सेठ और ठग – Motivational Short Story in Hindi

Thag aur seth - सेठ और ठग – Motivational Short Story in Hindi

एक बार की बात है , एक बहुत बड़े सेठ जी हीरो मोतियों का ब्यापार करते थे ।

और अक्सर ब्यापार के लिए देश विदेश जाया करता थे । कभी इस शहर कभी उस शहर …!!

एक बार की बात है , सेट जी ऐसे ही ब्यापार यात्रा कर रहे थे ।

तो उनको एक ठग ने देख लिया और सेठ जी का पीछा करने लगा ।

जिस जहाज़ में सेठ जी यात्रा कर रहे थे , ठग ने भी उसी जहाज़ का टिकट ले कर सवार हो गया और सेठ जी के साथ यात्रा करने लगा ।

दो दिन की यात्रा थी , सेठ जी थोड़े परेशान थे की ठग ने उन्हें देख लिया है ।

ठग ने सोचा की आज रात को वो सेठ जी के हीरे चुरा लेगा ।

ठग मन ही मन योजना बना रहा था ।

उस रात ठग जल्दी सो गया ताकि रात को जब सेठ जी गहरी नींद सो रहे होंगे , तो जल्दी उठ कर सेठ जी के हीरे चुरा लूंगा ।

सेठ जी इस बात को सोच कर चिंतित थे की हीरे साथ लेके कैसे सोया जाये .. ठग का खतरा था ।

सेठ जी ने बहुत सोचा और हीरे सोते हुए ठग के कुर्ते की जेब में छुपा दिए ….. और सेठ जी बापिस अपने बिस्तर पर आराम से सो गए ।

देर रात ठग जगा उठा और और हीरे ढूंढ़ने लगा ।

उसने हीरे सब जगह तलाश किये हर तरफ ढूंढा पर उसे हीरे कहीं नहीं मिले ।

ठग थक हार कर बापिस सो गया ….

अगले दिन सेठ जी उस देश पहुँच गए जहा उन्हें जाना था ।

सेठ जी खशी ख़ुशी जहाज़ से उतरे और जाने लगे……

ठग सेठ जी के पीछे दौड़ा और पास जा कर के सेठ जी से बड़ी बिनम्रता से सवाल किया ।

सेठ जी मैं तो एक ठग हूँ , और आपके हीरे चुराना चाहता था ।

परन्तु मैं आपसे एक सवाल पूछू…… सेठ जी मुस्कुराये और बोले पूछो भाई ।

तो ठग बोला….. वो अपने हीरे कहाँ छुपाये थे ।

सेठ जी हँसे और बोले , मैं तुम्हे पहचान गया था और मैंने वो हीरे तुम्हारे कुर्ते की जेब मैं छुपा दिया थे ।

तुमने हर जगह ढूंढा पर अपनी जेब नहीं देखी , जो तुम्हे चाहिए था वो तो तेरे पास ही था , और उस चीज़ को तुम बाहर ढूंढ रहे थे ।

ठग ने सेठ जी से क्षमा …

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हिंदी कहानी : श्रेष्ठ कौन | Hindi Story : Shrestha Kaun

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श्रेष्ठ कौन – Shrestha Kaun

हिंदी कहानी : श्रेष्ठ कौन | Hindi Story : Shrestha Kaun : काशी के राजा वेनुगुप्त के गर्वदत्त, महादत्त और कोमलदत्त नामक तीन पुत्र थे। राजा वेनुगुप्त उन तीनों युवराज में से किसी एक को राजा बनाना चाहते थे। एक दिन राजा वेनुगुप्त ने तीनों पुत्रों को बुलाया और कहा किसी श्रेष्ठ व्यक्ति को खोज कर लाओ ?

तीनों राजकुमार श्रेष्ठ व्यक्तिको खोजने निकल पड़े। कुछ समय बाद बड़ा राजकुमार गर्वदत्त एक राईस गोल-मटोल आदमी को लाया। उसने राजा से कहा, ‘ये सेठजी बहुत ही दान-पुण्य करते हैं। इन्होने कई मंदिर, तालाबों का निर्माण कराया है। यह सुनकर राजा वेनुगुप्त ने सेठ का स्वागत किया और धन देकर उन्हें सम्मान पूर्वक विदा किया।’

दूसरा राजकुमार महादत्त एक गरीब साधु को लेकर लौटा ।उसने राजा से कहा, ‘इन साधु को चारों वेद और पुराणों का पूरा ज्ञान है। इन्होंने चारों धामों की यात्रा पैदल ही की है। ये तप भी करते हैं और सात-सात दिनों तक निर्जल भी रहते हैं इसलिए ये श्रेष्ठ व्यक्ति हैं। राजा वेनुगुप्त ने ठीक उस सेठ की तरह ही साधु को भी धन का दान देकर सम्मान पूर्वक विदा किया।

 Shrestha Kaun – Hindi Story

आखिर में छोटा राजकुमार कोमलदत्त आया, वह अपने साथ एक आदमी को लाया। राजकुमार ने कहा, पिताश्री! यह आदमी सड़क पर घायल पड़े एक कुत्ते के जख्मों को धो रहा था। जब मैनें इससे पूछा ऐसा करने पर तुम्हें क्या मिलेगा। तो इसने उत्तर दिया, मुझे तो कुछ नहीं मिलेगा हां ये जरूर है कि इस कुत्ते को आराम मिल जाएगा।

राजा वेनुगुप्त ने उस व्यक्ति से पूछा, ‘क्या तुम धर्म-कर्म करते हो?’ आदमी ने कहा, मैं अनपढ़ हूं। धर्म-कर्म के बारे में कुछ भी नहीं जानता। कोई मांगे तो अन्न दे देता हूं। कोई बीमार हो तो सेवा कर देता हूं।

यह सुनकर राजा वेनुगुप्त ने कहा, कुछ पाने की आस रखे बिना दूसरों की सेवा करना ही तो धर्म है। छोटे राजकुमार कोमलदत्त ने बिल्कुल सही व्यक्ति की तलाश की है। अतः राजा ने अपने तीसरे बेटे को राजा के पद के लिए चुन लिया। इस तरह युवराज कुछ समय बाद राजा बन गया।…

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