shayarisms4lovers mar18 92 - तमाम उम्र तेरा मुंतज़िर रहा – मोहसिन नक़वी की शायरी

तमाम उम्र तेरा मुंतज़िर रहा – मोहसिन नक़वी की शायरी

तमाम उम्र तेरा मुंतज़िर रहा “मोहसिन” उदासियों का यह मौसम बदल भी सकता था वो चाहता तो मेरे साथ चल भी सकता था वो शख्स तूने जिसे छोड़ने की जल्दी की तेरे मिज़ाज के साँचे में ढाल भी सकता था वो जल्दबाज़ खफा हो के चल दिया वरना तनाज़आत का कोई हल निकल भी सकता […]

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