shayarisms4lovers June18 250 - Chand – Ajay

Chand – Ajay

गंगा की शांत सतह पे वो एकादसी का चंद्रमा घाटों पे लगा वो नौंको का डेरा सीढ़ियों पे बैठे हम भी कुछ शांत से ही है लेकिन मन को है पानी के लथेड़ों ने घेरा मेरा मन भी है गंगा की गहराइयां लिए बाते बहुत सी दबी है अंगड़ाइयाँ लिए… मैं भी वो चाँद होना […]

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