Urdu Mehfil Shayari – Parveen Shakir,Ibrahim Zauq,Jigar Moradabadi & Muneer Niyazi

Mehfil shayari - Urdu Mehfil Shayari – Parveen Shakir,Ibrahim Zauq,Jigar Moradabadi & Muneer Niyazi



ख्याल जिसका था मुझे ख्याल में मिला मुझे 
सवाल का जवाब भी सवाल में मिला मुझे

BY Poetry – MUNEER NIYAZI

हम तो समझे थे की एक ज़ख़्म है भर जायेगा 
क्या खबर थी की रग-ऐ -जान में उतर जायेगा

BY Poetry – Parveen Shakir

पास जब तक वो रहे दर्द थम जाता है 
फ़ैल जाता है फिर आँख के काजल की तरह

BY Poetry – Parveen Shakir

तुम जिसे याद करो फिर उसे क्या याद रहे 
न खुद की हो परवाह न खुदा याद रहे

BY Poetry – Ibrahim Zauq

हम नहीं वो जो करें खून का दावा तुझ पर 
बाकि पूछेगा खुदा भी तो मुकर जायेंगे

BY Poetry – Ibrahim Zauq

क्या जाने उसे वहां है क्या मेरी तरफ से 
जो ख्वाब में भी रात को तनहा नहीं आता

BY Poetry – Ibrahim Zau

मेरी ज़िन्दगी तो गुज़री तेरे हिजर के सहारे 
मेरी मौत को भी प्यारे कोई चाहिए बहाना

BY Poetry – Jigar Moradabadi

कुछ खटकता तो है पहलु में मेरे रह रह कर 
अब खुदा जाने तेरी याद है या दिल मेरा

BY Poetry – Jigar Moradabadi


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बशीर बद्र – उर्दू शायरी & ग़ज़ल

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हमा वक़्त रंज-ओ-मलाल क्या , जो गुज़र गया सो गुज़र गया
उसे याद कर के न दिल दुखा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                  न गिला किया न खफा हुए , यूं ही रास्ते में जुदा हुए
                  न तू बेवफा न में बेवफा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

वो ग़ज़ल की एक किताब था , वो गुलाबों में एक गुलाब था
ज़रा देर का कोई ख्वाब था , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                   मुझे पतझड़ों की कहानिया , न सुना सुना कर उदास कर
                   तू ख़िज़ाँ का फूल है मुस्कुरा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

वो उदास धूप समेट कर , कहीं वादियों में उतर चूका
उसे अब न दे मेरे दिल सदा ,जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                  यह सफर भी कितना तवील है , यहाँ वक़्त कितना क़लील है
                 कहाँ लौट कर कोई आएगा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

वो वफ़ाएँ थी या जफायें थी , यह न सोच किस की खतायें थी
वो तेरे है उस को गले लगा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                  तुझे ऐतबार -ओ -यकीन नहीं , न ही दुनिया इतनी बुरी नहीं
                  न मलाल कर मेरे साथ आ , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।


Hama Waqt Ranj-O-Malaal Kya , Jo Guzaar Gaya So Guzar Gaya
Usay Yaad Kar Key Na Dil Dukha , Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                    Na Gila Kiya Na Khafa Hue, Yoon Hi Raastey Mein Juda Hue
                    Na Tu Bewafa Na Mein Bewafa, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

Wo Gazal Ki Ek Kitab Tha , Wo Gulabon Mein Ek Gulab Tha
Zara Der Ka Koi Khwaab Tha, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                    Mujhey Patjharon Ki Kahaniya , Na Suna Suna Kar Udaas Kar
                    Tu Kizaan Ka Phool Hai Muskura, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

Wo Udaas Dhoop Samait Kar , Kahin Wadiyon Mein Utaar Chuka
Usay Ab Na Dey Mere Dil Sada,Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                    Yeh Safaar Bhi Kitna Taweel Hai, Yahan Waqt Kitna Qaleel Hai
                   Kahan Laut Kat Koi Ayee Ga , Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

Wo Wafaein Thi Ya Jafaien Thi, Yeh Na Soch Kis Ki Khataien Thi
Wo Tere Hai Us Ko Gale Laga, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                  Tujhe Aitbar-O-Yakeen Nahin, Na Hi Duniya Itni Buri Nahi
                  Na Malaal Kar Mere Saath Aa , Jo Guzaar Gya So …

