shayarisms4lovers June18 80 - रूह का रूह से मिलन शायरी

रूह का रूह से मिलन शायरी

जो तेरे गुलाबी लब मेरे लबों को छू जायें, मेरी रूह का मिलन तेरी रूह से हो जाये, ज़माने की साज़िशों से बेपरवाह हो जायें, मेरे ख्वाब कुछ देर तेरी बाहों में सो जायें, मिटा कर फ़ासले हम प्यार में खो जायें, आ कुछ पल के लिये एक-दूजे के हो जायें।

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