shayarisms4lovers June18 264 - तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी

तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी

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मेरे मर जाने की वो सुन के खबर आई  “मोहसिन”
घर से रोते हुए वो बिन ज़ुल्फ़ सँवारे निकले

ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे

ऐसा लगता है तेरी ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे
होके गुलशन से सबा आज चली हो जैसे
अध खुले होंठ सियाह ज़ुल्फ़ और गज़ली ऑंखें
किसी शायर ने कोई ग़ज़ल तर्ज़ की हो जैसे

Zulf khuli ho jaise

Aisa lagta hai teri zulf khuli ho jaise
Hoke Gulshan se saba aaj chali ho jaise
Adh khule hont siyah zulf aur gazali ankheN
Kisi shayar ne koi gazal tarz ki ho jaise…


ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये

यह ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये तो अच्छा है
इस रात की तक़दीर सँवर जाये तो अच्छा है
जिस तरह से थोड़ी सी ज़िन्दगी तेरे साथ कटी है
बाकी भी उसी तरह गुज़र जाये तो अच्छा है
वैसे तो तुम्ही ने मुझे बर्बाद किया है
इल्ज़ाम किसी और के सिर जाये तो अच्छा है

Zulf Agar Khul ke Bikhar Jaye

Yeh zulf agar khul ke bikhar jaye to accha hai
Is raat ki takdir sanwar jaye to accha hai
Jis tarah se thodi si zindagi tere saath kati hai
Baaki bhi usi tarah guzar jaye to accha hai
Waise to tumhi ne mujhe barbaad kiya hai
Ilzaam kisi aur ke sar jaye to accha hai….


परेशान ज़ुल्फ़-ऐ-यार

छलके हुए थे जाम परेशान थी ज़ुल्फ़-ऐ-यार
कुछ ऐसे हादसात से घबरा के पी गया
कांटे तो खैर कांटे हैं इस का गिला ही क्या
फूलों की वारदात से घबरा के पी गया .

Pareshaan Zulf-AE-Yaar

Chhalke hue the jaam pareshaan thi zulf-AE-yaar
kuchh aise haadsaat se ghabra ke pee gaya
Kaante to khair kaante hain iss ka gila hi kya
phoolon ki waardaat se ghabra ke pee gaya…


ज़ुल्फ़ रातों सी

ज़ुल्फ़ रातों सी , रंगत है उजालों जैसी
पर तबियत है वही , भूलने वालों जैसी
ढूढ़ता फिरता हूँ , लोगों में शबाहत उसकी
के वो ख्वाबों में भी लगती है , ख्यालों जैसी

Zulf Raaton Si

Zulf raaton si, rangat hai ujaalon jaisi
par tabiyat hai wohi, bhulne walon jaisi
?Dhoonta phirta hun, logon mein shabahat uski?
ke wo khwabon mein bhi lagti hai, khayalon jaisi….


चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़

चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन
क्यों रोज़ गरजते हो बरस जाओ किसी दिन
राज़ों की तरह उतरो मेरे दिल में किसी शब्
दस्तक पे मेरे हाथ की खिल जाओ किसी दिन

Chehre pe mere Zulf

Chehre pe …

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