children story in hindi | कहानी बच्चों की

children story in hindi

Children Story in Hindi | आलस्य

यह एक ऐसे किसान की कहानी है जो अपने पुरखों की दी हुई ज़मीन-जायदाद के कारण था तो काफी धनि लेकिन उसमें एक कमी थी, और वह थी आलस करना| जीवन के शुरूआती दिनों से ही वह आलसी बनता गया| पहले तो उसने कई कामों को टालना शुरू कर दिया लेकिन ज़िन्दगी के सफ़र में जैसे-जैसे वह आगे बढ़ रहा था ठीक वैसे-वैसे वह और भी आलसी होता चला जा रहा था| अब तो आलम यह था की आलस में उसने खेतों पर जाना तक छोड़ दिया|

अब तो आलस में उसे अपने घर-परिवार तक की सुध न थी| अपने गाय-भेंसों की भी सुध न लेता| उसका सारा काम अब नोंकरों के भरोसे चलने लगा| उसके आलस से अब पुरे घर की व्यवस्था बिगड़ने लगी| खेती में ध्यान न देने के कारण अब उसको खेती में नुकसान होने लगा| उसके पालतू पशुओं ने भी धीरे-धीरे अब दूध देना बंद कर दिया|

एक दिन उस किसान का दोस्त उससे मिलने उसके गाँव आया| उसने गाँव में जैसे ही अपने किसान के घर जाने का रास्ता पूछा गाँव वालों ने उसे उसके घर की पूरी दशा बता दी| खैर, अब था तो उसका ही मित्र… सौ उसने उस किसान के घर जाने और उसे समझाने का मन बनाया| वह जैसे ही अपने मित्र किसान के घर पहुंचा उसे अपने मित्र के घर की दशा देखकर बहुत दुःख हुआ|

उसे पता था की अब आलस ने उसके मित्र को इस कदर जकड लिया था की अब उसे समझाने में भी कोई लाभ न था| उसने अपने मित्र की दशा पर चिंतित होते हुए अपने मित्र से कहा –  मित्र, तुम्हारी परेशानियाँ देखकर मेरे ह्रदय को काफी दुःख पहुंचा हैं| लेकिन मेरे पास तुम्हारी इन साडी परेशानियों को दूर करने का एक ऐसा उपाय है जिसे करके तुम फिर से धनि व् खुश्हर जीवन जी सकते हो|

किसान अपनी दशा से खुद बड़ा परेशान था लेकिन उसे अपने आलसीपन का आभास तक न था| उसने अपने मित्र से कहा – मित्र मेरी इस दशा के कारण धन, वैभव और सम्मान सब कुछ मेरे हाथ से चला गया है| तुम तो मेरे प्रिय मित्र हो में तुम्हारे बताए हुए उपाय पर अमल जरुर करूँगा|

किसान के मित्र ने कहा – मित्र, सुबह-सुबह दिन दिकलने से पहले एक देवदूत प्रथ्वी पर आता है| जो कोई भी उस देवदूत का सर्वप्रथम दर्शन कर लेता है उसे जीवन में सब कुछ मिल …

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Story for Kids in Hindi | सच्चा स्वांग

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  Story for Kids in Hindi | सच्चा स्वांग

एक राज्य में एक राजा था| एक दिन राजा के पास एक बहुरुपिया आया और बोला, “महाराज में एक बहुरुपियाँ हूँ, मुझमे देवी की एक एसी शक्ति है की में एक बार जो स्वांग धारण कर लेता हूँ उसे पूरी शिद्दत के साथ निभाता हूँ और कभी चुकता नहीं हूँ| राजा बहुरूपिये की बात सुनकर काफी मोहित हुआ और उसे एक विरक्त त्यागी महात्मा का स्वांग लाने का आदेश दिया| बहुरूपिये ने राजा के आदेश को स्वीकार किया और महल से चला गया|

काफी दिनों तक बहुरुपिया एक गुप्त स्थान पर रहा और दाढ़ी बढ़ने पर साधू का स्वांग लेकर शहर में आया| वह सबके साथ एक संत की तरह बर्ताव करने लगा| किसी के साथ कोई राग, द्वेष न रखता| सबको अच्छी-अच्छी बातें सुनाता, हर परेशानी में शहरवासियों को एक संत की तरह सहायता करता| धीरे-धीरे उसकी ख्याति पुरे शहर में फ़ैल गई|

राजा ने जब शहर में प्रख्यात संत के आने की खबर सुनी तो उसने अपने मंत्री को भेजा की जाकर देखो की वही बहुरुपिया है या कोई संत है? मंत्री ने जाकर देखा तो बहुरूपिये को पहचान लिया और राजा को आकर सारी बात बता दी| मंत्री की बात सुनकर राजा ने अगले ही दिन संत के दर्शन को जाने की घोषणा कर दी| अगले दिन राजा पुरे लाव-लश्कर के साथ एक थाल में  बहुत सारी अशर्फियाँ और एक थाल में भेंट-पूजा का सामान लेकर पुरे ठाठ बाट के साथ वहां गया| रास्ते में जिसने भी राजा को संत के दर्शन के लिए जाते हुए देखा तो यही सोचा की संत बड़े ही पहुचे हुए महात्मा है जिनके दर्शन को राजा खुद जा रहें है| कुछ ही देर में काफी लोग संत की कुटीया के समीप एकत्रित हो गए|

Story for Kids in Hindi | सच्चा स्वांग

राजा ने  संत की कुटीया में प्रवेश किया और अशर्फियों से भरा थाल संत के समक्ष रख दिया| संत ने अशर्फियाँ अथवा रूपया कपडा कुछ भी लेने से मन कर दिया और “शिव-शिव” कहते हुए वहां से चले गए| राजा के इस व्यहवार को देखकर नगरवासी बहुत नाराज हुए| लोग कहने लगे, अच्छा सत्संग होता था राजा को पता नहीं क्या सूझी कि संत महात्मा को अशर्फियाँ भेंट की| भला रूपया और अशर्फियाँ महात्मा के किस काम की|

अगले दिन बहुरुपिया अपने असली रूप में राजा के महल में उपस्थित हुआ और राजा के दरबार में आकर बोला कि अन्नदाता! इनाम …

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