गुज़री तेरे हिजर के सहारे 
मेरी मौत को भी प्यारे कोई 
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अभी कुछ शेयर बाकी है – By Jaun Elia Shayari

Jaun Elia Shayari - अभी कुछ शेयर बाकी है – By Jaun Elia Shayari


इरादा रोज़ करता हूँ , मगर कुछ कर नहीं सकता
मैं पेशेवर फरेबी हूँ , मोहब्बत कर नहीं सकता

यहाँ हर एक चेहरे पर अलग तहरीर लिखी है
मेरी आँखों में ऑंसू हैं , अभी कुछ पढ़ नहीं सकता

मैं उस घर का मुक़ीमी हूँ , जिसे औक़ात कहतें है
मैं अपनी हद में रहता हूँ , सो आगे बढ़ नहीं सकता

अभी कुछ शेयर बाकी है , मगर लिखने नहीं हरगिज़
किसी की लाज रखनी है , सो ज़ाहिर कर नहीं सकता

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Irada Roz Karta Hoon,Magar Kuch Kar Nahi Sakta
Main Paisewar Fraibi Hoon , Mohabbat Kar Nahi Sakta

Yahan Har Ek Chehre Par Alag Tehreer Likhi Hai
Meri Aankhon Mein Ansu Hain, Abhi Kuch Padh Nahi Sakta

Main Us Ghar Ka Muqeemi Hoon, Jisy Oqat Kehtein Hai
Main Apni Had Mein Rehta Hoon, So Agay Badh Nahi Sakta

Abhi Kuch Sher Baki Hai, Magar Likhnay Nahi Hargiz…

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काश ! के  होते  वो  मेरे

काश ! के  होते  वो  मेरे
उनकी  आगोश  में  गुजरती  शामें
उनकी  बाँहों  में  होते  मेरे  सवेरे

      न  रहती  बाकि  कोई  आरज़ू , कोई हसरत
      न  होते  जीवन  में  अँधेरे

  जाने  क्यों  मेरी  राहों  में
किस्मत  ने  कांटे  बिखेरे

      है  दिल  का  बगीचा  वीरान
      वो  फूल      सका  आंचल में  मेरे

बड़ी  खुश  किस्मत  होगी  वो
आएगी  जो  जीवन  में  तेरे

      इस  कदर  हम  तन्हा    हुए  होते
      अगर  होते  वो  मेरे
      हाँ  ! काश  होते  वो  मेरे

लेखिका
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खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता

खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता ,
यह चीज़ वो है जो देखी कहीं कहीं मैंने ..

Khudaa to milta hai, Insaan hi nahi milta,
Yeh cheez woh hai jo dekhi kahin kahin meine…


जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है ,
उन का हर ऐब भी ज़माने को हुनर लगता है …

Jin ke angan mein Ameeri ka shajar lagta hai,
Un ka har aaib bhi zamane ko hunar lagta hai…


तेरी बन्दा परवारी से मेरे दिन गुज़र रहे हैं
न गिला है दोस्तों का , न शिकायत -ऐ -ज़माना

Teri Banda Parwari Se Mere Din Guzaar Rahe Hain
Na Gila Hai Doston Ka, Na Shikayat-e-Zamana…


और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा
तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना

Aur bhi kar daita hai Dard mein Izafa
Tere hote huwe Gairoon ka Dilasa daina…

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चले भी आओ दुनिया से जा रहा है कोई – फ़राज़ की शायरी

चले भी आओ दुनिया से जा रहा है कोई – फ़राज़ 

ग़म -ऐ- हयात का झगड़ा मिटा रहा है कोई
चले भी आओ दुनिया से जा रहा है कोई

अज़ल से कह दो रुक जाए  दो घड़ी
सुना है आने का वादा निभा रहा है कोई

वो इस नाज़ से बैठे हैं लाश के पास
जैसे रूठे हुए को मना रहा है कोई

पलट कर न आ जाए  फिर सांस नब्ज़ की  “फ़राज़”
इतने हसीं हाथों से मय्यत सजा रहा है कोई

Chalay Bhi Aaoo Duniya Say Ja Raha Hai Koi – Faraz

Gham-ae-Hayaat Ka Jhagra Mita Raha Hai Koi
Chalay Bhi Aaoo Duniya Say Ja Raha Hai Koi

Azal Say Keh Do Ruk Jayee Do ghadi
Suna Hai Aanay Ka Waada Nibha Raha Hai Koi

Wo Is Naaz Say Baithay Hain Laash Ke Pass
Jaisay Rothay Hue Ko Mana Raha Hai Koi

Palat Ker Na Aa Jaye Pher Saans Nabz …

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हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी – अल्लम इक़बाल शायरी

बड़ा बे-अदब हूँ

तेरे इश्क़ की इन्तहा चाहता हूँ
मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी
बड़ा बे-अदब हूँ , सज़ा चाहता हूँ

Bada be-Adab Hoon

Tairay ishq kii intehaa chahataa hoon
mairi saadagii daikh kyaa chahataa hoon
bharii bazm mein raaz ki baat kah di
bada bai-adab hoon, sazaa chahataa hoon….


इक़बाल दुनिया तुझ से नाखुश है

बड़े इसरार पोशीदा हैं इस तनहा पसंदी में .
यह मत समझो के दीवाने जहनदीदा नहीं होते .
ताजुब क्या अगर इक़बाल दुनिया तुझ से नाखुश है
बहुत से लोग दुनिया में पसंददीदा नहीं होते .

