ओझल शायरी 2 लाइन – ओझल Status

ओझल शायरी 2 लाइन – ओझल Status

◼ 1
आँख खुलते ही ओझल हो
जाते हो तुम,

ख्वाब बन के ऐसे क्यों
सताते हो तुम?

अब भी ओझल है निगाहों से
निशान-ए-मन्जिल,
जिन्दगी तू ही बता
कितना सफर बाकी है.

जुदाई फैसले में थी
फिर भी न प्यार होगा कम,

आँखों से ओझल होकर भी
आँखों में बसता हूँ.

तुम हर्फ़-हर्फ़ मुझे याद हो बेशक
मैं खुद से ओझल हो गयी.
मेरे इश्क मे वो कशिश नही है सनम,
तभी तो ऑखो से ओझल हो.
करती वो एक पल
अपने से ओझल नहीं,
माँ तेरे दिल जैसा
दुनिया में कोई दिल नहीं.
बस नज़रों से ओझल
होने की देर है,
लोग याद्दाश्त के
बड़े कमज़ोर साबित होते.

ओझल शायरी 4 लाइन

वक्त की धुंध में
छुप जाते हैं ताल्लुक,
बहुत दिनों तक किसी की आँख से
ओझल ना रहिये.
तुम कहां हो
ढूंढती है बस तुम्हें ही दृष्टि मेरी
तुम हुएओझल नयन से
शून्य मानों हो गई है सृष्टि मेरी.
ओझल हुआ मैं उनकी नज़र से तो यूँ लगा,
जैसे जिस्म से जान जुदा हो गयी.
इन निगाहों से ओझल न होना,
मेरे दिल की इबादत हो तुम,
तुम ही तुम हो हर धड़कनों में,
इन धड़कनो की चाहत हो तुम.

रास्ता मुझको दिखाया
और ओझल हो गए,
आप के रहमो करम का
शुक्रिया कैसे करूँ?
तेरी नज़रों से ओझल हो जायेंगे हम
दूर फ़िज़ाओं में कहीं खो जायेंगे हम,
हमारी यादों से लिपट कर रोते रहोगे
जब ज़मीन की मट्टी में सो जायेंगे हम.

 

ओझल शायरी 2 लाइन – ओझल Status

आँखों से न ओझल थे,
पहले अपने, अपने थे,
एक घर में आज कई टुकड़े है,
सब एक दूसरे से उखड़े है.
ख़ुद मिरी आँखों से ओझल मेरी हस्ती हो गई.
आईना तो साफ़ है तस्वीर धुँदली हो गई.
साँस लेता हूँ तो चुभती हैं बदन में हड्डियाँ.
रूह भी शायद मिरी अब मुझ से बाग़ी हो गई.

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