लालची राजा | Hindi Kahaniya for Kids

पाठकों नमस्कार, कहा गया है बच्चों को अगर उनकी ही भाषा में कोई बात समझाई जाए तो वे बेखुभी समझते हैं| लेकिन अब हर बच्चे के साथ बच्चा तो नहीं बना जा सकता| इसलिए अगर बच्चों को कोई शिक्षाप्रद बात बताना है तो उन्हें कहानी के माध्यम से बताई जा सकती है| इसीलिए आज हम आपके लिए ऐसी कहानियां (Hindi Kahaniya for Kids) लेकर आएं हैं जिन्हें आप अपने बच्चो को सुनाकर उन्हें ज़िन्दगी के बारे में बता सकते हैं! लीजिये पेश है आज की कहानी……… लालची राजा | Hindi Kahaniya for Kids यूनान देश के एक राज्य में एक लालची राजा रहता था| राजा इतना लालची था की उसे अपनी पुत्री के सिवा इस दुनियां में अगर कोई दूसरी चीज प्यारी थी तो वह बस सोना ही था| उसने इतना सोना इच्क्ट्हा कर लिया था की पूरा राज्य भी अगर बैठकर खाए तो सोना ख़त्म न हो, लेकिन फिर भी वह रात-दिन सोना इक्कठा करने के स्वप्न देखा करता था| ऐसे ही एक दिन राजा अपने खजाने में बैठा सोने की इटे और अशर्फियाँ  गिन रहा था तभी वहां पर एक देवदूत प्रकट हुए| उन्होंने राजा को असरफियन और सोने की इटें गिनते देखा तो आश्चर्य से बोले, “आप […]

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Child Story in Hindi | ये बच्चे कब समझदार होंगे

Child Story in Hindi | ये बच्चे कब समझदार होंगे रघुवर प्रसाद जी अब सेवानिवृत्त हो चुके थे| वो अध्यापक थे| उनकी पहचान एक कर्मठ अध्यापक के रूप में थी| अपने कितने ही छात्रों से भावनात्मक रिश्ता था, रघुवर जी का| सेवा निवृत्ति के उपरांत भी कितने ही ऐसे छात्र थे जो सफल थे और यदि कहीं मिल जाते थे तो रघुवर जी के पैरो में पड़ जाते थे| इस सम्मान के आगे अपनी अच्छी खासी पेंशन भी रघुवर जी को छोटी लगती थी| वो अक्सर कहा करते थे “हमने शिक्षा को संस्कार के रूप में विद्यार्थियों में रोपा है, अब तो शिक्षा भी सर्विस सेक्टर का हिस्सा है… शिक्षक के लिए छात्र एक ग्राहक है, तो छात्र और उनके माता पिता के लिए शिक्षक एक सार्विस प्रोवाईडर|” फिर वो एक लम्बी साँस खिंच कर बोलते “सही समय में जिंदगी गुजार गए हम….” रघुवर जी के एक पुत्री और दो पुत्र थे| बड़ा पुत्र इन्द्र इंजिनियर था! वह अपनी पत्नी रेखा, एक पुत्र रोहन और एक पुत्री रोहिणी के साथ चंडीगढ़ में रहता था| जबकि छोटा पुत्र राजेंद्र, रघुवर जी के साथ रहता था| वो एक अच्छी कम्पनी में नौकरी करता था| ठीक ही कमा लेता था| उसके भी एक पुत्र […]

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प्रेरक लघु कहानियां : भगवान् की मूर्ति