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अभी कुछ शेयर बाकी है – By Jaun Elia Shayari

Jaun Elia Shayari


इरादा रोज़ करता हूँ , मगर कुछ कर नहीं सकता
मैं पेशेवर फरेबी हूँ , मोहब्बत कर नहीं सकता

यहाँ हर एक चेहरे पर अलग तहरीर लिखी है
मेरी आँखों में ऑंसू हैं , अभी कुछ पढ़ नहीं सकता

मैं उस घर का मुक़ीमी हूँ , जिसे औक़ात कहतें है
मैं अपनी हद में रहता हूँ , सो आगे बढ़ नहीं सकता

अभी कुछ शेयर बाकी है , मगर लिखने नहीं हरगिज़
किसी की लाज रखनी है , सो ज़ाहिर कर नहीं सकता

*************

Irada Roz Karta Hoon,Magar Kuch Kar Nahi Sakta
Main Paisewar Fraibi Hoon , Mohabbat Kar Nahi Sakta

Yahan Har Ek Chehre Par Alag Tehreer Likhi Hai
Meri Aankhon Mein Ansu Hain, Abhi Kuch Padh Nahi Sakta

Main Us Ghar Ka Muqeemi Hoon, Jisy Oqat Kehtein Hai
Main Apni Had Mein Rehta Hoon, So Agay Badh Nahi Sakta

Abhi Kuch Sher Baki Hai, Magar Likhnay Nahi Hargiz
Kisi Ki Laaj Rakhni Hai, So Zahir Kar Nahi Sakta


नया एक रिश्ता पैदा क्यों करें हम
बिछड़ना है तो झगड़ा क्यों करें हम

ख़ामोशी से अदा हो रास-ऐ-दूरी
कोई हंगामा बरपा क्यों करें हम

यह काफी है की दुश्मन नहीं है हम
वफादारी का दावा फिर क्यों करें हम

*************

Naya Ek Rishta Paida Kyun Karein Hum
Bichhadna Hai To Jhagda Kyun Karien Hum

Khamoshi Se Ada Ho Ras-Ae-Duri
Koi Hungama Barpa Kyun Karein Hum

Yeh Kaafi Hai Ki Dushman Nahi Hai Hum
Wafadari Ka Daava Kyun Karein Hum


कितनी दिलकश हो तुम, कितना दिल-जू हूँ मैं
क्या सितम है की हम लोग मर जाएंगे

*************

Kitni Dilkash Ho Tum , Kitna Dil-Ju Hoon Main
Kya Sitam Hai Ji Hum Log Mar Jaayenge…

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shayarisms4lovers June18 291 - काश ! के  होते  वो  मेरे

काश ! के  होते  वो  मेरे

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काश ! के  होते  वो  मेरे
उनकी  आगोश  में  गुजरती  शामें
उनकी  बाँहों  में  होते  मेरे  सवेरे

      न  रहती  बाकि  कोई  आरज़ू , कोई हसरत
      न  होते  जीवन  में  अँधेरे

  जाने  क्यों  मेरी  राहों  में
किस्मत  ने  कांटे  बिखेरे

      है  दिल  का  बगीचा  वीरान
      वो  फूल      सका  आंचल में  मेरे

बड़ी  खुश  किस्मत  होगी  वो
आएगी  जो  जीवन  में  तेरे

      इस  कदर  हम  तन्हा    हुए  होते
      अगर  होते  वो  मेरे
      हाँ  ! काश  होते  वो  मेरे

लेखिका – जसविंदर कौर उर्फ़ जस्सी (नकोदर पंजाब)


Kash ! Ke Hote Wo Mere
Unki Agosh Mein Gujrati Shaame
Unki Bahon Mein Hote Mere Savere

                    Na Rehti Baki Koi Arzoo, Na Koi Hasrat
                    Na Hote Jeevan Main Andhere

Na Jane Kyon Meri Rahon Mein
Kismat Ne Kante Bikhere

                   Hai Dil Ka Bagicha Viran
                   Wo Phool Na Aa Saka Aanchal Mein Mere

Badi Kush Kismat Hogi Wo
Ayegi Jo Jivan Main Tere

                   Is Kadar Hum Tanha Na Hue Hote
                   Agar Hote Wo Mere
                   Haan Kash Hote Wo Mere

Written By – Jaswinder Kaur “Jassi” (Nakodar Punjab)

