मुहब्बत की जुबान

मुहब्बत की जुबान

यहां तक आये हो कुछ ज़ुबान से कह दो
लफ्ज़ मुहब्बत नहीं कह सकते सलाम तो कह दो

पलकें तो उठाओ अपनी इतनी भी हया कैसी
ज़ुबान से नहीं कुछ कहते निगाह से ही कह दो

दिल को यकीन आये कहदो आप हमारे हो
अपने लिखे खतों का जवाब साथ लाए हो

खत में तो तुम ने हर बात लिख दी
आये हो तो मुस्कुरा कर इक़रार भी कर दो

माना की तारीफ से बढ़ कर ग़ज़ल तुम हो
जुम्बिश लबों को कह अपनी तक़दीर हमें कह दो

Mohabbat ki Juban

ahan tak aaye ho kuch zuban se keh do
lafz muhabbat nahi keh saktay salam to keh do

palkain to uthao apni etni bhi haya kaisi
zuban se nahi kuch kehte nighah se hi keh do

dil ko yaqeen aaye keh aap hamare ho
apne likhe khaton ka jawab sath laye ho

khat mein to tum …

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मस्ती भरी नज़र का नशा है मुझे अभी

मस्ती भरी नज़र का नशा है मुझे अभी
ये जाम दूर रख दो पी लूँगा फिर कभी

दिल को जला के बज़्म को रौशन ना कीजिए
उस महजबीन को आने में कुछ देर है अभी

हम ने तो अश्क पी के गुज़री है सारी उम्र
हम से खफा है किस लिए आखिर ये ज़िंदगी

जाम-ए-सुबू को दूर ही रहने दे सक़िया
मुझ को उतरना है कल का नशा अभी

-सुरेंदर मलिक गुमनाम…

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आदतन तुम ने कर दिए वादे

आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने ऐतबार किया

तेरी राहों में बारहा रुक कर
हम ने अपना ही इंतज़ार किया

अब ना माँगेंगे ज़िंदगी या रब
ये गुनाह हम ने एक बार किया

-गुलज़ार…

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यारो मुझे माफ़ करो मैं नशे में हूँ

यारो मुझे माफ़ करो मैं नशे में हूँ
अब दो तो जाम खाली ही दो मैं नशे में हूँ

मज़ुर हूँ जो पावं मेरे बेतरह पड़े
तुम सर-गरन तो मुझ से ना हो मैं नशे में हूँ
[मज़ुर=मजबूर; बेतरह=लड़खड़ाना ; सर-गरन=चिढ़ना]

या हाथों हाथ लो मुझे जैसे के जाम-ए-मय
या थोड़ी दूर साथ चलो मैं नशे में हूँ

-मीर तक़ी मीर…

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वफ़ा के शीश महल में सज़ा लिया मैं ने

वफ़ा के शीश महल में सज़ा लिया मैं ने
वो एक दिल जिसे पत्थर बना लिया मैं ने

ये सोच कर की ना हो तक में खुशी कोई
गमों की ओट में खुद को छुपा लिया मैं ने

कभी ना ख़त्म किया मैं ने रोशनी का मुहाज़
अगर चिराग बुझा, दिल जला लिया मैं ने

कमाल ये है की जो दुश्मन पे चलाना था
वो तीर अपने कलेजे पे खा लिया मैं ने

‘क़तील’ जिसकी अदावत में एक प्यार भी था
उस आदमी को गले से लगा लिया मैं ने

-क़तील शिफ़ाई…

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उनके एक जान-निसार हम भी हैं

उनके एक जान-निसार हम भी हैं
हैं जहाँ सौ-हज़ार हम भी हैं

तुम भी बेचैन हम भी हैं बेचैन
तुम भी हो बेक़रार हम भी हैं

ऐ फलक कह तो क्या इरादा है
ऐश के ख्वाइशगार हम भी हैं

शहर खाली किए दुकान कैसी
एक ही वादा-ख्वार हम भी हैं

शर्म समझे तेरे तगाफुल को
वह! क्या होशियार हम भी हैं

तुम अगर अपनी खु के हो माशूक़
अपने मतलब के यार हम भी हैं

जिस ने चाहा फँसा लिया हमको
दिल-बारों के शिकार हम भी हैं

कौन सा दिल है जिस में दाग नहीं
इश्क़ की यादगार हम भी हैं

-दाग देहलवी…

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Cute Love Shayaris of Bachpan Ka Romantic Pyaar

