इमोशनल सच्ची कहानी – खुशियों का कोई सौदा नहीं होता Emotional Sachi Kahani

Emotional Sachi Kahani 
Submitted by Sudha Thakur

मेरा नाम सुधा ठाकुर है और मैं कानपूर में रहती हूँ. मैं एक कास्मेटिक की दुकान चलती हूँ. मेरे पति ने ये दुकान शुरू की थी लेकिन 4 साल पहले उनका देहांत हो गया था इसलिए अब मैं ही ये दूकान चलाती हूँ. दुकान पर एक सेल्स गर्ल भी है जो काफी अच्छा काम करती है और मैं भी उसे बेटी की तरह ही मानती हूँ.

शाम के 7 बजे का वक़्त था कि दूकान पर पति पत्नी आये और वो सेल्स गर्ल से कुछ बाते कर रहे थे. मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया। तभी सेल्स गर्ल ने ऊंची आवाज़ में कहा “आप सुबह भी आये थे, मैंने तब भी कहा था कि ये कंगन 1000 रुपये से कम नहीं मिलेंगे, चले जाईये अब”. मैंने जब ये सुना तो मुझे कुछ याद आ गया. मुझे वही वक्त याद आ गया जब मेरी नयी नयी इनके साथ शादी हुई थी. उस वक़्त हमारी फाइनेंसियल हालत ज़्यादा अच्छी नहीं थी. आज भी मुझे याद है मैं और मेरे पति पहली बार घर से बाहर घूमने गए थे और एक दुकान पर मुझे चूडियो का सेट पसंद आ गया था.

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वो इतनी प्यारी चूडिया थी कि देखते ही मैंने अपने पति को कहा था “कितनी प्यारी चूडिया है, ये ले लू”

उस वक़्त वो चूडियो का सेट 10 रुपये का था.

मेरे पति ने दुकान वाले से पुछा “भाई साहब कितने का है ये चूड़ियों का सेट?”

दुकानदार ने कहा “10 रुपये का”

मेरे पति ने अपना पर्स देखा और कहा “भाई साहब 5 रुपये का दे दो”

दूकानदार ने मना कर दिया था. मैं समझ गयी थी कि इनके पास इतने पैसे नहीं है इसलिए मैंने भी कह दिया “चलिए रहने दीजिये, ये महंगा लगा रहा है”

लेकिन मेरे की आँखों में मेरी इच्छा पूरी ना करने का अफ़सोस मैं साफ़ देख रही थी. मेरे पति ने 3 – 4 बार दुकानदार से मिन्नतें की लेकिन वह नहीं माना.

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उस दिन मेरे पति की आँखों में मैंने पढ़ लिया था कि ये मुझसे बहुत प्यार करते है और मेरे लिए कुछ भी कर सकते है. उस दिन के ठीक 2 महीने बाद मेरे पति ने उसी दुकान से मुझे वही चूड़ियों का सेट खरीद का दिया था. मैं समझ सकती थी कि वो इन चूड़ियों को कभी भूले ही नहीं थे, बस उन्हें इस बात का अफ़सोस था कि उस दिन नहीं ले सके.

उस दिन के बाद मेरे पति ने दिन रात इतनी मेहनत की और बहुत जल्द खुद की अपनी दुकान खड़ी कर दी. उस दिन के बाद मुझे कभी अपने पति से कुछ माँगना नहीं पड़ा. मैं जिस चीज़ पर भी हाथ रख देती थी, उसी वक़्त वो मुझे ले देते थे.

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आज जब मैंने इन पति पत्नी को कंगन खरीदते हुए देखा तो मुझे फिर से अपने वही दिन याद आ गए और आँखे नम हो गयी. इस आदमी की आँखों में भी अपनी पत्नी को कंगन दिलवाने की वैसी ही ललक मैं साफ़ देख रही थी.

मैं अपने ही खयालो में खोयी हुई थी कि मेरा ध्यान टूटा जब मेरी दुकान की सेल्स गर्ल ने ऊंची आवाज़ में कहा “जी नहीं, 1000 से कम नहीं हो सकते”

उस आदमी के पास पैसे कम थे इसलिए वो बार बार बोल रहा था कि ये कंगन 600 के दे दीजिये. लेकिन पत्नी बार बार मना कर रही थी खरीदने के लिए.

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मैंने सेल्स गर्ल को आवाज़ लगायी और कहा “मैंने कल तुम्हे बोला था कि इन कंगन पर 50 % छूट का स्टीकर लगा दो, तुमने लगाया क्यों नहीं”

सेल्स गर्ल ने भी हैरानी से कहा “अरे… मैम आपने कब कहा था?”

“ओह….शायद मैं तुम्हे कहना भूल गयी… ” मैंने कहा

मैंने उस आदमी को कहा “भाईसाहब… ये कंगन 500 रुपये के है, आप ले लीजिये”

ये सुन कर उस पति की आँखों में ख़ुशी भर आयी और उसने हँसते हुए अपनी पत्नी को देखा और कहा “बहुत सुन्दर है ये कंगन और तुम्हारे हाथो पर अच्छे लगेंगे”

उस आदमी की ख़ुशी देख कर मैं समझ सकती थी कि अगर उस दिन मेरे पति भी वो चूडियो का सेट खरीद पाते तो ऐसे ही खुश होते…

उस दिन वो सेल्स गर्ल ज़रूर सोच रही थी कि कितने घाटे का सौदा किया है लेकिन मुझे पता है कि मैंने अपनी ख़ुशी के लिया किया है ये. और वैसे भी खुशियों का कोई सौदा नहीं होता, क्यों ठीक कहा ना?

वो कहते है न:

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