 …

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shayarisms4lovers June18 131 - मैं हूँ इक ख्वाब मगर जागती आँखों का – Ameer Qazalbash Shayari

मैं हूँ इक ख्वाब मगर जागती आँखों का – Ameer Qazalbash Shayari

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आरज़ू-ऐ-साहिल

उनकी बेरुखी में भी इल्तेफ़ात शामिल है
आज कल मेरी हालत देखने के काबिल है

क़त्ल हो तो मेरा सा मौत हो तो मेरी सी
मेरे सोगवारों में आज मेरा क़ातिल है

मुजतरीब हैं मौजें क्यों उठ रही हैं तूफ़ान क्यों
क्या किसी सफ़ीने को आरज़ू-ऐ-साहिल है

सिर्फ राहजन ही से क्यों “अमीर ” शिकवा हो
मंज़िलों की राहों में राहबर भी शामिल है

Aarazuu-ae-saahil

unki berukhi mein bhi iltefaat shaamil hai
aaj kal meri haalat dekhne ke kabil hai

 

Qatal ho to mera sa maut ho to meri si
mere sog vaaron mein aaj meraa qaatil hai

muztarib hain maujen kyun uth rahe hain tuufaan kyun
kya kisi safine ko aarazuu-ae-saahil hai

sirf rahzan hi se kyon “Ameer” shikva ho
manzilon ki raahon mein raahbar bhi shaamil hai


कभी सोचा न था

जगमगाते शहर की रंगीनियों में क्या न था
ढूंढने निकला था जिस को मैं , वही चेहरा न था

रेत पर लिखे हुए नामों को पढ़ कर देख लो
आज तनहा रह गया हूँ कल मगर ऐसा न था

हम वही तुम भी वही मौसम वही मंज़र वही
फासला बढ़ जाएगा इतना कभी सोचा न था

Kabhi Socha na Tha

Jagmagaate shehar ki ranginiyon mein kya na tha
dhundhane nikala tha jis ko main wahi chehara na tha

ret pe likhe huye naamon ko padh kar dekh lo
aaj tanhaa reh gayaa hoon kal magar aisa na tha

hum wahi tum bhi wahi mausam wahi manzar wahi
fasla bad jaayega itana kabhi socha na tha


तू एक दरिया

आज की रात भी गुज़री है मेरी कल की तरह
हाथ आये न सितारे तेरे आँचल की तरह

रात जलती हुई इक ऐसी चिता है जिस पर
तेरी यादें हैं सुलगते हुए संदल की तरह

तू एक दरिया है मगर मेरी तरह प्यासा है
मैं तेरे पास चला आऊंगा बादल की तरह

मैं हूँ इक ख्वाब मगर जागती आँखों का “अमीर ”
आज भी लोग छोड़ दे न मुझे कल की तरह

To Ek Dariya Hai

Aaj ki raat bhi guzari hai meri kal ki tarah
haath aaye na sitaare tere aanchal ki tarah

raat jalti hui ik aisi chitaa hai jis par
teri yaadein hain sulagate huye sandal ki tarah

to ek dariyaa hai magar meri tarah pyaasa hai
main tere paas chalaa aaunga baadal ki tarah

main hoon ik khwab magar jaagati ankhon ka “Ameer”
aaj bhi log chod de na mujhe kal ki tarah…

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shayarisms4lovers mar18 71 - यह इश्क़ वाले हैं जो हर चीज़ लूटा देते हैं – ग़ालिब

यह इश्क़ वाले हैं जो हर चीज़ लूटा देते हैं – ग़ालिब

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यह इश्क़ वाले

अक़्ल वालों के मुक़द्दर में यह जूनून कहाँ ग़ालिब
यह इश्क़ वाले हैं जो हर चीज़ लूटा देते हैं ….

Yeh Ishq Wale

Aqal Walon ke Muqaddar mein Yeh Junoon Kahan Ghalib,
Yeh Ishq Wale hain Jo Har cheez Luta Deta Hain…..


ज़ाहिर है तेरा हाल

ग़ालिब न कर हुज़ूर में तू बार बार अरज़
ज़ाहिर है तेरा हाल सब उन पर कहे बग़ैर

Zaahir Hai Tera Haal

Ghalib na kar huzoor mein tu bar bar arz,
Zaahir hai tera haal sab un par kahe baghair !!