प्रेरक लघु कहानियां किसी दूर गाँव में एक पुजारी रहते थे जो हमेशा धर्म कर्म के कामों में लगे रहते थे । एक दिन किसी काम से गांव के बाहर जा रहे थे तो अचानक उनकी नज़र एक बड़े से पत्थर पे पड़ी । तभी उनके मन में विचार आया कि कितना विशाल पत्थर है? क्यूँ ना इस पत्थर से भगवान की एक मूर्ति बनाई जाये । यही सोचकर पुजारी ने वो पत्थर उठवा लिया । गाँव लौटते हुए पुजारी ने वो पत्थर का टुकड़ा एक मूर्तिकार को दे दिया, जो बहुत ही प्रसिद्ध मूर्तिकार था । अब मूर्तिकार जल्दी ही अपने औजार लेकर पत्थर को काटने में जुट गया । जैसे ही मूर्तिकार ने पहला वार किया, उसे एहसास हुआ की पत्थर बहुत ही कठोर है । मूर्तिकार ने एक बार फिर से पूरे जोश के साथ प्रहार किया लेकिन पत्थर टस से मस भी नहीं हुआ । अब तो मूर्तिकार का पसीना छूट गया वो लगातार हथौड़े से प्रहार करता रहा लेकिन पत्थर नहीं टुटा । उसने लगातार 99 प्रयास किये लेकिन पत्थर तोड़ने में नाकाम रहा । अगले दिन जब पुजारी आये तो मूर्तिकार ने भगवान की मूर्ति बनाने से मना कर दिया और सारी बात बताई […]

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सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की कहानी | The Golden Egg Story In Hindi

Golden Egg Story In Hindi : एक गाँव में एक गरीब किसान अपने पत्नि के साथ रहता था. दोनो पति-पत्नि दिन भर खेत में काम किया करते थे. फिर भी उनको दो वक़्त का खाना बहुत मुश्किल से नसीब हो पाता था. एक दिन किसान कुछ मुर्गियाँ खरीद कर लाया. वह उनके अंडे बेचकर पैसे कमाना चाहता था. उन मुर्गियों में से एक मुर्गी अद्भुत थी. वो रोज़ सोने का एक अंडा दिया करती थी. किसान को अब रोज़ सोने का एक अंडा मिलने लगा. जिसे बेचकर उसे अच्छे पैसे मिलने लगे. धीरे-धीरे किसान की गरीबी दूर होती गई और वह अपने गाँव का एक धनी किसान बन गया. किसान अपने जीवन से संतुष्ट था. लेकिन उसकी पत्नि को और पैसों का लालच था. एक दिन वह किसान के पास गई और बोली, “कब तक हम एक-एक अंडा बेचकर थोड़े-थोड़े पैसे कमाते रहेंगे? क्यों न एक बार ही में हम मुर्गी के पेट से सारे सोने के अंडे निकाल ले और उन्हें बेच दें. इस तरह हम एक बार में ही ढेर सारे पैसे इकठ्ठे कर लेंगे और बहुत धनवान हो जायेंगे.” किसान को अपनी पत्नि की बात जंच गई. वो एक बड़ा सा चाकू लेकर मुर्गियों के दड़बे में गया. […]

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Story for Kids in Hindi | सच्चा स्वांग

  Story for Kids in Hindi | सच्चा स्वांग एक राज्य में एक राजा था| एक दिन राजा के पास एक बहुरुपिया आया और बोला, “महाराज में एक बहुरुपियाँ हूँ, मुझमे देवी की एक एसी शक्ति है की में एक बार जो स्वांग धारण कर लेता हूँ उसे पूरी शिद्दत के साथ निभाता हूँ और कभी चुकता नहीं हूँ| राजा बहुरूपिये की बात सुनकर काफी मोहित हुआ और उसे एक विरक्त त्यागी महात्मा का स्वांग लाने का आदेश दिया| बहुरूपिये ने राजा के आदेश को स्वीकार किया और महल से चला गया| काफी दिनों तक बहुरुपिया एक गुप्त स्थान पर रहा और दाढ़ी बढ़ने पर साधू का स्वांग लेकर शहर में आया| वह सबके साथ एक संत की तरह बर्ताव करने लगा| किसी के साथ कोई राग, द्वेष न रखता| सबको अच्छी-अच्छी बातें सुनाता, हर परेशानी में शहरवासियों को एक संत की तरह सहायता करता| धीरे-धीरे उसकी ख्याति पुरे शहर में फ़ैल गई| राजा ने जब शहर में प्रख्यात संत के आने की खबर सुनी तो उसने अपने मंत्री को भेजा की जाकर देखो की वही बहुरुपिया है या कोई संत है? मंत्री ने जाकर देखा तो बहुरूपिये को पहचान लिया और राजा को आकर सारी बात बता दी| मंत्री की […]