IQBAL dunia tujh se nakhush hai

Barray israr poshida hain is tanha pasnadi mein.
Ye mat samjho k dewanay jahan’deeda nahi hotay.
Tajub kya agar IQBAL duniya tujh se nakhush hai
Bohat se log duniya mein pasanddeeda nahi hotay….


दर्द में इज़ाफ़ा

और भी कर देता है दर्द में …

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अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना – आलम इक़बाल की शायरी

अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना

मुहब्बत की तमना है तो फिर वो वस्फ पैदा कर
जहां से इश्क़ चलता है वहां तक नाम पैदा कर

अगर सचा है इश्क़ में तू ऐ बानी आदम
निग़ाह -ऐ -इश्क़ पैदा कर

मैं तुझ को तुझसे ज़्यादा चाहूँगा
मगर शर्त ये है के अपने अंदर जुस्तजू तो पैदा कर

अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना
तू अपने आप में पहले अंदाज़ -ऐ -वफ़ा तो पैदा कर

Agar Na Badlu Teri Khatir Har Ek Cheez To Kehna

Muhabbt Ki Tamna Hai To Phir Wo Vasf Peda Kar
Jahan Se Ishq Chalta Hai Wahan Tak Naaam Peda Kar

Agar Sacha Hai Ishq Mein Tu Ae Bani ADAM
Nighah-E-Ishq Peda Kar

Main Tujh Ko Tujh Se Ziada Chahunga
Magar Shart Yeh Hai Ki Apne Andar Justju To Pedaa Kar

Agar Na Badlu Teri Khatir Har Ek Cheez …

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अफ़सोस के तुझ से मेरी आदत नहीं मिली – फ़राज़ शायरी

अफ़सोस के तुझ से मेरी आदत नहीं मिली – फ़राज़

ऐसा नहीं के हम को मोहब्बत नहीं मिली
तुम्हें चाहते थे , पर तेरी उल्फत नहीं मिली

मिलने को ज़िन्दगी में तो कई हमसफ़र मिले
पर उन की तबियत से तबियत नहीं मिली

चेहरों में दूसरों के तुझे ढूँढ़ते रहे
सूरत नहीं मिली कहीं सीरत नहीं मिली

बहुत देर से आया तू मेरे पास
अल्फ़ाज़ ढूंढने की भी मोहलत नहीं मिली

तुझ को गिला है के तवज्जो न दी तुझे
लेकिन हम को तो खुद अपनी मोहब्बत नहीं मिली

हम को तो तेरी हर आदत अच्छी लगी  “फ़राज़
अफ़सोस के तुझ से मेरी आदत नहीं मिली

Afsos Ke Tujh Se Meri Aadat Nahi Mili

Aisa Nahi Ke Hum Ko Mohabbat Nahi Mili
Tumhain Chahtay Thay, Par Teri Ulfat Nahi Mili

Milnay Ko Zindagi Mein Toh Kayi Hamsafar Milay
Par Un Ki Tabiyat Se Tabiyat Nahi Mili

Chehron Mein Dosron …

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Wasi Shah Shayari – Ankhon Se Meri is Liye Lali Nahi Jati


आँखों से मेरी इस लिए लाली नहीं जाती
यादों से कोई रात जो खाली नहीं जाती

अब उम्र न मौसम न वो रास्ते के वो पलटे
इस दिल की मगर खामं ख्याली नही जाती

मांगे तू अगर जान भी हंस के तुझे दे दें
तेरी तो कोई बात भी टाली नहीं जाती

अब आए कोई आकर यह तेरे दर्द संभाले
अब हम से तो यह ज़ागीर संभाली नहीं जाती

मालूम हमें भी हैं बहुत से तेरे क़िस्से
हर बात तेरी हम से उछाली नही जाती

हमराह तेरे फूल खिलाती थी जो दिल में
अब शाम वही दर्द से खाली नहीं जाती

हम जान से जायेंगे तभी बात बनेगी
तुम से तो कोई राह  निकली नहीं जाती ….!!!

Ankhon Se Meri is Liye Lali Nahi Jati
Yadoon Se Koi Raat jo Khali Nahi Jati

Ab Umar Na Mosam Na Woh Rastey Ke wo palte
Iss Dil Ki Magar Khaam Khayali Nahe …

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जब भी गुज़रे हैं किसी दर्द के बाजार से हम – परवीन शाकिर शायरी

अक्स -ऐ -खुशबू हूँ

अक्स -ऐ -खुशबू हूँ बिखरने से न रोके कोई
और फिर बिखरु तो मुझ को न समेटे कोई .

काँप उठती हूँ मैं यह सोच के तन्हाई में
मेरे चेहरे पे तेरा नाम न पढ़ ले कोई

अब तो इस राह से वो शख्स गुज़रता भी नहीं
अब किस उम्मीद पे दरवाज़े से झाँके कोई

कोई आहट , कोई आवाज़ , कोई चाप नहीं
दिल की गालियां बड़ी सुनसान हैं आये कोई

Aks-ae-khushboo hoon

Aks-ae-khushboo hoon bikherne se na roke koi
aur phir bikharjaoun to mujh ko na samete koi.

 

kaanp uthti hoon main yeah soch ke tanhayii mein….
mere chehre pe tera naam na padh le koi

ab to iss rah se wo shakhs guzarta bhi nahi..
ab kis umeed pe darwaze se jhanke koi

Koi aahat, koi awaz, koi chaap nahi,
dil ki ghaliyaan bari sunsaan hein aaye koi.


हुई बर्बाद मोहबत कैसे

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