वो आये घर में  हमारे

यह जो हम हिज्र में दीवार-ओ -दर को देखते हैं
कभी सबा को कभी नामाबर को देखते हैं

वो आये घर में  हमारे , खुदा की कुदरत है
कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं

नज़र लगे न कहीं उसके दस्त-ओ -बाज़ू को
ये लोग क्यों मेरे ज़ख्म-ऐ -जिगर को देखते हैं

तेरे जवाहीर-ऐ- तरफ ऐ-कुलाह को क्या देखें
हम ओज-ऐ-ताला- ऐ-लाल-ओ-गुहार को देखते हैं

Wo Aaye Ghar Mein Hamaare

Ye jo ham hijr mein diivaar-o-dar ko dekhate hain
kabhii sabaa ko kabhii naamaabar ko dekhate hain

Wo aaye ghar mein hamaare, Khudaa kii kudarat hai
kabhii ham un ko kabhii apane ghar ko dekhate hain

nazar lage na kahii.n usake dast-o-baazuu ko
ye log kyon mere zaKhm-e-jigar ko dekhate hain

tere javaahiir-e- tarf-e-kulah ko kyaa dekhein
ham auj-e-taalaa- e-laal-o- guhar ko dekhate hain…..…

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shayarisms4lovers mar18 60 - फ़राज़ और मोहसिन नक़वी की खूबसूरत उर्दू शायरी

फ़राज़ और मोहसिन नक़वी की खूबसूरत उर्दू शायरी

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तन्हाई और महफ़िल – फ़राज़

तन्हाई में जो चूमता है मेरे नाम के हरूफ फ़राज़
महफ़िल में  वो शख्स मेरी तरफ देखता भी नहीं ​

Tanhai Aur Mehfil – Faraz

Tanhai main jo chomta hai mere naam ke haroof  “Faraz”
Mehfil mein wo shakhas meri taraf dekhta bhi nahi​


जिंदगी और मौत – फ़राज़

कोई न आएगा तेरे सिवा मेरी जिंदगी में  “फ़राज़”
एक मौत ही है जिस का हम वादा नही करती ​

Zindgi Aur Maut – Faraz

Koi na ayega tere siwa meri zindgi main “Faraz”
Ek maut hi hai jiss ka hum wada nahi karte


मिज़ाज़ और धड़कन – फ़राज़

कितना नाज़ुक मिज़ाज़ है  उसका  कुछ न पूछिये  “फ़राज़”
नींद नही आती उन्हें धड़कन के शोर से ​

Mizaz Aur Dhadkan – Faraz

Kitna nazuk mizaz hai uska kuch na puchiay “Faraz”
Neend nhi ati unhe Dhadkan ke shor se​


खुश और उदास – फ़राज़

वो मुझ से बिछड़ कर खुश है तो उसे खुश रहने दो “फ़राज़ “
मुझ से मिल कर उस का उदास होना मुझे अच्छा नहीं लगता

Khush Aur Udaas – Faraz

Wo mujh se bichad kar khush hai to usse khush rehne do “Faraz”
Mujh se mil kar us ka udass hona muje acha nai lagta


बेवफा और ज़िंदगी – फ़राज़

वो बेवफा ही सही, आओ उसे  याद कर लें  “फ़राज़”
अभी ज़िंदगी बहुत पड़ी है, उसे भुलाने के लिए ​

Bewafa Aur Zindgi – Faraz

Wo bewafa hi sahi aao usse yaad kar lein “Faraz”
Abhi zindgi bahut padi hai usse bhulane ke liye​


आँखें – मोहसिन  नक़वी 

तेरी कम गोइ के चर्चे हैं ज़माने भर में  “मोहसिन”
किस से सीखा है यूँ आँखों से बातों की वज़ाहत करना ​

Anken – Mohsin Naqvi

Teri kam goi ke charche hain zamane bhar main “Mohsin”
Kis se seekha hai yun ankhon se baton ki wazahat karna​


हाथों की लकीरें – मोहसिन  नक़वी 

अपने हाथों की लकीरें न बदल पाया  “मोहसिन”
खुशनसीबो से बहुत हाथ मिलाये हम ने ​

Hathon ki Lakeerain – Mohsin Naqvi

Apne hathon ki lakeerain na badal paya “Mohsin”
khush naseebo se bahut hath milay hum ne​…