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मकड़ी की सीख : शिक्षाप्रद कहानी | Makadi Ki Seekh Moral Story In Hindi

Makadi Ki Seekh Moral Story In Hindi : एक समय की बात है. स्कॉटलैंड में रॉबर्ट ब्रूस नाम का राजा राज करता था. उसके राज्य में खुशहाली और शांति थी. प्रजा उसका बहुत सम्मान करती थी. एक बार इंग्लैंड के राजा ने स्कॉटलैंड पर आक्रमण कर दिया. दोनों राज्यों के मध्य घमासान युद्ध हुआ. उस युद्ध में राजा ब्रूस की पराजय हुई और स्कॉटलैंड पर इंग्लैंड का कब्ज़ा हो गया. राजा ब्रूस किसी भी तरह अपना राज्य वापस प्राप्त करना चाहता था. उसके अपने सैनिकों को एकत्रित किया और इंग्लैंड पर आक्रमण कर दिया. पुनः युद्ध हुआ. लेकिन उस युद्ध में भी उसे पराजय का मुँह देखना पड़ा. राजा ब्रूस ने १४ बार इंग्लैंड पर आक्रमण किया, किंतु अपना राज्य वापस प्राप्त करने में असमर्थ रहा. १४वें युद्ध में पराजय के बाद उसके सैनिकों और प्रजा का उस पर से विश्वास उठ गया. वह बुरी तरह टूट गया और भागकर एक पहाड़ी पर जाकर बैठ गया. थका, हताश और उदास वहाँ बैठा वह सोच रहा था कि अब वह कभी अपना राज्य वापस प्राप्त नहीं कर पायेगा. तभी उसकी दृष्टि एक मकड़ी पर पड़ी, जो एक पेड़ के ऊपर जाला बनाने का प्रयास कर रही थी. वह पेड़ के तने […]

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Muththi Bhar Mendhak Moral Story In Hindi

Muththi Bhar Mendhak Moral Story In Hindi: बहुत समय पहले की बात है. एक गाँव में एक सज्जन और ईमानदार व्यक्ति रहता था. गाँव के सभी लोग उसकी बहुत प्रशंषा करते थे. सभी लोगों का प्रशंषापात्र होने के कारण वह बहुत प्रसन्न था. एक दिन की बात है. काम से लौटते हुए उसे अपने आगे कुछ दूरी पर चलते हुए लोगों की बातें सुनाई पड़ी. वे उसके बारे में ही बातें कर रहे थे. वह जानता था कि गाँव के लोग उसकी प्रशंषा के पुल बांधा करते है. वह अपनी प्रशंषा सुनने के उत्साह को रोक नहीं सका और दबे पांव उनके पीछे चलते हुए उनकी बातें सुनने लगा. लेकिन जब उसने उनकी बातें सुनी, तो वह उदास हो गया, क्योंकि वे सभी लोग उसकी बुराई कर रहे थे. कोई उसे घमंडी बता रहा था, तो कोई दिखावेबाज़. उन बातों ने उसके मन को झकझोरकर रख दिया. उसे महसूस होने लगा कि अब तक वह भुलावे में था कि सभी लोग उसकी प्रशंषा करते है. जबकि वास्तविकता इसके उलट है. उस दिन के बाद से जब भी वह किसी को बातें करते हुए देखता, तो सोचता कि अवश्य ही वे उसकी बुराई कर रहे हैं. प्रशंषा करने पर भी वह […]

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