shayarisms4lovers June18 233 - उनके एक जान-निसार हम भी हैं

उनके एक जान-निसार हम भी हैं

उनके एक जान-निसार हम भी हैं हैं जहाँ सौ-हज़ार हम भी हैं तुम भी बेचैन हम भी हैं बेचैन तुम भी हो बेक़रार हम भी हैं ऐ फलक कह तो क्या इरादा है ऐश के ख्वाइशगार हम भी हैं शहर खाली किए दुकान कैसी एक ही वादा-ख्वार हम भी हैं शर्म समझे तेरे तगाफुल को […]

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