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shayarisms4lovers may18 41 - तेरे वादे पर सितमगर – Daag Dehlvi

तेरे वादे पर सितमगर – Daag Dehlvi

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तेरे वादे पर सितमगर अभी और सब्र करते

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ऐ-यार होता
कभी जान सदके होती कभी दिल निसार होता

न मज़ा है दुश्मनी में न है लुत्फ़ दोस्ती में
कोई गैर गैर होता कोई यार यार होता

यह मज़ा था दिल्लगी का के बराबर आग लगती
न तुम्हें क़रार होता न हमें क़रार होता

तेरे वादे पर सितमगर अभी और सब्र करते
अगर अपनी ज़िन्दगी का हमें ऐतबार होता

Tere Waade Par Sitamgar Abhi Aur Sabr Karte

Ajab Apna Haal Hota Jo Visaal-AE-Yaar Hota
Kabhi Jaan Sadqe Hoti Kabhi Dil Nisaar Hota

Na Mazaa Hai Dushmani Main Na Hai Lutf Dosti Main
Koi Gair Gair Hota Koi Yaar Yaar Hota

Ye Mazaa Tha Dillagi Ka Ke Barabar Aag Lagti
Na Tumhen Qaraar Hota Na Hamein Qaraar Hota

Tere Waade Par Sitamgar Abhi Aur Sabr Karte
Agar Apni Zindagi Ka Hamein Aitbaar Hota…

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shayarisms4lovers mar18 16 - खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता

खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता

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खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता ,
यह चीज़ वो है जो देखी कहीं कहीं मैंने ..

Khudaa to milta hai, Insaan hi nahi milta,
Yeh cheez woh hai jo dekhi kahin kahin meine…


जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है ,
उन का हर ऐब भी ज़माने को हुनर लगता है …

Jin ke angan mein Ameeri ka shajar lagta hai,
Un ka har aaib bhi zamane ko hunar lagta hai…


तेरी बन्दा परवारी से मेरे दिन गुज़र रहे हैं
न गिला है दोस्तों का , न शिकायत -ऐ -ज़माना

Teri Banda Parwari Se Mere Din Guzaar Rahe Hain
Na Gila Hai Doston Ka, Na Shikayat-e-Zamana…


और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा
तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना

Aur bhi kar daita hai Dard mein Izafa
Tere hote huwe Gairoon ka Dilasa daina…

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shayarisms4lovers June18 210 - सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है – फ़राज़ की शायरी

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है – फ़राज़ की शायरी

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सुना है लोग उसे – फ़राज़ अहमद

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है
तो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते है

सुना है राफत है उसे खराब हालो से
तो अपने आप को बर्बाद कर के देखते है

सुना है दर्द की गाहक है चस्मे नाज़ उसकी
तो हम भी उसकी गली से गुजर के देखते है

सुना है उसको भी है शेयर -ओ -शायरी से सराफ
तो हम भी मोईझे अपने हुनर के देखते है

सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते है
यह बात है तो चलो बात कर के देखते है

सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है
सितारे बामे-ऐ-फलक से उतर के देखते है

सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती है
सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते है

सुना है उसके बदन की तराश ऐसी है
फूल अपनी कवाएं क़तर के देखते है

रुके तो गर्दिशयें उसका तवाफ़ करते है
चले तो उसे ज़माने ठहर के देखते है

Hindi and Urdu Shayari – हुस्न की तारीफ  (Faraz Ahmed) – सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है

Suna hai Log use – Faraz Ahmed

suna hai log use ankh bhar ke dekhte hai
to uske shehar mein kuch din tehar ke dekhte hai

suna hai raft hai use khrab haalo se
to apne app ko barbaad kar ke dekhte hai

suna hai dard ki gaahak hai chaasme naaz uski
to hum bhi uski gali se gujar ke dekhte hai

suna hai usko bhi hai sher-o-shayari se saraaf
to hum bhi moejhe apne hunar ke dekhte hai

suna hai bole to baaton se phool jharthe hai
yeah baat hai to chaalo baat kar ke dekhte hai

suna hai raat use chand takta rehta hai
sitare bame falak se utaar ke dekhte hai

suna hai din ko use titliya satati hai
suna hai raat ko jungu ther ke dekhte hai

suna hai uske badan ki tarash aisi hai
phhol apni kawayen katar ke dekhte hai

ruke to gardishyein uska tawaf karte hai
chale to use jamane ther ke dekhte hai

Urdu and hindi shayari – Husn – Faraz ki shayari – suna hai log use ankh bhar ke dekhte hai
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shayarisms4lovers mar18 163 - हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते – Noshi Gilani ki Shayari

हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते – Noshi Gilani ki Shayari

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मेरी सांसें

यह नामुमकिन नहीं रहेगा , मुक़ाम मुमकिन नहीं रहेगा
ग़रूर लहजे में आ गया तो कलाम मुमकिन नहीं रहेगा
तुम अपनी साँसों से मेरी सांसें अलग तो करने लगे हो लेकिन
जो काम आसान समझ रहे हो वो काम मुमकिन नहीं रहेगा

Meri Saansain

Yeh Nammumkin Nahi rahega, Muqaam Mumkin Nahi rahega
Gharoor Lehjay Mein Aa Gaya To Kalaam Mumkin Nahi rahega
Tum Apni Saanson Se Meri Saansain Alag To Karnay Lagay ho Laikin
Jo Kaam Aasaan Samajh Rahay ho Wo Kaam Mumkin Nahi rahega…


एहले-ऐ-इश्क़

कभी यह चुप में कभी मेरी बात बात में था
तुम्हारा अक्स मेरी सारी क़ायनात में था
हम एहले-ऐ-इश्क़ बहुत बदगुमाँ होते हैं
इसी तरह का कोई वस्फ तेरी ज़ात में था ..

Ehle-ae-ishq

Kahbi yeh chup main kabhi meri baat baat main tha,
Tumhara akss meri saari kayenaat mein tha,
Hum ehle-ae-ishq bahut bdgumaan hote hain,
isi tarah ka koi vasf teri zaat mein tha…


अगर हौसले किये होते

हमारे बस में अगर अपने फैसले होते
तो हम कभी के घरों को पलट गए होते

करीब रह के सुलगने से कितना बेहतर था
किसी मुक़ाम पर हम तुम बिछड़ गए होते

हमारे नाम पे कोई चिराग तो जलता
किसी जुबान पर हमारे भी तजकरे होते

हम अपना कोई अलग रास्ता बना लेते
हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते

Agar Hoslay Kye Hotay

Hamaray Bas Mein Agar Apne Faislay Hotay
Tou Hum Kubhi Ke gharon Ko Palat Gaye Hotay

Qareeb Reh Ke Sulaghnay Se Kitna Behtar Tha
Kisi Muqaam Per Hum Tum Bicharr Gaye Hotay

Hamaray Naam Pe Koi Charaagh Tou Jalta
Kisi Zabaan Pe Hamaray Bhi Tazkaray Hotay

Ham Apna Koi Alag Raasta Bana Letay
Hamaray Dil Ne Agar Hoslay Kye Hotay……

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shayarisms4lovers June18 205 - काश ! के वो मेरा होता , मेरे नाम की तरहँ – परवीन शाकिर

काश ! के वो मेरा होता , मेरे नाम की तरहँ – परवीन शाकिर

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मेरे नाम की तरहँ 

यह मेरी ज़ात की सब से बड़ी तमन्ना थी ,
काश ! के वो मेरा होता , मेरे नाम की तरहँ

Mere Naam Ki Tarhan

Yeh Meri Zaat Ki Sab Se Bari Tamanna Thi
Kaash! Ke Woh Mera Hota, Mere Naam Ki Tarhan


दर्द क्या होता है बताएँगे किसी रोज़

दर्द क्या होता है बताएँगे किसी रोज़
कमाल की ग़ज़ल तुम को सुनायेंगे किसी रोज़
थी उन की ज़िद के मैं जाऊँ उन को मानाने
मुझ को ये वेहम था वो बुलाएंगे किसी रोज़
उड़ने दो इन परिंदों को आज़ाद फ़िज़ाओं में
तुम्हारे होंगे अगर, तो लौट आएंगे किसी रोज़

Dard Kia Hota Hai Batayein Gay Kisi Roz

Dard Kia Hota Hai Batayein Gay Kisi Roz
Kamal Ki Ghazal Tum Ko Sunayein Gay Kisi Roz
Thi Un Ki Zid K Main Jaaoun Un Ko Manane
Mujh Ko Ye Veham Tha Wo Bulayein Gay Kisi Roz
Urney Do In Parindon Ko Azaad Fizaon Mein
Tumhare Honge Agar To Lout Aayein Gay Kisi Roz


