Places to Visit in Amritsar | मेरी अमृतसर की यात्रा

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Places to Visit in Amritsar | मेरी अमृतसर की यात्रा


अमृतसर भ्रमण मेरे मन में काफी समय से था| जैसे ही तारीख तय हुई मैं अपनी एकल यात्रा का खाका तैयार करने में लग गया| मैंने दो दिवसीय “मेरी अमृतसर की यात्रा | Places to Visit in Amritsar” निर्धारित की थी|

जाने से पूर्व ही मैंने अपने दोनों दिनों को ध्यानपूर्वक योजनाबद्ध किया| कहाँ निवास करना है, किन जगहों पर किस दिन किस क्रम में जाना है और किन स्थानों पर अमृतसर के प्रसिद्ध व्यंजनों का लुत्फ़ उठाना है इन पहलुओं पर विचार कर निर्धारण किया|

किस जगह पर कितना समय व्यतीत होना चाहिए इसका भी पूर्वानुमान लगा लिया था| जिन वस्तुओं की जरुरत पड़ सकती थी इसकी भी एक सूची तैयार की थी और सभी सामन अपने साथ रख लियेथे|

अवधि कम थी इसलिए दिल्ली से अमृतसर आवागमन के लिए हवाई यात्रा के माध्यम का चुनाव किया था| पूर्व निर्धारण करना आवश्यक था ताकि यात्रा के दौरान मैं अपने समय का पूर्ण उपयोग कर सकूँ और सभी महत्वपूर्ण जगहों को भी देख सकूँ|

परिणामस्वरूप अमृतसर में मुझे कुछ भी सोचने की जरुरत नहीं पड़ी क्योंकि एक कागज़ पर मेरे पास सभी निर्देश विद्यमान थे| मुझे इस बात का संतोष है कि यात्रा को जिस प्रकार सोचा था उसी प्रकार क्रियान्वित किया|


Places to Visit in Amritsar | दिल्ली से अमृतसर

इंदिरा गांधी अंतराष्ट्रीय हवाईअड्डे से मेरे विमान के प्रस्थान का समय सुबह 05:30 बजे था| हवाईअड्डे के पूरे परिसर में अंतराष्ट्रीय मानको के अनुरूप सुविधाएँ, भव्यता और सुरक्षा देखकर मै पूर्णत: भाव-विभोर हो गया| भारत के इस प्रवेश द्वार की आभा देखकर मुझे बहुत ख़ुशी हुई|

वहाँ खड़े नाना प्रकार के भीमकाय हवाई जहाजों को देखना रोचक था| हवाईअड्डे का अंदरूनी भाग किसी शहर जैसा लग रहा था| मेरा सेवा प्रदाता ‘एयर इंडिया’ था| मुझे यह बात विदित थी की छोटे सामान को मैं अपने साथ लेकर बैठ सकता था और किसी कतार में भी नहीं लगना पड़ता|

इसी कारण मैंने अपने साथ एक लघु बस्ता ही रखा था जिसके परिणामस्वरूप मुझे सुरक्षा जाँच में ज्यादा समय नहीं लगा| विमान में चढ़ने में कुछ समय था इसलिए मैं पतीक्षालय में बैठ गया| हवाई जहाज़ मुझे सदा ही प्रभावित करते हैं | इनका आकार, उड़ान इत्यादी| इसी कौतूहल में मैं झरोखों से हवाई पट्टी और विमानों को निहारता रहा|

सूचना मिलने पर मैं विमान की ओर चल पड़ा| अपने विमान में प्रवेश करते ही विमान परिचारिका ने ‘नमष्कार’ कहकर मेरा …

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Prem Mandir Vrindavan | मथुरा का प्रेम मंदिर

Vrindavan | मथुरा का प्रेम मंदिर

Prem Mandir Vrindavan - Prem Mandir Vrindavan | मथुरा का प्रेम मंदिर

एक प्यार लैला मजनू जैसा जो इतिहास में प्यार के मायने बदल दे,
एक प्यार शाहजहां जैसा जो दुनिया के कुछ चंद अजूबे में खुदको शामिल कर ले,
एक प्यार राम सीता जैसा जो दुनिया को त्याग का मतलब सिखा दे
और एक प्यार राधा कृष्णा जैसा जो एक शहर वृन्दावन को प्रेम नगरी बना दे।।।

राधा कृष्णा की बात करें तो उनका रिश्ता ,उनकी जोड़ी हमारे दिमाग में हमेशा एक सवाल पैदा करता है कि उनकी शादी रुक्मणी से हुई थी फिर भी क्यों राधे-कृष्णा को साथ पूजा जाता है।।।

कृष्ण के साथ, राधा को सर्वोच्च देवी स्वीकार किया जाता है और यह कहा जाता है कि वह अपने प्रेम से कृष्ण को नियंत्रित करती हैं। यह भी माना जाता है कि कृष्ण संसार को मोहित करते हैं, लेकिन राधा “उन्हें भी मोहित कर लेती हैं। इसलिए वे सभी की सर्वोच्च देवी हैं।

कृष्णा जी की बात करें तो सबसे पहले उनका माखन चुराना और उनकी गोपियों के साथ रास लीला याद आती है।।।

भगवान श्रीकृष्ण  की लीला से जुडा हुआ है एक क्षेत्र “वृन्दावन” जो मथुरा से १५ किमी कि दूरी पर है। पुराणों के अनुसार सतयुग में महाराज केदार की पुत्री वृंदा ने श्री कृष्णा को पति रूप में पाने के लिए तप किया था उसके तप से भगवान प्रसन्न हुए इसलिए वृंदा के तपस्थल को वृन्दावन कहते है।। यह स्थान श्री कृष्ण भगवान् के बाल लीलाओं का स्थान माना जाता है।

कृष्ण भगवान से संबंधित मंदिर एवं घाट सभी वृन्दावन में स्थित है। युवास्था से सम्बन्धित मंदिर एवं कुंज, व्रन्दावन में स्थित है। ऐसा माना जाता है की  यह एक ऐसी भूमि है जहाँ आने से सभी पापों का नाश हो जाता है

वृन्दावन का प्राकृतिक सौंदर्य देखने योग्य है। यमुना जी ने इसको तीन ओर से घेरे रखा है। यहाँ के सघन कुंजो में तरह तरह के पुष्पों से शोभित लता तथा ऊँचे-ऊँचे घने वृक्ष मन में रोमांच भरते हैं। बसंत ॠतु के आगमन पर यहाँ की छटा और सावन-भादों की हरियाली आँखों को शीतलता प्रदान करती है।

वृन्दावन का कण-कण रसमय है। यहाँ प्रेम-भक्ति का ही वातावरण है। इसे गोलोक धाम से अधिक बढ़कर माना गया है। यही कारण है कि हज़ारों धर्म-परायणजन यहाँ अपने-अपने कामों से अवकाश प्राप्त कर अपने शेष जीवन को बिताने के लिए यहाँ अपने निवास स्थान बनाकर रहते हैं।

वे नित्य प्रति रासलीलाओं, साधु-संगतों, हरिनाम संकीर्तन, भागवत आदि ग्रन्थों के होने वाले …

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