Emotional Love Shayari of Bachpan for girlfriend

बचपने में की मोहब्बत का अपना ही मज़ा है.
बचपन के प्यार को याद करना मीठी सी सजा है…
वो स्कूल में बात बात पे लड़ना भी याद आता है…
वो टेस्ट में साथ बैठ के पढ़ना भी याद आता है…
उसकी गली के पैदल चक्कर काटने का बड़ा अजब स्वाद था..
वो भी झट से छत पे आ जाती दिल उसका भी बेकरार था…
वो प्यारी प्यारी सी दिल की बातो का मज़ा क्या बताऊ…
उसकी याद में उसकी नोटबुक को देख कर
कटी रातो का मज़ा क्या बताऊ..
वो स्कूल का आखरी दिन भी अजीब था..
जिस से दूर भागता था आज जाना चाहता उसके करीब था..
दिल में कोई जज़्बात न थे ज़ुबान पे कोई बात न थी…
तब पता भी न था के किसी से प्यार है
जब पता लगा तो वो पास न थी…!!!

Jaanta Nahin Hoon Kitna

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Hindi Poem on Love

आँखों मे प्यास हुआ करती थी,
दिल में तुफान उठा करते थे,
लोग आते थे गज़ल सुनने को,
हम तेरी बात किया करते थे,
सच समझते थे सब सपनो को,
रात दिन घर में रहा करते थे,
किसी विराने में तुझसे मिलकर,
दिल में क्या फुल खिला करते थे,
घर की दिवार सजाने की खातिर,
हम तेरा नाम लिखा करते थे,
कल तुझ को देखकर याद आया,
हम भी महोब्बत किया करते थे,
हम भी महोब्बत किया करते थे..…

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Urdu Hindi Shayari | Dil Daar ke Aansoo | Shayri Ghazal

Urdu Hindi Shayari

2665 - Urdu Hindi Shayari | Dil Daar ke Aansoo | Shayri Ghazal

Baazar-e-muhabbat me baha pyar ke aansoo
Hote hain yahan kharch khareedar ke aansoo

Behte hain shab-o-roz* muhabbat ki gali mien
Dil thaam ke bethe huwe dil-daar ke aansoo
(shab-o-roz = raat din)

Chhup jaate hain shabnam ki har ek boond se dab kar
Jo shab* ke andheroN mein bahe khaar* ke aansoo
(Shab = raat) (khaar = kante)

Aabid ki nigahoN mien ye naapaak ho lekin
Allah ko pyare hain gunehgaar ke aanoo

Kya kya n sitam qeis* pe laila ne kiye hain
Sehra me barste rahe dildar ke aansoo
(qeis = majnuN ka naam)

Seh seh ke sitam husn ke, dete hain duaaeN
Aashiq ke girebaan ke har taar ke aansoo

Woh chheen ke hansta raha muflis* ki muhabbat
AankhoN se jhalak te the magar haar ke aansoo
(muflis = gareeb)

Main bhi to ek insaan hun patthar to nahin hun
Behte hain meri aankh se

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Urdu Shayari – Kabhi Khamosh Betho Ge Kabhi Kuch Gungunao

कभी खामोश बेतो गे कभी कुछ गुनगुनाओ गे
मैं उतना याद ओँगा मुझे जितना भुलाओ गे

कोई जब पूच बेते गा खामोशी की वजा तुम से
बोहट समझना चाहो गे मगर समझा ना पाओ गे

कभी दुनिया मुकम्मल बन क आएगी निगाहों मे
कभी मेरी कमी दुनिया की हर शे मे पाओ गे

कहीं पर भी रहें हम तुम मोहब्बत फिर मोहब्बत है
तुम्हे हम याद आएँगे हुमैन तुम याद आओ गे…

Kabhi Khamosh Betho Ge Kabhi Kuch Gungunao Ge
Main Utna Yad Aunga Mujhe Jitna Bhulao Ge

Koi Jab Pooch Bethe Ga Khamoshi Ki Waja Tum Se
Bohat Samjhana Chaho Ge Magar Samjha Na Pao Ge

Kabhi Duniya Mukammal Ban K Aegi Nigahon Me
Kabhi Meri Kami Duniya Ki Har Shay Me Pao Ge

Kahin Par Bhi Rahen Hum Tum Mohabbat Phir Mohabbat Hai
Tumhe Hum Yaad Aenge Humain Tum Yaad Ao Ge……

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