तेरी खुशबु का पता करती है

तेरी खुशबु का पता करती है
मुझ पे एहसान हवा करती है
शब की तन्हाई मैं अब तो अक्सर
गुफ्तगू तुझ से रहा करती है
दिल को उस राह पे चलना ही नहीं
जो मुझे तुझ से जुड़ा करती है
ज़िन्दगी मेरी थी लेकिन अब तो
तेरे कहने मैं रहा करती है
उस ने देखा ही नहीं वरना ये आँख
दिल का हाल बयान कहा करती है
बेनियाज़ -ऐ -कफ -ऐ -दरिया अंगुश्त
रेत पर नाम लिखा करती है

Teri Khushbu Ka Pata Karti Hai

Teri khushbu ka pata karti hai
Mujh pe ehsan hawa karti hai
Shab ki tanhai main ab to aksar
Guftagu tujh se raha karti hai
Dil ko us rah pe chalna hi nahin
Jo mujhe tujh se juda karti hai
Zindagi meri thi lekin ab to
Tere kahne main raha karti hai
Us ne dekha hi nahin warna ye ankh
Dil ka ehwal kaha karti hai
beniyaz-e-kaf-e-dariya angusht
Ret par nam likha karti hai


कोई रात 

कोई रात मेरे आश्ना मुझे यूँ भी तो नसीब हो ..
न ख्याल हो लिबास का वो इतना मेरे क़रीब हो ..
बदन की गरम आंच से मेरी आरज़ू को आग दे ..
मेरा जोश भी बहक  उठे मेरा हाल भी अजीब हो ..
तेरे चाशनी वजूद का मैं सारा रस निचोड़ लूँ ..
फिर तू ही  मेरा मर्ज़ हो फिर तू हे मेरा तबीब हो ..…

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shayarisms4lovers mar18 29 - चले भी आओ दुनिया से जा रहा है कोई – फ़राज़ की शायरी

चले भी आओ दुनिया से जा रहा है कोई – फ़राज़ की शायरी

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चले भी आओ दुनिया से जा रहा है कोई – फ़राज़ 

ग़म -ऐ- हयात का झगड़ा मिटा रहा है कोई
चले भी आओ दुनिया से जा रहा है कोई

अज़ल से कह दो रुक जाए  दो घड़ी
सुना है आने का वादा निभा रहा है कोई

वो इस नाज़ से बैठे हैं लाश के पास
जैसे रूठे हुए को मना रहा है कोई

पलट कर न आ जाए  फिर सांस नब्ज़ की  “फ़राज़”
इतने हसीं हाथों से मय्यत सजा रहा है कोई

Chalay Bhi Aaoo Duniya Say Ja Raha Hai Koi – Faraz

Gham-ae-Hayaat Ka Jhagra Mita Raha Hai Koi
Chalay Bhi Aaoo Duniya Say Ja Raha Hai Koi

Azal Say Keh Do Ruk Jayee Do ghadi
Suna Hai Aanay Ka Waada Nibha Raha Hai Koi

Wo Is Naaz Say Baithay Hain Laash Ke Pass
Jaisay Rothay Hue Ko Mana Raha Hai Koi

Palat Ker Na Aa Jaye Pher Saans Nabz Ki Faraz
Itnay Haseen Hathoon Say Mayyat Saja Raha Hai Koi…

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shayarisms4lovers mar18 32 - हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी – अल्लम इक़बाल शायरी

हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी – अल्लम इक़बाल शायरी

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बड़ा बे-अदब हूँ

तेरे इश्क़ की इन्तहा चाहता हूँ
मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी
बड़ा बे-अदब हूँ , सज़ा चाहता हूँ

Bada be-Adab Hoon

Tairay ishq kii intehaa chahataa hoon
mairi saadagii daikh kyaa chahataa hoon
bharii bazm mein raaz ki baat kah di
bada bai-adab hoon, sazaa chahataa hoon….


इक़बाल दुनिया तुझ से नाखुश है

बड़े इसरार पोशीदा हैं इस तनहा पसंदी में .
यह मत समझो के दीवाने जहनदीदा नहीं होते .
ताजुब क्या अगर इक़बाल दुनिया तुझ से नाखुश है
बहुत से लोग दुनिया में पसंददीदा नहीं होते .

IQBAL dunia tujh se nakhush hai

Barray israr poshida hain is tanha pasnadi mein.
Ye mat samjho k dewanay jahan’deeda nahi hotay.
Tajub kya agar IQBAL duniya tujh se nakhush hai
Bohat se log duniya mein pasanddeeda nahi hotay….


दर्द में इज़ाफ़ा

और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा
तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना

Dard mein Izaafa

Or bhi kar daita hai Dard mein Izaafa
Tere hote huwe Gairoon ka Dilasa daina….


ज़ख्मो से भर दिया सीना

किसी की याद ने ज़ख्मो से भर दिया सीना
हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी

Zakhmoon se bhar Diya Seena

Kisi Ki Yaad ne Zakhmoon se bhar Diya Seena
Har aik Saans Par Shak hai k Aakhri Hogi…

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shayarisms4lovers June18 176 - Ahmad Faraz Shayari – Akele To Hum Pehle Bhi Jee Rahe The

Ahmad Faraz Shayari – Akele To Hum Pehle Bhi Jee Rahe The

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अकेले तो हम पहले भी जी रहे थे “फराज़
क्यों तन्हा हो गए तेरे जाने के बाद

प्यार में एक ही मौसम है बहारों का  “फ़राज़
लोग कैसे मौसमो की तरह बदल जाते है

वहां से एक पानी की बूँद न निकल सकी
तमाम उम्र जिन आँखों को हम झील देखते रहे

जिसे भी चाहा है शिदद्त से चाहा है
सिलसिला टुटा नहीं दर्द की ज़ंज़ीर का

वो जो शख्स कहता रहा तू न मिला तो मर जाऊंगा
वो जिन्दा है यही बात किसी और से कहने के लिए

कुछ ऐसे हादसे भी ज़िन्दगी में होते है  “फ़राज़
इंसान तो बच जाता है पर ज़िंदा नहीं रहता

 

ऐसा डूबा हूँ तेरी याद के समंदर में
दिल का धड़कना भी अब तेरे कदमो की सदा लगती है

एक ही ज़ख्म नहीं सारा बदन ज़ख़्मी है
दर्द हैरान है की उठूँ तो कहाँ से उठूँ

तुम्हारी दुनिया में हम जैसे हज़ारों है
हम ही पागल थे की तुम को पा के इतराने लगे

तमाम उम्र मुझे टूटना बिखरना था  “फ़राज़
वो मेहरबाँ भी कहाँ तक समेटा मुझे

शायरी – अहमद फ़राज़

Akele To Hum Pehle Bhi Jee Rahe The “Fazar
Kyon Tanhaa Ho Gaye Tere Jane Ke Baad

Pyar Mein Ek Hi Mausaam Hai Bharoon Ka “Faraz
Log Kaise Mausmoo Ki Tarah Badal Jate Hai

Wahan Se Ek Pani Ki Boond Na Nikal Ski
Tamaam Umar Jin Ankhon Ko Hum Jheel Dekhte Rahe

Jiso Bhi Chaha Hai Chidaadt Se Chaha Hai
Silsila Tuta Nahi Dard Ki Zanzeer Ka

Wo Jo Shakhs Kehta Raha Tu Na Mila To Maar Jaunga
Wo Jinda Hai Yahi Baat Kisi Aur Se Kehne Ke Liye

Kush Aise Hadse Bhi Zindagi Mein Hote Hai “Fazar”
Insan To Bach Jata Hai Par Zindaa Nahi Rehta

Aissa Duba Hun Teri Yaad Ke Samandar Mein
Dil Ka Dhadkna Bhi Ab Tere Kadmoo Ki Sadaa Lagti Hai

Ek Hi Zakham Nahi Saara Badan Zakhmi Hai
Dard Hairan Hai Ki Uutun To Khan Se Uutun

Tumhari Duniya Mein Hum Jaise Hazaron Hai
Hum Hi Pagal The Ki Tum Ko Pa Ke Itrane Lage

Tamam Umar Mujhe Tootna Bikhrna Tha “Faraz
Wo Mehrban Bhi Kahan Tak Sameta Mujhe

Akele To Hum Pehle Bhi Jee Rahe Hai “Fazar
Kyon Tanha Ho Gaye Tere Jane Ke Baad

Shayari By- : Ahmad Faraz

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